नीतिवचन 5:22
दुष्ट अपने ही अधर्म के कर्मों से फँसेगा, और अपने ही पाप के बन्धनों में बँधा रहेगा।
सुलैमान ने 3000 साल पहले ही यौनाचार की लत के बारे में चेतावनी दी थी। मनोवैज्ञानिकों ने तो हाल ही में इसे जाना है। अपने बेटे को यौन पापों और उनके लिए परमेश्वर के दण्ड के बारे में चेतावनी देने के बाद (नीतिवचन 5:1-21), सुलैमान ने आगे यह कहकर गंभीर चेतावनी दी कि जो इन पापों को करता है उसका सर्वनाश होगा (नीतिवचन 5:22-23)। कुछ समय के लिए आप जिन यौन पापों का आनंद लेते हैं वह आपको जीवन भर के लिए कैद कर सकता है।
इस नीतिवचन का संदर्भ स्पष्ट और सरल है – अपने कानूनी जीवनसाथी के अलावा किसी और के साथ नाजायज़ यौन अंतरंग सम्बन्ध (नीतिवचन 5:1-21)। इस नीतिवचन में उल्लेखित मनुष्य मूर्ख है जिसने चेतावनियों को अनसुना कर दिया और एक पराई औरत के साथ यौन पाप करने लगा। उसके यौन पाप उसके शरीर और प्राण को जकड़ लेंगे, और वह उनकी जंजीरों जैसी बेड़ियों में जकड़ लिया जाएगा। वे उसके प्राण को पकड़ लेंगे और बन्धन में फँसा लेंगे।
यौन पाप मनुष्य के प्राण को अन्य सभी पापों की तुलना में अधिक मज़बूती से जकड़ लेते हैं। शराब के कारण नशे की और नशीले मादक पदार्थो की लत लग सकती है, लेकिन व्यभिचार के कारण अनैतिक विचारों और कुकर्म का जुनून पैदा हो सकता है। जो पुरुष यौन पाप करते हैं, वे शायद ही कभी छुटकारा पाते हैं (नीतिवचन 2:18-19; 5:5-13; 6:26-35; 7:22-27; 9:17-18)। केवल परमेश्वर का महिमाशाली अनुग्रह ही व्यभिचारी मनुष्य को इस बंधन से मुक्ति दिला सकता है।
यौन पाप जिस प्रकार से मौलिक रोमांच प्रदान करने के लिए अधिक से अधिक उत्तेजना की मांग करते हैं, वे इस मायने में भी लत की ओर ले जाते हैं। नग्न औरतों की तस्वीरें देखनेवाला व्यक्ति शायद ही कभी वही तक नियंत्रित रह पाता है, क्योंकि कुछ पुरुष सीमित अश्लील चित्र देखने में ही संतुष्ट हैं। लेकिन अधिकतर पुरुष अपने प्राथमिक अनुभवों को याद करके उसी स्तर के यौन और पापपूर्ण रोमांच को महसूस करने की अपनी वासना में भड़क जाते हैं, और फिर उसे असल में अनुभव करने के लिए उत्तरोत्तर अधिक चरम नग्न तस्वीरों को देखने लगते हैं।
पोर्नोग्राफ़ी अपने आप में इस उत्तरोत्तर पतन का एक स्वतंत्र विषयगत अध्ययन (केस स्टडी) है। 40-60 साल पहले जिसे पोर्नोग्राफ़ी कहा जाता था, वह आज की पोर्नोग्राफ़ी से काफ़ी अलग है। अंतर उल्लेखनीय है! जिन मूर्खों ने अपनी किशोरावस्था में औरतों की नग्नता से शुरुआत की थी, वे अब अपने चालीसवें वर्ष में आने के बाद उसी रोमांच को पाने के लिए समलैंगिकता, पशुगमन और बाल यौन शोषण का अनुभव लेना चाहते हैं। और यह बात वैवाहिक सुख में सुधार करने के बजाय, क्योंकि उनका मन उनसे झूठ बोलता है, वैवाहिक क्षमता और संतुष्टि को नष्ट कर देती है।
