नीतिवचन 5:13
मैं ने अपने गुरुओं की बातें न मानीं और अपने सिखानेवालों की ओर ध्यान न लगाया।
यौन पाप करनेवालों का ज़मीर जब जाग जाएगा, तब वे पश्चात्ताप के आंसुओं के साथ चिल्लाएँगे, “मैंने अपने गुरुओं की बात क्यों नहीं मानी? मैंने उनकी चेतावनियों पर कान क्यों नहीं लगाएं? अब बहुत देर हो चुकी है! मेरा जीवन बर्बाद हो गया!” ये उस मूर्ख की दर्दनाक चीखें हैं जिसने यौन पापों के बारे में अपने गुरुओं की सलाह को ठुकरा दिया था। पछतावे का उनका यह दुःख बहुत बड़ा है, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है।
अब पछताने से कोई फायदा नहीं। उसने वेश्याओं के साथ सम्बन्ध बनाकर अपने जीवन का विनाश कर लिया है। अब उसे पछतावे का रोग लग गया है। वह कामना करता है कि काश वह वापस लौट जाता। उसने क्यों शिक्षा से घृणा कीं और डाँट को अनसुना कर दिया? उसने अपने गुरुओं की चेतावनियों का पालन क्यों नहीं किया? उसकी चीत्कार पर ध्यान दें जो उसके दुख की गहराई को रेखांकित करती है।
इस पुरे अध्याय में युवाओं को यौन पापों के बारे में चेतावनी दी गईं है। सुलैमान ने अपने बेटे को मीठी-मीठी बातें करने वाली पराई औरत – अर्थात् वेश्या (नीतिवचन 5:1-7) के बारे में चेतावनी दी। यह नीतिवचन एक लंबे वाक्य को निष्कर्ष पर पहुँचाता है, जिसमें उसने अपने बेटों को उससे दूर रहने की चेतावनी दी, ऐसा न हो कि वे अपने जीवन का विनाश कर लें और निराश होकर उसकी शिक्षाओं की अनदेखी पर दुखी हों (नीतिवचन 5: 8-13)।
जिसे बहुत दिया गया है, उससे बहुत माँगा जाएगा (लूका 12:47-48)। यदि पास्टर, माता-पिता, गुरुजन और मित्र आपको यौन पापों के प्रति सचेत करते हैं, तो इस महान ज्ञान के विरुद्ध पाप करने के कारण आपका अपराध और दंड अधिक गंभीर होगा। उस दुःख और अपराध पर विचार करें जो शिमशोन और दाऊद ने अपने व्यभिचार के लिए महसूस किया था (न्यायियों 16:20-21; भजन 51:8)। ख्रिश्चन, क्या यह सच है कि आपको यौन पापों के बारे में शिक्षा और चेतावनियाँ दी गई थीं? तो फिर अपने प्राण, अपनी ज़िन्दगी के लिए भागो!
यौन-भावना परमेश्वर की ओर से एक महान उपहार है, लेकिन उसने इसे केवल पति-पत्नी के वैवाहिक रिश्तें तक ही सीमित कर दिया है (नीतिवचन 5:15-19), और विवाह से बाहर किसी और से ऐसे अंतरंग रिश्ते की कड़ी निंदा की है (नीतिवचन 5:20-23)। युवा पुरुष परमेश्वर-प्रदत्त टेस्टोस्टेरोन (एक हार्मोन) से यौन इच्छा से जलते हैं, लेकिन उन्हें अपने शरीर पर क़ाबू रखना ज़रूरी है और उन्हें यौन विचारों या यौन-क्रीड़ा को केवल अपनी पत्नी तक ही सीमित रखना चाहिए (नीतिवचन 5:19; 1 कुरिन्थ 6:13-20; 1 थिस्स 4:3-8; इब्रा 13:4).
यह दुनिया यौन-वासना से ग्रस्त है, खासकर विवाह के बाहर पापपूर्ण यौन सम्बन्ध से, यहां तक कि समलिंगी अप्राकृतिक सेक्स यौन सम्बन्ध से भी ग्रस्त है। लोगों की नैतिकता मर गयी है। आज छोटे छोटे बच्चें भी यौन कामना करते हैं। विज्ञापन कम्पनियाँ इसका फायदा उठाती हैं। मनोरंजन की दुनिया इसे बढ़ावा देती है। न्यायपालिका भी इसे हल्के से लेती है। माता-पिता इसकी इजाज़त देते हैं। औषध विक्रेता इसकी पैरवी करते हैं। महिलाएं सार्वजनिक स्थानों पर कम कपड़े पहनती हैं; व्यभिचारी स्त्रियों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है – जो अजनबियों के साथ यौन सम्बन्ध बनाने में संकोच को खत्म करती हैं। पुरुषों (और महिलाओं) के लिए यौनाचार की परीक्षा इससे पहले इतनी शक्तिशाली कभी नहीं थीं जितनी आज है।
लेकिन परमेश्वर ने अपना वचन बोला है. उसकी उपेक्षा करने से आपका ही जीवन बर्बाद हो जाएगा। उसने यौन सम्बन्ध को प्रेमपूर्ण विवाह के बन्धन में बंधें एक पुरुष और एक स्त्री तक सीमित कर दिया। किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसे अन्तरंग रिश्तें की अनुमति नहीं है। उसने इसकी शिक्षा सृष्टि किए जाने के तुरन्त बाद दीं (उत्पत्ति 2:18-25)। कुलपतियों ने इसे समझा (उत्पत्ति 39:7-12)। मूसा की व्यवस्था ने इसे वर्जित किया गया (लैव्य 18:1-30)। और सुसमाचार ऐसे रिश्ते के लिए दोषी ठहराता है (इफि 5:3-7; इब्रा 13:4; प्रकाशितवाक्य 21:8)।
