नीतिवचन 3:8
ऐसा करने से तेरी नाभि भली चंगी, और तेरी हड्डियाँ पुष्ट रहेंगी।
आपका आत्मिक और शारीरिक स्वास्थ्य तथा जीवन का उत्साह आप पर निर्भर हैं। उनकी बुनियाद पिछले नीतिवचन, अर्थात् नीतिवचन 3:7 की आज्ञाकारिता पर आधारित है। जब आप अपने विचारों और कपोल-कल्पनाओं का त्याग करते हैं, परमेश्वर का भय मानने लगते हैं और पाप से दूर हो जाते हैं, तब आप अपने शरीर और अपनी आत्मा पर परमेश्वर की आशिषों को पा सकते हैं। यह महत्वपूर्ण फैसला लेना इस नीतिवचन का प्राथमिक सबक है – उसकी बुद्धि को चुनकर अपने जीवन के लिए परमेश्वर से उत्तम वस्तुएं पाना। यदि आप उसके इस उपहार और बुलाहट की उपेक्षा करते हैं या उसे ठुकरा देते हैं, तो एक तरह से आप आत्महत्या ही कर रहे हैं (नीतिवचन 8:36)।
शब्द “ऐसा करने से” नीतिवचन 3:7 की ओर संकेत करते हैं। वहां सुलैमान ने लिखा, “अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न होना; यहोवा का भय मानना, और बुराई से दूर रहना।” अपने खोखले आत्मविश्वास को ठुकरा देने, भय के साथ परमेश्वर पर भरोसा करने, उसकी आज्ञा मानने और पाप से घृणा करने का यह संयुक्त फैसला लेना इन प्रतिज्ञात आशिषों को पाने की शर्त है। शर्त के प्रत्येक वाक्यांश में एक आज्ञासूचक क्रियापद है, जो स्पष्ट रूप से प्रगट करता है कि इसके लिए आपका सक्रिय होना आवश्यकता है। “ऐसा करने से” आपको क्या रोक रहा है?
नाभि और हड्डियाँ हमारे शरीर के लिए पर्यायवाची शब्द हैं। नाभि और हड्डियाँ, जो शरीर के अंग हैं, पूरे शरीर के लिए प्रयुक्त हुएं हैं। जब हम अपनी माँ की कोख़ में होते हैं, तो पूरे नौ महीनों तक हम पूरी तरह से अपनी नाभि पर निर्भर रहते हैं, उस दौरान मूल पोषण हमें अपनी माँ से गर्भनाल के माध्यम से मिलता है। और हमारी हड्डियों की जीवन शक्ति हमारे मज्जा से मिलनेवाले पोषण पर निर्भर रहती है (अय्यूब 21:24)। ये रूपक उन आशिषों और समृद्धि के दर्शक हैं जिन्हें हम प्रभु का पूरे मन से अनुसरण करने के परिणाम स्वरूप पाते हैं। एक अच्छा और खुशहाल जीवन परमेश्वर की इच्छा के प्रति समर्पण और आज्ञाकारिता पर निर्भर है (नीतिवचन 4:22; 14:30)।
एक अच्छा नियमित आहार और नियमित कसरत आपके जीवन की जीवन शक्ति को बढाने में केवल कुछ ही मदद कर सकता है। एक बुद्धिमान व्यक्ति जानता है कि दीन मन से आज्ञाकारिता के कारण मिलनेवाली परमेश्वर की आशीष जीवन को बढ़ाने या सुधारने के ऐसे किसी भी प्राकृतिक प्रयास से अधिक बढ़कर है (नीतिवचन 3:2,18; 4:10,22; 7:23; 9:11; 11:19; 12:28; 14:27,30; 17:22; 19:23)। आज्ञाकारिता पाप के अटल स्वाभाविक परिणामों, न्यायी के दण्ड, और परमेश्वर के दण्ड से बचाती है। इससे परमेश्वर की अनमोल प्रतिज्ञायें और भी सक्रिय हो जाती है (1 पतरस 3:10-12)।
क्या आप अपनी बुद्धि का त्याग करेंगे (नीतिवचन 3:7)? आप निर्बुद्धि ही पैदा हुए थें, और इस दुनिया की शिक्षा आपको वह दिव्य बुद्धि नहीं देती है। आप इस दुनिया में एक शिशु बनकर आए और एक शिशु की असहायता दशा में इस दुनिया को छोड़ कर चले जायेंगे। सत्य और बुद्धि परमेश्वर यहोवा की संपत्ति हैं, और केवल वही उन्हें देता है। आत्म-विश्वास, अर्थात् खुद पर भरोंसा विनाश का निश्चित मार्ग है (नीतिवचन 14:12; 26:12; 1 कुरिन्थ 3:18-20)। आपके विचार और भावनाएँ धोखा देनेवाले भ्रम हैं (भजन 94:11; यिर्म 17:9), इसलिए दोनों से दूर भागो।
क्या आप परमेश्वर का भय मानेंगे (नीतिवचन 3:7)? परमेश्वर का भयमानना ज्ञान और बुद्धि के लिए आवश्यक है (नीतिवचन 1:7; 9:10), और यह मनुष्य का संपूर्ण कर्तव्य भी है (सभोपदेशक 12:13-14)। सम्पूर्ण श्रद्धा से यहोवा का भय मानना और उसके प्रति समर्पित जीवन जीना आपके पास जो कुछ भी है और आप जो भी करते हैं उस पर परमेश्वर के आशीर्वाद का आधार है (भजन 112:1-3; 128:1-6)। परमेश्वर का भय आपके मन को प्रसन्न करेगा, इतना कि जिसकी बराबरी इस दुनिया की कोई चीज नहीं कर सकती।
क्या आप बुराई से अलग रहेंगे (नीतिवचन 3:7)? परमेश्वर का भय मानना किसी भी पाप से घृणा करना और उसे न करना है (नीतिवचन 8:13; 16:6; अय्यूब 1:1; 28:28)। क्या तुम सब बातों के विषय में उसके सब उपदेशों को सही मानते हो, और क्या तुम हर झूठे मार्ग से घृणा करते हो (भजन 119:128)? पाप तुम्हें शीघ्र ही नष्ट कर देगा (सभो. 7:17)। पाप से दूर हो जाओ जैसे यूसुफ ने किया, जिसमें शिमशोन विफल रहा। दोनों के जीवनों के विपरित नतीजों की तुलना करें.
पाठक, इस नीतिवचन को अपनी जोखिम पर नज़रअंदाज करें। अहंकार और पाप आपको अंदर से सुखा देंगे (नीतिवचन 1:31; 5:11; 12:4; 15:13; 17:22; 18:14; 27:4)। अगर आप इस पाप-शापित दुनिया में जीवन और ज्योति पाना चाहते हैं तो परमेश्वर का भय मानना ही आपकी एकमात्र आशा है। आज और अभी अपने मन को दीन करें। अपने मूर्खतापूर्ण विचारों का त्याग करें। रहम के लिए उससे प्रार्थना करें। अपने सभी पापों से अपना मन फिराओ, तो हो सकता है वह आपकी ज़िन्दगी और मन की शांति को बढ़ा दे, जिसे घमंडी राजा नबूकदनेस्सर ने खो दिया था (दान 4:27)।
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