नीतिवचन 4:19
दुष्टों का मार्ग घोर अन्धकारमय है; वे नहीं जानते कि वे किस से ठोकर खाते हैं।
क्या आप मानवजाति, विशेषकर वर्तमान पीढ़ी की मूर्खता को देखकर चकित हैं? आपको होना चाहिए। अपने हृदय की भ्रष्टता और दिमाग की अज्ञानता के कारण, वे सत्य और ज्ञान से अनभिज्ञ हैं, और घोर अंधकार में रहते हैं। वे जो नहीं देख पाते उसी से वे खुद को चोट पहुँचाते रहते हैं, और हर गुज़रते दिन के साथ उनका जीवन और अधिक बेकार होता जाता है।
सुलैमान यहां समरूपता के निष्कर्ष पर आता है। इसके पहले के नीतिवचन में, उसने कहा कि धर्मियों की चाल उस चमकती हुई ज्योति के समान है जिसका प्रकाश दोपहर तक अधिक अधिक बढ़ता रहता है (नीतिवचन 4:18)। जैसे जैसे मनुष्य सत्य और बुद्धि सीखते जाता है और अपने जीवन पर लागू करता जाता है, वैसे वैसे परमेश्वर उसे और अधिक समझ देता जाता है, ठीक वैसे ही, जैसा बढ़ता सूर्योदय अंधेरे को अधिक और अधिक दूर करता जाता है और अंततः चमकते दिन का उजाला अपनी पूरी रोशनी में प्रगट हो जाता है।
परन्तु दुष्ट लोग कुछ भी नहीं देख पाते हैं, क्योंकि वे अन्धकार में चलते हैं। वे नहीं जानते कि वे क्यों लड़खड़ाते और गिरते हैं, क्योंकि वे अपनी सोच में कोई ख़ामी नहीं देख पाते। उनका अहंकार एक बड़ा अभिशाप है, क्योंकि उस मनुष्य की तुलना में, जो सोचता है कि वही सही है, मूर्ख से अधिक आशा है (नीतिवचन 26:12)। वे पाप करने के लिए बड़ी तेज़ी से भागते हैं, जब तक कि अचानक यह उन्हें दर्दनाक परिणामों से झकझोर नहीं देता (भजन 36:1-2; 50:21-22)।
इस नीतिवचन की कई मिसाले दी जा सकती हैं। बुद्धिमान लोग दुनिया की विलक्षण स्थिति को देखकर विनम्रतापूर्वक पवित्रशास्त्र में सत्य की ख़ोज करते हैं, ऐसा न हो कि वे अपने आस-पास के लोगों की तरह भ्रम में फँस जाएँ और अज्ञानता में रहें। बुद्धिमान माता-पिता अपने बच्चों को दुनिया की मूर्खता और उसके दुखद परिणाम दिखाते हैं। परमेश्वर के पुत्रों को अन्धकार की कुटिल संतानों से घृणा करनी चाहिए (नीतिवचन 29:27; उत्पत्ति 6:1-2; भजन 139:21-22)।
परमेश्वर किसी भी मनुष्य पर अपना सत्य प्रगट करने और उसे बुद्धि देने उसका ऋणी नहीं है। उसने अपनी सृष्टि में अपना सनातन सामर्थ और परमेश्वरत्व को प्रकट किया (रोमियों 1:18-20)। जब वे इस प्रगट ज्ञान को मानने से इनकार करते हैं, तो वह उचित ही उनके दिलों को अंधकारमय कर देता है और उन्हें भ्रम में छोड़ देता है (रोमियों 1:20-23)। समलैंगिकता का अभिशाप और कई अन्य विकृतियाँ विद्रोही मनुष्यों पर परमेश्वर का न्याय है (रोमियों 1:24-32; इफि 4:17-19)।
आप परमेश्वर को मूर्तिपूजकों का मज़ाक उड़ाते हुए देख सकते हैं – जो मूरत खोदकर बनाते हैं और उसकी पूजा करते हैं! उनके दाहिने हाथ में मिथ्या है और वे उसे छोड़ नहीं सकते (यशायाह 44:9-20)। जब मनुष्य उस सत्य से प्रेम नहीं करते जो उन्हें दिया जाता है, तो परमेश्वर उन्हें झूठ पर विश्वास करने और शापित होने के लिए सामर्थशाली भ्रम भेजता है (2 थिस्स 2:9-12)। जब कोई मनुष्य अपने मन में मूरतें लिये हुए आता है, तब वह भविष्यद्वक्ताओं को फँसाता है कि वे झूठ का प्रचार करें। (यहेजकेल 14:1-11) और उस ने अहाब के पास, जिस ने दुष्टता को चुना था, एक झूठ बोलनेवाली आत्मा भेजी (1 किग्स 22:19-23)।
