नीतिवचन 30:17
जिस आँख से कोई अपने पिता पर अनादर की दृष्टि करे, और अपमान के साथ अपनी माता की आज्ञा न माने, उस आँख को तराई के कौवे खोद खोदकर निकालेंगे, और उकाब के बच्चे खा डालेंगे।
एक किशोर का अपने माता-पिता की ओर अनादर की दृष्टि से देखना कितना बुरा होता है? परमेश्वर ने अपना उत्तर आगूर भविष्यवक्ता के लिखे हुए वचन द्वारा दिया। शिकारी पक्षी ऐसे बुरे बच्चों की आँखो को खोद कर खा जाएंगे! पिता या माता के विरुद्ध इस दुष्ट अपराध के लिए परमेश्वर भयंकर न्याय के साथ लोगों के सामने उनका तमाशा बनाएगा। आज आमतौर पर और कितना अधिक अनादर बर्दाश्त किया जाता है!
क्या यह नीतिवचन 21वीं सदी में अप्रासंगिक है, जैसा कि इस स्त्रीवत और विद्रोही पीढ़ी के अधिकांश लोग कहेंगे? आपको चुनाव करना होगा कि परमेश्वर की प्रेरित बाइबल गलत है, या परमेश्वर द्वारा दी गई व्यवस्था सही है। सुलैमान के पिता दाऊद ने परमेश्वर की व्यवस्था के विषय में लिखा, “इस कारण मैं तेरे सब उपदेशों को सब विषयों में ठीक जानता हूँ; और सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूँ” (भजन संहिता 119:128)।
यदि आप पृथ्वी पर बचे हुए उन दुर्लभ विचारकों में से एक हैं, तो आप जानते हैं कि कहीं न कहीं कुछ तो गलत है, क्योंकि सभी स्तरों पर और सभी क्षेत्रों में अधिकार का अनादर भ्रामक और चिंताजनक है। पिछले कुछ दशकों में समाज में बहुत परिवर्तन हुआ है। इसका कारण क्या है? इसका उपाय क्या है? अगर अधिकारीयों को उनका सम्मान वापस न दिया जाए तो समाज का भविष्य क्या होगा?
बच्चों को जीवन में मिलने वाले उनके पहले अधिकारी माता-पिता होते हैं। यदि वे माता-पिता की आज्ञा का पालन करना और उनका सम्मान करना नहीं सीखेंगे, तो वे अन्य अधिकारीयों की भी उपेक्षा करेंगे। यहाँ तक कि चेहरे के भाव द्वारा माता-पिता का अपमान करने की भी सज़ा होनी चाहिए। माता-पिता के प्रति बच्चों की अपमानजनक नज़र, भाव और रवैये से परमेश्वर घृणा करता हैं, अत: यह नीतिवचन माता-पिता के विरुद्ध मौखिक अपराधों में से एक है जिसकी परमेश्वर निंदा करता है (नीतिवचन 20:20; 30:11)।
माता-पिता के प्रति श्रद्धा के लिए ऐसी दृढ़ता से खड़ा होना अब कहीं नहीं दिखता; हालाँकि आपके दादा-दादी इसे भली प्रकार से जानते थे। विद्रोही, दुष्क्रियाशील, स्वार्थी और आलसी युवाओं के परिणाम से आपको आश्चर्य नहीं होना चाहिए। आज के समय में माता-पिता का घोर अनादर करना मनोरंजन का एक प्रमुख विषय और अधिकांश घरों का एक दैनिक कार्यक्रम हो गया है। यह नीतिवचन इस आधुनिक दुनिया में असहज लगता है।
परंतु यह यहोवा परमेश्वर का अचूक वचन है, और जो मनुष्य इसे हल्के में लेता है वह इसके फल को भुगतेगा, जो कि अपने बच्चों और यहोवा की ओर से कष्ट और पीड़ा मिलना है (नीतिवचन 13:15; यशायाह 1:19-20)। जीवन में सफलता या असफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप परमेश्वर के वचन के सामने स्वयं को नम्र बनाएं और बुद्धिमत्ता प्राप्त करें, चाहे दुनिया कुछ भी सोचे या कहे (नीतिवचन 1:20-33; 13:13; 15:32)।
