नीतिवचन 4:13

शिक्षा को दृढ़ता से थामे रह; उसे छोड़ न दे; उसकी रक्षा कर, क्योंकि वही तेरा जीवन है।

शिक्षा ही आपका जीवन है। आप जो कुछ भी जानते हैं वह सब आपको सीखना पड़ा। वह सब जो आपके लिए जानना ज़रूरी है, आपको सीखना पड़ता है। आप जो कुछ भी सही और सत्य सीखते हैं उसे आपको सुरक्षित सम्भालकर रखना है। आपका जीवन गलतियों से सुधार करने और जीने का तरीका जानने के लिए सत्य सिखाने पर निर्भर करता है।

यदि आप शिक्षा से प्रेम रखते हैं और उसके अनुसार चलने के इरादे से उसे प्राप्त करते हैं, तो आप आशीष पाएंगे; यदि आप उसकी अनदेखी करते हैं या उसे मानने से इनकार करते हैं, तो आप शापित होंगे (भजन 50:16-17; नीति 6:23; 8:32-36; 15:32)। बुद्धि को सीखना आपके लिए किसी भी अन्य लालसा, या महत्वाकांक्षा से अधिक महत्वपूर्ण होना चाहिए (नीतिवचन 3:13-14; 8:10; 16:16; 23:23)।

जब तक आपको सिखाया नहीं जाता, तब तक आप कुछ भी नहीं जान सकते, जिसका अर्थ है अपने आप को शिक्षकों के प्रति विनम्र मन से समर्पित करना, फिर वे शिक्षक चाहे परमेश्वर हों, माता-पिता हों, पास्टर हों, या अन्य कोई भी हों। बुद्धिमान व्यक्ति शिक्षा का भूखा होता है ताकि वह समझदार हो सके (नीतिवचन 1:5; 9:9; 19:20)। मूर्ख शिक्षा को तुच्छ जानते हैं, जिससे उनका ही विनाश हो जाता है (नीतिवचन 12:1; 13:18)। जब आपको अच्छे शिक्षक मिलें, तो उनसे वह सब कुछ सीखें जो आप सीख सकते हैं (नीतिवचन 18:1; प्रेरितों 10:33)।

“रस्सी को कास के पकड़ो, उसे अपने हाथों से छूटने मत दो! तुम कर सकते हो! तुम बच सकते हो!” यदि आप समुद्र में डूब रहे हों, और लाइफ-बोट आपको बचाने आ जाए तो क्या आप नाविक के इन शब्दों को नहीं सुनेंगे? आप ज़रूर सुनेंगे, क्योंकि आज्ञा न मानने के परिणाम निश्चित मृत्यु हैं। आप ज़रूर सुनेंगे, क्योंकि रस्सी को मज़बूती से पकड़कर रखना बहुत सस्ता सौदा है और अपनी जान बचाने का बहुत ही आसान काम है।

भले ही आप पर कभी समुद्र में डूबने की नौबत न आएं, लेकिन जब इस मूर्ख और पापी दुनिया के तूफ़ान आपको प्रभावित करेंगें, तो आप पर जीवन-समुद्र में डूबने की नौबत आ पड़ सकती है। केवल निर्देशों का पालन करके ही आप जीवन के तूफान से बच पाएंगे। परमेश्वर हमें अपने माता-पिता, पास्टरों और अपने वचन के माध्यम से शिक्षा देता है। क्या आपने अपना जीवन बचाने के लिए इस शिक्षा को दृढ़ता से थाम लिया है (नीतिवचन 3:18,22; सभो 7:12; व्यवस्था 32:45-47)?

