नीतिवचन 4:9

वह तेरे सिर पर शोभायमान भूषण बाँधेगी; और तुझे सुन्दर मुकुट देगी।

अपने जीवन और प्रतिष्ठा की कीर्ति किसी राजकुमार के समान ही बढ़ाएँ। और इसके लिए बुद्धि और समझ को अति आवश्यक जानो (नीतिवचन 4:7-8)। सुलैमान ने अपने बच्चों को वही नियम दिया जो उसके पिता ने उसे दिया था। दाऊद और बतशेबा दोनों ने उसे सिखाया कि वह सब बातों से बढ़कर बुद्धि प्राप्त करे और कभी उसका त्याग न करे (नीतिवचन 4:1-8)।

इसलिए जब परमेश्वर ने सुलैमान से कहा कि वह जो चाहे मांग सकता है, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि वह जानता था कि क्या माँगना है (1 राजा 3:5)। उसके माता-पिता ने उसे अच्छी शिक्षा दी थी। वह जानता था कि बुद्धि पृथ्वी पर सबसे महत्वपूर्ण वस्तु है। उसने दीर्घायु, धन, स्त्री, अपने शत्रुओं का नाश, या कोई अन्य व्यर्थ वस्तु नहीं मांगी। वह बुद्धि और समझ पाना चाहता था (1 राजा 3:6-10)।

सुलैमान की इस अतुलनीय विवेकपूर्ण प्राथमिकता के कारण, परमेश्वर ने उसे किसी भी अन्य व्यक्ति की तुलना में अधिक बुद्धिमान और समझदार मन दिया (1 राजा 3:11-12)। और यहोवा ने उसे धन, प्रतिष्ठा, और लम्बी आयु भी दी, जो उसे उसके बुद्धिमानीपूर्ण चुनाव के कारण अतिरिक्त प्रतिफल के रूप में दी गई (1 राजा 3:13-14)। सुलैमान सब प्रकार से स्थिर और एकाग्र मन का था। पर कैसे? बुद्धि को पहला स्थान देकर!

दाऊद बुद्धि के महत्व को जानता था। गोलियत को मारने और सार्वजनिक रीति से जनता में आने के पश्चात्, दाऊद की ख्याति उसके कार्यों में उसकी महान बुद्धि के कारण तेजी से बढ़ती चली गई (1 शमूएल 18:14-16)। मूर्ख और दुष्ट शाऊल की तुलना में, दाऊद कुलीनता और बुद्धि का प्रतिमान बन गया न था। राजा शाऊल दाऊद से ईर्ष्या करने लगा था, परन्तु इस्राएली उससे प्रेम करने लगे थे और उन्होंने उसे उन्नत किया (1 शमूएल 18:28-30)।

माता-पिता, क्या आप इस नीतिवचन को समझते हैं? सबसे महत्वपूर्ण बात जो आप अपने बच्चों को सिखा सकते हैं वह बुद्धि है, जो कि परमेश्वर के वचन पर आधारित सही निर्णय लेने की शक्ति है। इसका आरम्भ परमेश्वर का भय मानने से होता है (नीतिवचन 1:7; 9:10), और परमेश्वर के वचन के द्वारा ही उस पर विकसित होता जाता है (भजन 19:7-10)। यह परमेश्वर की तरह सोचना, बोलना और कार्य करना सीखना है, जो स्पष्ट रूप से पवित्रशास्त्र में प्रकट है। दाऊद, एक ऐसा मनुष्य जो परमेश्वर के मन के अनुसार था, जानता था कि कैसे सोचना है, कैसे बोलना है और किस प्रकार बुद्धिमानी से कार्य करना है।

यदि आप अपने बच्चों की स्कुल और कॉलेज की शिक्षा पर ही अधिक ज़ोर देते हैं, तो आप इस नीतिवचन को समझने से चूक गए हैं। यदि आप उनकी एथलेटिक उपलब्धियों का गुणगान करते हैं, तो आप इस नीतिवचन को समझने से चूक गए हैं। यदि आप उनकी आर्थिक या व्यावसायिक सफलताओं की प्रशंसा करते हैं, तो आप इस नीतिवचन को समझने से चूक गए हैं। एक बुद्धिमान और समझदार मन परमेश्वर के साथ चलने, पवित्रशास्त्र से सीखने और उस शिक्षा को जीवन की परिस्थितियों में लागू करने से आता है। यह बाइबल पर मनन करने, उसकी आज्ञा मानने और उसे सख्ती से लागू करने से आता है (भजन 1:1-3; 119:98-100; इब्रा 5:14)।

क्या होगा यदि आपका बच्चा पीएचडी प्राप्त करता है, क्रिकेटर बनकर भारतीय टीम में खेलता है, और अपनी कमाई को सफल उद्दोग में लगाता है जो उसे अरबपति बना देगा? क्या उसने सफलता प्राप्त की है? क्या आपने उसकी मदद की है? नहीं! नहीं! क्योंकि इनमें से कोई भी बात जीवन के महत्वपूर्ण मामलों में उसकी मदद नहीं करेगी, और न ही उनसे वह परमेश्वर और धर्मिजनों की दृष्टी में अनुग्रह पाएगा (नीतिवचन 22:1; लूका 2:52)।

