नीतिवचन 4:27

न तो दाहिनी ओर मुड़ना, और न बाईं ओर; अपने पाँव को बुराई के मार्ग पर चलने से हटा ले।

दिशाहीन बनकर ज़िन्दगी में यूँही भटकते मत रहिएँ। एक बार जब आप जान जाते हैं कि आपको कहाँ जाना है, तो उस दिशा से न हटें। हर गलत या ध्यान भटकानेवाले काम से दूर रहें। अपने जीवन के हर क्षेत्र में परमेश्वर को प्रसन्न करने पर अपनी आँखें टिकाएँ रखें, और किसी भी चीज़ से विचलित न हों। सुलैमान ने अपने बेटे को आग्रहपूर्ण बताया कि परमेश्वर और मनुष्यों के सामने एक समृद्ध और सफल जीवन कैसे जिया जाता है (नीतिवचन 4:20-27)।

बुद्धि का मार्ग –धार्मिकता का मार्ग है – पवित्रता का राजमार्ग है – शुद्धता का मार्ग – बिलकुल सीधा जाता है (नीतिवचन 4:25-27)। इस नीतिवचन की चेतावनी बिलकुल स्पष्ट है! मार्ग से भटककर पाप के दलदल में न जाएँ। और उपाय स्पष्ट है! यदि आप पहले ही दलदल में जा चुके हैं, तो अपने पैर को गंदगी से बाहर निकालें और वापस सीधे मार्ग पर आ जाएँ।

धन्य परमेश्वर ने एक मार्ग निर्धारित किया है जिसपर प्रत्येक पवित्रजन को चलना है। इसे बाइबल में चमकतें चिह्नों और चेतावनी संकेतों के साथ स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है (भजन 119:105)। और उसने यह सुनिश्चित करने के लिए कि कही आप रोडमैप को गलत न पढ़ लें, शिक्षकों को भेजा। वह यह कहकर प्रतिज्ञा करता है कि वे इस मार्ग पर आपका मार्गदर्शन करेगा, “जब कभी तुम दाहिनी या बाईं ओर मुड़ने लगो, तब तुम्हारे पीछे से यह वचन तुम्हारे कानों में पड़ेगा, “मार्ग यही है, इसी पर चलो” (यशायाह 30:21)।

सुलैमान ने अपने बेटे को सिखाया कि वह अपनी आँखें सामने ही की ओर लगाए रखें। उसने उससे कहा, “तेरी आँखें सामने ही की ओर लगी रहें और तेरी पलकें आगे की ओर खुली रहें।” (नीतिवचन 4:25)। दुनिया आपके सामने नाना प्रकार के प्रलोभन रखती है ताकि आप इस राजमार्ग को छोड़कर वासना और पाप के दलदल में उतर जाएं। ये परिक्षाएं और पुकार बहुत ही भ्रामक और आकर्षक होती हैं। आप को तो उनकी ओर देखना तक नहीं है।

उसने अपने बेटे से यह भी कहा कि वह ध्यान से सोचे कि वह किस ओर जा रहा है, और केवल वहीं जाएं जहाँ जाने के लिए उसके पास ठोस कारण हों। उसने उससे कहा, “अपने पाँव रखने के लिये मार्ग को समथर कर, और तेरे सब मार्ग ठीक रहें” (नीतिवचन 4:26)। प्रत्येक ख्रिश्चन व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह अपने हर काम को परमेश्वर के वचन से प्रमाणित करे और किसी भी विपरीत को राय अपनाने या उस पर अमल करने से खुद को रोकें (यशायाह 8:20; 1 थिस्सलुनीकियों 5:21)।

अधिकांश लोग ऐसे मार्ग को पसंद नहीं करते जो उसने जीवन को प्रतिबंधात्मक बना दें (मत्ती 7:13)। वे अपनी मर्जी से काम करना चाहते हैं; वे काम को अपने तरीके से करना चाहते हैं। वे पाप के सुखों का स्वाद लेना चाहते हैं। दलदल के विज्ञापन बहुत आकर्षक होते हैं! मूसा जैसे बहुत कम लोग हैं, जिन्होंने परमेश्वर के लोगों के साथ स्वर्ग के मार्ग पर बने रहने के लिए संसार के बड़े बड़े लाभों को ठुकरा दिया (इब्रानियों 11:24-26)।