यह नीतिवचन हमें सिखाता है कि शिक्षा को कैसे सुनना है। हम जो कुछ सुनते हैं उसे हमें समझकर के साथ थामना है और उसे कभी छोड़ना नहीं है। बुद्धि की शिक्षा ही आपको जीवन की दुविधाओं और खतरों से बचाएगी। आपको इसे कसकर पकड़ना ज़रूरी और उसे छोड़ना नहीं है। आप जो सीखते हैं उसे थामे रखना हा। आपको उसे याद रखना होगा। इसे किसी भी कीमत पर न बेचें (नीतिवचन 23:23)।

जो सुनने में तत्पर हैं, यीशु ने उनका वर्णन ऐसे लोगों के रूप में किया जिन्होंने उसकी बातें मानीं और उन पर अपने जीवन का निर्माण किया (मत्ती 7:24-27)। उसने दो मनुष्यों का दृष्टांत दिया, एक जिसने अपना घर रेत पर बनाया, और एक जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया। तूफान ने रेत पर बने घर को नष्ट कर दिया, लेकिन चट्टान पर बने घर ने तूफान को आसानी से सह लिया। प्रिय पाठक, जो शिक्षा आप पाते हैं, उसका उपयोग आप कैसे करते हैं?

इन बीते वर्षों में माता-पिता और पास्टर ने आपको कितना सिखाया है? आपने इसमें से कितनी शिक्षा को दृढ़ता से थामे रखा है? या कही ऐसा तो नहीं कि आपने सुनी हुई शिक्षा का अधिकांश भाग छोड़ दिया है, और आपको उसे फिर से सुनने की ज़रूरत है? क्या आप वही गलतियाँ बार-बार करते हैं? क्या आप जीवन में सामने आने वाली स्थितियों पर पिछली शिक्षाओं को तुरंत और आसानी से लागू कर पाते हैं? क्या आप जिस बात पर विश्वास करते हैं उसका बचाव कर पाते हैं? सबक यह है: आपका जीवन शिक्षा को प्राप्त करने और उसका व्यवहारिक उपयोग करने पर निर्भर है। एक अच्छे विद्यार्थी बनें!

जब आप शिक्षा को दृढ़ता से थाम लेते हैं, तो आप उसे अपनी पकड़ में जकड़ लेते हैं। वह छुटकर निकल नहीं जा सकती। आप उसे अपने दिमाग में इस तरह से सुरक्षित कर लेते हैं कि यह हमेशा आपके पास रहेगी। आप अपना जीवन उसके लिए समर्पित कर देते हैं। आप अपने शिक्षकों से सीखने के लिए समर्पित हो जाते हैं, और आप उनके ज्ञान के शब्दों को कभी नहीं भूलेंगे ऐसा आप वादा करते हैं। क्या आप शिक्षा को प्रमाणित करते हैं, उसकी समीक्षा करते और उसपर चिंतन करते हैं? क्या आप उसका विश्लेषण कर तब तक मनन करते हैं जब तक कि वह आपकी आत्मा और अस्तित्व का हिस्सा न बन जाए? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? यह आपके जीवन के लिए है!

माता-पिता, पास्टर और अन्य शिक्षकों को अपनी शिक्षा को क्यों इतनी बार दोहरानी पड़ती हैं? इसलिए क्योंकि सुननेवालों में अधिकतर श्रोता आलसी, हठधर्मी और आसानी से विचलित होने वाले होते हैं। वे शिक्षा का मूल्य नहीं समझते, और इसलिए वे उसे दृढ़ता से थामे रखने के लिए आवश्यक परिश्रम नहीं करते, न कोईकदम नहीं उठाते हैं। अगर शिक्षा को असरदार बनाना हो तो उसे ध्यान देकर सुनना, अपनी सोच का समर्पण करना, उसे अपनाना और उसका व्यवहारिक उपयोग करना आवश्यकता होता है।

