नीतिवचन 3:5

तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन् सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना।

यहाँ आपके लिए एक अत्यन्त मूल्यवान नीतिवचन है। यह आपके और आपके परिवार के जीवन को बचा सकता है। बुद्धि के सभी खोजियों को इसे और इसके अगले वचन को स्मरण कर लेना चाहिए (नीतिवचन 3:6)। परमेश्वर को प्रसन्न करनेवाली बुद्धि प्राप्त करने और सफल जीवन जीने का नियम यहाँ दिया गया है। अपने-आपको बचाने इसे पढ़ने के लिए कुछ मिनट निकालिए।

बुद्धि का सच्चा आधार यही है। अपनी समझ का सहारा मत लो; बल्कि, मानवजाति की अज्ञानता से बचने के लिए परमेश्वर के प्रेरित प्रकाशन और उसकी सार्वभौम व्यवस्था पर भरोसा रखो। यदि आप उसकी इच्छा के विरोध में उठनेवाले अपने ही मतों को प्रिय मानते हैं या उनका बचाव करते हैं, तो आपको दुःख उठाना पड़ेगा। पाठक, सावधान रह।

भरोसा विश्वास ही है। परमेश्वर पर भरोसा रखने का अर्थ यह विश्वास करना है कि वह है, और यह भी कि वह अपने खोजनेवालों को प्रतिफल देता है (इब्रानियों 11:6)। यह विश्वास करता है कि परमेश्वर ने मनुष्यों के लिए अपनी सिद्ध इच्छा पवित्र शास्त्र में प्रकट की है (नीतिवचन 22:20-21; व्यवस्थाविवरण 29:29; II तीमुथियुस 3:16-17), और इसके विरोध में उठनेवाले सभी मतों को वह अज्ञानी विद्रोहियों की व्यर्थ और प्रलापपूर्ण बातें मानकर लताड़ देता है (भजन संहिता 119:128; यशायाह 8:20; I तीमुथियुस 6:3-5,20)।

बुद्धि की नींव यह है कि आप अपने जीवन के प्रत्येक पहलू में सम्पूर्ण मन से परमेश्वर ही पर भरोसा रखें। ऐसा भरोसा परमेश्वर पर प्रश्न नहीं उठाता, उसकी इच्छा के विषय में किसी शंका या पुर्वानुमान को स्थान नहीं देता, और उसके वचन को मानवीय ज्ञान के साथ मिलाने से इन्कार करता है। यह उस सत्य के अनुसार जीने की पूर्ण समर्पित मन की दीनता है कि परमेश्वर है, उसने अपनी इच्छा प्रकट की है, और वह आज्ञाकारी लोगों को प्रतिफल देता है।

यहोवा पर वह भरोसा, जो बुद्धि तक ले जाता है, पवित्र शास्त्र और संसार पर उसके सार्वभौम शासन में विश्वास रखता है। वह पवित्र शास्त्र के प्रत्येक वचन को, चाहे वह किसी भी विषय से सम्बन्ध रखता हो, अंतिम सत्य का पूर्ण और एकमात्र स्रोत मानता है। वह यह भी विश्वास करता है कि जीवन की परिस्थितियाँ सर्वज्ञानी और सर्वशक्तिमान कुम्हार द्वारा अत्यन्त सावधानी से सुनियोजित की जाती हैं, जो आपसे मांग करता है कि आप उसके प्रति आत्मसमर्पण करें।

परन्तु आपकी समझ कहाँ से आई? आप तो उसके बिना ही जन्मे थे। आपने नवजात लकड़बग्घे के समान सहज प्रवृत्ति से दूध पिया करते थे, पक्षी के बच्चे के समान हर कुछ घण्टों में भोजन के लिए रोया करते थे, और खुद को अपने ही मल-मूत्र से गन्दा करते थे। आप इस संसार में जंगली गदहे के बच्चे के समान आए थे (अय्यूब 11:12)। फिर आपकी समझ कहाँ से आई, और आप उसका सहारा लेने की सोच भी क्यों करेंगे?

क्या आपको अपनी समझ अपने माता-पिता से मिली? वे भी इसी रीति से संसार में आए थे, जैसे आप आए। उनके पीछे चलना उनकी अज्ञानता को ही आगे बढ़ाता है। क्या शिक्षा ने आपको समझ दी? दुनियाभर के स्कूल-कॉलेज अनुशासन, नैतिकता, सत्य और बुद्धि के विषय में दिवालिया हो चुके हैं। समाज के सबसे विकृत लोग प्रायः सबसे अधिक शिक्षित लोग ही होते हैं। वे बन्दर से विकासवाद सिखाते हैं, समलैंगिकता को मान्यता देते हैं, गर्भ में पल रहे बच्चों की हत्या करते हैं, गिलहरी के बच्चों की रक्षा करते हैं, पिकासो को कलाकार कहते हैं, विशाल राज्यसत्ता की आराधना करते हैं, और पवित्र शास्त्र से बैर रखते हैं।

