नीतिवचन 30:24
पृथ्वी पर चार छोटे जन्तु हैं, जो अत्यन्त बुद्धिमान हैं :
आप पृथ्वी पर परमेश्वर की सृजी हुईं छोटी-छोटी चीज़ों से बहुत कुछ सीख सकते हैं। भविष्यवक्ता अगुर यहाँ प्रकृति में विद्यमान चीज़ों के अवलोकन के माध्यम से अपने कुलीन छात्रों को ज्ञान सिखाना जारी रखता है। उसने चार बहुत छोटी चीज़ों को सूचीबद्ध किया, और बताया कि इन छोटे जीवों में से प्रत्येक से बहुत ज्ञान सीखा जा सकता है। सुनने में सावधान रहें, प्रिय पाठक, और आप ज्ञान सीख सकते हैं।
लोग इन चार जीवों – चींटियों, बिज्जू, टिड्डों और मकड़ियों – को मामूली, मूर्ख और किसी अपने सम्मान के लिए अपात्र मानते हैं। सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने उनमें उनके लिए जो ज्ञान रखा है, वे उसे सिखने में अपनी ताकत या धन लगाने के बजाए वे इन जीवों को नष्ट करने की कोशिश में बहुत अधिक ताकत या धन या समय और प्रयास लगाते हैं। इन जीवों में उस ज्ञान की खोज करना मनुष्य को बहुत ही छोटापन महसूस होता है जिसे वह अपने अथक प्रयास से खुद कभी हासिल नहीं कर सका है। सुनें, प्रिय पाठक, परमेश्वर इन जीवों से आपको विनम्रता का एक सामान्य पाठ भी सिखा रहे हैं।
इन छोटे जीवों की सहज प्रवृत्ति अक्सर मनुष्य की तर्क और बुद्धि की उच्च दुनिया से बेहतर होती है। दूर की सोचने में चींटी का मुक़ाबला कौन कर सकता है? बिज्जू के समान सुरक्षित कौन है? टिड्डे के समान सहयोगी कौन है? मकड़ी के समान मेहनती कौन है? सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने मनुष्य को इन छोटे छोटे जीवों से बुद्धि सिखाने का तरीका अपनाया है। परमेश्वर के बिना, मनुष्य मूर्ख हैं। इन चार जीवों की आदतों में वह बुद्धि छिपी है जो लोगों को सिखा सकती है, सुधार सकती है और फटकार लगा सकती है। लेकिन बिजनेस स्कूल आज भी सफलता के कारणों पर अटकलें लगाते हैं।
आप कितने दूरंदेश और होशियार हैं? क्या आप सिर्फ़ आकार, सुंदरता, आवाज़ या दिखावे से प्रभावित होते हैं? या आप बुद्धि और आचरण, दूरदर्शिता और परिश्रम और दिखावे से कहीं ज़्यादा मूल्यवान अन्य गुणों की तलाश करते हैं? बुद्धि मुख्य चीज़ है, और भला होगा कि आप इन छोटे, बदसूरत, शांत और मितभाषी प्राणियों में जो बुद्धि है उसका अवलोकन करें।
फिर भी आगूर ने कुछ सुन्दर चालवाले प्राणियों की भी सराहना की, इसलिए उसने चार अन्य प्राणियों को सूचीबद्ध किया जो दिखने में, अपनी चाल में, आचरण और प्रभाव में काफ़ी असरदार और सुंदर हैं (नीतिवचन 30:29-31)। सही काम करना और बुद्धिमान होना ही काफ़ी नहीं है, क्योंकि आपको दोनों का अभ्यास करने के तरीके में आकर्षक और मनभावन भी होना ज़रूरी है। क्या आप सुन्दर शिष्टाचार से अपने भक्तिपूर्ण सद्गुण को सुशोभित करते हैं?