ख्रिश्चन पाठक, क्या आपको अपने में सुधार किया जाना और यह बताया जाना कि जीवन कैसे जीया जाता है, प्रिय लगता है? क्या आप बुद्धिमान पुरुषों के विचारों पर चिंतन करने के लिए अपने विचारों का त्याग कर पाते हैं? इन सवालों से खुद को मापें। यही शिक्षा है! यह ज्ञान और नियम है जिसके द्वारा आप अपने जीवन का उद्धार कर सकते हैं। लेकिन बुद्धि और नियम केवल उन्हीं को लाभ पहुँचाते हैं जो उन्हें दृढ़ता से थामे रखते हैं। यह आपके जीवन के लिए है। सुधार और शिक्षा से प्रेम रखें।

शिक्षा स्वर्ग से एक महान आशीर्वाद है, क्योंकि सच्चे और जीवित परमेश्वर के संप्रभु निर्णय के कारण अधिकांश लोगों को शिक्षा से रहित छोड़ दिया जाता है (भजन 147:19-20; 44:9-20; मत्ती 10:6; 15: 24; 13:9-18; 2 थिस्स 2:9-13)। परमेश्वर कहता है कि उसके सुसमाचार के प्रचारकों के पाँव सुंदर हैं क्योंकि वे आपको अनन्त जीवन और उसके प्रति आपके कर्तव्यों के बारे में शिक्षा देते हैं (रोमियों 10:15)।

यदि चर्च के सदस्यों ने प्रेरितों की शिक्षाओं का दृढ़ता से पालन किया होता, तो आज सभी चर्च पूर्ण प्रेरितिक सिद्धांत पर कायम होते। लेकिन मनुष्यों ने उन बहुमूल्य चीज़ों को ऐसे स्थान पर जाने दिया जहाँ ख्रिश्चन धर्म के नाम पर आज हज़ारों झूठी बातें सिखाई जाती हैं। इस विषय में चेतावनी स्पष्ट रूप से दी गई थी (2 कुरिन्थ 11:3-4; 1 थिस्स 5:21; 2 थिस्स 2:15; यहूदा 1:3)।

आपको अब तक की सबसे महान शिक्षा की जो विरासत दी गई है वह बाइबल है। यह परमेश्वर द्वारा प्रेरित छियासठ पुस्तकों का एक दिव्य पुस्तकालय है जो आपको समय और अनंत काल के लिए आपकी सभी आवश्यकताओं के बारे में पूरी तरह से शिक्षा देती है (2 तीमु 3:16-17)। यह बात विशेषकर नीतिवचन की पुस्तक के बारे में सच है (नीतिवचन 1:1-7; सभोपदेशक 12:9-11)। आप बाइबल सीखने और उसका पालन करने पर कितना ज़ोर देते हैं, क्योंकि आपका जीवन उस पर निर्भर करता है (भजन 19:7-11; जस 1:21-25)? आज आप बाइबल के साथ क्या करेंगे?

यदि पुराने नियम के सत्य से पतन हो जाने पर कठोर दण्ड दिया जाता था तो नए नियम के सत्य का उल्लंघन किए जाने पर कितना अधिक दण्ड दिया जाएगा (इब्रानियों 2:1-4; 10:26-31; 12:25-29; प्रकाशितवाक्य 2:14-16)? चूँकि केवल यीशु मसीह के पास ही अनन्त जीवन के वचन हैं, क्या आपने उन्हें दृढ़ता से थामे रखा है (यूहन्ना 6:68)? चूँकि बाइबल परमेश्वर के जन को सिद्ध बना सकती है, क्या आप अपने जीवन से इसकी सच्चाई की रक्षा कर रहे हैं?

यीशु ने कहा कि जिन्हें बहुत दिया गया है वे बहुत के लिए जवाबदेह होंगे (लूका 12:47-48)। यदि आपके पास धर्मनिष्ठ माता-पिता और पास्टर हैं, तो शिक्षा के इस आशीर्वाद के अनुसार आपका न्याय किया जाएगा। क्या आपने इसे अपने जीवन के उद्धार के लिए थामकर रखा है? न्याय के उस महान दिन में, परमेश्वर इस बात को परखेगा कि जो शिक्षा उसने आपके लिए भेजी थी उसका आपने क्या किया।

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