नीतिवचन 4:20
हे मेरे पुत्र, मेरे वचन ध्यान धरके सुन, और अपना कान मेरी बातों पर लगा।
अगर आप महान बनना चाहते हैं तो अवश्य है कि आप वचन को सुने और उसे सीखे। जैसा कि सुलैमान ने अपनी प्रस्तावना में लिखा है, शिक्षा को ध्यान धरके सुनना बुद्धिमान बनने के महान रहस्यों में से एक है (नीतिवचन 1:5)। व्यक्ति जितना ध्यान धरके सुनेगा और सीखेगा, वह उतना ही महान बनेगा। यह सोचने के बजाय कि आप क्या कहना चाहते हैं या जो व्यक्ति बोल रहा है उसकी कौन-सी बातें आपको अच्छी नहीं लगती है, आपको अपनी सारी शक्ति से मन की दीनता के साथ उसके हर शब्द को ध्यान धरके सुनने पर एकचित्त होना चाहिए। आप जीवन में जो भी यत्न करते हैं, उसमें आपकी सफलता इसी पर निर्भर करती है।
आप वचन की शिक्षा को कितनी अच्छी तरह ध्यान धरके सुनते हैं? आपको जो सिखाया जाता है क्या आप उसपर अपने कान लगाते हैं? सुलैमान एक महान राजा, मनुष्यों में सबसे बुद्धिमान और अपने पुत्र पर प्रेम करने वाला पिता था। वह जानता था कि उसके बेटे की सफलता उसके विशाल अनुभव और ज्ञान की बातों को सीखने पर निर्भर करती है। उसने अपने बेटे को जन्म के कुछ ही समय बाद देखा था, बचपन से उसपर अपनी नज़र रखी थी, और जब वह युवक और किशोरावस्था में था, उसने उसकी मूर्खता देखी थी। उसका बेटा कुछ नहीं जानता था और उसे सब बातें सीखनी आवश्यक थीं!
नीतिवचन की पुस्तक बुद्धि की पुस्तक है, जिसे समझ सिखाने के लिए रचा गया है। चूँकि सभी पुरुष असहाय और अज्ञानी शिशुओं के रूप में इस दुनिया में आते हैं, इसलिए उन्हें स्तनपान और डायपर के पड़ाव से निकालकर दूसरों के कुलीन और सफल अगुवे बनने सक्षम बनाने के लिए शिक्षा की अवस्था से गुज़रना अवश्य होता है। सुलैमान जानता था कि माता-पिता और शिक्षकों के निर्देशों को मन की दीनता और ध्यान धरके सुनना इस की कुंजी है, इसलिए उसने अक्सर इन मुद्दों पर ज़ोर दिया (नीतिवचन 1:8; 2:1; 3:1; 4:1-5; 5:1,7; 6: 20; 7:24; 8:32-33; 19:20; 22:17; 23:12)।
अपने ही शारीरिक और बौद्धिक विकास पर विचार करें। आप कई महीनों तक अपना नाम तक नहीं जानते थे, आपको बोतल से खिलाया-पिलाया जाता था, और आप अपने स्वयं के कपड़े और बिस्तर गंदे करते थे। लड़खड़ाकर चलना सीखने में आपको एक साल लग गया। अपने जूतों की लैस बांधना और साइकिल चलाना सीखना आपके लिए इतना आसान काम नहीं था। चार अक्षरों वाले शब्दों की वर्तनी और चार अंकों वाली संख्याओं को जोड़ना आपके लिए कठिन कार्य था। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आपको लिखित परीक्षा और ड्राइविंग टेस्ट से गुज़रना पड़ा।
लेकिन फिर आपने जाना कि आपका नाम क्या है, कैसे खाना है, शौचालय का उपयोग कैसे करना है, कैसे चलना है, जूते के लैंस कैसे बांधनी है, बाइक कैसे चलाना है, वर्तनी क्या है और गणित कैसे करना है यह सीखा, और अंत में आपने गाड़ी चलाने की परीक्षा भी पास कर ली। यह प्रगति कैसे हुई? आपको ऐसे अन्य लोगों ने सिखाया और प्रशिक्षित किया जिनका ज्ञान और समझ आपसे कई अधिक थी। आपको सुनना और सीखना पड़ा, क्योंकि एक कमरे में अकेले रखे गए बच्चे जो बिना किसी निर्देश या शिक्षा के हैं वे इन बुनियादी निपुण कौशलों को हासिल नहीं पाएंगे।