नवयुवक, सुन! वृद्ध मनुष्य, सुन! यह नीतिवचन गुरुत्वाकर्षण जितना ही सत्य है। यदि आप कल्पनाओं, अश्लील साहित्य, व्यभिचार, समलैंगिकता या पशुगमन के साथ खेलते हैं, तो आप अपना ही विनाश कर लेंगे। आपके अपने पाप आपकी आत्मा को पकड़ लेंगे और कैद कर लेंगे। आप स्वयं को मुक्त नहीं कर पाएंगे। आप स्वर्ग से चमत्कार के बिना फिर कभी परमेश्वर, अपनी पत्नी या धार्मिक जीवन से प्रेम नहीं रख पाएंगे। और परमेश्वर ने न तो आपको और न ही किसी अन्य व्यभिचारी को इतनी दयालु और अयोग्य मुक्ति का वादा नहीं किया है।
शिमशोन पर विचार करें। उसके माता-पिता धर्मी थे, वह आजीवन नाज़री था, अन्य मनुष्यों से निडर था और उसने बीस वर्षों तक इस्राएल का न्याय किया। शिमशोन पलिश्ती स्त्रियों के रूप-रंग को देखकर उनके लिए वासना में जल उठा (न्यायियों 14:1-3; 16:1), और दलीला के जाल में फँस गया। उसने उसके स्पष्ट घातक इरादों को भापने के बावजूद, वह उसकी सर्वशक्तिमान स्वामी बनी गई (न्यायियों 16:4-21)। उसकी समझ में क्यों नहीं आया? क्या वह निर्बुद्धि था? वह अपने ही यौन पाप के बन्धनों में बँधा था। अंत में वह अंधा हो गया और आत्मघात किया।
अम्नोन पर विचार करें। उसके माता-पिता धर्मी थे, वह राजा दाऊद का ज्येष्ठ पुत्र था, उसके पास यहोवा का सच्चा धर्म था, और इस्राएल में उसके लिए हर प्रकार की योग्य स्त्री हो सकती थी। लेकिन वह अपनी बहन तामार के बारे में तब तक यौन कल्पना करता रहा जब तक कि वह उसके प्रति जुनून से भर नहीं गया। इस कल्पना के प्रति उसकी लत के कारण उसने उसके साथ क्रूरतापूर्वक बलात्कार किया, परिणामस्वरूप उससे नफरत की गई, और उचित रूप से उसके भाई अबशालोम ने उसे मार डाला (2 शमू 13:1-39)। वह अपने ही यौन पाप के बन्धनों में बँधा था।
अब सुलैमान पर विचार करें। उसने तो खुद ही ये नीतिवचन लिखे। यह नीतिवचन भी उसी ने लिखा है। परन्तु स्त्रियों ने उसका जीवन नष्ट कर दिया (1 राजा 11:4-13)। यह कैसे हुआ? उसने पहली बार परमेश्वर की आज्ञा के विरुद्ध, परमेश्वर से बिना पूछे विवाह किया (व्यवस्थाविवरण 7:1-6; 1 राजा 3:1)। फिर वह बहुपत्नीक बन गया, वह भी परमेश्वर की आज्ञा के विरुद्ध (व्यवस्थाविवरण 17:17; 1 राजा 11:1-3)। भिन्न-भिन्न देशों की विविध प्रकार की औरतों के प्रति उसकी चाहत उसका यौन जुनून बन गया, इस हद तक कि उसके पास 1000 विदेशी औरतें थीं, जिसके चलते उसका जीवन बर्बाद हो गया (सभोपदेशक 7:26-29)।
जनाब! यदि आप कल्पनाओं, अश्लील साहित्य, व्यभिचार, या किसी ऐसी औरत के साथ दोस्ती करते हैं जो पूरी तरह से परमेश्वर की नहीं है, तो आप शरारती मूर्ख हैं। आप मूर्ख हो, क्योंकि आपने परमेश्वर की चेतावनियों को मानने से इनकार कर दिया है। आप फंसे हुए मूर्ख हैं, क्योंकि आपने खुद से झूठ बोला है कि आप इससे बच सकते हैं। आप जल्द ही अपने इस प्रिय पाप से नफरत करने लगेंगे, जो आपको नष्ट कर देगा (भजन 36:2)।
