नीतिवचन 6:10
कुछ और सो लेना, थोड़ी सी नींद, एक और झपकी, थोड़ा और छाती पर हाथ रखे लेटे रहना,
बिस्तर पड़े एक आलसी मूर्ख की कल्पना करें। सूर्य ऊपर आ चूका है; घड़ी बताती है कि उठने का समय हो गया है; रात ख़त्म हो गई है, और काम पर जाना है। वह थोड़ी देर सोता है; वह अपने गर्म बिस्तर से प्यार करता है; वह अपने हाथों को मोड़ लेता है और अपने आरामदायक शयनकोश में करवटें बदल बदलकर चिमट कर सो जाता है। वह आलसी मूर्ख है। वह हारा हुआ है। उसे शीघ्र ही दरिद्रता कचोट लेगी (नीतिवचन 6:11)। उसका उनींदापन उसे बर्बाद कर देगा (नीतिवचन 23:21)।
उसे बिस्तर से उठना चाहिए, लेकिन उसे काम करना पसंद नहीं है। वह सोना अधिक पसंद करता है। वह बिस्तर पर पड़ा रहकर काम टालने की कोशिश करता है। वह सपने देखता है कि शायद काम टल जाए, और वह पूरे दिन सो सके। वह सोचता है कि शायद बिस्तर में और पंद्रह मिनट पड़े रहने से उठने में आसानी हो। यह अहसास बहुत अच्छा लगता है, वह खुद से बुदबुदाता है; सोचता है, जो बात उसे अच्छी महसूस हो रही है तो निश्चित रूप से इसमें कुछ भी गलत नहीं है!
सुलैमान ने आलस और देर तक सोते रहने के विरुद्ध चेतावनी दी (नीतिवचन 6:6-11)। सोना युवाओं के लिए एक बड़ा प्रलोभन है, इसलिए उसने इन शब्दों को फिर से दोहराया (नीतिवचन 24:30-34)। उसने शयनकोश में करवटें लेकर सोनेवाले आलसी का मज़ाक उड़ाया, “जैसे किवाड़ अपनी चूल पर घूमता है, वैसे ही आलसी अपनी खाट पर करवटें लेता है” (नीतिवचन 26:14)। वह उठने के बजाय, आगे पीछे लुढ़कता है, सोने के नए अंग विन्यास ढूँढ़ता है!
आप बिस्तर पर पड़े पड़े पैसे नहीं कमा सकते। बिस्तर पर पड़े रहने से केवल एक एक पल और सुअवसर बर्बाद होते हैं। असली मर्द बिस्तर से उठते हैं। वे स्नूज बटन नहीं दबाते। वे खटाक से ज़मीन खड़े हो जाते हैं; कमरे की खिड़कियाँ खोलते हैं; अपना चेहरा धोते हैं; तुरंत सक्रीय हो जाते हैं; अँगड़ाई लेते हैं, और शरीर को लचीला बनाते हैं; अपने हाथ मलते हैं; एक और दिन के लिए परमेश्वर का शुक्रिया अदा करते हैं; वे आलसी पड़ोसियों से पहले उठने में आनन्दित होते हैं।
युवाओं को नींद बहुत पसंद होती है। वे जीवन के आरम्भ में ही पूरा दिन सोते हैं। वे अपने परिवार के प्रति अपने कर्तव्य को नहीं जानते। उन्हें महीने की तनख्वाहवाली नौकरी अच्छी नहीं लगती। उनका अब तक का जीवन खाने में, खेलने में और सोने में ही बीत रहा है। जब तक उनका उठने का मन नहीं करता तब तक वे बस सोना ही चाहते हैं, जो अक्सर दोपहर तक का समय होता है। उन्होंने नहीं सीखा है कि बहुत अधिक नींद उन्हें उनींदा बना देती है (नीतिवचन 19:15)।
अन्य बातों के समान नींद को भी नियंत्रित किया जाना अवश्य है। हमें नींद की आवश्यकता एक निश्चित मात्रा में ही होती है, और उससे अधिक नींद लेना आलस्य है। संयम, या आत्म-अनुशासन इसकी कुंजी है। पियक्कड़ बहुत अधिक पीते हैं; आलसी बहुत ज्यादा सोते हैं। जिस रीति से आप जितना चाहे उतना पी नहीं सकते, उसी रीति से आप जितना चाहें उनता सो नहीं सकते। अच्छी आदतें विकसित की जा सकती हैं, और शरीर और मन दोनों उनकी आदत विकसित करने के लिए समायोजित हो जाएंगे।
नींद से प्यार करना उतना ही गलत है जितना कि शराब से प्यार करना, क्योंकि यह आपके संयम से समझौता करना है। सुलैमान ने लिखा, “नींद से प्रीति न रख, नहीं तो दरिद्र हो जाएगा; आँखें खोल तब तू रोटी से तृप्त होगा” (नीतिवचन 20:13)। सफलता का एक बड़ा कदम सुबह का पहला कदम है। उठों! काम पर लग जाओ! जैसे ही आप एक बार जब उठते और चल पड़ते हैं, आपको अपने इस किए पर खुशी होगी।
माताओं और पिताओं! अपने बच्चों को उदाहरण और नियम दे दे कर उठना सिखाओ। यद्यपि आप सुबह सुबह अपने काम के कारण उन्हें उठा नहीं पाए, फिर भी आप उनसे जल्दी उठने और दिन पर हमला करने की उम्मीद कर सकते हैं। लड़कियों को भी इसी नियम की कम से कम उतनी ही आवश्यकता है, क्योंकि सद्गुणी स्त्रियां सोतीं नहीं रहती (नीतिवचन 31:15)। साथ ही, उन्हें यह भी सीखने की जरूरत है कि बहुत से काम ऐसे हैं जिन्हें सुबह जल्दी किया जा सकता है।
आपको आभारी होना चाहिए कि स्वर्ग का परमेश्वर यहोवा न तो ऊँघता है और न ही सोता है, जो कि आपके लिए यह भरोसा रखने का एक ईश्वर-प्रेरित कारण है कि वह आपकी सहायता करने और आपकी रक्षा करने के लिए सदैव जागृत है (भजन 121:1-8)। प्रभु यीशु मसीह अपने जीवन और सेवकाई के दौरान कभी नहीं सोया, क्योंकि वह जानता था कि जब तक उसके पास अवसर था तब तक उसे परमेश्वर की इच्छा पर काम करते रहना अवश्य था (यूहन्ना 9:4; 11:9-10; 12:35)।
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