नीतिवचन 4:18

परन्तु धर्मियों का पथ चमकती हुई ज्योति के समान है, जो मध्यान्ह की तरह चमकता है।

परमेश्वर ने आपको को ज्योति दीं है उसकी चमक में चलों! वह प्रत्येक व्यक्ति को उसके जीवन के किसी न किसी मोड़ पर सत्य का ज्ञान देता है। परन्तु उनमें से ज्यादातर लोग मनुष्य सत्य के ख़िलाफ विद्रोह करते हैं और उसे नहीं मानते, इसलिए वह उन्हें उनकी अज्ञानता में रखकर हमेशा के लिए अंधा कर देता है। लेकिन समझदार लोग सत्य को जानकर प्रसन्न होते हैं और उस पर चलते हैं, और वह उनकी समझ को बढ़ाकर उन्हें प्रतिफल देता है।

इस नीतिवचन के संदर्भ में सुलैमान ने अपने बेटे को दुष्टों के मार्ग में न चलने की हिदायत दी (नीतिवचन 4:14-17)। उस ने उस से कहा, कि दुष्टों की राह में पाँव न रखना, और न बुरे लोगों के मार्ग पर चलना, उसे छोड़ दे, उसके पास से भी न चल। इस नीतिवचन में उसे धर्मियों के मार्ग का अद्भुत वर्णन बताने के बाद, उसने उससे कहा कि दुष्टों का मार्ग घोर अन्धकारमय है; वे यह तक नहीं जानते कि वे किस से ठोकर खाकर लड़खड़ाते हैं (नीतिवचन 4:19)।

सृष्टि में दिखाई देनेवाली सब चीजें परमेश्वर की सनातन सामर्थ्य और परमेश्वरत्व को साबित करती हैं (रोमियों 1:18-20; भजन 19:1-6)। इसलिए मनुष्य निरुत्तर हैं। जब वे अहंकार में आकर उसे मानने से इनकार कर देते हैं, तो परमेश्वर उनके मनों को अँधा कर देता है और उनके दिमागों को विकृत कर देता है ताकि वे मूर्तिपूजा और विकासवाद जैसी बुरी इच्छाओं और अज्ञानी सोच के शिकार हो जाएं (रोमियों 1:21-23)। समलैंगिकता का कारण और स्रोत भी यही है (रोमियों 1:24-27)।

फिरौन पर विचार करें। मूसा उसके देश पर सामर्थी चिन्ह दिखाकर बहुत-सी विपत्तियाँ ले आया था, फिर भी उसने यहोवा की आज्ञा को न माना। इसलिए परमेश्वर ने उसके मन को कठोर कर दिया, और वह मूर्खतापूर्वक अपने रथों और सेना को लाल समुद्र में ले गया कि उसका सेना समेत भयानक विनाश हो। किस बात ने उसे ऐसा फैसला लेने के लिए अँधा कर दिया था कि वह इस स्पष्ट खतरे को देख न सका? यहोवा ने उसे अन्धा कर दिया (निर्गमन 14:4,17)।

परमेश्वर साधारण व्यक्तित्ववालें मनुष्यों को भी सत्य का ज्ञान देता है। यदि वे इसे मानने से इनकार करते हैं, तो वह उनकी समझ को अंधा कर देता है और उन्हें उनके धोखेबाज़ मनों और अन्य मनुष्यों की विकृत विचारधाराओं पर छोड़ देता है। जब लोग अपने मनों में मूरतें स्थापित करके परमेश्वर के सामने आतें हैं, तो वह प्रतिज्ञा करता है कि वह भविष्यवक्ताओं को उन्हीं के मन के द्वारा फँसाएगा (यहेज़केल 14:4-11)। यीशु ने यहूदियों के मनों को कठोर करने के लिए दृष्टान्तों में बातें कीं (मत्ती 13:10-17)। और जब लोग प्रकट सत्य की प्रतीति नहीं करते तब परमेश्वर मनुष्यों में एक भटका देनेवाली सामर्थ्य को भेजता है कि वे झूठ पर विश्वास करें, (2 थिस्स 2:9-12)।

