नीतिवचन 6:16

परमेश्वर इन छः बातों से बैर रखता है : हां, सात से उसका प्राण घृणा करता है : (केजेवी)

पाप कितना बुरा है? परमेश्वर तीव्र विरोध के साथ इससे अत्यधिक घृणा और द्वेष करता है! पाप यहोवा के लिए घृणित है। जिसे लोग दोष, भूल या ग़लतियाँ कहते हैं, परमेश्वर उसे पाप कहता है। वह पाप का तिरस्कार करता है और उसे तुच्छ जानता है – वह उससे नफ़रत करता है। आज परमेश्वर की पवित्रता का जो मूल्य घटा दिया गया है, उसे अगर देखा जाए, तो अधिकांश लोग कभी भी न तो सुन पाते हैं और न ही सीख पाते हैं कि परमेश्वर पाप से कितनी घृणा और नफ़रत करता है। परमेश्वर के चरित्र के मूल्य को नीचा समझकर, मूर्ख लोग कल्पना करते हैं कि परमेश्वर उनके समान है।

पाप के प्रति यहोवा की असीम घृणा उसकी सबसे महिमामयी विशेषताओं में से एक है – यह उसे उन अन्यजातिय देवताओं से अलग करती है जिन्हें लोगों ने अपनी कल्पनाओं से गढा हैं। यह पवित्रता -पाप से पूर्ण मुक्ति, और पाप से सम्पूर्ण और हिंसक घृणा- ही है जो परमेश्वर को शोभायमान बनाती है (भजन 29:2; 96:9)। चरित्र जितना पवित्र होता है, व्यक्ति उतना ही गौरवशाली होता है। यहोवा परमेश्वर के समान पवित्र कोई नहीं है (1 शमू 2:2)। स्वर्ग भी उसकी दृष्टि में निर्मल नहीं है (अय्यूब 15:14-16)। उसकी आराधना करों!

सुलैमान ने यहाँ सात पापों का परिचय दिया जिनसे परमेश्वर बैर रखता है। धन्य यहोवा परमेश्वर असीम घृणा और नफ़रत के साथ सभी पापों से समान रूप से बैर रखता है, लेकिन सुलैमान ने अपने बेटे को कई पापों के बारे में चेतावनी देने की कोशिश की जो बुद्धि को नष्ट कर देते हैं और मनुष्य को उसके पवित्र सृष्टिकर्ता के सामने खुल्लम-खुल्ला कर देते हैं। ये सात पाप हैं, अहंकार, झूठ बोलना, हत्या, बुरा विचार, उत्पात, झूठी साक्ष, फूट डालना।

यहोवा का भय मानने में, जो बुद्धि और समझ की बुनियाद है (नीति 1:7; 9:10), पाप के प्रति परमेश्वर के समान बैर रखना भी सम्मिलित है। सुलैमान ने बाद में नीतिवचन में लिखा, “बुराई से घिन करना परमेश्वर का भय है, और मैं अहंकारी और अभिमानी और कुमार्ग और हठीले मुंह से बैर रखती हूँ” (नीति 8:13)। दाऊद ने लिखा, “हे यहोवा के प्रेमियो, बुराई से घृणा करो” (भजन 97:10)।

एक कमज़ोर और समझौतावादी समाज में, पाप के विषय में उचित दृष्टिकोण रखना असम्भव है। जघन्य अपराधियों को क्षमा किया जाता है; मनोरंजन उद्योग द्वारा पाप का सौन्दर्यीकरण किया जाता है, और शिक्षण संस्थाएं उसे उचित ठहराती हैं; अधिकार के सभी स्तर पाप को बिना रोकटोक के अनियंत्रित होने देते हैं, या उसे नरमी तथा विलम्ब से दंडित करते हैं – पाप को इतनी नरमी और विलम्ब से दण्ड देना बिल्कुल भी समस्या-निवारक नहीं है (सभोपदेशक 8:11)।

पाप कितना बुरा है? परमेश्वर ने शैतान को घमण्ड के पाप के कारण अनन्तकाल के नरक में यातना भोगने नियुक्त किया है (यशा 14:12-15; मत्ती 25:41)। आदम द्वारा वर्जित वृक्ष से फल खाने के कारण परमेश्वर ने मानवजाति को आध्यात्मिक भ्रष्टता, जीवन भर की बीमारी और दर्द के साथ धीमी मृत्यु, और अनन्त नरक के दण्ड के अधीन कर दिया है (उत्पत्ति 2:16-17; 3:1-7; रोम 5:12-14)। और उनके पापों और दुष्टता के कारण उसने सारे जगत को जलप्रलय में डुबा दिया, न तो उसने आयु और न स्त्री-पुरुष के भेद की परवाह की (उत्पत्ति 7:21-23)।

पाप कितना बुरा है? परमेश्वर ने कनान के सात राष्ट्रों को व्यभिचार और पुरुषगामिता जैसे घिनौने पापों के लिए नाश कर दिया, दो पाप जिन्हें भारत सहित दुनिया भर के देशों में महिमामंडित किया गया है (लैव्य 18:1-30; प्रेरितों 13:19)। सब्त के दिन लाठी उठाने के अपराध में एक व्यक्ति को पत्थरवाह करके मार डाला गया था (गिनती 15:32-36)। और परमेश्वर ने एक मनुष्य और उसकी पत्नी को कलीसिया में इसलिए मार डाला क्योंकि उन्होंने अपनी सम्पत्ति का ग़लत हिसाब दिया था (प्रेरितों के काम 5:1-11)।