सोचकर देखो। आलसी मूर्ख सो-सोकर अपने आप को लाड़-प्यार करता है, लेकिन फिर वह यह जानकर निराश हो जाता है कि वह कुछ भी नहीं खरीद सकता (नीतिवचन 21:25)। व्यभिचारी सोचता है कि सम्भोग से उसे बहुत आनंद मिला है, जब तक कि उसे इस पृथ्वी पर सबसे ज्यादा अकेलापन नहीं महसूस होता (नीतिवचन 5:3-5)। एक आधुनिक माँ अपने बच्चों को प्रशिक्षित करने के बजाय उन्हें लाड़-प्यार करती है, लेकिन एक समय आता है जब वे अपनी हरकतों से उसे दूसरों के सामने शर्मिंदा करते हैं (नीतिवचन 29:15)। एक अति संकोची पत्नी अपने पति को सहवास से अक्सर वंचित रखती है, और फिर उसके कड़वे और चिडचिडे व्यवहार से हैरान होती है कि ऐसा क्या हुआ (1 कुरिन्थ 7:1-5)।
वासना से भरा मूर्ख किसी खूबसूरत औरत का जिस्म पाने के लिए उसे डेट करता है, और वह समझ नहीं पाता कि उसका वैवाहिक जीवन कैसे नरक बन गया (नीतिवचन 11:22; 30:21-23; 31:30)। कॉलेज की कोई छात्रा पुरुष-स्त्री की दोस्ती की पैरवी करती है, फिर विवाह के बाद अपने पति के उसकी महिला-मित्र के साथ व्यभिचार से अचम्भित हो जाती है। राजनेता वोट खरीदने के लिए लोगों को झूठे वादों, और सपनों का झाँसा देते हैं, और सरकार में आते ही खुद पिछली सरकार की तुलना में कई ज्यादा महँगाई को बढ़ा देते हैं। इस संसार से प्रेम करनेवाला ख्रिश्चन व्यक्ति रात-रातभर OTT और टेलीविज़न पर समाज-घातक वेब सीरीज़ और फिल्में देखता है, लेकिन रविवार को उपदेश को उबाऊ जानकर पास्टर की आलोचना करता है, और ऊँघता है।
आधुनिक महिला बड़ी बहादूरी से अपने दो अजन्मे बच्चों का गर्भपात करा देती है, लेकिन जब उसके पड़ोसी से झगड़ा हो जाता है तो घबराहट से बेहोश हो जाती है। विकासवादी सिखाते हैं कि मनुष्य का विकास बंदरों से हुआ है, लेकिन खुद पर अमानवीय आचरण की शिकायत करता है। ख्रिश्चन धर्म के कुछ मुख्यधारा के सम्प्रदाय मानते है कि व्यक्ति का नया जन्म उसके अपने मुक्त-इच्छा से निर्णय लेने पर होता है, लेकिन फिर अचम्भित होता है कि उसके जीवन में कोई बदलाव क्यों नहीं हुआ। बुद्धिजीवी सृष्टिकर्ता परमेश्वर का इनकार करते हैं, और उसके ठहराए नियम-कायदों का विद्रोही मानसिकता से उल्लंघन कर अपने ही शरिरों को सब प्रकार के अशुद्ध कामों से नाश कर देते हैं।
गर्भपात करने वाला डॉक्टर अपनी वैक्यूम पाइप से अजन्मे बच्चों को चूसकर टुकड़ो में बाहर निकालता है, लेकिन इलेक्ट्रिक तारों में फंसे कबूतर के जान की उसे बहुत चिंता होती है। यूनियन कर्मचारी अपने नियोक्ता से ज़बरदस्ती वेतन वृद्धि कराने पर खुशी मनाते हैं, लेकिन जब प्लान्ट बंद पड़ जाता है और वे बेरोजगार हो जाते हैं तो उन्हें झटका लगता है। किशोर बंदूकधारी अपने साथी छात्रों और शिक्षकों की हत्या कर देता है, लेकिन कोई भी ऐसे किशोरों का मनोरंजन और कार्यक्रम करने वाले हिंसक संगीत, फिल्मों और वीडियो गेम को गैरकानूनी घोषित करने के बारे में नहीं सोचता है।