जीवन में बाइक चलाने से कहीं बड़ी चुनौतियाँ हैं। बुद्धि की बुनियाद क्या है? क्या मेहनत करना ज़रूरी है? परमेश्वर किससे घृणा करता है? क्या घमण्ड के कारण सूझबूझ पर कोई बुरा असर पड़ता है? एक खूबसूरत महिला कैसे क्या खतरनाक होती है? क्या क्रोधित शासकों के क्रोध को शांत किया जा सकता है? एक अच्छी पत्नी क्या होती है? बच्चों को कैसे प्रशिक्षित किया जाता है? क्या मैं अपने व्यवसाय में आगे बढ़ सकता हूँ? निर्बुद्धि वित्तीय जोखिम क्या हैं? चुगली करना कैसे गलत है? क्या मैं एक सच्चा दोस्त हूँ? इन सवालों और उनके जैसे कई अन्य सवालों का जवाब केवल बुद्धिमान शिक्षा द्वारा दिया जाता है, जिसे आपको सुनना, समझना, याद रखना और व्यवहारिक उपयोग करना अवश्य है।
स्कूलों में बच्चों को विश्वास करना और सोचना सिखाया जाता है कि सरकार को जो सबसे अच्छा लगता है वही सही है। क्योंकि बाइबल का सृष्टिकर्ता परमेश्वर मानवतावाद और सामाजिक प्रयोगों के लिए खतरा है, इसलिए बच्चों को सिखाया जाता है कि वे बंदरों से आए हैं। उन्हें समाजवाद के विरोधाभासी झूठ सिखाए जाते है, उन्हें सिखाया जाता है कि आत्म-प्रेम, अभिव्यक्ति की आज़ादी, व्यक्ति के अधिकार, पशु संरक्षण, गर्भपात, मानव प्रगति, पुरुषगामिता सामान्य बातें हैं। मास मीडिया के साथ एक आधुनिक दुनिया में रहनेवाले माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को ऐसी घिनौनी मूर्खतापूर्ण बकवास के खिलाफ बार बार पढ़ाये और लगातार चेतावनी देते रहें।
क्या आप एक अच्छे श्रोता और शिक्षार्थी हैं? या आप दिवास्वप्न देखते हैं? या आप पहले से ही सोच रहे हैं कि आपको आगे क्या बोलना है? यहाँ सफलता और असफलता के बीच का अंतर है। एक बुद्धिमान व्यक्ति ध्यान धरके सुनता है, क्योंकि वह जानता है कि सीखने का यही एकमात्र तरीका है। एक मूर्ख, यह सोचकर कि उसके पास पहले से ही उत्तर हैं, सुनने से इंकार कर देता है और फिर अपना शेष जीवन एक अज्ञानी हारे हुए व्यक्ति के रूप में गुज़ारता है। बुद्धिमान मूर्खों की तुलना में बेहतर रीति से सुनते हैं: वे बुद्धिमान होते जाते हैं, और मूर्ख मूर्ख बने रहते हैं (नीतिवचन 9:7-9)। आपकी बुद्धिमानी का पक्का सबूत यह है कि आप मन की दीनता से शिक्षा को सुनते हैं और उसे अपने जीवन में लागू करते हैं।
प्रभु यीशु मसीह ने पिलातुस से कहा कि वह सत्य की गवाही देने के लिए जगत में आया (यूहन्ना 18:37)। पीलातुस ने, अधिकांश शिक्षकों और राजनेताओं की रीति पर, सत्य की परिभाषा को तिरस्कारपूर्वक रीति से ठुकरा दिया (यूहन्ना 18:38)। यीशु ने अपने सुनने वालों से कहा कि वे चौकस रहें कि वे सत्य को कैसे सुनते हैं। यदि वे सुनने में तत्पर और उत्सुक हैं, तो वह उन्हें और सत्य प्रकट करेगा; यदि वे सुनने में सचेत नहीं हैं, तो वह उनसे वह छोटा सा सत्य भी ले लेगा, जो उन्हें लगता है कि वे जानते हैं(लूका 8:18)।
जब प्रभु यीशु मसीह की बात आती है, तो सुनना कोई विकल्प नहीं है। वह स्वर्ग और पृथ्वी का सृष्टिकर्ता है, और वह आदेश देता है कि आप उसके प्रचार और बाइबल में छपे हुए वचन पर ध्यान दें और आज्ञा माने। उसने अपने ही लोगों इज़राइल को दंडित करने की प्रतिज्ञा की जिन्होंने उसकी बात नहीं सुनी थी (यशा 30:8-14; यिर्म 13:16-17; 22:5-9,20-26; मलाकी 2:1-3; प्रेरितों के काम 3:22-23), और हालात आज और भी बदतर हैं, जब तथाकथित मसीही खरी धर्मशिक्षा को सहन नहीं करेंगे बल्कि ऐसे मनोरंजक प्रचारकों की तलाश करेंगे जो दंतकथाओं से अपनी मन की वासनाओं को संतुष्ट करेंगे (2 तीमुथियुस 4:3-4)।