परमेश्वर अपने सभी कामों में महिमामय है, यहाँ तक कि छोटे कामों में भी। परमेश्वर ने अय्यूब के सामने अपने सबसे बड़े जीवों, लेवियोथॉन और बेहेमोथ (अय्यूब 40:15; 41:11) का बखान किया, लेकिन यहाँ आप छोटी-छोटी चीज़ों में भी उनकी महिमा देख सकते हैं। क्या आप इतने करीब से देखते हैं और इतना सोचते हैं कि पहचान सकें कि उनकी पूरी रचना उनकी महिमा का बखान करती है? क्या आपको हमिंगबर्ड को देखकर उतना ही आनंद मिलता है जितना हाथी को देखकर, बबून को देखकर उतना ही आनन्द होता है जितना घोड़े को देखकर, छोटे भालू और चील को देखकर?
प्रकृति में ज्ञान के ऐसे पाठ हैं जो इस तथाकथित प्रबुद्ध दुनिया में खो गए हैं। उदाहरण के लिए, प्रेरित पौलुस ने बालों की लंबाई के प्राकृतिक नियमों का पालन करने का अनुरोध किया (1 कुरिन्थ 11:14-15)। पुरुषों का लंबे बाल रखना घृणित हैं, लेकिन महिलाओं के लंबे बाल रखना शानदार हैं। इस पीढ़ी के विकृत लोगों को नज़रअंदाज़ करते हुए, इतिहास में अधिकांश समाजों ने इस नियम का पालन किया है। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि हिप्पी या डिज़ाइनर क्या कहते हैं; नियम आम तौर पर सच होता है। पुरुषों के लंबे बाल उतने ही शर्मनाक हैं जितने कि लेस वाला नाइटगाउन पहनने वाले पुरुष, चाहे कैटलिन जेनर कुछ भी करें।
पौलुस ने अधिकांश समाजों में उपजतीसमलैंगिकता की भी सार्वत्रिक रूप से भर्त्सना करने का अनुरोध किया (रोमियों 1:26-27)। बाइबल इस विकृति की निंदा करती है, लेकिन प्रकृति भी ऐसा ही करती है। अधिकांश लोगों ने हमेशा इसका तिरस्कार किया है। शरीर रचना विज्ञान, जीव विज्ञान, स्वच्छता, स्वास्थ्य, चरित्र, यौन आकर्षण और मानव समाज की मामूली समझ इसके प्रति घृणा पैदा करती है। अधिकांश देशों में समलैंगिकता के विरुद्ध कठोर दंड वाले कानून हुआ करते थे, और अमेरिका के सभी पचास राज्यों में इसके विरुद्ध कानून थे। हाल ही में बहुत प्रयास के बाद उन्हें निरस्त किया गया। 21वीं सदी में कई राज्यों में ये क़ानून थे।
भविष्यवक्ता अगुर ने चार नीतिवचनों में ज्ञान के चार पाठ पढ़ाए, जिसमें उसने चार छोटे जीवों में ज्ञान के अद्वितीय चरित्र लक्षणों की ओर इशारा किया गया। उनमें हैं, चींटी (25), बिज्जू (26), टिड्डा (27), और मकड़ी (28)। इन जीवों में से प्रत्येक के उदहारण के द्वारा अगुर जो सबक सिखाना चाहता था इसे अगर आप नहीं समझते हैं तो आप उसके सबक से चुक जाएंगे। वे सबका हैं, दूरदर्शिता और बचत (25), जोखिम-मुक्त सुरक्षा (26), समाज में सहयोग (27), और अथक परिश्रम (28)।
इस संसार के दीन-दुर्बल लोगों से मिलते समय उन्हें तुच्छ न समझो, क्योंकि परमेश्वर ने उन्हें विश्वास में धनी और अपने राज्य के वारिस होने के लिए चुना है (याकूब 2:5; 1 कुरिन्थियों 1:26-29)। और जब आपको बुद्धि की आवश्यकता हो, तो आपको परमेश्वर के पास जाना चाहिए जो बुद्धि का भण्डार है, और जो इन छोटे-छोटे प्राणियों को भी बहुत अधिक बुद्धि दे सकता है। निश्चय ही वह आपकी जज़रूरत पूरी कर सकता है (याकूब 1:5)।
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