नीतिवचन 5:17
यह केवल तेरे ही लिये रहे, और तेरे संग औरों के लिये न हो।
नाजायज़ बच्चें एक बड़ी समस्या हैं, खासकर राजाओं के लिए। सुलैमान ने अपने बेटे को चेतावनी दी कि वह वेश्याओं से दूर रहे, ऐसा न हो कि वह उसके घराने के वंश को भ्रष्ट कर दे। एक बुद्धिमान व्यक्ति अपने घराने में वैध बच्चों के कारण प्रसन्न होता है, लेकिन यौन पाप का एक परिणाम यह भी है कि उससे नाजायज़ या सौतेले बच्चों के कारण घर में भयावह पीडाओं और दरारों का संकट आता है।
यौन सम्बन्ध मुख्य रूप से पति-पत्नी के बीच शारीरिक सुख और आनंद के लिए होता है, फिर भी रोमन कैथोलिक चर्च की शिक्षा इससे भिन्न है। यौन सम्बन्ध का उद्देश प्रजनन भी है, क्योंकि पति और पत्नी दोनों अपने सहवास के द्वारा परमेश्वर की आशीष से अपना एक परिवार बना सकते हैं। ऐसे बन्धन को विवाह कहा जाता है, क्योंकि इसमें विवाहित पति-पत्नी के अलावा कोई ग़ैर मर्द या पराई औरत और नाजायज़ बच्चे नहीं होते हैं!
सुलैमान अपने बेटे को यौन पापों के ख़िलाफ बार बार आगाह करता था (नीतिवचन 5:1-23)। हालाँकि यह संसार आजकल इस पाप को कैजुअल सेक्स कहती है (जिसमें ऐसे किसी अजनबी के साथ यौनाचार किया जाता है, और इसका तात्पर्य ऐसे यौन सम्बन्ध से है जिसमें आदमी और औरत के बीच कोई प्रतिबद्धता, भावनात्मक लगाव या पहले से किसी परिचय की आवश्यकता नहीं होती), परन्तु परमेश्वर इसे व्यभिचार, परस्त्रीगमन और बेवफ़ाई का पाप कहता है, और वह ऐसे पाप करनेवाले हर एक पुरुष और स्त्री को दण्ड देगा (इब्रा 13: 4)। इस नीतिवचन का एक सबक यह भी है कि सुलैमान अपने बेटे को केवल अपनी पत्नी के साथ ज्यादा से ज्यादा यौन सुख प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करता है (नीतिवचन 5:15,19-20)। फिर वह उसे मूल्यवान प्रेरणा देता है कि वह किसी पराई औरत के साथ कोई मिश्रण किए बिना केवल अपनी पत्नी से जायज़ बच्चों का एक वैध परिवार खड़ा करे (नीतिवचन 5: 16-18)।
इस नीतिवचन के पहले खंड में प्रयुक्त शब्द “यह केवल तेरे ही लिये रहे”, इसके पहले के नीतिवचन, अर्थात 5:16 में उल्लेखित सोतें और जल की धारा हैं, जो एक कुलीन और धर्मी पुरुष के जायज़ बच्चे और वंशज हैं (नीतिवचन 5:16) )। एक महान परिवार के सुख, शांति, प्रतिष्ठा और शक्ति को बढ़ाने के लिए ज़रूरी है कि पुरुष के सब बच्चे उसकी ब्याही पत्नी से हो।
धर्मीजन, जो एक कुलीन पुरुष होता है, वह एक बड़े, सुखी और समृद्ध परिवार के मूल्य को समझता है (भजन 107:41; 127:3-5; 128:1-6)। वह जानता है कि यह जीवन की एक महान आशीष और एक महान लक्ष्य है। वह आज के उन विकृत समलैंगिक लोगों जैसा नहीं है, जो मर्दों को ही अपना प्रेमी बनाते हैं या औरतों का इस्तेमाल सिर्फ़ यौन सम्बन्ध के लिए करते हैं जिसमें न तो विवाह के लिए प्रतिबद्धता होती है और न ही बच्चे पैदा करने की कोई चाहत। धर्मी पुरुषों का मूल्यवान उद्देश्य एक निष्कलंक परिवार की स्थापना करना होता है, और इसलिए वे वेश्याओं और व्यभिचारी पराई औरतों से दूर रहते हैं। जो भी माँ-बाप समझदार हैं वे अपने बच्चे के प्रशिक्षण में इस मुद्दे को शामिल करेंगे।
