नीतिवचन 4:26

अपने पांव के पथ को तौल, सो तेरे सारे मार्ग ठीक किये जायेंगे।

बुद्धिमान लोगों का जीवन ऐसे ही क़ामयाब नहीं होता। वे हर काम को सावधानीपूर्वक सोच-विचार और गंभीर चिंतन के बाद करते हैं। वे अपने जीवन के लिए योजना बनाते हैं और योजना के अनुसार ही सब चीजों को करते हैं। वे अपना लक्ष्य बुद्धिमानी से तय करते हैं और फिर उन्हें प्राप्त करने के तौर-तरीके ठहराते हैं, और अपनी प्रगति को उन्हीं लक्ष्यों से मापते हैं। परमेश्वर के दुर्लभ कृत्यों के अलावा, जिन्हें वे टाल नहीं सकते, वे उनकी प्राप्ति के लिए अपनी परिस्थितियों को नियंत्रित और निर्देशित करते हैं, न कि परिस्थितियां उनपर हावी होती हैं।

बुद्धिमान लोग एक लक्ष्य से दूसरे लक्ष्य की ओर उछलने या एक दिशा से दूसरी दिशा में भटकने के बजाय, अपने जीवन को एक स्थिर दिशा में कायम रखते हैं। वे अपने जीवन के सभी पहलुओं को अपने चुने हुए लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए अनुशासित करते हैं। वे जीवन के हर पहलू पर बारीकी से विचार करते हैं। वे अपने समग्र उद्देश्य को अपने सामने रखने और उसमें लगातार प्रगति करने के लिए अपने द्वारा किए गए हर फैसले पर सवाल उठाते हैं, उसका मूल्यांकन करते हैं, उसे तौलते हैं, और उस पर विचार करते हैं।

पाठक, आप कहाँ जा रहे हैं? अपने पैरों के पथ पर विचार करें। क्या आप की सिर्फ़ उम्र बढ़ती जा रही है और केवल बूढ़े होते जा रहे हैं? क्या आपका जीवन बिना किसी मक़सद या लक्ष्य के बस यूँही चल रहा है? आपकी दैनिक एवं साप्ताहिक दिनचर्या का कोई ठोस उद्देश्य एवं नेक उद्देश्य होना चाहिए। या क्या आप सिर्फ हवा में मुक्के मार रहे हैं – अव्यवस्थित स्थिति में हैं – बिना किसी उन्नति के? ज़रा ठहरें। अपने पांव के पथ को तौलें। आत्म-परीक्षण करें (2 कुरिन्थ 13:5)। अपने चाल-चलन पर ध्यान दें (हाग्गै 1:5)। अपने बिछौने पर मन ही मन सोचें (भजन 4:4)।

तौलने का क्या मतलब है? इसका अर्थ है किसी बात पर मानसिक रूप से सोचना, उस पर ध्यान से विचार करना, उस पर चिंतन करना, और उस पर मनन करना। ज्यादातर लोग बहुत अधिक शोर और दिशाहीन गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि रुककर अपने जीवन के बारे में गंभीरता से नहीं सोच पाते हैं। सोचने के बजाय, वे यहाँ-वहाँ अपना मन बहलाने को देखते हैं – अर्थात् ऐसे प्रकार की गतिविधियाँ जहाँ उन्हें सोचने-समझने का कोई मौका ही नहीं मिलता। वे अपना आत्म-परीक्षण करने और जीवन को जाँचने के बजाय मनोरंजन के पीछे अधिक भागते हैं। सोचने के बजाय, वे अपनी आंतरिक बातचीत को टेलीविजन, फिल्मों, संगीत, शराब पीने या मादक पदार्थों के नशे में डुबो देते हैं। क्या मूर्खता है!

अपने जीवन पर विचार करने के लिए एकान्त में समय बिताने के बजाय, वे उनकी कारों में रेडियो, घरों में टेलीविजन और जेब में सेल फोन पर संगीत बजाते फिरते हैं। “उनका पूरा विचार यही है कि कोई परमेश्वर है ही नहीं” (भजन 10:4)। वे नहीं जानते कि वे कहाँ जा रहे हैं, वे एक विशिष्ठ दिशा में क्यों जा रहे हैं, या इसके परिणाम क्या होंगे। वे परिस्थितियों के प्रबंधक होने के बजाय परिस्थितियों के शिकार हैं। वे मूर्ख हैं और जैसे गुरुत्वाकर्षण के कारण चीज़ें नीचे गिरती हैं, उन्हें उसी प्रकार दण्ड दिया जाएगा।