क्या परमेश्वर भ्रम का कर्ता है? हाँ, बिल्कुल! वह अपना सत्य प्रगट करने किसी भी मनुष्य का कर्ज़दार नहीं है, और जो भी व्यक्ति उसे प्रगट किए गए सत्य को व्यर्थ कर देता और मानने से इनकार कर देता है वह उस व्यक्ति से उस सत्य और ज्योति को छीन लेगा। बाबेल की मीनार और वहां भाषा में गड़बड़ी का डाला जाना न केवल वास्तविक ऐतिहासिक घटना हैं, बल्कि यह उन लोगों यह उसके पवित्र दण्ड का संकेत भी है जो अपने ही मनसूबों को अन्जाम देकर अपनी इच्छा के अनुसार चलने की सोचते हैं (उत्पत्ति 11:1-9)।

परन्तु यही सर्वशक्तिमान परमेश्वर धर्मियों और भले मनुष्यों को आशीष देगा। जैसा कि इस नीतिवचन में लिखा है, वह चमकती हुई ज्योति प्रगट करेगा कि वे और भी अधिक सत्य के ज्ञान में पहुंचें, क्योंकि जो सत्य उसने धर्मी लोगों पर पहले ही प्रगट किया है उस पर वे चलते हैं। यह बात हमें प्रोत्साहन देती है कि जो सत्य वह हम पर प्रगट करता है उस पर हम चलें। वह या तो आपकी आज्ञाकारिता के कारण आपको और भी सत्य की ज्योति देगा, या जो ज्योति आप सोचते हैं कि आपके पास है वह उसे भी आपसे छीनकर आपकी अवज्ञा के लिए दण्ड देगा (लूका 8:18)। ध्यान रखें, प्रिय पाठक!

यह ज्योति हर किसी पर नहीं चमकती, क्योंकि यह केवल धर्मियों के पथ पर ही चमकती है। यह ज्योति सत्य से भटकने वालों, पाखंडियों, या समझौता करने वालों के लिए नहीं है। परमेश्वर की ज्योति, जो ज्ञान, सत्य और समझ देती है, केवल धर्मी मनुष्य के लिए है – वह मनुष्य जो अपने व्यर्थ विचारों से फिर कर परमेश्वर की सिद्ध इच्छा पूरी करने की ओर आता है (नीतिवचन 3:33; 9:9; 11:9; 12:13,21; 14:14; 20:7; 21:15; 24:16)।

दिन मध्यान्ह तक कैसे पहुँचता है? इसकी शुरुआत पूर्व में एक धीमी चमक से होती है, जो रात के अंधेरे में काफी कमज़ोर दिखाई देती है। लेकिन जैसे ही तेजस्वी सूरज बची हुई रात को दूर करने के लिए क्षितिज से उगता है, अंधेरा तेज़ी से दूर होने लगता है। जैसे-जैसे वह आसमान में प्रतापी रूप से चढ़ता जाता है, इसकी रोशनी तीव्रता से हर कोने में बढ़ती जाती है जब तक कि मध्यान्ह के सूरज के नीचे सब कुछ स्पष्ट रूप से चमक नहीं जाता। धर्मी के पथ पर यहोवा की आशीष कुछ ऐसे ही होती है; जैसे जैसे वह धर्मी मनुष्य न्याय के कार्य करता और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चलता जाता है, वह धुन्धली से सिद्धता की ओर अधिकाधिक चमकता जाता है, (मीका 6:8)।

