नीतिवचन 30:20

व्यभिचारिणी की चाल भी वैसी ही है; वह भोजन करके मुँह पोंछती, और कहती है, मैं ने कोई अनर्थ काम नहीं किया।

व्यभिचारिणी समझ से परे होती है! उसमें विवेक कम और मिथ्याभिमान सबसे ज्यादा होता है। वह संभवतः सबसे जघन्य विश्वासघातों में से एक को अंजाम देती है, फिर भी ऐसे बाते करती है और रहती है, जैसे कि उसने कुछ भी नहीं किया हो। वह अपने भरोसेमंद पति और बाकि जान-पहचान के लोगों को उसपर संदेह करने से बचाने के लिए पत्नी जैसी आदतें बनाए रखेगी। चार अचंभित करनेवाली चीजों का वर्णन करने के बाद जो उसकी समझ से परे हैं, भविष्यवक्ता आगुर व्यभिचारिणी की तुलना उनसे करता है (नीतिवचन 30:1,18-19)।

उकाब पक्षी जिस तरह से असमान में ऊँचा उड़ता है और शिकार की ओर गोता लगाता है वह अद्भुत है। किसी चिकनी चट्टान पर बिना हाथ-पैर के सांप जिस तरह चलता है, वह अद्भुत है। जिस तरह एक भारी जहाज बिना चप्पू या निशान के समुद्र में आसानी से चलता है वह अद्भुत है। और जिस आसानी और शक्ति से पुरुष एक कुंवारी कन्या का मन जीत लेता है वह अद्भुत है। इन चार चीजों को समझना कठिन है, और उसी प्रकार यह विश्वास करना कि एक विवाहित औरत किसी अन्य पुरुष के साथ आखिर कैसे यौन संबंध बना सकती है (नीतिवचन 30:18-20)।

इस नीतिवचन में उल्लेखित भोजन शाब्दिक नहीं है – यह व्यभिचारिणी की यौन क्रियाएं हैं। वह किसी अजनबी के सामने अपने पैर खोलती है और उस शारीरिक सुख का आनंद लेती है जिसका आनंद उसे केवल अपने बिस्तर पर अपने पति के साथ लेना चाहिए। भोजन का उपयोग यहाँ संभोग के लिए एक व्यंजन के रूप में किया गया है, जैसा कि पहले किया गया है (नीतिवचन 5:15; 9:17; 20:17)। हालाँकि बाइबल अन्य स्थानों पर स्पष्ट शब्दों का उपयोग करती है, यहाँ पर इस नीतिवचन की समझ को और भी स्पष्ट रूप से बढ़ाने के लिए व्यंजना का उपयोग किया गया है (यहेजकेल 16:17,25-26; 23:16-21)।

जब वह अपना मुँह पोंछती तो रुमाल का ज़िक्र नहीं है – यह अपनी पोल खुलने से बचने के लिए अपने पैरों की चाल को छुपाना है। वह अपने इस नाजायज़ संबंधों को अपने पति और अन्य लोगों से छिपाने के लिए हर संभव प्रयास करती है। वह इंतजार करती है कि कब उसका पति के घर से जाता है (नीतिवचन 7:19-20; उत्पत्ति 39:7-12)। वह तेज़ी से घरेलू कामकाज ख़त्म करती है; जो समय बर्बाद हो गया था उसकी नुकसान भरपाई के लिए जल्दी-जल्दी काम करती है; व्यभिचार के बाद वह अपने पाप के हर सुराग को मिटा देती है; वह नहाती है और अपने पति से मिलने की तैयारी करती है जैसे कि सब कुछ ठीक हो।

वह अपने शब्दों और कार्यों से अपने पति को ऐसा दिखाती है कि सब कुछ ठीक है। वह घर में और सार्वजनिक स्थानों पर अपने पति से प्यार करने का दिखावा करती है। वह उसके साथ बिस्तर पर जाती है और उसके साथ इस तरह अंतरंग होती है मानो सब कुछ ठीक हो। वह अपने बच्चों के साथ खेलती है, पड़ोसियों से बातें करती है, रविवार को चर्च जाती है, अच्छे कपड़े पहनती है और अपनी शादी की अंगूठी पहनती रहती है। उसमें अपने किए पर कोई मलाल, अपराधबोध या पछतावा नहीं है। अपने जघन्य पाप के बावजूद, वह ऐसा व्यवहार करती है मानो उसने कुछ भी गलत नहीं किया है।

