नीतिवचन 6:1

मेरे बेटे यदि तू अपने मित्र का ज़मानतदार हुआ हो, यदि तू ने परदेसी से हाथ मिलाया है,

यदि आप घमंडी, जज़्बाती, या आवेगशील हैं, तो मित्र आपके लिए एक आर्थिक खतरा बन जाते हैं। जो लोग संयम में बलवान और विवेकपूर्ण हैं वे अपने धन की रखवाली करते हैं (नीति 11:16), परंतु दुर्बल लोग अनावश्यक और मूर्खतापूर्ण खतरे उठाकर अपने धन को खो देते हैं। नीतिवचन की पुस्तक में परमेश्वर ने आपको कंगाल होने से बचाने के लिए, जो आपकी संपत्ती और आमदनी को असुरक्षित छोड देने की जोखीम से आ सकती है, अनमोल परामर्श दिया है। धन्यवाद, स्वर्गीय पिता।

सुलैमान, जो जन्म देनेवाले एक प्रेमी पिता के रूप में अपने बेटे को सिखा रहा है, उस ने उसे मित्रों के लिए एक ज़मानतदार होने के खिलाफ चेतावनी दी, जिसकी उसने अक्सर निंदा कीं (नीति 6:1-5; 11:15; 17:18; 20:16; 22:26-27; 27:13)। जो मनुष्य अपने मित्रों के लाभ के लिए अपने संसाधनों को ज़रूरत से ज्यादा उपलब्ध कराता है, वह अत्यन्त वास्तविक खतरा मोल लेता है।

ज़मानतदार बनना क्या है? यह क्यों ग़लत है? हम अपने जीवन के लिए कौन-सी बुद्धि सीख सकते हैं? आज के इस लापरवाही से भरे व्यक्तिगत, व्यवसायिक, और राष्ट्रीयस्तर के वित्तीय वादों के युग में, इस नीतिवचन का ज्ञान महत्वपूर्ण है। एक बुद्धिमान मनुष्य संदेहास्पद ऋण के लेनदेन में अपना दिल ज्यादा चौड़ा नहीं खोलेगा, और न अपनी संपत्ति को जोखिम में डालेगा।

आप तब ज़मानतदार कहलाते हैं, जब आप किसी और का आर्थिक भुगतान करने, या किसी व्यक्ती के पक्ष में आर्थिक व्यवहार करने का आश्वासन देते हैं। इस मामले में, आप एक तीसरे पक्ष से वादा करते हैं – एक अजनबी से – कि आपका मित्र अपना भुगतान करेगा या वही करेगा जो अपेक्षित है, और आप वादा करते हैं कि यदि आपका मित्र भुगतान करने में नाकाम रहता है. या भुगतान नहीं करता है, तो आप स्वयं उसके ऋण का भुगतान करेंगे, या व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।

क़र्ज़ लेनेवाले का क्रेडिट हिसाब और उसके दिवालियापन का विश्लेषण करने की आज की कंप्यूटरीकृत प्रणाली का आविष्कार होने से पहले, जब एक व्यक्ति का शब्द ही पर्याप्त होता था, इस तरह के वित्तीय लेनदेन औपचारिक रूप से हाथ मिलाकर तय किए जाते थे (नीति 17:18; 22:26)। दो लोगों का आपस में हाथ मिलाना विभिन्न देशों और विभिन्न युगों में अनुबंध करने का एक स्वरूप हुआ करता था (अय्यूब 17:3; भजन 144:8,11)। आज भी कुछ वादे या सौदे हाथ मिला कर किए जाते हैं। लिखित अनुबंध के बिना, व्यक्तिगत सत्यनिष्ठा ही दो पक्षों को आपस में अनुबंधित करती है।

आज ज़मानतदारी अक्सर ऋणों के करारनामों पर सह-हस्ताक्षर करने से होती है। आप अपने मित्र के साथ उसके ऋणदाता के पास जाते हैं, जो आपके लिए एक अजनबी है, और आप भुगतान के पूर्तिकर के स्रोत के रूप में अपना नाम लिखवाकर हस्ताक्षर करते हैं, कि यदि आपका मित्र ऋण-अनुबंध की तय किश्तों का भुगतान नहीं कर सका, या नहीं करेगा, तो आप करेंगे। दोस्ती निभाने का कितना अच्छा अवसर है, है ना? दोस्त आखिरकार किस लिए होते हैं, है ना? इस अनुबंध में आप एक प्रिय नायक बन जाते हैं!