पूर्व पीढ़ियों के उच्च सिद्धांतवादी, महान और सच्चे चरित्र वाले महापुरुषों को कभी भी माता-पिता के प्रति उन अभद्र और विद्रोही शब्दों को बोलने और कार्यों को करने, जो आज लगभग सब तरफ है, की अनुमति नहीं थी । इसलिए आपको आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए कि अतीत के उन अद्भुत अगुवों की तुलना में आज वैसे पुरुषों और महिलाओं की प्रायः कमी है।
आगूर ने चेहरे के भावों के लिए आँख का प्रयोग उपलक्ष्य अलंकार के रूप में किया। और उसका तात्पर्य उस मांसपेशी या श्लेष्मा झिल्ली से अधिक कहीं था, जो आपके सॉकेट में होती है। अधिकारी के प्रति अवहेलना आँखों से तब तक दिखाई नहीं देती जब तक हृदय उसे ऐसा करने का निर्देश न दे। यदि आँखें आत्मा के झरोखे हैं, तो बेहतर होगा कि माता-पिता के प्रति हृदय में किसी भी तरह का अनादर न दिखे।
परिहास करना उपहास या तिरस्कार के द्वारा घमंड से अनादर करना होता है। हम इसे घृणा या आक्रोश में “आंखें मटकाना” या “सिर हिलाना” कहते हैं। यह अब आम हो गया हैं, और बच्चों के हाव-भाव और बर्ताव को दंडित करने के हर विचार को अधिकतर लोगों ने वर्षों पहले ही ठुकरा दिया है। और इस अहंकारी और विद्रोही पीढ़ी के परिणाम सभी भुगतते हैं। परंतु परमेश्वर इस प्रकार के अनादर से घृणा करता है।
यहाँ एक माँ की आज्ञा मानने को तुच्छ जानना ढिठाई से उसकी बातों का मान रखने से इंकार करने का भाव है। आज अधिकांश माताओं ने किशोरों से कुछ भी उपयोगी या लाभकारी कार्य करवाने का प्रयास करना छोड़ दिया है। वे घमंड और आलस्य से अपने समय के लिए स्वयं अपनी योजनाएं बनाते हैं, और उनमें माता-पिता के अनुरोधों को अनदेखा करने, मज़ाक बनाने, या उपेक्षा करने के विरुद्ध अंत:करण नहीं होता।
परमेश्वर ऐसे विद्रोही बिगड़ैल बच्चे को गिद्द के चारे के रूप में वर्णित करता है, जिनकी आँखों की पुतलियों को ये पक्षी झुकी हुई चोंच और पंजो से चीरकर खा जाते हैं। हालांकि इस लाड़-प्यार करने वाले समाज में यह राजनीतिक रूप से गलत है, लेकिन यह असभ्य बच्चों के बारे में परमेश्वर के विचार को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। ऐसे मूर्ख बच्चे पवित्र परमेश्वर के कठोर न्याय के तहत मारे जाएंगे, क्योंकि वह अपने द्वारा नियुक्त पदों की रक्षा करता है।
माता-पिता दोनों ही इसमे शामिल हैं। माताओं को पिताओं के समान मान और सम्मान दिया जाना चाहिए, और एक बुद्धिमान पिता अपने बच्चों से अपनी पत्नी के लिए इस तरह के सम्मान की मांग करेगा और उसे लागू करवाएगा। एक बच्चे को गर्भ में धारण करने के लिए माता और पिता दोनों की आवश्यकता होते हैं और आम तौर पर माता-पिता दोनों ही होते हैं जो बच्चे को परिपक्वता तक पहुँचाने के लिए सब कुछ मुहैया कराते हैं, भले ही आज तीस वर्षीय व्यक्ति के चरित्र को परिपक्वता कहा जाता है।
पाठकों, स्वर्ग के पवित्र परमेश्वर ने माता-पिता के विषय में बिना सोचे-विचारे बात करने के विरोध में मृत्यु की सज़ा ठहराई थी। क्या आप इस विषय में परमेश्वर से सहमत हैं? या आपको लगता है कि मूसा की व्यवस्था के ऐसे कठोर उपदेश पुराने, अतिशय और मूल्य रहित हैं? मूसा ने लिखा, “शापित हो वह जो अपने पिता या माता को तुच्छ जाने। तब सब लोग कहें, आमीन” (व्यवस्थाविवरण 27:16)।