वर्तमान पीढ़ी फिल्मों और धारावाहिकों, अभिनय करनेवाले कलाकारों और अभिनेत्रियों, रोमांस उपन्यासों, मनोचिकित्सकों और मूर्तिपूजक विवाह-परामर्शदाताओं द्वारा व्यभिचारियों को ग्लैमराइज करती है। हॉलीवुड की फिल्मों जैसे “ब्रेवहार्ट,” “डॉक्टर ज़ीवागो,” “डेस्परेट हाउसवाइव्स,” “सेक्स एंड द सिटी,” और प्रिंसेस डायना, और बॉलीवुड की फिल्मों जैसे मर्डर आदि के बारे में सोचें! हॉलीवुड-बॉलीवुड कभी शादी को ग्लैमराइज़ नहीं करता! कभी नहीं! जबकि एक समय ऐसा था जब व्यभिचार के लिए मृत्युदंड, या सार्वजनिक स्थानों पर कोड़े लगाना या मुँह काला किया जाता था, आज इसका मज़ाक उड़ाया जाता है और एक रोमांचक घटना के रूप में इसकी प्रशंसा की जाती है। हालाँकि यह कई देशों के क़ानूनों में आज भी अपराध है, लेकिन उन में से कोई भी देश इस पर अमल नहीं करता है। सारा संसार व्यभिचार का यह भोजन खाता है, अपना मुंह पोंछता है, और कहता है, मैं ने कोई दुष्टता नहीं की!

परन्तु स्वर्ग में एक परमेश्वर है जो व्यभिचार और परस्त्रीगमन से बैर रखता है। यह कोई प्रेम-सम्बन्ध नहीं है: यह प्रेमी होना नहीं है; यह कोई कमज़ोर क्षण नहीं है; यह व्यभिचार है – विवाह अनुबंध और विवाह का उल्लंघन (निर्ग 20:14)। परमेश्वर ने जिस देश को अपनी व्यवस्था दी उस देश में व्यभिचारियों को मौत के घाट उतार दिया जाता था (लैव्य 20:10; यहेजकेल 16:38), और यहूदियों ने यीशु को ऐसे ही एक व्यभिचार के मामले में फंसाने की साजिश रची, परन्तु उसने उस मामले को जिस तरह से निपटाया उससे उस व्यवस्था में कुछ भी नहीं बदला जो परमेश्वर ने देश के नागरिकों को दीं थी (यूहन्ना 8:1- 11)।

परमेश्वर ने स्त्री के शरीर की रचना ऐसे कीं कि विवाह से पहले उसके कौमार्य को साबित किया जा सकता है, और उसने मूसा को व्यवस्था दीं और उसमें प्रावधान दिया कि विवाह के बाद बेवफाई को उजागर करने के लिए परीक्षा ली जाए (व्यवस्था 22:13-21; गिनती 5:11-31)। स्त्री की शुद्धता को प्रमणित करने के लिए वह किस हद तक जाता है? उसने उस औरत के हाथ ही काटने का आदेश दिया जो किसी ग़ैर मर्द के गुप्तांगों को छूती है, भले ही वह लड़ाई में अपने पति की सहायता कर रही हो (व्यवस्थाविवरण 25:11-12)। हो सकता है कि उसने मन के कठोर पुरुषों के लिए बहुविवाह की अनुमति दी हो, लेकिन बहुपतित्व की अनुमति कभी नहीं दी (निर्गमन 21:10-11)।

इस नीतिवचन में जिस किसी भी व्यभिचारिणी को दोषी ठहराया गया है और निंदा की गई है, उसके लिए पश्चाताप से बहुत फर्क पड़ता है। प्रभु यीशु मसीह किसी भी अन्य पाप के समान ही इस पाप को भी तुरंत माफ कर देता है (लूका 7:36-50; यूहन्ना 4:4-42; 8:1-11; 1 कुरिन्थ 6:9-11)। यीशु ने पश्चाताप करने वाली वेश्याओं को बड़ी प्रसन्नता से अपनाया, और उन्होंने उन धार्मिक लोगों से पहले, जो खुद को धर्मी समझते थें, उसके राज्य में प्रवेश किया (मत्ती 21:31-32)। आप परमेश्वर–भक्ति के शोक के द्वारा अपने आप को इस जघन्य पाप से पूरी तरह मुक्त कर सकते हैं (2 कुरिन्थ 7:10-11)। उसकी महिमा!

परमेश्वर ने बतशेबा को दो बार यीशु मसीह के पूर्वज के रूप में सम्मानित किया (2 शमू 12:24; मत्ती 1:6; लूका 3:31; 1 इति 3:5)। उस वंशावली में उसने तामार और राहाब भी ज़िक्र किया, हालाँकि वे व्यभिचार के पाप के भी दोषी थी (मत्ती 1:3,5)। जबकि मरियम मगदलीनी के पाप, जो कभी सात दुष्टात्माओं से ग्रस्त थी, ज्ञात नहीं हैं, फिर भी यीशु अपने पुनरुत्थान के बाद पहली बार उसके सामने प्रकट हुआ था (मरकुस 16:9)। पश्चाताप करने वाले पाठक आनन्द करो! आपके पाप क्षमा किये गये हैं! शांति से जाओ, और फिर पाप मत करो!