अधिकांश लोग खरी धर्म-शिक्षा और प्राचीन मार्ग की शिक्षा देनेवाले प्रचारकों से नाराज़ हो जाते हैं जो उन्हें बताते हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए (2 तीमुथियुस 4:3-4)। वे ऐसे प्रचारक चाहते हैं जो उनका मनोरंजन करें, जो अच्छी और दिलचस्प कहानियां सुनाकर उनके कानों को गुदगुदाएँ। वे सकेत और कठिन मार्ग से थक चुके हैं (मत्ती 7:14), इसलिए वे ऐसे शिक्षक ढूँढ़ते हैं जो उन्हें सांसारिक ईसाई धर्म के दलदल में ले जाएँ (यशायाह 30:8-11)। आज ऐसे बहुत से लोग हैं और उन्हें ढूँढ़ना आसान है। असली प्रचारकों को कड़ी खोज की आवश्यकता होती है, लेकिन उन्हें ढूंढने का प्रतिफल बड़ा है। उनके सुंदर पैर और खजाना आपकी मदद करेंगे (रोमियों 10:15; 2 कोर 4:1-7)।

परमेश्वर यहोवा ने वचन दिया – यह परम और अंतिम है। उसे बिगाड़नेवालों का कठोर न्याय किया जाता है। कैन से पूछिए, जिसने सोचा था कि परमेश्वर उसकी शुद्ध भेंट को पसंद करेगा (उत्पत्ति 4:1-5)। नादाब और अबीहू से पूछिए, जिन्होंने परमेश्वर की आराधना को उनके समय की आराधना-शैली में बदलने की कोशिश की (लैव्यव्यवस्था 10:1-2)। मूसा से पूछिए, जिसने सोचा कि चट्टान पर प्रहार करना काफी होगा (गिनती 20:7-13)। शाऊल से पूछिए, जिसने परमेश्वर की आराधना में नयी सोच लाकर लोगों को प्रसन्न किया (1 शमूएल 15:22-26)। एक नई बैलगाड़ी पर सन्दूक ले जाने के बारे में दाऊद से पूछिए (2 शमूएल 6:1-9; 1 इतिहास 15:13-15)। उज्जियाह से पूछिए, जिसने सोचा कि उसके पास सेवकाई का अधिकार था (2 इतिहास 26:16-21)।

परमेश्वर ने आपके जीवन के अधिकांश पहलुओं के लिए पहले ही सब नियम दे दिए हैं। किसी और दिशा में देखने या मुड़ने के बारे में सोचना भी मत। उस पर और उसके वचन पर भरोसा रखें! अपने विचारों को अस्वीकार करें (नीतिवचन 3:5-6)। सभी विषयों को लेकर उसने जो जो आज्ञाएँ दीं हैं उन से प्रेम करें, और किसी अन्य राय से घृणा करें (भजन 119:128)। उसकी आज्ञाओं में दुनिया की धार्मिक प्रथाओं से कुछ जोड़ने के बारे में भी न सोचें (व्यवस्थाविवरण 12:29-32)। याद रखें कि वह इस दुनिया और उससे मित्रता रखने वालों को अपना दुश्मन मानता है (याकूब 4:4)।

यदि आप मूर्खता में आकर पहले से ही दुनिया के पीछे जाने के लिए भटक गए हैं और पाप के दलदल में जा धँस चुके हैं, चाहे निजी आदतों या वासनाओं या सार्वजनिक आराधना में, तो केवल एक ही उपाय है। आप अब मृतकों की मण्डली में हैं, और आपको खुद को बचाना होगा (नीतिवचन 21:16)। पश्चाताप करें! अपने पाप से बाहर निकलें और आज और इसी वक़्त धार्मिकता के मार्ग पर लौट आएँ। पश्चाताप करें! अपनी पापी आदतों को त्याग दें। पश्चाताप करें! अपने समझौता करने वाले चर्च को छोड़ दें। पश्चाताप करें! बुराई से अपना पैर हटाएँ।

परमेश्वर ने वचन दिया – यह पूर्ण और अंतिम है। भिन्नताओं का कठोर न्याय किया जाता है। लेकिन पश्चाताप आपको बचा सकता है। दाऊद से पूछो, जिसे व्यभिचार और हत्या के लिए क्षमा किया गया था (2 शमूएल 12:13)। मनश्शे से पूछो, जिसे सबसे जघन्य पापों के लिए क्षमा किया गया था (2 इतिहास 33:12-13)। निनवे से पूछो, जिसने अपने शहर को पूर्ण विनाश से बचाया था (योना 3:10)। कुरिन्थ के चर्च से पूछो, जिसने ईश्वर-प्रेरित पश्चाताप के द्वारा अपने जीवन और चर्च को बचाया था (2 कुरिन्थियों 7:9-11)।

बुद्धि का मार्ग – धार्मिकता का मार्ग – सीधा है। ज़रा भी मत मुड़ो। परमेश्वर की आज्ञाओं में ज़रा भी बदलाव मत करो। एक पल के लिए भी मत सोचो कि यह नई सहस्राब्दी बाइबल को लेकर नए नज़रिए को उचित ठहराती है। सिद्धांत और व्यवहार में नवाचारों पर अधिक सहिष्णुता के लिए सभी तरफ़ से हो रहे शोर को मत सुनो। न तो दाहिनी ओर मुड़ना, और न बाईं ओर!

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