नीतिवचन 3:9

अपनी संपत्ति के द्वारा, और अपनी भूमि की सारी पहली उपज दे देकर यहोवा की प्रतिष्ठा करना

परमेश्वर आपके लिए कितना महत्वपूर्ण है? क्या आप अपनी आर्थिक हालातों में सुधार कर सकते हैं? यह नीतिवचन इन दोनों सवालों का जवाब देता है। आप अपने मुंह से परमेश्वर का सम्मान कर सकते हैं, पर फिर भी आपकी बातचीत निचले स्तर की है। आपको पैसा वहीं लगाना चाहिए जहां आपका मुंह सच्चा सम्मान दिखाता हो। सुलैमान ने एक प्रतिफल का वादा किया, “इस प्रकार तेरे खत्ते भरे पूरे रहेंगे, और तेरे रसकुण्डों से नया दाखमधु उमण्डता रहेगा।” (नीति. 3:10)।

सफलता के लिए आवश्यक है कि आप अपनी कुछ सम्पत्ति और वृद्धि का पहला भाग परमेश्वर को दें। उसे बचा हुआ देना, चाहे बड़ा या छोटा, सम्मान नहीं है, और यह इस नीतिवचन को पूरा नहीं करता। सुलैमान ने एक वित्तीय रहस्य दिया -परमेश्वर का सम्मान करने के लिए पहला फल देना। पैसा देना आगे बढ़ने का तरीका है (नीति. 11:24-26)। क्या आप निर्धन हैं? आप अपनी पहली उपज में से न देने का जोखिम नहीं उठा सकते (सभो. 11:1-6)। यीशु ने एक विधवा का आदर किया जिसने अपना सब कुछ दे दिया; यीशु ने उस विधवा को देने से रोका नहीं (लूका 21:1-4)।

प्रथम फल देना परमेश्वर को सबसे पहले और सर्वोत्तम देना है। प्रतिफल निवेश या परिश्रम का लाभ है। किसी और को देने से पहले, जिसमें आपका स्वयं के लिए खर्च करना भी शामिल है, परमेश्वर को देना प्रथम कहलाता है। कई लोग जो कुछ कमाते है उन सब में से कुछ अंश देकर इस नियम का उल्लंघन करते हैं। यह सम्मान नहीं है। अन्य लोग अपने लिए खर्च करने के बाद जो कुछ बचता है उसे देकर इसका उल्लंघन करते हैं। यह सम्मान नहीं है। यह प्रथम फल नहीं है। कई लोग अपने वेतन का कुछ प्रतिशत देते हैं, हालांकि वे हमेशा अपने वेतन को सकल वेतन के रूप में उद्धृत करते हैं। यह प्रथम फल नहीं है।

दसवां भाग, या दशमांश देना, नया नियम में प्रत्यक्ष रूप में नहीं पढ़ाया गया है, परन्तु न ही बच्चों के अनुशासन, बचत, जमानत, या अच्छी और बुरी पत्नियों के चरित्र-लक्षण जैसे अन्य कर्तव्यों का विवरण है। देना नया नियम में सिखाया गया है, और पुराना नियम अनुग्रहपूर्वक बुद्धिमान व्यक्तियों के लिए विवरण प्रदान करता है। अब्राहम और याकूब ने मूसा से बहुत पहले दशमांश दिया था (उत्प. 14:20; 28:22)। मसीही विश्वासियों को चाहिए कि वे अपनी कहीं अधिक बढ़कर आशीषों के लिए एक मार्गदर्शक या न्यूनतम के रूप में दशमांश दें (लूका 12:48; इब्रा. 8:6)।

परमेश्वर ने मूसा की व्यवस्था में इस्राएल को दशमांश देने, या आय का दसवां हिस्सा देने की आज्ञा दी। वास्तव में, इस्राएलियों ने दो वार्षिक दशमांश और एक त्रैवार्षिक दशमांश के साथ 23 1/3 प्रतिशत दिया (गिन. 18:20-32; व्यव. 14:22-29), हालांकि इसमें से कुछ देना अधिकांश राष्ट्रों की आयकर योजनाओं के अन्तर्गत आता है। इस्राएल ने विशेष मन्नतें और स्वेच्छा-बलिदान भी दिए (व्यव. 12:6)। इसलिए, अब्राहम, याकूब और मूसा की व्यवस्था के आधार पर देने के लिए एक बार का दशमांश एक तर्कसंगत मार्गदर्शक है।

