नीतिवचन 30:7
मैंने तुझ से दो बातें चाही हैं; सो मेरे मरने से पहले उन्हें मुझे देने से इन्कार न कर।
क्या आप बुद्धिमानी से प्रार्थना करते हैं? क्या आप उत्साह और तत्परता से प्रार्थना करते हैं? आप अपनी प्रार्थनाओं के द्वारा अपने मन को खोलतें हैं। जीवन अल्प है, और परमेश्वर को प्रसन्न करना आप की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा होनी चाहिए। इस नेकनियत लक्ष्य का पीछा करने में केवल कुछ ही मनुष्य अपने जीवन का अच्छी तरह से उपयोग करते हैं। आगूर ने परमेश्वर के लिए एक सम्मानजनक जीवन जीने में दो महत्वपूर्ण बातों के लिए प्रार्थना करके अपने मन को बड़ी दृढ़ता से अभिव्यक्त किया। जीवन की अल्पता को मानकर और अपनी सबसे बड़ी आवश्यकता का अंगीकार करते हुए उसने इन दो महत्वपूर्ण बातों के लिए आक्रामक रूप से प्रार्थना कीं।
उसकी प्रार्थना लंबी नहीं थी क्योंकि एक लम्बी प्रार्थना से अधिक मूल्यवान प्रार्थना की विषयवस्तु और ह्रदय की उत्सुकता होती है। परमेश्वर माला जपने के व्यर्थ दोहराव और उसकी मूर्तिपूजक जड़ से घृणा रखता है (मत्ती 6:7-8)। यद्यपि आगूर की अन्य आवश्यकतायें भी थी, फिर भी वह आध्यात्मिक आशीष की सर्वोच्च प्राथमिकता को जानता था। उसकी पहली विनती सीधे तौर पर आध्यात्मिक थी, दूसरी विनती थी कि वह अपनी शारीरिक जरूरतों को भी प्रार्थना के जरिए परमेश्वर के सामने रखे। यदि आप हमेशा पहले परमेश्वर के राज्य और उसकी धार्मिकता की खोज करते हैं तो वह बाकी सब आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा (मत्ती 6:33)।
आगूर ने क्या विनती की? उसने पहले परमेश्वर से यह याचना की कि वह उसे व्यर्थता और झूठी बातों से बचाए (नीति 30:8)। उसने गिडगिड़ाकर प्रार्थना कीं कि परमेश्वर उसे मनुष्यों के मूर्ख और लाभरहित विचारधाराओं और इस दुनिया द्वारा प्रदान किए जाने वाले खाली और बेकार जीवन से मुक्ति दिलाए। उसने यहोवा से विनती की कि वह उसे मनुष्यों के धोखेबाज झूठ पर विश्वास करने से बचाए। वह जानता था कि सांसारिक विचारधाराएं और भागदौड़ व्यर्थ और कष्टदायक हैं (भजन 119:113; सभो 1:1-3; 12:8; मत्ती 6:24; 1 तीमू 4:8; 2 तीमू 3:1-5; याकूब 4:4; 1 यूहन्ना 2:15-17)।
आगूर ने क्या विनती की? तब उसने परमेश्वर से विनती की कि वह उसे केवल जरूरतों की चीजें और पर्याप्त सफलता दे। वह निर्धनता और धन-दौलत दोनों से बचना चाहता था, क्योंकि वह जानता था कि दरिद्रता और धन-दौलत दोनों ही अपने अपने प्रलोभनों और परीक्षाओं को लेकर आते हैं (नीति 30:9)। उसने दोनों के विरुद्ध प्रार्थना कीं, क्योंकि शारीरिक स्वभाव की समस्याएं दोनों ही को ले आ सकती हैं, बल्कि उसने इन दोनों बातों की बहुतायत के कारण उसके परमेश्वर के प्रति जो प्रेम है उस पर पड़ने वाले असर के खिलाफ प्रार्थना की। धन-दौलत उसके मन को अहंकारी बना सकती है और उसे परमेश्वर से दूर कर सकती है (नीति 18:11; 28:11; 1 तीमू 6:6-10), तो वही, गरीबी या दरिद्रता उसे चोरी करने और परमेश्वर के नाम की अप्रतिष्ठा करने की ओर ले जा सकती है (नीति 1:10-19; 6:30-31)।