आपकी कार की हेडलाइटें कुछ ही दूरी तक चमकती हैं। लेकिन जैसे-जैसे आप गाड़ी चलाते हैं, वे दूर-दूर तक चमकते हैं। जब आप अंधेरे गैराज से निकलते हैं, तो आप घर का पूरा रास्ता नहीं देख पाते। आप पथदिपों की रोशनी में गाड़ी चलाना शुरू करते हैं, जो थोड़ी ही आगे तक चमकती है। लेकिन जैसे-जैसे आप अपनी गाड़ी रोशनी पर भरोसा करते हैं और आगे बढ़ते हैं, आपकी रोशनी आगे तक चमकती रहती है, जब तक कि आप अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच जाते। आपकी रोशनी ने घर तक आपका मार्गदर्शन किया, क्योंकि आपने रास्ते के हर मोड़ पर उस पर भरोसा किया। सुलैमान के पास कार की हेडलाइटें नहीं थीं, लेकिन उसके पास अपने पथ के लिए दीपक थें (भजन 119:105)।

चमकती ज्योतियों के इन दो उदाहरणों के अनुसार ही, जैसे-जैसे आप उस सत्य के प्रति धन्यवादी मन की आज्ञाकारिता में आगे बढ़ते जाते हैं जो उसने आप पर पहले ही प्रकट किया है, वैसे वैसे धन्य परमेश्वर आपको और अधिक ज्योति देता है तथा और भी अधिक सत्य प्रकट करता है, (नीतिवचन 2:1-5; अय्यूब 17:9; भजन 84: 7; होशे 6:3; 2 कुरिन्थ 3:18)। इसलिए, आप शिक्षा पर ध्यान दें और उसका पालन करें ऐसी सुलैमान ने कई नीतिवचनों में बार-बार चेतावनी दी है (नीतिवचन 1:23; 8:32-33; 10:17; 12:1; 28:9; 29:1) )। अवज्ञा के परिणाम गंभीर होते हैं।

बुद्धि और सत्य तेज़ दिमाग या शिक्षकों पर निर्भर नहीं हैं। वे विश्वास और आज्ञाकारिता पर निर्भर हैं। तेज़ दिमाग और सांसारिक शिक्षा के कारण परमेश्वर की बुद्धि को सीखने में एक गंभीर बाधा उत्पन्न हो सकती है (1 कुरिन्थ 1:19-20)। जवान पुरुष आसानी से बुद्धिमान बूढ़ों से आगे निकल सकता है, अगर वह केवल परमेश्वर का भय मानता है और उस पर और उसके वचन पर पूरा भरोसा रखता है (अय्यूब 32:6-9)। आप परमेश्वर के धर्मग्रंथ पर भरोसा करके आसानी से अपने शत्रुओं, शिक्षकों और पूर्वजों से आगे निकल सकते हैं (भजन 119:98-100)।

हमारे धन्य प्रभु ने इस नीतिवचन के ज्ञान को इन शब्दों में सिखाया: “यदि कोई उसकी इच्छा पर चलना चाहे, तो वह इस उपदेश के विषय में जान जाएगा कि यह परमेश्वर की ओर से है या मैं अपनी ओर से कहता हूँ” (यूहन्ना 7:17)। यदि आप परमेश्वर की इच्छा पर चलना चाहते हैं, तो आप परमेश्वर के सच्चे उपदेश को जान लोगे, क्योंकि वह आप पर और भी अधिक सत्य प्रकट करेगा और आपके मन में उसकी प्रतीति देगा। नतनएल, प्रेरितों, खोजे और कुरनेलियुस ने आज्ञाकारिता के बाद ज्योति को पाया (यूहन्ना 1:45-51; लूका 24:32; प्रेरितों 8:30-35; 10:6)।