कई लोग आज दशमांश से इनकार करते हैं, परन्तु दान देने के लिए प्रतिज्ञात प्रतिफल ने सरगर्म दाताओं को प्रेरित करना चाहिए। परमेश्वर खुले मन से, या उदारतापूर्वक दिए दान-दशमांश का प्रतिफल देता है (नीति. 11:24-26; 22:9; भजन. 112:9; यशा. 32:5-8; 2 कुरि. 9:6)। परमेश्वर हर्ष से देने वालों से प्रेम करता है (2 कुरि. 9:7; रोमि. 12:8; 1 इति. 29:17-18)। जो लोग दान-दशमांश के विषय में बाइबल के मानक के साथ बहस करना चाहते हैं, वे इन दोनों महत्वपूर्ण सिद्धान्तों का उल्लंघन करते हैं। इस जीवन में आर्थिक आशीषों से परे, परमेश्वर ने देने वालों के लिए अनन्त जीवन की भी प्रतिज्ञा की है (1 तीमु 6:17-19)।

परमेश्वर अपने लोगों को यह परखने की चुनौती देता है कि वह उन्हें कितनी आशीषें दे सकता है (मला. 3:8-12)। अब्राहम, इसहाक और याकूब धन्य थे, क्योंकि वे देना जानते थे (उत्प. 14:20; 28:22)। परमेश्वर ने दाऊद को धनवान बनाया (1 इति. 29:19), परन्तु दाऊद ने देने से प्रेम किया (1 इति. 21:24; 22:1-16)। यदि आप उदारता से देते हैं, तो प्रभु आपको उदारतापूर्वक प्रतिफल देने की प्रतिज्ञा करता है (नीति. 11:25; लूका 6:38; 2 कुरिं. 9:6)। यह बाइबल की सबसे महानतम प्रतिज्ञाओं में से एक है। इस पर विश्वास करने और आज्ञा पालन करने का हर कारण है।

एक मसीही उद्योगपति, आर.जी. लेटोर्नियो ने परमेश्वर का सम्मान करने और देने की अवधारणा को समझ लिया -उन्होंने 90 प्रतिशत दिया और 10 प्रतिशत अपने लिए रखा, चाहे उनकी वित्तीय स्थिति जो भी रही हो। वे अमेरिका के महान् उद्योगपतियों में से एक बन गए जिनके नाम लगभग 300 सनद, अर्थात पेटेंट पंजीकृत हैं। उन्होंने कहा, “प्रश्न यह नहीं है कि मैं अपना कितना पैसा परमेश्वर को देता हूं, बल्कि यह है कि परमेश्वर का कितना पैसा मैं अपने लिए रखता हूं।” वे दशमांश से घृणा करने वालों से कहीं बेहतर उदाहरण हैं।

इस नीतिवचन में सिखाया गया दान-दशमांश का देना मसीहियों के लिए एक विकल्प नहीं है -यह एक कर्तव्य है- इस कारण, न देना चोरी करना बन जाता है (मला 3:8-12)। परमेश्वर सभी चोरों को दण्ड देगा, परन्तु वह उन लोगों को विशेष रूप से दण्ड देगा जो अपने आप को उसके ऊपर सम्मान देकर उससे चोरी करते हैं (हाग्गै 1:2-7)। परमेश्वर को देना आपकी पसन्दीदा आर्थिक गतिविधि होनी चाहिए। यदि आप परमेश्वर का सम्मान करने के लिए हर्ष से देने को उदारतापूर्वक देने के साथ जोड़ते हैं तो वह आपको बहुत आशीष देगा (भजन 37:4; यशा. 58:7-12; हाग्गै 2:15-19)।

नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।