दूसरे खंड में “औरों” वेश्याओं की ओर इशारा करता है (नीतिवचन 23:27)। राजाओं की शुरू से ही उनकी शक्ति और धन के कारण रखैलें होती थीं। राजा सुलैमान ने अपने बेटे को अपनी पत्नी तक ही यौन संबंध सीमित रखने की चेतावनी दी (नीतिवचन 5:19-20)। वह अकसर शिष्टोक्ति “पराई स्त्री” का प्रयोग करता है (नीतिवचन 2:16; 5:3,20; 6:24; 7:5; 23:27; न्यायियों 11:1-2)। वह एक “पराई स्त्री” है क्योंकि वह उसके बिस्तर के लिए पराई है जो केवल एक विवाहित युगल के लिए होता है; उसे उसके साथ अन्तरंग सम्बन्ध बनाने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि उसने अपनी पत्नी से प्रतिज्ञा की थी कि वह अपने तन और मन से केवल उसी से समागम करेगा। भले ही वह इस पराई स्त्री को व्यक्तिगत रूप से अच्छी तरह से जानता होगा, फिर भी वह उसके यौन क्षेत्र से बाहर है।
परमेश्वर ने मनुष्यों के मन की कठोरता के कारण बहुविवाह होने दिएँ (मत्ती 19:8)। हालाँकि वह आसानी से आदम के लिए कई पत्नियाँ बना सकता था, फिर भी एक पुरुष के लिए केवल एक पत्नी की व्यवस्था दी जिसकी एक धर्मनिष्ठ वजह है (मलाकी 2:14-15) – अर्थात, पवित्र और निष्कलंक सन्तान। जैसा कि पुराने नियम के इतिहास से पता चलता है, बहुविवाह परिवारों को शुद्धता को भ्रष्ट कर देता है, भले ही कुछ देशों में बहुविवाह क़ानूनन वैध ही क्यों न हों।
सारा ने अपने पति अब्राहम को हाजिरा नाम की दूसरी पत्नी लेने के लिए प्रोत्साहित किया। लेकिन जैसे ही हाजिरा गर्भवती हुई, बच्चे के जन्म से पहले ही, ईर्ष्या और अनबन की शुरुवात हो गई थी (उत्पत्ति 16:1-6)। जब सारा और हाजिरा दोनों ने अब्राहम के लिए एक एक पुत्र को जन्म दिया, तो पारिवारिक संघर्ष खुलकर सामने आ गया था और अब्राहम का बहुपत्नी परिवार हमेशा के लिए टूट गया (उत्पत्ति 21:1-11)।
दाऊद के पुत्र आपस में लड़-मरें, क्योंकि दाऊद ने बहुविवाह के द्वारा अपने पारिवारिक वंश को भ्रष्ट कर दिया था (1 इति 3:1-9)। सुलैमान ने अपनी आँखों इस विनाशकारी संघर्ष को देखा था, जब अम्नोन ने अपनी सौतेली बहन का बलात्कार किया जिसके चलते उसके सौतेले भाई अबशालोम ने उसे मार डाला (2 शमू 13:1-39)। और वह खुद भी इस अनुभव से गुज़रा, जब अदोनियाह ने उसके सिंहासन पर कब्ज़ा करने की कोशिश की (1 राजा 1:1-53; 2:12-25)।
व्यभिचार बहुविवाह से भी बदसूरत है, क्योंकि इसमें अपने पार्टनर के प्रति कोई प्रतिबद्धता या विवाह का बंधन नहीं होता है। व्यभिचार से जन्मे बच्चों के एक ही माता-पिता नहीं होते हैं, क्योंकि ऐसे सम्बन्ध में या तो सिर्फ़ पिता असली होता है या केवल माँ, और सौतेले माता-पिता को सौतेले बच्चे के प्रति कोई गहरा स्नेह और अपनापन नहीं हो सकता है। पराई स्त्री से जन्में बच्चों से ऐसी ही पारिवारिक परेशानियाँ उपजती हैं और इसलिए सुलैमान ने अपने बेटे को चेतावनी दी, और आज आपको भी दे रहा है।