बाइबल का यह पिछला वचन किसी भी युवा सम्मेलन के लिए एक महान और ग्रहणशील अध्ययन होगा। या इससे भी बेहतर, इसे एक गीत के रूप में लिखा जाना चाहिए जिसे एक साथ में गाया जाए। जेम्स डॉब्सन को ऐसा करना चाहिए या उपरोक्त नीतिवचन के विषय को अपने स्त्रीवत रेडियो प्रोग्राम “परिवार पर ध्यान दें” के आरंभ और अंत में दोहराना चाहिए। यह एक धार्मिक परिवार को प्रशिक्षित करने में प्रभावकारी होगा।
धर्मी पाठकगण इस विषय पर प्रभु से सहमत होंगे। उसने हठी और विद्रोही बच्चों को मृत्यु दंड देने का आदेश दिया है (व्यवस्थाविवरण 21:18-21)। घर परिवार खुशहाल होंगे और पालन-पोषण आसान होगा यदि अशुद्ध बच्चों को सभी लोगों द्वारा देखे जाने और भय मानने के लिए सार्वजनिक रूप से दण्ड दिया जाए। परमेश्वर ने माता-पिताओं को श्राप देने (निर्गमन 21:17; लैव्यव्यवस्था 20:9) और माता-पिताओं को मारने-पीटने के लिए भी मृत्युदंड का आदेश दिया है (निर्गमन 21:15)।
निःसंदेह, परमेश्वर ने ये आज्ञाएँ इजराइल को 3500 वर्ष पहले दीं थी, जब कलीसिया और अर्थविधानिक सरकार एक ही होते थे। आधुनिक समाज में रहने वाले लोग मूसा की व्यवस्था को अपने हाथ में नहीं ले सकते और उन्हें लेना भी नहीं चाहिए। लेकिन वे माता-पिता के अनादर के प्रति परमेश्वर की घृणा से सीख सकते हैं और अपने घर में धार्मिक, संयमी, आदर करने वाले बच्चों को बढ़ावा देने के लिए अपनी पूर्ण क्षमता से सबकुछ कर सकते हैं।
जब अबशालोम ने अपने पिता दाऊद, जो एक राजा भी था, का विरोध करने की दुष्टता की, तो यहोवा ने उसे उसके निजी शत्रु द्वारा तीर से मारे जाने के लिए बांज वृक्ष पर उसके बालों से लटका दिया (2 शमूएल 18:9-18)। जब बयालीस लड़के एलीशा का ठट्ठा करने लगे तो उसने यहोवा के नाम से उनको श्राप दिया; और यहोवा ने दो रीछनियों के द्वारा उसका आदर किया जिन्होंने उसका ठट्ठा करने के कारण उन सभी लड़कों को चीरकर मार डाला (2 राजाओं 2:23-24)।
आप आत्म-प्रेम, बच्चों द्वारा विद्रोह और अभिलाषाओं से ग्रसित पीढ़ी वाले संकटपूर्ण समय में जी रहे हैं (2 तीमुथियुस 3:1-5)। और यह कलंक मसीहियों का वर्णन करता है, न कि पूरी मूर्तिपूजक दुनिया का, जहाँ यह भी सच है (रोमियो 1:29-31)। परमेश्वर के कुछ दासों को ऐसी अनुमोदक सोच के विरुद्ध परमेश्वर के वचन के हथौड़े और आग का उपयोग करना चाहिए (यिर्मयाह 23:28-29; 2 तीमुथियुस 4:1-4)।
प्रिय माता-पिता, आपको बाल्यवस्था से ही बच्चों को परमेश्वर के मार्ग पर चलने के लिए शिक्षित करना चाहिए। जाग्रत समझ के शुरुआती दिनों से ही, बच्चों को माता-पिता का सम्मान करना सिखाया जाना चाहिए। एक विद्रोही भावना के हल्के से संकेत से भी तुरंत ही और गंभीरता से निपटा जाना चाहिए, जो कि हाव-भाव, इशारे या बर्ताव में दिखाई देते हैं। इस समय पर समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है।