कई लोगों ने परमेश्वर के सत्य को जाना है परन्तु उन्होंने परंपरा के प्रति अपने प्रेम, मनुष्य का डर, नौकरी की सुरक्षा और अन्य जालों में फंसकर के उसे मानने से इनकार कर दिया है (नीतिवचन 29:25)। कितने लोगों ने बाइबल-सम्मत बपतिस्मा को मानने से इनकार कर दिया और रोमन कैथोलिक चर्चों के शिशु-छिड़काव वाले सम्प्रदायों में चले गए? कितने लोगों ने ठोस सिद्धांत को अस्वीकार कर दिया और मूर्ख महिलाओं और सफ़ेद सूट पहने पुरुषों के साथ असंगत रूप से अन्य-अन्य भाषाओँ में बड़बड़ाने लगे? कितनों को सिर्फ़ धार्मिक विधि अच्छी लगी और उन्होंने बपतिस्मा के द्वारा नया जन्म होने की झूठी शिक्षा पर विश्वास कर अपना ही विनाश कर लिया? कितने लोगों ने ‘स्वतंत्र इच्छा’ की मूर्ति को चुना और अपनी मर्जी का उद्धार पाने के लिए भावनात्मक अव्हानों पर भरोसा किया और अवास्तविक विश्वास करने के घातक परिणामों में डूब गए? कितने ख्रिश्चन लोगों ने सरकारी सहायता, नौकरी और आरक्षण की सुरक्षा के लिए अपने जाति प्रमाणपत्र बनवाएं और ख्रिश्चन धर्म को हिन्दू धर्म की जाति-व्यवस्था का कलंक लगा दिया?

आप इस नीतिवचन को कैसे लेते हैं इसका आपकी आत्मा, आपके परिवार और चर्च पर बहुत प्रभाव पड़ेगा। यदि आप हठ करके अपना मार्ग चुनते हैं, तो स्वर्ग का यहोवा आपको अन्धा कर देगा। यदि आप विनम्रतापूर्वक उसके वचन के प्रति समर्पण करेंगे, तो वह आपको ज्योति और सत्य की आशीष देगा। प्रिय पाठक, आप अपने जीवन में सत्य और दृढ़ विश्वास को कहाँ अस्वीकार कर रहे हैं? आप कहाँ परंपरा को पकड़े हुए हैं या परमेश्वर से ज़्यादा मनुष्यों से डर रहे हैं? आपके जीवन, परिवार या चर्च में क्या ग़लत हो रहा है जिसे आप सुधार नहीं रहे हैं? आपके प्रिय पाप कौन कौन-से हैं? परमेश्वर को ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता!

सुलैमान ने आगाह किया, ” जो मनुष्य बुद्धि के मार्ग से भटक जाए, उसका ठिकाना मरे हुओं के बीच में होगा” (नीतिवचन 21:16)। इस गंभीर पाठ पर मेरी शिक्षा को पढ़ें। किसी समय गौरवशाली रहा अमेरिका में अब अधिकांश चर्च ऐसी ही सभाएँ बनकर रह गई हैं, क्योंकि उस देश के मसीहियों ने दंतकथाओं और लोगों के मनोरंजन के लिए परमेश्वर के वचन को छोड़ दिया है (2 तीमु 3:4-7; 4:3-4)।

आप पवित्रशास्त्र के अधिक निश्चित वचनों पर ध्यान देकर अज्ञानता से बच सकते हैं, जो अन्धियारे स्थान में चमकने वाली ज्योति के समान है, और जो सत्य के सम्बन्ध में स्वर्ग से परमेश्वर की वाणी सुनने से भी अधिक दृढ़ है (2 पतरस 1:16-21)। अगर आप ऐसा करते हैं तो आप पर यीशु मसीह की महिमा के माध्यम से अपने मन में उसके ज्ञान का सूर्योदय होगा, जो अब और उसके महिमामय रूप से प्रकट होने के दिन आप पर चमकेगा। आपको यह ज्योति कैसे प्राप्त हो सकती है? उसके वचन के निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो (1 पतरस 2:2; 2 पतरस 3:18)।

धर्मी मनुष्य का पथ इस जीवन से परे आगे जाता है। वह दिन आ रहा है, जिस में वह सिद्ध ज्ञान से जान लेगा। वह प्रभु यीशु की उपस्थिति में होगा, और तब वह सब कुछ जान लेगा। तब तक, उसके वचन की चमकती रोशनी पर भरोसा रखें और जो आप देखते हैं उसके अनुसार चलें, और प्रार्थना करें कि वह आपको अपनी पहचान में ज्ञान और प्रकाश की आत्मा दे (इफि 1:17-18)। सत्य और ज्योति के लिए धन्यवाद प्रभु।

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