नीतिवचन 4:11

मैं ने तुझे बुद्धि का मार्ग बताया है; और सीधाई के पथ पर चलाया है।

पिताओ! माताओ! इस नीतिवचन वर्णित विश्वासी और महान माता-पिता पर विचार करें। क्या ही अद्भुत दावा है! अपने बच्चों को जो शिक्षा दी है क्या आप उस बारे में सुलैमान के समान साहसपूर्वक और पक्के तौर पर बोल सकते हैं?

इस नीतिवचन को फिर से पढ़ें। क्या आप अपने जीवन के अन्तिम क्षणों में ये शब्द कह पाएँगे? क्या आप में इंतनी हिम्मत है कि आप इन शब्दों का दावा आज और इसी समय कर सकें? क्या परमेश्वर और आपके बच्चे आपसे सहमत होंगे? आपने आज अपने बच्चों के लिए क्या किया है? परमेश्वर का आशीर्वाद और आपके बच्चों की सफलता इस पर निर्भर करती है।

क्या आपने अपने बच्चों को सिखाया है कि एक लम्बी आयुवाला और समृद्ध जीवन कैसे जीया जाता है (नीतिवचन 4:10)? क्या आपने उन्हें सिखाया है कि कैसे जीवन की भटका देनेवाली बातों, परेशानियों और जाल से बचें (नीतिवचन 4:12)? माताओ, आप भी इस विशेषाधिकार और कर्तव्य से मुक्त नहीं हैं (नीतिवचन 1:8; 4:3; 6:20; 31:1-2)।

इस नीतिवचन में तीन सबक हैं – कर्तव्य, संतोष और अच्छी परवरिश व शिक्षण का भरोसा। सुलैमान के शब्दों को पढ़ें, और तीनों सबक देखें, और आज से ही उन सबकों को अपने जीवन में लागू करने का संकल्प लें। आपके लिए अवश्य है कि आप अपने बच्चों को शिक्षा और निर्देश दें; और उन्हें सही बातों की शिक्षा और निर्देश दें; आपको इस पूरे विश्वास के साथ करना है।

हाई स्कूल से स्नातक होना या कॉलेज की डिग्री प्राप्त करना परमेश्वर को प्रभावित नहीं करता है, न ही इससे बच्चों का कुछ ज्यादा भला होता है। परमेश्वर को न माननेवालों के पास कई मास्टर और पीएचडी की डिग्रियां हैं, और ऐसी उच्च शिक्षाप्राप्त अधिकांश लोग या तो नास्तिक हैं, या मूर्तिपूजक। इतिहास पर गौर करें, तो परमेश्वर को माननेवाले केवल 1% पवित्र लोगों ने कभी कॉलेज जाने के बारे में सोचा था। नास्तिक और मूर्तिपूजक मानवतावादी और सांसारिक लोगों के लिए स्वर्ग और सच्ची सफलता की बातें बेबुनियाद हैं। दानिय्येल में बसनेवाली उत्तम आत्मा और तीमुथियुस का सच्चा विश्वास वह बातें हैं जिन्हें आपको अपने में विकसित करना आवश्यक है।

“बुद्धि का मार्ग” और “सीधाई का पथ” आज की शिक्षा-प्रणाली के विपरीत हैं। ये चीजें, जो जीवन में परमेश्वर और मनुष्य को प्रसन्न करती हैं, अब सिखाई नहीं जाती हैं। आज के स्कूलों का दायरा और क्रम छोटे मानवतावादी बनाने के लिए नरक से एक पाठ्यक्रम है। माता-पिता, आपको घर पर ईश्वरीय बुद्धि और सच्चा ज्ञान सिखाना चाहिए। पास्टर जिम्मेदार नहीं है, क्योंकि रविवार के कुछ घंटे बच्चों को उनके विश्वासयोग्य माता-पिता की ओर से दी जानेवाली दैनिक शिक्षा की बराबरी नहीं कर सकते हैं।

