नीतिवचन 5:1

हे मेरे पुत्र, मेरी बुद्धि की बातों पर ध्यान दे, और मेरी समझ की ओर कान लगा;

पिताओं, क्या आप अपने बेटों को बुद्धि और समझ की बातें सिखाते हैं? क्या आप उन्हें जीवन के बड़े खतरों से अवगत कराते हैं – जिसमें वेश्यायें और अन्य विवाहित व्यभिचारी स्त्रियाँ भी शामिल हैं? बेटों, क्या तुम अपने पिता की शिक्षा और सलाह की ओर अपना कान लगाते हो? क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हारे जन्म से पहले वह एक पुरुष था और वह तुम्हारी करना चाहता है?

सुलैमान ने अपने पुत्र से कहा कि वह उसकी शिक्षा की ओर कान लगाए। बिना किसी डर या बिना किसी झूठी नम्रता के, उसने अपने बेटे से कहा कि उसके पास जो बुद्धि है और जो समझ वह उसके बेटे के पास नहीं है। और उसने अपने बेटे से कहा कि वह उसकी वात्सल्यपूर्ण सलाह पर ध्यान दे और खुद को नम्र बनाए – “मेरी समझ की ओर कान लगा”। हालाँकि सुलैमान एक राजा था, यह आज्ञा एक पुरुष और उसके बेटे के बीच का मसला था। हर पिता जो परमेश्वर से डरता है और बुद्धि से प्रेम रखता है, इस मिसाल की गम्भीरता को समझेगा। पिताओं, तुम भी ऐसा ही करो!

इस नीतिवचन का संदर्भ क्या है? जैसा कि शेष अध्याय से पता चलता है, संदर्भ यह है कि सुलैमान अपने बेटे को व्यभिचारी स्त्रियों के बारे में आगाह कर रहा है (नीतिवचन 5:1-23)। सुलैमान ने अपने बेटे को मनचली और बिगड़ी हुई औरतों के बारे में साफ़ साफ़ सच्चाई और उनके खतरे के बारे में बताया, और एक वफादार पत्नी के साथ यौन सम्बन्ध और पारिवारिक पहलुओं के मूल्य को समझाया। यहां पिता और पुत्र दोनों के लिए व्यभिचार के बहुत बड़े प्रलोभन का विरोध करने और यह सीखने के लिए व्यावहारिक बुद्धि है कि किस प्रकार महान पिता अपने पुत्रों को शिक्षा और निर्देश देते हैं। पिताओं, क्या तुम ऐसा ही करोंगे? बेटों, क्या तुम उनकी शिक्षा की ओर अपना कान लगाओंगे?

पिता-पुत्र के रिश्ते में डर की कोई जगह नहीं होती। पिता, अपने बेटे का सामना करने से न डरें, उसे उसकी गलतियाँ बताएं, उसे आने वाले खतरे से आगाह करें और उसे विपत्तियों से बचने के लिए कड़ी सलाह दें। आप दोनों के लिए आने वाली पीड़ा और शर्मिंदगी आपकी ग़रीबी या धन की कमी के कारण उत्पन्न किसी भी असुविधा से कहीं अधिक होगी। आप अपने बेटे से कहीं अधिक जानते हैं, चाहे वह कितना भी अहंकारी या ढीठ क्यों न हो। यदि वह आपके निर्देशों की अवहेलना करता है, तो आपको वही करना होगा जिसकी परमेश्वर आपसे अपेक्षा करता है। यहोवा परमेश्वर तुम्हें आशीर्वाद देगा, और जो भी सम्मति तुम अपने पुत्र को देते हो उसे बाद में वह याद करेगा। भरोसा रखो।