यह नीतिवचन व्यभिचारी महिलाओं का वर्णन करता है, क्योंकि नीतिवचन की पुस्तक मुख्य रूप से युवा पुरुषों के लिए ज्ञान और चेतावनी की पुस्तक है (नीतिवचन 1:1-7)। लेकिन हर व्यभिचारिणी के लिए एक व्यभिचारी होता है। प्रत्येक पुरुष याद रखे कि जब परमेश्वर ने व्यभिचारी स्त्री और व्यभिचारी पुरुष दोनों का न्याय किया तब उसने दोनों को मृत्युदण्ड ही दिलाया (लैव्य 20:10)। धर्मी पुरुष विवाह करते समय अपनी आँखों से वाचा बाँधते हैं – वे किसी अन्य महिला के साथ यौन अंतरंगता के बारे में नहीं सोचेंगे (अय्यूब 31:1)। सुलैमान ने अन्य स्त्रियों की ओर देखने की निंदा की, और उसने पुरुषों को सिखाया कि वे अपनी पत्नी के साथ संतुष्ट रहें (नीतिवचन 6:24-26; 5:18-20)।

व्यभिचारिणी बनने के एक से अधिक मार्ग हैं। मूर्खता का विचार ही पाप है, इसलिए मन की कोई भी कल्पना परमेश्वर की दृष्टि में वास्तविक कार्य के ही बराबर है (नीतिवचन 24:9; निर्गमन 20:17; अय्यूब 31:1; मत्ती 5:28)। एक धर्मपरायण स्त्री विचार और कर्म में पवित्र होती है (तीत 2:5; 1 पतरस 3:2)। जिस प्रकार एक स्त्री को रोमांस उपन्यास पढ़ने, कामसूत्र के चित्र देखने या हॉलीवुड-बॉलीवुड की रोमांस फिल्मों का आनंद लेने की स्वतंत्रता नहीं है वैसे ही एक पुरुष के लिए अश्लील साहित्य को देखकर कल्पना करने की स्वतंत्रता नहीं है।

व्यभिचारिणी बनने के एक से अधिक तरीके हैं। स्वर्ग का पवित्र परमेश्वर मसीहियों का या कलीसियाओं का इस संसार के साथ मित्रता रखने को आध्यात्मिक व्यभिचार की दृष्टि से देखता है (यहेजकेल 16:1-59; होशै 1:1-3; 9:1; 2 कुरिन्थ 11:1-4; याकूब 4:4)। वह जलन रखनेवाला परमेश्वर है, और वह अपनी महिमा, प्रेम, और आराधना को किसी अन्य के साथ साझा नहीं करेगा (व्यवस्था 4:23-26; यहोशू 24:19; इब्रानियों 12:28-29)।

वह उन लोगों को दुत्कारता है जो सोचते हैं कि वे एक ही समय में उससे और दुनिया की चीज़ों से प्रेम रख सकते हैं (मत्ती 6:24; फिलि 3:18-19; 1 यूहन्ना 2:15-17)। जैसे एक पुरुष इस बात को स्वीकार नहीं करता कि उसकी पत्नी अन्य प्रेमियों को याद करने सकती है या उनसे प्रेम रख सकती है, वैसे ही परमेश्वर उसकी आरधना को भ्रष्ट या विकृत किए जाने को कभी स्वीकार नहीं करता (यहेजकेल 23:38-39; 2 कुरिन्थ 6:14-17)। यदि आप संसार से प्रेम रखते हैं, तो आप उसके शत्रु के साथ सम्बन्ध या व्यभिचार कर रहे हैं!

यीशु मसीह ने यूहन्ना को एक बड़ी वेश्या का दर्शन दिखाया जिसकी बेटियां व्यभिचार करती हैं और जो घृणित कार्यों और गंदे व्यभिचार से भरी हुई थी (प्रकाशितवाक्य 17:1-6)। यह वेश्या भी भोजन करती है, अपना मुंह पोंछती है, और निर्दोष और शुद्ध होने का दावा करती है, क्योंकि वह एक विशिष्ट चर्च है जो स्वर्ग के परमेश्वर के खिलाफ आध्यात्मिक व्यभिचार के लिए प्रसिद्ध है। उस पर आनेवाले कठोर न्याय का विस्तार से वर्णन किया गया है (प्रकाशितवाक्य 17:15-17; 18:1-24)। वह कौनसी कलीसिया है? वह नगर जिसने यूहन्ना के दिनों में संसार पर शासन किया था (प्रकाशितवाक्य 17:18)! उनकी बेटियाँ कौन हैं? वे झूठी कलीसिया खुद को प्रोटोस्टेंट तो कहती हैं, पर चलती रोमी कलीसिया के सिद्धांतों पर!

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