अगर आप ऐसा सोचते हैं कि आप बाद में पश्चाताप करके अपने पाप और उसकी सजा से बच सकते हैं, तो आप मूर्ख हैं, क्योंकि आप अपनी वासनाओं के पूर्ण बंधन में हैं; आप स्वयं को मुक्त करने में न तो सक्षम होंगे और न ही इच्छुक होंगे। और यदि आप यौन रोगों, ईर्ष्यालु पति के क्रोध, या न्यायाधीश की सजा से बच भी जाते हैं, तौभी आप परमेश्वर के धर्मी न्याय से कदापि बच नहीं पाएंगे जो अटल और अचूक है।
परमेश्वर की वह संतान जो पश्चाताप नहीं कर सकती और अपने परमेश्वर के साथ आनंद और शांति नहीं पा सकती उससे बढ़कर कोई बन्धन नहीं है। क्या आपने यह सुना, पापी? आप पश्चाताप नहीं कर सकते! आप पश्चाताप क्यों नहीं कर सकते? क्योंकि आप अपनी अभिलाषाओं के दास बन गए हैं, और आपका हृदय पापपूर्ण विचारों और कार्यों के कारण मृत्यु के जाल में फंसा है। हर बार जब आप अपने जीवन में किसी पापपूर्ण विचार या कार्य को अपनाते हैं, तो आप एक और पापपूर्ण धागे को उन रस्सियों में बदल देते हैं जो आपको अपने यौन पापों में बांध लेंगे।
यदि आप कल्पनाओं, अश्लील साहित्य या किसी पापी रिश्ते के साथ खेल रहे हैं, तो अभी दूर हो जाइए। पौलुस कहता है, जवानी की अभिलाषाओं से भागो (2 तीमु 2:22)। ऐसी किसी भी जगह या चीज़ के पास न जाएं जो आपको यौन पाप करने के लिए प्रलोभित करता है (नीतिवचन 4:15; 5:8; भजन 101:3; रोमियों 13:11)। यीशु ने कहा, यौन पाप के साथ खेलने के बजाय अपनी दाहिनी आंख निकाल लें या अपना दाहिना हाथ काट लें (मत्ती 5:28-30)।
यदि आप यौन पाप के आदी हैं, तो आपका मामला इतना भी निराशाजनक नहीं है, लेकिन आप अपने तरीकों या अपनी ताकत से खुद को कभी भी मुक्त नहीं कर पाएंगे। आपको अब पाप को हिंसक तरीके से, पूरी तरह से काट देना चाहिए! इन शब्दों के साथ पश्चाताप करें (अय्यूब 33:27-28)। आपको पाप, यौनाचार और शैतान से मुक्ति दिलाने के लिए यीशु के नाम से परमेश्वर से शक्ति के लिए प्रार्थना करें। अपने जीवनसाथी, माता-पिता या पास्टर के सामने हर निंदात्मक बात का अंगीकार करने के लिए खुद को विनम्र रखें। पूरे मन से सार्वजनिक और निजी तौर पर परमेश्वर की आराधना करें।
प्रभु मसीह के लिए कुछ भी असम्भव नहीं है! आप बाइबल में पढ़ सकते हैं कि धार्मिक फरीसियों से पहले वेश्याएँ परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर गई (मत्ती 21:31)। पौलुस ने कुरिन्थ की कलीसिया में के कई यौन पापियों के बारे में यह कहा, “और तुम में से कितने ऐसे ही थे, परन्तु तुम प्रभु यीशु मसीह के नाम से और हमारे परमेश्वर के आत्मा से धोए गए और पवित्र हुए और धर्मी ठहरे” (1 कुरिन्थ 6:11)।
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