लेकिन समलैंगिकता के दिखावटी विवाह में दो पुरुषों या दो औरतों का किसी बच्चे को गोद लेना कितना भयावह है जिसमें किसी और के समागम से पैदा हुए बच्चों को गोद लिया जाता है? यहां तक कि प्रकृति आप ही ऐसे मिलन की निंदा करती है और उन्हें प्रजनन की क्षमता से वंचित करती है (रोमियों 1:24-27,31; 1 कुरिन्थ 6:9; 1 तीमु 1:10; 2 तीमु 3:3), फिर भी वे खुद समलैंगिक होने के बावजूद एक ऐसा बच्चा पाना चाहते है जो एक पुरुष और एक स्त्री के बीच सहवास से जन्मा हो। सुलैमान ने ऐसी मानसिक विकृति कभी नहीं देखी थी। यह नीतिवचन ऐसे घिनौने आविष्कारों पर और भी अधिक प्रभावशाली रूप से लागू होता है, क्योंकि यह नीतिवचन कहता है, “[तेरे बच्चें] केवल तेरे ही लिये रहे, और तेरे संग औरों के लिये न हो” (नीतिवचन 5:17)।
जीवित और सच्चा परमेश्वर, जिसने विवाह और यौन सम्बन्ध को विवाह बंधन में बंधें केवल एक पुरुष और केवल एक स्त्री तक सीमित रखा, वह आप भी तलाकों की भर्त्सना करता है – जिस तरह से आज दुनियाभर में लगभग 50% पहली शादियों में होता है। उसे ऐसे तलाकों से घिन आती है (मल 2:16), और उसने कहा कि यह केवल कानूनी व्यवस्था का विकृतिकरन हैं ताकि लोग व्यभिचार के भयानक पाप की लीपापोती कर सकें (मत्ती 5:31-32; 19:3-9)। ऐसे तलाक भी इस नीतिवचन का उल्लंघन हैं, क्योंकि इससे विवाह टूटते हैं और घराने को सौतेले बच्चों से भ्रष्ट कर देते हैं।
जो परमेश्वर की सन्तान हैं, उन्हें अवश्य है कि वे जीवन भर विपरीत लिंग के एक धर्मनिष्ठ और सदाचारी जीवनसाथी से विवाह करें और वैध तथा प्रिय बच्चों के एक शुद्ध घराने का निर्माण करें, जिन्हें वे भक्ति से प्रेम रखने और इस दुनिया की घृणित चीजों से नफरत करने के लिए प्रशिक्षित कर सकें। परमेश्वर करें कि ऐसे बच्चे महिमा को देखें, आनंद करें, और एक धर्मनिष्ठ और शुद्ध परिवार के लाभ को जानें। परमेश्वर करें कि वे व्यभिचार, परस्त्रीगमन, समलैंगिकता और बाइबल-विरोधी तलाकों को परिवार के शत्रु के रूप में देखें और उनसे से घृणा करना सीखें। ऐसे धर्मपरायण बच्चों के सोतें और जल-धाराएं और अधिक बढ़ें (नीतिवचन 5:15-18; भजन 144:11-15)।
स्वर्ग के परमेश्वर ने अपने बच्चों का एक घराना बनाया है जो प्रभु यीशु मसीह के साथ कलीसिया के गौरवशाली विवाह से जन्में हैं (इफि 3:14-15; 5:25-27; इब्रानियों 2:10-13)। परमेश्वर के चुनाव के अनुग्रह के बाहर बाकी सब लोग नाजायज़ हैं, और वह उन्हें अपने प्रेम और ताड़ना से वंचित रखता है (इब्रा 12:5-8; इफि 1:3-6; रोमियों 8:28-33; 9:21-24)। यीशु मसीह ने इन बच्चों में से प्रत्येक को अनन्त जीवन की निश्चयता दी है (यूहन्ना 6:38-39; 10:27-28; 17:1-4), और वे उसके और अपने पिता के साथ एक नए स्वर्ग और एक नई पृथ्वी पर आनन्द मनाते हुए अनंतकाल के लिए जीवित रहेंगे ( भजन 16:11; 36:8; यूहन्ना 14:1-3; रोमियों 8:17-23; इफि 2:4-7)।
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