परन्तु बुद्धि पुकारकर कहती है, ““चुप हो जाओ, और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ” (भजन 46:10)। “काँपते रहो और पाप मत करो; अपने अपने बिछौने पर मन ही मन सोचो और चुपचाप रहो (सेला)” (भजन 4:4)। “मैं रात के समय अपने गीत को स्मरण करता; और मन में ध्यान करता हूँ, और मन में भली भाँति विचार करता हूँ” (भजन 77:6)। “परन्तु यहोवा अपने पवित्र मन्दिर में है; समस्त पृथ्वी उसके सामने शान्त रहे” (हबक्कूक 2:20)। ये सब काम बुद्धिमान और पवित्र पुरुषों के काम हैं जो उन्हें उत्पादक और सफ़ल बनाते हैं।

यह मूर्ख है जो अपना जीवन बिना सोचे-समझे जीता है, बिना सोचे-समझे काम करता है और बिना सोचे-समझे अपना रास्ता चुनता है। ख्रिश्चन विश्वासियों को आज्ञा दी गई है कि वे अपने चाल-चलन पर ध्यान दें – सभी कोणों से अपने पथ की जाँच करना। केवल इस अनुशासन के द्वारा ही वे परमेश्वर की इच्छा को समझ सकते हैं और अपने जीवन में उस इच्छा को लागू कर सकते हैं (इफि 5:15-17)। यह आपका कर्तव्य है कि आप अपने पैरों के लिये सीधा मार्ग बनायें (इब्रानियों 12:13)।

एक और लापरवाही है जो लोगों को अपने जीवन के बारे में सोचने से रोकती है – वे दूसरों के बारे में ज्यादा सोचते हैं। यह दुष्ट, स्वधर्मी पाखंडी है जो अपने जीवन पर ध्यान देने के बजाय दूसरों के जीवन के बारे में सोचता है। वह दूसरों के अधिक से अधिक पापों को पहचानने का प्रयास करके अपने पापों में स्वयं को तसल्ली देता है (लूका 18:9-14)। यीशु ने ऐसे व्यक्ति की भर्त्सना कीं जो अपनी आँख के लठ्ठे को निकालने के बजाए दूसरे व्यक्ति की आँख में के तिनके के बारे में ज्यादा सोचता है। यह मानसिकता आत्मनिरीक्षण के ठीक विपरीत है और ऐसी सोचवाले व्यक्ति को सदाचारी तथा बुद्धिमान के विपरीत सिद्ध करती है- उसे मूर्ख सिद्ध करती है।

आपको क्या तौलना ज़रूरी है? क्या आप परमेश्वर के साथ चल रहे हैं और यीशु मसीह के अनुग्रह और ज्ञान में बढ़ रहे हैं? क्या आप बहुत पर्याप्त आत्मा के फल उत्पन्न कर रहे हैं? क्या आप दूसरी आज्ञा का पालन करने के लिए दूसरों को क्षमा कर रहे हैं, अपने पड़ोसी प्रेम कर रहे हैं और उनकी सेवा कर रहे हैं? क्या आपका वैवाहिक जीवन ठीक वैसा ही है जैसा कि होना चाहिए? क्या आप अपने जीवन में ऐसे काम कर रहे हैं जिनसे आप परीक्षा में पड़ जाते हैं और जो पाप की ओर ले जाते हैं? क्या आप परमेश्वर के राज्य के लिए एकचित्त हैं? क्या आप अनंत काल को ध्यान में रखकर अपना जीवन जीते हैं? यदि आप आज मर जाते, तो क्या यीशु मसीह आपको धार्मिकता के मार्ग पर ले जाते?

क्या आपका जीवन यीशु मसीह को प्रसन्न करने के पवित्र उद्देश्य की ओर अग्रसर है? रविवार को आप जिस पथ पर चलते हैं क्या वह पथ आपको एक विश्वासयोग्य चर्च की ओर ले जाता है जहां हर एक धर्म-सिद्धांत और अभ्यास शास्त्रों से मेल खाते हैं? क्या आपकी प्राथमिकताएँ उन सूचियों के अनुरूप हैं जिनका जिक्र सुलैमान इस पुस्तक में करता है? क्या आप बाइबल को नियमित रूप से निजी तौर पर पढ़ते हैं, वचन पर ध्यान करते हैं, प्रार्थना करते हैं और भजन तथा आत्मिक गीत गाते हैं? अपने पांव के पथ को तौलें।

पिताओं, क्या आपने सोचा है कि आपकी पत्नी और बच्चे किस रास्ते पर चल रहे हैं? परमेश्वर के समक्ष यह आपका कर्तव्य है कि आप उन्हें सुधारें, उनका नेतृत्व करें और उन्हें प्रभु के भय के सही मार्ग पर चलाएं (भजन 34:11)। आपके कर्तव्य और प्रेम का असली माप उन्हें प्रभु यीशु मसीह से मिलने के लिए तैयार करना और उन्हें सिद्ध करना है। क्या आप उन्हें धार्मिकता के मार्ग पर चलने में मदद कर रहे हैं?

