नीतिवचन 4:15

उसे छोड़ दे, उसके पास से भी न चल, उसके निकट से मुड़कर आगे बढ़ जा।

मित्र या तो आपको उन्नत करेंगे या बिगाड़ेंगे। यदि आप अपने लिए संसार से प्रेम करनेवाले मित्र चुनते हैं, तो वे आपको नीचे अधोगति में खींच लेंगे। यदि आप अनावश्यक रूप से संसार से प्रेम करनेवालों से रिश्ते बनाते हैं, तो आप परमेश्वर के सामने न तो बुद्धिमान ठहरेंगे, और न धर्मी।

सुलैमान ने अपने पिता दाऊद की दी हुई सम्मति का उपयोग करके अपने पुत्र को चिताया (नीतिवचन 4:1-9)। परमेश्वर ने इन दो राजाओं की इस अनमोल बुद्धि को आपके लिए बाइबल में लिखा है। उपरोक्त नीतिवचन से पहले के नीतिवचन में यह चेतावनी दी गई है, “दुष्टों की राह में पाँव न रखना, और न बुरे लोगों के मार्ग पर चलना” (नीतिवचन 4:14)।

संसार से प्रेम करनेवाले मित्र आपको भी बिगाड़ देंगे, अत: उनसे दूर ही रहें। आपको उनके आस-पास भी नहीं भटकना चाहिए। सांसारिक मनुष्यों के मार्ग या उनके पथ के बारे में यह नीतिवचन कहता है, “उसे छोड़ दे, उसके पास से भी न चल, उसके निकट से मुड़कर आगे बढ़ जा ” (नीतिवचन 4:15)। अगर बहुत ही आवश्यक न हो तो सांसारिक लोगों को अपना मित्र बनाने से बचें।

क्या आप इस चेतावनी को देख और सुन सकते हैं? सुलैमान ने इसे चार तरीकों से दोहराया है। दुष्टों की जीवनशैली से सख्ती से बचना ज़रूरी है (नीतिवचन 4:14)। उनका अनुसरण मत करो। उनकी आदतें मत सीखो। उनसे मित्रता मत रखों। उनकी संगती को ठुकरा दो। इसके बजाय, बुद्धि के मार्ग और सीधाई के पथ पर चलें (नीतिवचन 4:11-13)।

अच्छे माता-पिता इस बात की फिक्र करते हैं कि कही उनके बच्चों पर उनके मित्रों का दबाव तो नहीं है, और सुलैमान को भी यही चिन्ता थी। उसने अपने बेटे से कहा कि वह बुद्धि के मार्ग और सीधाई के पथ पर चले (नीतिवचन 4:11-13), और उसने उसे दुष्टों की राह और बुरे लोगों के मार्ग पर न चलने की चेतावनी दी (नीतिवचन 4:14-15)।

कई लोग यह कहकर कि “हर कोई तो इसे कर रहा है” अपने पाप से छुटकारा पा लेते हैं। ऐसों को बुद्धि का प्रत्युत्तर है, “इससे साबित होता है कि यह गलत है!” यह पापी संसार दुष्ट है (1 यूहन्ना 2:15-17; 5:19)। यीशु ने कहा कि संसार जिन बातों को बहुत मूल्यवान समझता है, वे परमेश्वर की दृष्टि में घृणित हैं (लूका 16:15)। भीड़ का भाग बनकर पाप और नैतिक बातों के मसले में समझौता करना और भी दण्डनीय अपराध है (निर्गमन 23:2)।

इस सरल नीतिवचन में परमेश्वर और सुलैमान द्वारा चुने गए शब्दों पर गौर करें। ” उसे छोड़ दे” का अर्थ है उससे अछूत रहना या उससे दूर रहना, उससे कोई लेना-देना न रखना, उससे किनारा करना। “उसके पास से भी न चल” का अर्थ है एक सुरक्षित दूरी बनाए रखना, इसके पास नहीं जाना, उसे सामने से आते हुए देखते ही अपना रास्ता बदल देना।