अशिष्ट भाषण, आँखों को मटकाना, सिर को हिलाना, आँखें तरेरना, दरवाज़ा पटकना, विद्रोह से धधकती आँखें, नाक सिकोड़ना, उपेक्षाभरी नज़रें, तीखे जवाब, बोलने से इंकार करना, या ठट्ठा उड़ाकर अनादर करने वाली मूर्ख आँखों को बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। इसे आरंभ में ही सुधार लें, ताकि आपके बच्चे आपको विश्राम और शांति दें (नीतिवचन 19:18; 29:15,17)।
यदि आप इसमें समझौता करते हैं, तो आप माता-पिताओं के सृजनहार और न्यायी को अपमानित करते हैं और वह (परमेश्वर) आपके कर्तव्य और उसकी व्यवस्था का उपहास करने के लिए आप पर अपना फैसला सुनाएगा। अपने अलौकिक कर्तव्य को पूरा करें: अपने बच्चों को सभी प्राधिकारों के अधीन उत्कृष्ट सेवा करने के लिए तैयार करें। वे यह जानते हुए स्वयं बहुत प्रसन्न होंगे कि सुरक्षित, शांतिपूर्ण और सम्मानजनक संबंध; क्रोध, कड़वाहट और विद्रोह से कहीं अधिक बेहतर होते हैं। आप भी अधिक प्रसन्न होंगे (नीतिवचन 23:24-25)।
यदि आप इस नीतिवचन में विश्वास करते हैं, तो इसकी बुद्धिमत्ता के समक्ष स्वयं को नम्र बनाएं और अपने घर में माता-पिता के सम्मान को बनाए रखने के लिए मान्य साधनों का उपयोग करें। ऐसा करने के कारण परमेश्वर आपको आशीषित करेगा (भजन संहिता 112:1-3; नीतिवचन 20:7)। अपने बच्चों को याद दिलाएं कि इस नीतिवचन के आगे, माता-पिता का आदर करने के लिए परमेश्वर द्वारा दीर्घायु और अच्छे जीवन का दयामय और अविश्वसनीय वादा है (निर्गमन 20:12; इफिसियों 6:1-3)।
यदि आप माता-पिता नहीं है, बल्कि स्वयं एक बच्चे हैं या माता-पिता और बच्चे दोनों हैं, तो सुनिश्चित करें कि आप अनादर के पिछले हर पाप के लिए परमेश्वर और अपने माता-पिता के आगे पश्चाताप करें। अपने दिल में यह इरादा रखें कि आप अपने माता-पिता के साथ परमेश्वर के इच्छानुसार व्यवहार करके इस भ्रष्ट पीढ़ी के विरुद्ध खड़े होंगे। अपने दिल में यह इरादा रखें कि जब परमेश्वर आपको संतान देगा, तो आप उसके (परमेश्वर) वचन द्वारा उनका पालन-पोषण करोगे।
यीशु ने माता-पिता का आदर करना सिखाया और उसने मृत्यु दंड की चेतावनी को बार-बार दोहराया (मत्ती 15:4)। पौलुस ने माता-पिता का आदर करने के कर्तव्य को दो बार सिखाया (इफिसियों 6.1-3; कुलुस्सियों 3:20), और धर्मशास्त्र पर बातचीत करते समय उसने पिताओं के प्रति आदर की भावना रखी (इब्रानियों 12:9)। यह विषय इज़राइल के अधिकृत धर्म का एक खंडित पहलू नहीं है, यह बच्चों और माता-पिताओं के लिए परमेश्वर की सतत नैतिक व्यवस्था है।
चूँकि इस नीतिवचन ने आपको अपने पिता का आदर करना सिखाया है, तो आप सुनिश्चित करें कि आप अपने स्वर्गीय पिता का भी आदर करें, क्योंकि यदि आप अपने पिता का आदर करना मानते हैं मगर उसकी (परमेश्वर) की उपेक्षा करते हैं तो वह आप से नाराज़ होगा (मलाकी 1:6)। वह किसी भी सांसारिक पिता से असीम रूप से अधिक महान है, और वह असीम रूप से अधिक आदर और श्रद्धा के योग्य है। सभी आदर अंततः स्वयं परमेश्वर की ओर ही निर्देशित हो।
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