कौन-सी बात आपको अपने पैरों के पथ तौलने से रोक रही है? वह बात चाहे जो कुछ भी हो, वह इतनी मूल्यवान नहीं है कि आप समझ के रास्ते से भटक जाएं और मृतकों की मंडली के साथ नाश हो जाएं (नीतिवचन 21:16)। “ऐसा मार्ग है, जो मनुष्य को ठीक जान पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है” (नीतिवचन 14:12; 16:25)। और पाठक, यदि आप अपने पथ को नहीं तौलते हैं, तो परमेश्वर उन्हें तौल रहा है, विशेष रूप से आपके यौनाचार के पथ को, जिनके बारे में आप सोचते हैं कि वे सबसे बखूबी छिपे हुए हैं (नीतिवचन 5:21)। अपने अपने पैरों के पथ तौलने के इस पवित्र कर्तव्य की उपेक्षा न करें या न तौलने की भूल न करें।

बाइबल का परमेश्वर यहोवा तुम्हें वैसे ही बुलाता है जैसे उसने अब्राहम को बुलाया था। “जब अब्राम निन्यानवे वर्ष का हो गया, तब यहोवा ने उसको दर्शन देकर कहा, “मैं सर्वशक्तिमान् ईश्वर हूँ; मेरी उपस्थिति में चल और सिद्ध होता जा” (उत्पत्ति 17:1)। क्या आप इस बुलाहट को सुनकर उसके पीछे हो लेंगे?

यदि आप उसकी बुलाहट को सुनकर उसके पीछे हो लेंगे, तो प्रभु आपके लिए दृश्य और अदृश्य शिक्षक भेजेगा। “जब कभी तुम दाहिनी या बाईं ओर मुड़ने लगो, तब तुम्हारे पीछे से यह वचन तुम्हारे कानों में पड़ेगा, “मार्ग यही है, इसी पर चलो” (यशायाह 30:21)। क्या आप अपने शिक्षकों की आज्ञा का पालन करते हैं?

भजनकार ने कहा, ”मैं ने अपनी चालचलन को सोचा, और तेरी चितौनियों का मार्ग लिया” (भजन 119:59)। पाठक, क्या आप अपने जीवन के पथ को तौलने के इस निरंतर कर्तव्य में भजनकार के साथ शामिल होंगे?” हम अपने चालचलन को ध्यान से परखें, और यहोवा की ओर फिरें” (विलाप 3:40)। इसे प्रार्थना में अपने दैनिक अभ्यास का हिस्सा बनाएं (भजन 139:23-24)।

आपका शरीर, यह संसार और शैतान हर दिन आपके रास्ते में जाल बिछाएंगे। आज भी आपका कईयों से सामना होगा। वे आपके विचारों में, आपकी वाणी में, आपके रिश्तों में, आपकी नौकरी में और हर जगह आपको लुभाने और फंसाने की कोशिश करेंगे। यह आपका कर्तव्य है कि आप अपने पथ पर सावधानी से विचार करें और उन जालों से बचें। यह आपका कर्तव्य है कि आप हर लुभावनी और खतरों से भरी स्थिति से तुरंत दूर भाग जाएं (नीतिवचन 4:14-15; रोमियों 13:14; 2 तीमु 2:22)।

जब आप अपने पांव के पथ को तौल लेते हैं, तो उसके बाद आपका कर्तव्य यह है कि आप प्रभु का भय मानते हुए अपने सभी मार्गों को ठीक करें और उनकी रक्षा करें। आप अपने जीवन में प्रभु का भय मानते हैं या नहीं इसे आप कैसे पहचानते हैं? पवित्र शास्त्र के अनुसार! बाइबल आपके पांवों के लिये दीपक और आपके मार्ग के लिये उजियाला हैं (भजन 119:105)। आपके घर की नींव मसीह के वचनों की पक्की चट्टान पर होनी चाहिए (मत्ती 7:24-27; 2 पतरस 1:19-21)। अपने सब मार्गों को प्रभु में स्थापित करें – ठीक करें और स्थायी रूप से सुव्यवस्थित करें। और परमेश्वर की कृपा आपको एक गौरवशाली जीवन की ओर आशीर्वाद देने में सक्षम है (1 पतरस 5:10; I थिस्स 3:12-13)।

सच्चे शिष्य, परमेश्वर की सच्ची संताने, मसीह के वचन में बने रहते हैं (यूहन्ना 8:31)। वे सुसमाचार की आशा से दूर नहीं होते हैं, बल्कि विश्वास पर कायम और स्थिर बने हुए रहते हैं (कुलुस्सियों 1:23)। और सत्य में इस विश्वास और स्थापित दृढ़ता के द्वारा ही आप स्वयं को यीशु मसीह का सच्चा शिष्य साबित करते हैं (इब्रानियों 3:6,14)।

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