“निकट से मुड़कर मुड़कर” का अर्थ है कि जैसे ही आपको पता चलता है कि आप उसके निकट है वैसे ही तुरंत अपनी दिशा बदलना, उसे त्याग देना और उससे बचकर भागना। ” आगे बढ़ जा” का अर्थ है दूर हटना, अपने और उसके बीच दूरी बनाना। ये परमेश्वर-प्रेरित शब्द सिखाते हैं कि कैसे आपको दुष्ट पुरुषों की जीवन शैली और उनकी विचारधाराओं का तिरस्कार करना चाहिए।

यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा कि वे सकेत फाटक से प्रवेश करें और कठिन मार्ग से चलें (मत्ती 7:13-14)। जैसे हथकड़ी बन्धक बनानेवाली, कसी हुई और निकालने में कठिन होती है, उसी तरह बुद्धि का मार्ग प्रतिबंधात्मक, कड़ा और कठिन होता है। थोड़े ही लोग जो उसे ढूँढ लेते हैं उन्हें उसमें बलपूर्वक पश्चाताप और अपने जीवन में परिवर्तन लाकर प्रवेश करना होगा (मत्ती 11:12; लूका 16:16; रोमियों 12:1-2; 2 कुरिन्थियों 5:17)।

यीशु ने अपने चलों से कहा कि वे उस चौड़े फाटक और आसान मार्ग से दूर रहें जो इस पूरे संसार को विनाश और नरक की ओर ले जाता है। यद्यपि यह मार्ग आकर्षक और लोकप्रिय, आसान और विलासिता से भरा है, फिर भी परमेश्वर के सच्चे पवित्र लोग उन बुरी बातों के नज़दीक भी नहीं जाएंगे (2 कुरिन्थियों 6:14-17)। वे हर मौके पर धार्मिकता, सच्चाई और बुद्धि का ही मार्ग चुनते हैं और अपने लिए मित्र भी ऐसा ही चुनाव करने वालों में से चुनते हैं।

दाऊद ने लिखा कि जो मनुष्य परमेश्वर का धन्य जन, जो सचमुच धर्मी है, वह न तो दुष्टों की युक्ति पर चलेगा, और न पापियों के मार्ग में खड़ा रहेगा, और न ठट्ठा करनेवालों की मण्डली में बैठेगा (भजन 1:1)। उसका उनसे कोई लेना-देना नहीं होगा। वह उनके विचारों और उनकी जीवनशैली का तिरस्कार करता है। दाऊद ने अपने जीवन में ऐसा ही फिसल लिया था और वह किस प्रकार के लोगों का तिरस्कार करता था, उनकी उसने सूचि दीं (भजन संहिता 101:3-8)।

धर्मीजन जानते हैं कि इस संसार से मित्रता करना परमेश्वर का शत्रु होना है, क्योंकि यह संसार उसका शत्रु है (याकूब 4:4)। बाइबल अक्सर इस संसार के साथ मित्रता की तुलना परमेश्वर के विरुद्ध व्यभिचार, परस्त्रीगमन, या वेश्यावृत्ति के रूप में करती है, क्योंकि आप परमेश्वर के शत्रु के साथ इश्कबाज़ी कर रहे हैं या उससे प्रेम कर रहे हैं। धर्मीजनों और संसार के बीच एक बड़ी खाई और शत्रुता है (नीतिवचन 29:27)।

दुष्ट और धर्मी के बीच एक पुरानी और प्रबल शत्रुता चलती आ रही है। यह शत्रुता आरम्भ में थी, और अंत तक बनी रहेगी। धर्मीजन दुष्ट से घृणा करता है; दुष्टजन धर्मी से घृणा करता है। वे एक दूसरे के विरोधी हैं, और उनमें कभी मेल-मिलाप नहीं हो पाएगा। परमेश्वर और शैतान के बीच की शत्रुता धर्मिजन और दुष्ट के बीच की शत्रुता से कम नहीं है।

धर्मीजन दुष्टों से घृणा करता है, क्योंकि वे दुष्टों की घृणित आत्मा और उनके बुरे कार्यों को सह नहीं सकते; वे दुष्ट मनुष्यों और उनके बुरे कामों से घृणा करते हैं। परन्तु दुष्ट धर्मियों से उनके भले कामों के कारण बैर रखते हैं, क्योंकि वे धर्मिजनों और भले कामों से नफ़रत करते हैं। यह संघर्ष अच्छे और बुरे, परमेश्वर और शैतान, पवित्रता और दुष्टता, पवित्रजनों और पापियों के बीच है।