आज का आपका चुनाव आपके शेष जीवन को प्रभावित करेगा। आपको चेतावनी दी गई है। यदि आप अश्लील साहित्य देखते हैं, जो इतना आकर्षक, आसानी से उपलब्ध और “मासूमियत” से भरा है, तो आप अपना जीवन बर्बाद कर देंगे (नीतिवचन 5:19-23; 6:25; 2 शमू 11:2-4; भजन 101:3; मत्ती 5:28; रोमियों 6:16)। और स्त्रियों को भी यह याद रखने की ज़रूरत है कि वे जो रोमांस की कहानियों के उपन्यास और पत्रिकाएँ लिखती हैं वे पुरुषों के लिए नग्न तस्वीरों के बिल्कुल समकक्ष हैं। ये दोनों नारकीय आविष्कार यौन पाप की लालसा को उत्तेजित करते हैं और वासना को बढ़ाकर संतुष्टि को नष्ट कर देते हैं।
यदि आप किसी नाजायज रिश्ते की ओर थोड़ा सा भी झुकने की परीक्षा में पड़ते हैं, तो हर हाल में उससे दूर भागे, चाहे जो भी करना पड़े। यीशु आपसे कहता कि इस व्यभिचार से बचने के लिए अपनी दाहिनी आंख निकाल लें या अपना दाहिना हाथ काट लें (मत्ती 5:29-30)। कुछ पापों से आप लड़ सकते हैं, लेकिन इस पाप से आपको भागना होगा (2 तीमु 2:22)। यदि आपकी अंतरात्मा में पीड़ा है, तो यह आपके लिए परमेश्वर की शुद्ध दया है। पश्चाताप करो, और भागो, अभी!
एक बार यौन पाप में फंसने के बाद आप वापस नहीं जा सकते (नीतिवचन 6:32-33; व्यवस्था 22:13-21)। आप क्या मुआवज़ा देंगे? इसका पूरा पूरा दण्ड दिया जाएगा (नीतिवचन 6:34-35; श्रेष्टगीत 8:6-7)। जाल बीछ गया है, और आप फँस चुके हैं। केवल बड़ी कृपा से और अत्यन्त दुर्लभ मामलों में ही परमेश्वर ने यौन पापियों को छुड़ाया है (नीतिवचन 2:18-19; 5:4-5,11,22-23; 7:26-27; 9:18; 23:27; सभोपदेशक 7: 26)। आप कल पछता लेंगे ऐसा घमंड मत करो; परमेश्वर आपको पश्चाताप करने का मौका दिए बिना आपको आपके पापों में सड़ने के लिए छोड़ देगा।
लेकिन ख्रिश्चन पाठक, आप इस नीतिवचन को यौन पापों तक सीमित नहीं रख सकते। यदि आपको किसी भी विषय पर सत्य या ज्ञान सिखाया गया है, तो आपको उस उपदेश का सम्मान करना है और हर मिथ्या मार्ग से बैर रखना है (भजन 119:128)। धर्मी परमेश्वर ने आपपर तरस खाकर जो शिक्षा और चेतावनी दीं है उसके विरुद्ध पाप करने के दुस्साहस के लिए वह आपको जवाबदेह ठहराएगा (नीतिवचन 29:1; गिनती 15:30-31; लूका 12:47-48; याकूब 4:17)।
वह भयानक दिन जल्द ही आने वाला है, जिसके भय, शोक और आतंक का वर्णन नहीं किया जा सकता, क्योंकि तुम्हें परमेश्वर को अपने जीवन का लेखा देना होगा (सभो 12:14; रोमियों 14:10-11; 2 कुरिन्थ 5:10- 11; प्रकाशितवाक्य 20:11-15). माता-पिता या पास्टरों की शिक्षा पर ध्यान देने के लिए अब बहुत देर हो चुकी होगी। पुस्तकें खोली जाएंगी, आपके दुस्साहस में किए गएँ सब पाप उजागर किएँ जाएँगे, और अनन्तकाल का दण्ड सुनाया जाएगा।
उस दिन, आप कामना करेंगे कि काश आपके पास्टर ने अधिक समय तक उपदेश दिया होता, कि काश आपके माता-पिता ने और ज्यादा सख्ती दिखाई होती, काश आपके पास्टर ने अधिक कठिन उपदेश दिया होता, और काश कि आपके माता-पिता ने अधिक कठोर दंड दिया होता। आप कामना करेंगे कि काश आप वापस जा सकें और असली उद्देश्य से चर्च में जा सकें। आप कामना करेंगे कि काश आपने सुना होता। केवल एक पल में आपके दृष्टिकोण में यह परिवर्तन कितना अविश्वसनीय रूप से बड़ा होगा।
इस नीतिवचन में वर्णित और उस दिन की भयानक दुर्दशा से बचने का केवल एक ही मार्ग है: जो आपको सिखाया गया है उसका आज से ही पालन करें। यदि आप पाप के बारे में परमेश्वर के नियमों और माता-पिता तथा अपने पास्टर की चेतावनियों का प्रतिदिन पालन करते हैं, तो आप कभी भी इस नीतिवचन के निराशाजनक दुःख का अनुभव नहीं करेंगे। परन्तु यदि आप दुस्साहस में आकर अहंकारपूर्वक या विद्रोह करके अपनी अभिलाषाओं में लिप्त हो जाते हैं, तो आपका दुःख और शोक क्या ही भयानक होगा!
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