नीतिवचन 4:4
और मेरा पिता भी मुझे यह कहकर सिखाता था, “तेरा मन मेरे वचन पर लगा रहे; तू मेरी आज्ञाओं का पालन कर, तब जीवित रहेगा।
यहाँ एक पिता की ओर से सबसे बड़ा उपहार है – बुद्धि और सत्य! आपके घराने में एक पीढ़ी अगली पीढ़ी को क्या दे रही है? सुलैमान ने स्वीकार किया कि उसका पिता दाऊद उसे सिखाता था। इसलिए वह भी पिता से पुत्र को प्राप्त होनेवाले ज्ञान की उस धरोहर के हस्तांतरण को जारी रखने के लिए अपने बच्चों को सिखाता था। उसने इस बात पर ज़ोर दिया कि एक सफल जीवन के लिए उसके बेटे को भी इस ज्ञान को प्राप्त करना होगा और उसकी रक्षा करनी होगी।
इस नीतिवचन के शुरुआती शब्दों पर ध्यान दें: “मेरा पिता भी मुझे यह कहकर सिखाता था।” सुलैमान दाऊद का प्रिय पुत्र था, इसलिए दाऊद उसे जो जो शिक्षा दिया करता था वह एक प्रिय पुत्र के लिए उसके प्रेमपूर्ण हृदय से आती थी जो उसका कल्याण ही चाहता था (नीतिवचन 4:1-4)। एक पिता के रूप में अपनी भूमिका को ईमानदारी से निभाते हुए, राजा सुलैमान ने अपने बच्चों से अनुरोध किया कि वे भी उसकी शिक्षा को ठीक उसी प्रकार सुनें जैसे वह अपने पिता से सुनता था।
पृथ्वी पर सत्य कैसे कायम रहता है? माता-पिता बच्चों को सबसे बड़ा उपहार क्या दे सकते हैं? माता-पिता द्वारा अपने बच्चों को दी जाने वाली सबसे बड़ी विरासत बुद्धि और सत्य है, और इसी तरह दोनों को दुनिया में कायम रखा जाता है। पवित्रशास्त्र के दो अनुच्छेद बड़ी सावधानीपूर्वक प्रत्येक व्यक्ति के सामने इसी लक्ष्य को रखते हैं कि उन्हें यह चार पीढ़ियों तक करना है (भजन 78:1-8; योएल 1:1-3)। इसलिए, धर्मनिष्ठ ख्रिश्चन परिवारों को सावधान रहना आवश्यक है कि वे कभी भी उन्हीं ग़ैर-ज़िम्मेदारियों को न दोहराएं जो इस्राएलियों ने की थीं, और उन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि करते बढ़ते जाना है।
पिताओं को अपने बच्चों के लिए शिक्षक बनना है। यह कोई मरजी या सुझाव नहीं है। पुराना और नया, दोनों ही नियमों में पिता एक नियुक्त शिक्षक है (व्यवस्था 4:9; 6:4-7; इफिसियों 6:4)। यदि कोई बच्चा निर्बुद्धि बना रहता है और अपने माता-पिता को लज्जित करता है, तो इसका कारण सिर्फ़ यह है कि पिता ने अपना काम नहीं किया (नीतिवचन 22:6; 29:15)। बड़ी शर्म की बात है कि आज टेलीविजन, स्कूल-कॉलेज और वर्तमान कुटिल पीढ़ी का दबाव सबसे अधिक शिक्षकों का कार्य कर रहें हैं। स्कूल-कॉलेज जानेवाले अपने बच्चों की विचारधारा का परिक्षण करें, और मैं जो कह रहा हूँ वह साबित हो जाएगा।
सुलैमान जैसे बेटे इत्तेफाक नहीं हैं। दाऊद और बतशेबा सुलैमान को सिखाया करते थें। जबकि राजा बनने के बाद परमेश्वर ने सुलैमान को बहुत बुद्धि दी, वह दाऊद ही था जिसने उसे युवावस्था से ही एक मज़बूत बुनियाद दी थी। बेशक, दाऊद ने अपने अन्य पुत्रों, अदोनियाह, अबशालोम और अम्नोन की उपेक्षा के गंभीर परिणाम देखे थे (1 राजा 1:6)। दाऊद ने लिखा कि कैसे वह अपने लड़कों को अपने पास बुलाता था ताकि वह उन्हें यहोवा का भय मानना सिखा सके (भजन 34:11)।
जैसा कि यह नीतिवचन सूचित करता है, दाऊद ने सुलैमान को तीन बातें सिखायीं। सबसे पहली, जो मैं जो तुझे सिखाता हूं उसे याद रख। मैं जो कहता हूँ उसे सिर्फ़ सुन मत। बल्कि मैं जो कहता हूं उसे सुन और उसका अर्थ भी समझ, उसकी सत्यता के विषय में अपने दिल और दिमाग में सहमत हो, उस पर चिंतन कर, खरें सिद्धांतों की समीक्षा कर, और परिस्थिति के अनुसार उन सिद्धांतों का व्यवहारिक उपयोग कर। पहली बार में ही सुनते वक़्त सावधानीपूर्वक समझ और जो समझा उस पर नियमित चिन्तन करते हुए सबक को याद रख।
दूसरी, तू मेरी आज्ञाओं का पालन कर। पिता की सलाह को सुनना और उसे याद रखना ही काफी नहीं है, आपको इसे मानना आवश्यक है – आपको उसके अनुसार करना भी आवश्यक है। जब परमेश्वर के वचन की बात आती है, तो यह वचन को सुनने वाले नहीं, बल्कि वचन पर चलने वाले ही हैं जो धन्य कहलाते हैं (याकूब 1:21-25)। माता-पिता के नियम केवल तब ही लाभदायक होते हैं, जिस जब उनका पालन किया जाता है। बेटों को आज्ञापालन करना सिखाया जाना ज़रूरी, और उनकी आज्ञाकारिता को शर्त का रूप देना ज़रूरी है।
तीसरा, इस शिक्षा और आज्ञा का लक्ष्य और अन्तिम उद्देश्य आपका सफल जीवन है। आप यहां छोटी-मोटी चीज़ों के बारे में नहीं पढ़ रहे हैं – ये बातें जीवन, अपने जीवन से सम्बंधित हैं! इन नियमों का पालन करें और जीवित रहें। सफ़ल बने! धार्मिकता से जीएं! भरपूरी का जीवन जीएं जीवित रहें! परमेश्वर और मनुष्यों की कृपा में बढ़ें। यही अच्छा जीवन है। यही धन्य जीवन है। यही संरक्षित जीवन है। यही समृद्ध जीवन है।
इस नीतिवचन में तीन पुरुष और तीन पीढ़ियाँ हैं – दाऊद, सुलैमान, और रहूबियाम और उसके भाई-बहन। मूल में जिन्हें यह वचन संबोधित किया गया उस प्रत्येक पाठक के, विशेष रूप से जो पुरुष थें, पिता और दादा थे, और उनमें से ज्यादातर के बच्चें और पोते-पोतियां भी रहें होंगे। इस लिहाज़ से यहाँ पांच पीढ़ियों को आसानी से देखा जा सकता है। क्या आप इस महत्वपूर्ण विशेषाधिकार के प्रति सचेत हैं और उसे मानते हैं और अपने परिवार के वंश में सत्य और ज्ञान को हस्तांतरित करने में अपनी भूमिका निभाने के लिए शपथ-बद्ध हैं? यदि हाँ, तो परमेश्वर आपको इस कर्तव्य और भूमिका में फलवन्त बनाएगा।
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