पाप कितना बुरा है? परमेश्वर ने माता-पिता का अनादर करने वाले बच्चों को मृत्युदण्ड दिए जाने की आज्ञा दी (नीति 30:17; व्यवस्था 27:16)। उसने व्यभिचार के लिए मृत्युदण्ड की आज्ञा दी (लैव्यव्यवस्था 20:10), और किसी स्त्री पर वासना से कुदृष्टि करे तो वह उसे व्यभिचार समझता है (मत्ती 5:28)। वह अन्यायपूर्ण क्रोध और क्रूर शब्दों को परोक्ष हत्या मानता है (मत्ती 5:21-26)। वह एक आज्ञा के उल्लंघन को अपनी सारी व्यवस्था का उल्लंघन मानता है, क्योंकि एक भी अपराध असीम बुराई है (याकूब 2:10-11)।

पाप कितना बुरा है? परमेश्वर को अपनी उपस्थिति में किसी भी व्यक्ति को स्वीकार करने के लिए, उसे अपने एकलौते पुत्र को पाप के बदले दाम चुकाने के लिए यातनामय मृत्यु सहने भेजना पड़ा। नासरत के यीशु को सूली पर चढ़ाए जाने की घटना में, आप पाप के प्रति परमेश्वर के बैर को देख सकते हैं, क्योंकि जब चुने हुओं के पाप उस पर डाल दिए गए थे, तब उसने अपने प्रिय पुत्र को त्याग दिया था (मत्ती 27:46)। परमेश्वर अपने चुने हुओं से प्रेम करने में सक्षम और इच्छुक है, केवल इसलिए कि वह उन्हें मसीह यीशु में देखता है (इफि 1:3-6)।

कभी-कभी परमेश्वर मनुष्यों को उन्हें धोखा देने के लिए कुछ समय के लिए पाप से दूर होने देता है, लेकिन वह अपने न्याय के विषय में और उनके दुस्साहस के लिए अपने क्रोध की चेतावनी देता है (भजन 50:21-22)। यहूदियों ने सोचा कि वे नासरत के यीशु से छुटकारा पा चुके हैं, लेकिन वह केवल 40 साल बाद रोमी सेनाओं को अकेले यरूशलेम शहर में दस लाख से अधिक लोगों को मारने और उनके शहर को मिट्टी में मिलाने के लिए ले आया।

प्रभु यीशु मसीह के सबसे बड़े चरित्र-लक्षणों में से एक था धार्मिकता के प्रति उसका प्रेम और पाप से बैर (भजन 45:7; इब्रा 1:8-9)। इस गौरवशाली गुण के लिए, धन्य परमेश्वर ने उसे अन्य सभी मनुष्यों से कहीं अधिक बढ़कर सम्मानित किया। उसके उदाहरण से, हम देख सकते हैं कि आत्मा की कुलीनता और परमेश्वर की उपस्थिति में मान्यता, सद्गुण के प्रति प्रेम और पाप के प्रति बैर से सीधे सम्बंध रखता है।

प्रिय मसीही, यदि परमेश्वर का आपका ज्ञान संडे स्कूल के एक मधुर शिक्षक से आया है, तो शायद आपको लगता हैं कि परमेश्वर पाप से घृणा करता है, लेकिन पापी से प्यार करता है। एक बार फिर अनुमान लगाओ! दाऊद ने लिखा, “क्योंकि तू ऐसा ईश्वर नहीं जो दुष्टता से प्रसन्न हो; बुराई तेरे साथ नहीं रह सकती। घमंडी तेरे सम्मुख खड़े होने न पाएँगे; तुझे सब अनर्थकारियों से घृणा है। तू उनको जो झूठ बोलते हैं नष्ट करेगा; यहोवा तो हत्यारे और छली मनुष्य से घृणा करता है” (भजन 5:4-6)।

दाऊद ने फिर लिखा, “परमेश्वर अपने पवित्र भवन में है; परमेश्वर का सिंहासन स्वर्ग में है; उसकी आँखें मनुष्य की सन्तान को नित देखती रहती हैं और उसकी पलकें उनको जाँचती हैं। यहोवा धर्मी को परखता है, परन्तु वह उनसे जो दुष्ट हैं और उपद्रव से प्रीति रखते हैं अपनी आत्मा में घृणा करता है। वह दुष्टों पर फन्दे बरसाएगा; आग और गन्धक और प्रचण्ड लूह उनके कटोरों में बाँट दी जाएँगी। क्योंकि यहोवा धर्मी है, वह धर्म ही के कामों से प्रसन्न रहता है; धर्मीजन उसका दर्शन पाएँगे” (भजन 11:4-7)। इन वचनों की उपेक्षा क्यों की जाती है? ये मुस्कुराते चेहरों के साथ क्यों नहीं छपे हैं?

आपको क्या करना चाहिए? अपने मूल्य-प्रणाली को फिर से क्रमबद्ध करें। बॉलीवुड और एम.टीवी जैसी बातों से बैर रखे। अपने बच्चों को पाप और बुराई से घृणा करना सिखाएं। उन्हें धार्मिकता और पवित्रता से प्रेम करना सिखाएं। भले मनुष्यों और स्त्रियों की प्रशंसा करें; बुरे पुरुषों और स्त्रियों का तिरस्कार करें। पाप को कठोर दण्ड दे; भलाई को उदारता से पुरस्कृत करें। केवल पालतू वचनों से नहीं, संपूर्ण बाइबल से प्रेम करें। दाऊद की तरह बनना चुनो, और अपने परमेश्वर के सामने सिद्धता से चलने की अपनी पवित्र इच्छा से प्रेरित होकर सभी बुरे प्रभावों से बैर रखों (भजन 101:2-8)।

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