जब माता-पिता अपने बच्चों की गलतियों को सुधारने, उन्हें शिक्षा देने या चेतावनी देने का प्रयास करते हैं तो बच्चों का जम्हाई लेना, सोना, मुँह बनाना या भाग जाना अब आम बात हो गई है। जब पास्टर परमेश्वर के वचन से सत्य का प्रचार करता है, तब चर्च के सदस्यों का लेना, दिवास्वप्न देखना, इधर-उधर देखना, अपनी बाइबल पढ़ना, या भजनों की पुस्तक के पन्ने पलटाना आम बात है। अटल नियम यह है कि ऐसे बच्चे और चर्च के ऐसे सदस्य हमेशा हारे हुए होते हैं। सफलता के लिए आपकी एकमात्र आशा अपने आप को विनम्र करना और पहले माता-पिता, फिर पास्टर, और सबसे बढ़कर और केवल परमेश्वर के अचूक वचन द्वारा परिभाषित निर्देश और ज्ञान सीखना है।
सुनने और सीखने को एक बोझ समझने के बजाय, इसे एक धन्य सौभाग्य समझे। आज बहुत कम लोग लंबे उपदेश को एक आशीष मानते हैं (2 तीमुथियुस 4:3-4)। लेकिन बेबीलोन में 70 साल की बंधुआई से लौटने के बाद नहेमायाह और एज्रा के अधीन इस्राएल ने क्या किया, पढ़ें, “तब सब लोग खाने, पीने, भोजन सामग्री भेजने और बड़ा आनन्द मनाने को चले गए, क्योंकि जो वचन उनको समझाए गए थे, उन्हें वे समझ गए थे” (नहेम 8:12)।
स्वर्ग और पृथ्वी को बनानेवाला, सर्वशक्तिमान परमेश्वर आज अपने पुत्रों और पुत्रियों को बुला रहा है। वह सृष्टि, विधान, विवेक, माता-पिता, पवित्र शास्त्र और शिक्षकों का उपयोग करता है। क्या आप सुन रहें हैं? क्या आप ध्यान देते हैं? क्या आप और सुनने की अपेक्षा करते हैं? उसकी सुनो! “और एलिय्याह सब लोगों के पास आकर कहने लगा, “तुम कब तक दो विचारों में लटके रहोगे, यदि यहोवा परमेश्वर हो, तो उसके पीछे हो लो; और यदि बाल हो, तो उसके पीछे हो लो।” लोगों ने उसके उत्तर में एक भी बात न कही” (1 राजा 18:21)। चुनाव सरल है, लेकिन बहुत कम ही सही चुनाव करेंगे, और बाकी आग के प्रतिशोध में भस्म कियें जाएंगे जो तेजी से उनपर आ रहा है (2 थिस्स 1:7-10)।
सयाने पाठक, एक बार जब आप अपने अहंकार या हठ से पश्चाताप करते हैं और सुनने में तत्पर और सीखने के लिए तैयार होते हैं, ताकि बड़ी तेज़ी से आप की उन्नति हो, तो आपको यह पता लगाना होगा कि सत्य और बुद्धि की शिक्षा कहाँ दी जाती है। देखे कि कहाँ आप सत्य और बुद्धि को चौकस होकर सुन सकते हैं, और अपना कान उनकी ओर लगा सकते हैं? परमेश्वर ने नियुक्त किया है कि वह अपने पुत्र यीशु मसीह की स्थानीय कलीसियाओं में प्रचार करके सुननेवालों को अपनी बुद्धि देगा (1 कुरिन्थ 1:19-21; 1 तीमु 6:3-5,20-21; 2 तीमु 3:16-17; तीतुस 1:1-4).
आज परमेश्वर के वचन के सच्चे सन्देश का अकाल है (आमोस 8:11-12), लेकिन इंटरनेट के आविष्कार के कारण अब पहले से कहीं बेहतर खोज संभव हो गई है। आपको एक ऐसे मनुष्य को खोजने की जरूरत है जिसे परमेश्वर ने बुलाहट दीं है जो लोग क्या कहते हैं इसकी परवाह किए बिना साहसपूर्वक और स्पष्ट रूप से परमेश्वर के सत्य की घोषणा करता है। परमेश्वर आपकी मदद करने में सक्षम है और वह आपकी सहायता करने में तत्पर है, इसलिए इसके लिए प्रार्थना करें (प्रेरितों के काम 8:26-40; 16:6-15)। परमेश्वर सच्चे और ईमानदार मनवाले लोगों को यह आशीष दे कि वे सत्य के कुछ निश्चित वचनों को पाएँ और उनके द्वारा समृद्ध हो जाएँ।
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