दुनिया प्रबुद्ध नहीं हो रही है। पिछली कुछ पीढ़ियों के केवल शिक्षित बेवकूफ ही विकासवाद पर विश्वास करते थे। केवल अंधे ही ऐसी कपोल-कल्पनाओं की प्रशंसा करते हैं। दुष्ट मनुष्य और बहकानेवाले तो और भी बुरे होते जाते हैं (2 तीमु 3:13)। मनुष्य का नैतिक पतन स्पष्ट दिखाई देता है। बस इसकी कला को देखें, इसका संगीत सुनें, इसकी किताबें पढ़ें, इसके युवाओं को देखें, इसके तलाकों को गिनें, इसकी भूख को मापें, इसकी रासायनिक निर्भरता की गणना करें, इसकी आत्महत्याओं की संख्या देखें।
पाठको, बाइबल में ज्योति है! यह आपको दुनिया के अंधेरे पागलपन से बचा सकती है। भजनकार क्या कहता है, सुनो : “तेरा वचन मेरे पांवों के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है” (भजन 119:105)। ” यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आँखों में ज्योति ले आती है” (भजन 19:8)। “अपने प्रकाश और अपनी सच्चाई को भेज; वे मेरी अगुवाई करें, वे ही मुझ को तेरे पवित्र पर्वत पर और तेरे निवास स्थान में पहुँचाएँ” (भजन 43:3)।
नीतिवचन की पुस्तक में ज्योति है! “आज्ञा तो दीपक है और शिक्षा ज्योति, और सिखानेवाले की डाँट जीवन का मार्ग है” (नीतिवचन 6:23)। यशायाह ने लिखा, “व्यवस्था और गवाही के विषय में: यदि वे इस वचन के अनुसार नहीं बोलते, तो ऐसा इसलिए क्योंकि उन में ज्योति नहीं है” (यशायाह 8:20-kjv)। बाइबल स्वर्ग से सुनाई देनेवाली परमेश्वर की वाणी से भी उत्तम है! “नबियों का जो वचन हमारे पास है, वह और भी अधिक निश्चित है। इस पर ध्यान देकर तुम अच्छा करोगे मानो कि यह अंधेरे में चमकता हुआ एक दीपक है, जो उस समय तक चमकता है जब तक पौ न फटे और तुम्हारे हृदय में भोर का तारा उदय न हो। पर पहिले यह जान लो कि पवित्रशास्त्र की कोई भी भविष्यद्वाणी व्यक्तिगत विचारधारा का विषय नहीं है” (2 पतरस 1:16-21)।
यीशु मसीह जगत की ज्योति हैं। लेकिन केवल वे ही जो उसके पिता द्वारा खींच लिएँ जाते हैं – अर्थात चुने हुए – उसकी ज्योति में आते हैं (यूहन्ना 1:5; 3:19; 6:44-45)। यदि आप यीशु मसीह को समझ पा रहे हैं और उसकी प्रशंसा कर पा रहे हैं, तो केवल इसलिए क्योंकि यह परमेश्वर का अपनी मर्जी से आपपर हुआ अनुग्रह है (मत्ती 11:25-27; 16:15-17; युहन्ना 10:26-29)। इससे पहले कि आप उसपर विश्वास रखें, अवश्य है आपका आत्मा से नया जन्म हो, क्योंकि नयें जन्म से पहले कोई भी व्यक्ति आत्मिक बातों को न तो देख सकता है और न सुन सकता है (यूहन्ना 3:3; 8:43,47; 1 कुरिन्थ 2:14)। खुद को दीन करों और यीशु मसीह में परमेश्वर से अनुग्रह पर निर्भर हो जाओं, तो मसीह की ज्योति तुम पर चमकेगी (यूहन्ना 8:12; इफि 5:14)। धन्यवाद, धन्य परमेश्वर!
नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।