आप दूसरों की विचारधाराओं और प्रभाव के आसान शिकार बन सकते हैं। पौलुस ने कहा, “धोखा न खाओ: बुरी संगति अच्छे आचरण को बिगाड़ देती है” (1 कुरिन्थियों 15:33)। आप को शायद लगे कि आप दुनिया की जीवन शैली या तत्वज्ञान का विरोध कर सकते हैं, लेकिन आप नहीं कर सकते! आपको उनसे दूर ही भागना होगा। साथ ही यह भी अवश्य है कि आप उनकी मूर्खता और मित्रता से उतनी ही घृणा करें। उनको दूर से ही आते देख अपना रास्ता बदलो। अपने आप को बचाओ!

सुलैमान ने यह भी लिखा, “जो बुद्धिमानों की संगति करे वह बुद्धिमान ठहरेगा, परन्तु मूर्खों का साथी नाश होगा” (नीतिवचन 13:20)। यह सरल किन्तु महत्वपूर्ण ज्ञान है। क्या आप अपनी सारी शक्ति और चतुराई से मूर्ख और दुष्ट लोगों से दूर रहेगा? उसने यह भी लिखा, “हे मेरे पुत्र, उस शिक्षा को जो ज्ञान की बातों से भटकाती है सुनना छोड़ दे” (नीतिवचन 19:27-केजेवी)।

यदि आप वास्तव में बुद्धिमान बनना चाहते हैं और इस संसार में परमेश्वर के साथ चलना चाहते हैं, तो आपको धार्मिकता का मार्ग चुनना अवश्य है और अपनी मित्रता को उन लोगों तक सीमित रखना होगा जो अपने कामों में परमेश्वर का भय मानते हैं (भजन 119:63)। भले ही यहाँ आपके बहुत ही कम मित्र हो, लेकिन आप स्वर्गदूतों और धर्मीजनों की एक बड़ी मंडली से जुड़े हुए हैं जो स्वर्ग में यीशु के साथ आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं (इब्रा 12:22-24)। इस पर विश्वास करो! आनन्द करों!

आप अपने जीवन के किस क्षेत्र में इस नीतिवचन की बुद्धि से समझौता कर रहे हैं? आप कहाँ इस संसार की मूर्खता और पाप के कुण्ड में नीचे गिराए जाने का बड़ा जोखिम उठा रहे हैं? क्या आपके काम की जगह पर? स्कूल में? आस पड़ोस में? एक सांसारिक चर्च में? जो टेलीविजन आप देखते हैं, वहां? आप जो संगीत चुनते हैं, वहां? आप जो किताबे पढ़ते हैं, वहां? आप जिन जगहों पर खरीदारी करते हैं, वहां? अपने जीवन का परिक्षण करें।

कुछ लोग यह कहकर संसार के लोगों से अपनी मित्रता का बहाना देते हैं कि यदि वे धर्मी और बुद्धिमान मित्रों की प्रतीक्षा करते बैठेंगे तो उनके कभी कोई मित्र नहीं होंगे। ऐसों को बुद्धि का जवाब यह है कि संसार के लोगों को अपना मित्र बनाने से अच्छा है कोई मित्र ही न हो! बिना किसी मित्र के, कम से कम सत्य, ज्ञान और धार्मिकता जो परमेश्वर ने आपको सिखाई है, सुरक्षित रहेंगे। नूह, यूसुफ, एलिय्याह, दानिय्येल, और अन्य लोगों के बहुत कम मित्र थे और वे बहुत समृद्ध हुए।

लेकिन ऐसे भक्त और बुद्धिमान मित्र हैं जिनके साथ आप अपने आसपास विद्यमान विश्व में की सबसे अद्भुत बातों के साथ संगति के अद्भुत समय बिता सकते हैं। वे यीशु मसीह की सच्ची कलीसियाओं में पाए जाते हैं, अर्थात दुनिया भर में फैली हुई विश्वासयोग्य आत्माओं की छोटी छोटी मंडलियों में। उनके साथ परमेश्वर के भवन का द्वारपाल (चौकीदार) होना इस संसार के किसी भी उच्च पद या धनवान मित्र से उत्तम है (भजन 84:10)।

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