यह दोनों विनतियां बहुत बुद्धिमानपूर्ण और नेक-नियत थी। आगूर ने प्रार्थना का उपयोग अपनी वासनाओं को पूरा करने के लिए नहीं किया जैसा कि अधिकांश मनुष्य प्रार्थना करते समय करते हैं (याकूब 4:3)। उसने परमेश्वर की महिमा, सत्य, और अपनी आत्मा की आध्यात्मिक भलाई की खोज की, भले ही उसका अर्थ कुछ सफलता का त्याग करना हो। जैसा कि सुलेमान के मामले में हुआ, परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए बुद्धि प्राप्त करना धन से अधिक महत्वपूर्ण था (1 राजा 3:5-13)। जैसा कि मूसा के विषय में था, परमेश्वर के लोगों के साथ दुख भोगना पाप में थोड़े दिन का सुख भोगने से उत्तम था (इब्रा 11:24-26)।
आगूर की आक्रामक प्रार्थना पर विचार करके देखो। सबसे पहले, उसने परमेश्वर की बातों के लिए विनती कीं। उसने मात्र एक कल्पना सूचित नहीं कीं, और न ही किसी विचार की इच्छा जाहिर कीं; उसने याकूब के समान, जो उसके कई वर्षों पूर्व होकर गया, आशीष की मांग कीं (उत्पत्ति 32:24-28)। वह इन विनतियों को लेकर अत्यन्त गंभीर था, क्योंकि वह जानता था कि यह पवित्र याचिकाएं थीं। फिर उसने अपनी निश्चित नश्वरता का अंगीकार किया, अविनाशी परमेश्वर की दुहाई दीं कि उसके थोड़े ही दिनों के जीवन का अंत होने से पहले उसे शीघ्र उत्तर दे (भजन 90:10-12)। उसकी प्रार्थना निश्चय ही सुनी गई क्योंकि उसकी प्रार्थना अपनी याचिकाओं में आग्रहपूर्ण और विषयवस्तु में धर्मी थी (याकूब 5:16)।
आप शारीरिक बातों के लिए अधिक प्रार्थना करते हैं या आध्यात्मिक बातों के लिए? आपने पिछली बार बुद्धि के लिए (याकूब 1:5), परमेश्वर का भय माननेवाला एक चित्त देने के लिए (भजन 86:11), पवित्र आत्मा के लिए (लूका 11:13), परमेश्वर आप से अपने उपदेशों का पालन कराए इस के लिए (भजन 119:35-) 37), या प्रभु आपकी गलतियों को आपको दिखाए इसके लिए (भजन 139:23-24) कब प्रार्थना कीं थीं? यदि परमेश्वर से प्रेम करना और उसे प्रसन्न करना आपकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, तो आपके पास आध्यात्मिक बातों के लिए प्रार्थनाओं की विनतियाँ होंगी। अगर आप आध्यात्मिक बातों के लिए प्रार्थना को पहला स्थान देते हैं, तो स्वर्ग में का परमेश्वर आपकी बाकी सब आवश्यकताओं को पूरा करेगा।
आपने इन बातों के लिए परमेश्वर के साथ आखिरी बार कब कुश्ती लड़ी, और उसकी ओर से ना सुनने से इनकार किया? महत्वपूर्ण और ज़िद्दी प्रार्थनाओं का उत्तर मिलता है; आरामदायक और जल्दबाजी में कीं हुई प्रार्थनाओं का कोई उत्तर नहीं मिलता (लूका 11:5-13; 18:1-8; रोमियों 12:12; इफि 6:18)। प्रार्थना का पवित्र आत्मा आपको अधिक से अधिक प्रार्थना करने के लिए प्रेरित करे, और इसे करने के लिए आपके प्रयासों में आपकी सहायता करे (रोमियों 8:26-27)।
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