परन्तु परमेश्वर ने चेतावनी दी कि आप दूसरों के ऋण के ज़मानतदार बनने से पहले उनके चरित्र की सावधानीपूर्वक समीक्षा करे (नीति 11:15; 20:16), अपने दायित्व की सीमा का मूल्यांकन करे (नीति 22:3; 14:15), और इसे चुकाने की आपकी हैसियत है या नहीं यह देखे (नीति 22:27)। उसने अप्रत्यक्ष रूप से ताल-मेल न खानेवाला वित्तीय लेखाजोखा और ऋण के लिए दूसरों पर अत्यधिक निर्भरता की निंदा की है, क्योंकि वह जोखिम प्रबंधन के महत्वपूर्ण परन्तु अक्सर उपेक्षित नियम को जानता था।

एक सचेत ज़मानतदार बनना न केवल स्वीकार्य हो सकता है, बल्कि विवेकपूर्ण, परोपकारी और आवश्यक भी हो सकता है (फिलेमोन 1:18-19; उत्पत्ति 43:8-10; यशायाह 1:17)। यदि एक भक्त मित्र या निर्धन ख्रिश्चन व्यक्ति को आप से आर्थिक सहायता की आवश्यकता है जो आप के बस में है, तो उनकी सहायता करने के लिए रुपये देने और दोस्ती निभाने में कोई पाप नहीं है। परन्तु जल्दबाजी में किए गए वादे और अत्यधिक प्रतिबद्धताएं मुर्खपूर्ण ज़मानतदारी है।

जल्दबाजी और घमंड मूर्खतापूर्ण वादों का कारण बनते हैं। जल्दबाजी का गुण यह है कि वह दायित्व की सीमा जानने से पहले ही शब्द बोल देती है, और हाथ मिलाती है (नीति 14:15; 19:2; 22:3; 29:20)। गर्व चाहता है की उसे एक ऐसे मनुष्य के रूप में देखा जाए जो सब बातों का मध्यस्थ है, और ऐसी प्रतिष्ठा तब बड़ी तेज़ी हासिल की जा सकती है जब ऋण के लिए बिचवैय्या बनने या व्यक्तिगत कार्य-प्रदर्शन की निश्चयता सबके सामने दी जाती है, भले ही व्यक्ति के पास दायित्व का भुगतान करने के लिए बहुत कम संपत्ति हो।

जज़्बात और आवेग मूर्खतापूर्ण वादों का कारण बनते हैं। जज़्बाती भावनाएं संभावित देनदारियों में शामिल जोखिम के बारे में गंभीरता से विचार करने से अधिक दोस्ती को अधिक वज़नदार बनाती हैं, इसलिए एक मूर्ख व्यक्ति अपने बेरोजगार मित्र की नई कार के लिए ज़मानतदार बन बैठता है। जज़्बाती मनुष्य अपने मित्र की ज़रूरत की पुकार को सुनता है, और उस का दिल उसे बताता है कि वह इस मामले को बड़ी आसानी से सुलझा सकता है, इसलिए वह इसका मूल्यांकन किए बिना ही जामिन बन जाता है।

इस नीतिवचन के संदर्भ पर विचार करें। यदि कभी कोई ऐसा पुत्र हो सकता है जो किसी भी ज़मानती दायित्वों का भुगतान कर सके, तो वह है पृथ्वी पर के सबसे धनी राजा (सुलैमान) का उत्तराधिकारी और राजकुमार। तौभी, राजा सुलैमान ने इसी पुत्र को चेतावनी दी। आर्थिक सफलता के लिए मात्र विनाशकारी नुकसान से बचना काफ़ी नहीं है – इसमें मूर्खतापूर्ण या जोखिम भरे निर्णयों से बचने के लिए आर्थिक अनुशासन और नियम भी शामिल हैं।

यह एक दुखद आपदा है जब गरीब लोग कड़ी मेहनत तो करते हैं लेकिन आर्थिक नुकसान कर बैठते हैं जो उन्हें हमेशा ही गरीबी में रखता है (नीति 13:23)। अपनी किसी नौकरी या व्यवसाय में कड़ा परिश्रम करना एक अच्छी बात है, लेकिन यह एक बहुत ही शर्मनाक बात है जब कड़ी मेहनत से होने वाली आय या संपत्ति को एक ग़लत निर्णय की एक क्षणिक चूक के कारण बर्बाद कर दिया जाता है। न तो परमेश्वर और न ही सुलैमान चाहते थे कि ऐसा हो, इसलिए परमेश्वर ने इस नीतिवचन को लिखने सुलैमान को प्रेरित किया।

यीशु अपने लोगों का ज़मानतदाता है (इब्रानियों 7:22)। उसने अपना वचन दिया और उनके अनंत पाप के ऋण को चुकाने के लिए अपना प्राण दिया, और उसका जामिन युगानुयुग के लिए निश्चित है (रोम 8:31-39)। यद्यपि, वे अपने पाप का भुगतान नहीं कर सकते थे, और न ही कभी करते, फिर भी उसने उनके खाते का पूरा-पूरा भुगतान कर दिया। चुने हुए लोग स्वर्ग में जायेंगे यह उतना ही निश्चित है जितना कल सुबह के उगते सूरज और आज रात को उस के डूबने का नियम निश्चित है (यिर्मयाह 31:35-36; 33:17-26)।

नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।