क्या आपके बच्चे अनुग्रहकारी हैं? काम में मेहनती हैं? उच्च ऊर्जा और ध्यान देने में सक्षम हैं? उत्तम चरित्र वाले हैं? क्या उनमें वित्तीय बुद्धि है? क्या वे पाप से नफरत करते हैं? घर देर से आते हैं? अन्याय करते हैं? क्या वे सामाजिक रूप से कुशल हैं? अच्छे वक्ता हैं? विचारशील और बड़े दिलवाले हैं? क्या वे सुसमाचार को जानते हैं? क्या वे जीवन के आम प्रश्नों के उत्तर देने में सक्षम हैं? क्या वे जानते हैं कि जीवन की समस्याओं को बाइबल के अनुसार कैसे हल करना है?

क्या उनका वचन सोने जैसा अच्छा है? क्या वे दयालु और क्षमाशील हैं? बुद्धिमान और विवेकशील हैं? पवित्र और शुद्ध हैं? क्या वे वास्तविक दुनिया में सम्मानित हैं? क्या उनके नाम का सम्मान किया जाता है? क्या उनके कई दोस्त हैं? क्या वे दूसरों की परवाह करते हैं? यहाँ तक कि उन लोगों की भी जो किसी भी तरह से ऋण नहीं चुका सकते? क्या वे स्वर्ग के राज्य की सेवा करते हैं? चर्च के लिए किसी भी समय कुछ भी करने को तैयार हैं?

माता-पिता, क्या आप उस बाप के समान आश्वस्त हैं जो इस नीतिवचन में बोल रहा है? परमेश्वर ने आपको सत्य इसलिए नहीं दिया है कि आप उसे दबा दें या उसके मूल्य की अवहेलना करें। अय्यूब 32 पढ़ें और युवा एलीहू के पवित्र विश्वास को देखें। आपको साहसी, धर्मशिक्षा में पराक्रमी और आलोचनात्मक होना चाहिए, क्योंकि शैतान और दुनिया आपका विरोध करने और सत्य को दबाने के अपने प्रयासों पर और भी ज़ोर दें रहें हैं। बाइबल के रूप में आपके पास एकमात्र और अंतिम उत्तर है, और आपको उसका उपयोग करना होगा। आपको वचन के विपरीत किसी भी परिकल्पना को ठुकरा देना होगा (भजन 119:128; यशायाह 8:20)।

पिताओ, आज रात आप अपने परिवार को क्या देंगे? नीतिवचन का एक अध्याय पढ़ें और उन्हें एक वचन समझाएँ। अगर आप हर दिन उन्हें एक छोटा सा बिंदु सिखाते हैं तो वह बहुत जल्द ही बुद्धि का पहाड़ बन जाएगा। अगर आपको इस पर विश्वास नहीं है, तो अपने आँगन में चींटियों को देखें (नीतिवचन 6:6-11)। हर दिन ऐसा करने से आप सुलैमान के समान निर्भीकता से बोल सकते हैं। यह परमेश्वर के आशीर्वाद और आपके बच्चों की सफलता के लिए है।

यहाँ दिया गया सबक पिताओं के लिए कोई सुझाव नहीं है – बल्कि यह एक आज्ञा है (इफिसियों 6:4)। हर मनुष्य को अपने उस काम को पूरा करना ज़रूरी होता है जिसे करने की आज्ञा उसने स्वर्ग, अर्थात परमेश्वर से पाई है, और उसे विश्वास की आँखों भविष्य में मिलनेवाले प्रतिफल की ओर लगानी हैं। परमेश्वर की महिमा, विश्वास की रक्षा और अपने परिवार के सुख के लिए एक ईश्वरीय बीज इसके लायक है। शिक्षण के कर्तव्य, विषयवस्तु और विश्वास पर विचार करें – और वैसा ही करें!

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