पाठक, आपके बारे में क्या? क्या आप बुद्धि और समझ के महत्व को समझते हैं? उनके बिना, आपका जीवन बेकार होगा और आप अकेले मरेंगे। अनुग्रह और महिमा उनकी बाट जोहते हैं जो यत्न से बुद्धि की खोज करेंगे (नीतिवचन 1:9; 3:22; 16:16; 18:1)। आपने इस नीतिवचन को कैसे पढ़ा? बोझिल मन से? केवल लहर में आकर? या बुद्धि को पाने के लालसापूर्ण उत्साह के साथ? आज आपने कितने मिनट परमेश्वर की बुद्धि का पीछा करने में बिताए हैं?

आप स्वर्ग के क़ानून को धोखा नहीं दे सकते। यदि आप किसी अन्य माध्यम से संतुष्टि या सफलता प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप के हाथ केवल निराशा ही आएगी, और आपका पूरा जीवन व्यर्थ और कष्टप्रद निष्फलता का एक दर्दनाक प्रयोग सिद्ध होगा। परमेश्वर के सुरक्षित रखे गए धर्मशास्त्र में बुद्धि और समझ की खोज करें और एक संतुष्ट और सफल जीवन जिएं। यदि आप नहीं जानते कि इसकी शुरुवात कैसे और कहाँ से करनी है, तो बुद्धि के लिए प्रार्थना करें और परमेश्वर आपकी प्रार्थना का उदारतापूर्वक उत्तर देगा (याकूब 1:5)।

हॉवर्ड ह्यूज के पास बहुत पैसा था। लेकिन उनके जीवन का अन्त एक विक्षिप्त वैरागी और बेकार मूर्ख के रूप में हुआ। राजकुमारी डायना लोकप्रियता के शिखर पर थी। लेकिन उनका जीवन अकेलेपन, दर्द और उथल-पुथल से भरा था। टाइ कॉब को खेल जगत में बहुत सफलता मिली, बहुत सारी। लेकिन उसने अपना जीवन नफरत करने और दूसरों की नफरत पाने में ही बिताया। इन लोगों के जीवन सबसे पहले बुद्धि की खोज न करने के भयावह परिणामों का उदाहरण रखते हैं।

जॉन एफ कैनेडी, जूनियर के पास बहुत से अवसर थें और ताकत थी, लेकिन मूर्खता ने उसे मिटा दिया। मर्लिन मुनरो एक सितारा थीं, लेकिन उसकी ज्योति गुमनामी के अंधेरे में बुझ गई। एल्विस प्रेस्ली को अन्यजातियों द्वारा पूजा जाता था, लेकिन वह जीवन के ऊँचे शिखर पर पहुंचकर एकदर्दनाक मौत मर गया। इन सब लोगों ने अपने ही विनाश के लिए पाप का पीछा किया। उन्होंने बुद्धि को ठुकरा दिया, और जीवन ने उन्हें विष के समान थूंक दिया।

दाऊद आठ पुत्रों में सबसे छोटा था और वह एक चरवाहा था, और जब शमूएल यिशै के पुत्रों में से किसी एक का राजा बनने के लिए अभिषेक करने आया तो उसके अपने परिवार ने उसकी उपेक्षा की (1 शमूएल 16:1-11)। परन्तु परमेश्वर ने उसके मन के भीतरी कामों को देखा और उसे उसके सब भाइयों, शाऊल के घराने, और इस्राएल के सब लोगों के ऊपर उन्नत किया। दाऊद ने बुद्धि को ऊँचा किया, और बुद्धि ने भी उसे ऊँचा किया। इस्राएल (1 शमूएल 18:16), पलिश्ती (1 शमूएल 29:9; 2 शमूएल 15:18-22), और प्रसिद्ध राजा (1 राजा 5:1) उससे से प्रेम करते थें।

दाऊद के पास सही सोच रखने, सही बोलने और सही काम करने से कहीं आगे की बुद्धि थी। उसके पास इस जीवन से परे और अगले जीवन में देखने की बुद्धि थी। उसने यीशु मसीह में परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को देखा और उन पर विश्वास किया, और वह इसी बुद्धि की मिठास से भरी सुखद सांत्वना में मरा (2 शमूएल 23:1-5)। सबसे बड़ी मूर्खता का अंतिम पैमाना है आनेवाले नए जगत की परवाह किए बिना इसी जगत की बातों को ऊँचा उठाना, और उनका पीछा करना। दाऊद ने अपने पुत्र और अपने प्रभु, अर्थात यीशु मसीह को जीवन और मृत्यु दोनों के लिए वास्तविक उद्देश्य के रूप में देखा (भजन संहिता 110:1)।

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