पिता-पुत्र के रिश्ते में झूठी विनम्रता के लिए कोई जगह नहीं है। आज एक घृणास्पद झूठी विनम्रता की अवधारणा आम है। उसका तिरस्कार करें! उसे मत मानों! आपका बेटा आपके बराबर नहीं है – वह आपकी तुलना में सिर्फ़ एक बच्चा है। अपनी श्रेष्ठ बुद्धि पर अफ़सोस न करें, न नरमी से पेश आयें। अपनी बुद्धिमत्ता पर अफ़सोस करना या समझौता करना विनम्रता नहीं है। परमेश्वर के आदेश की अवहेलना करना और अपने बेटे को शिक्षा देने की उपेक्षा करना नम्रता नहीं, घमण्ड है। इस भेद को समझो। अय्यूब का 32वां अध्याय पूरा पढों।

यदि आप अपने बेटे को परमेश्वर का भय मानने वाला जवान बनाने में सफल नहीं होते है, तो संभवतः आपने उसके प्रशिक्षण से समझौता कर लिया है। इसे समझना कितना आसान है। शिक्षा अपना प्रभाव दिखाती ही है (नीतिवचन 22:6,15; 29:15)। लेकिन आपको समय लेना होगा, एक नियमावली बनानी होगी, अपने बेटे के साथ रहना होगा और अपने दिल से उसके कानों तक बुद्धि और ज्ञान पहुंचाने के लिए अपना मुंह खोलना होगा। रात-रात भर गेम खेलने या वेब सिरीज़ देखने, या क्रिकेट खेलने या आज का घटिया संगीत सुनने से उन्नति नहीं होती (2 तीमु 3:6-7)। वास्तविक बने! सच्चाई क्या है, देखें! जवानी में आ चुके एक बेटे को जो प्रतिदिन इस विकृत पीढ़ी के बहकावे में आने की परीक्षा का सामना करता है, एक ऐसे सच्चे बाप की आवश्यकता होती है जो उसे वास्तविक रूप में वास्तविक चेतावनियां दे देकर प्रशिक्षित कर सके।

पिता, आप एक मर्द हैं। आप खूबसूरत औरतों के प्रति अपनी कमज़ोरी को जानते हैं। आप फसानेवाली चरित्रहीन औरतों के दर्द से वाकिब हैं। आप व्यभिचार और परस्त्रीगमन की पीड़ा को जानते हैं। आप खुद इन सब परीक्षाओं से गुज़र चूकें हैं, और आपने दूसरों की विफलताओं को देखा है। अपने बेटे को ये सब बताओ। उसे स्पष्ट भाषा में समझाओं। उसे उदहारण और चित्र दे देकर समझाओं। सुलैमान ने ऐसा ही किया। इससे कम कोई भी बात या समझौता करना मूर्खतापूर्ण विद्रोह है।

पुत्र, तुम सिर्फ़ एक लड़के हो। तुम्हारा पिता एक पुरुष है। उसकी सुनो। आपके जन्म से पहले वह मर्दाना परीक्षाओं से गुज़र चूका है। तुम्हारे जन्म से पहले ही उसने एक स्त्री से तुम्हें पैदा किया। तुम अगले 20 वर्षों में औरतों के बारे में जो जानोगे वह उनके बारे में उससे कहीं अधिक जानता है। उसे तुम्हारे भविष्य की फिक्र है, जिसे तुम अभी नहीं समझ सकते। ठहर जाओ। शान्त हो जाओ। उसकी बुद्धि की बातों पर ध्यान दो, और उसकी समझ की ओर कान लगाओ।

पाठक, स्वर्ग का परमेश्वर आपका पिता है क्योंकि उसने आपको बनाया, और अगर आप मसीह में उद्धार पाएं हुए हैं तब तो वह आपका आत्मिक पिता भी है जिसने आपको नया जन्म दिया। वह अनंतकाल से सम्बंधित विषयों की किसी भी बात को आप इस क्षणिक जीवन में जितना सीखेंगे उससे कहीं अधिक जानता है। उसकी बातों की ओर ध्यान दो। अपने आपको विनम्र बनाओ। अपने विचारों को छोड़ दो, उपदेश से प्रेम रखो, अपने पास्टर की शिक्षाओं पर विचार और चिंतन करो। उसके उपदेशों की समीक्षा करो। अपनी बाइबल पढ़ो, और यीशु मसीह में विश्वास के द्वारा उद्धार पाओ।

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