क्या आपको अपनी समझ अपने मित्रों से मिली? वे भी लगभग उसी समय और उसी तरीके से इस संसार में आए थे, जैसे आप आए। ऐसे सौ मूर्खों को एक साथ इकट्ठा कर देने से बुद्धि उत्पन्न नहीं हो जाती। क्या आपको यह टेलीविजन से मिली? कार्टून, हास्य-कार्यक्रम, समाचार, धारावाहिक और खेल, सब एक ही प्रकार के हैं; उनमें तो साधारण बुद्धि (कॉमन सेंस) तक का अभाव है। क्या आपको यह “पीपल,” “टाइम,” “परेड,” या “रीडर्स डाइजेस्ट” जैसी पत्रिकाओं से मिली? वे सब मिलकर गोबर के ढेर के समान अज्ञानता और भ्रान्त धारणाओं से भरी हुई हैं।

इस विषय को भली-भाँति समझ लें। आपके पास अपनी कोई समझ नहीं है। जिसे आप अपना ज्ञान समझते हैं, वही आपके लिए जानलेवा है, क्योंकि वह आपको सत्य और बुद्धि से बहकाकर दूर ले जाता है, और उनकी ओर लौटाकर ले जाने के लिए आवश्यक हर सुधार का विरोध करता है। आपका सबसे बड़ा शत्रु आपका अपना मन और दिमाग है। गर्भाधारणा से ही अज्ञानी, जन्म से ही झूठे ज्ञान पर पले, मित्रों द्वारा मूर्खता के लिए उकसाए हुए, अनुभवों की गलत व्याख्या से धोखा खाए हुए, और स्वभाव से अहंकारी तथा स्वार्थी होने के कारण आप गहरे संकट में हैं।

सफल होने के लिए आपको अपनी समझ को लताड़ना होगा। मानवजाति के शेष लोगों से आगे बढ़ने के लिए आप अपनी समझ का सहारा भी नहीं ले सकते। आपको अपनी उन सब पूर्वधारणाओं को मन से निकाल फेंकना होगा। अपने विचारों के प्रति कोई मोह, अथवा उनका कोई बचाव, आपको भी इस मूर्ख मानवजाति के साथ अधोगति में गिरा देगा। नियम सरल, स्पष्ट और कठोर है: अपनी समझ का सहारा तक न लें।

परमेश्वर पर भरोसा रखिए। समस्त सृष्टि का प्रत्येक सत्य केवल उसी के अधिकार में है। परमेश्वर पर भरोसा रखिए। उसने आपकी अनुमति के बिना आपको अस्तित्व दिया है, और वही आपके जीवन के बिलकुल छोटे-छोटे विवरणों तक पर शासन करता है। सम्पूर्ण मन से उसी पर भरोसा रखिए, तब आप अपने चारों ओर की उन विकृत और भटकी हुई भेड़ों से बहुत आगे बढ़ सकते हैं, जो निराशा, तलाक, नशीले पदार्थों और मृत्यु के वध-स्थान की ओर दौड़ी जा रही हैं।

पत्नियों! जब पवित्र शास्त्र आपको बताता है कि आपको अपने पति के साथ कैसा करना व्यवहार है, तब उस पर भरोसा रखिए; और यह कार्य किस रीति से किया जाना चाहिए, इस विषय में अपनी समझ का सहारा तक न लें जिस पति को यहोवा परमेश्वर ने आपको दिया है, उसके विषय में सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखें; और इस विचार की ओर झुकिए भी मत कि किसी दूसरे पुरुष के साथ जीवन अधिक सहज होता।

नागरिकों! जब पवित्र शास्त्र आपको प्रत्येक नागरिक व्यवस्था के अधीन रहने, कर देने, और अधिकार रखनेवालों का आदर करने की आज्ञा देता है, तब उस पर भरोसा रखिए। अपने अधिकारों की रक्षा करने के विषय में अपनी समझ का सहारा तक मत लीजिए। जो शासक आपके ऊपर हैं, चाहे वे आपको प्रिय हों या न हों, उनके विषय में सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखिए।

माता-पिता! जब पवित्र शास्त्र बालकों की मूर्खता और उनके उचित प्रशिक्षण की विधियों को विस्तार से बताता है, तब उस पर भरोसा रखिए। न अपनी समझ का सहारा लीजिए, और न अनुमान लगानेवाले बेन स्पॉक अथवा समझौता करनेवाले जेम्स डॉब्सन के विचारों की ओर झुकिए। यहोवा की उन प्रतिज्ञाओं पर भरोसा रखिए कि उचित प्रशिक्षण भविष्य में सफलता लाएगा।

मसीहियों! जब पवित्र शास्त्र निरन्तर बपतिस्मे को जल में उतरकर गाड़े जाने और फिर जी उठने के प्रतीक के रूप में बताता है, अर्थात् पूर्ण डुबकी के द्वारा बपतिस्मा, तब उस पर भरोसा रखिए। किसी भी विधर्मी धारणा अथवा इस झूठी परम्परा की ओर तनिक भी न झुकिए कि किसी शिशु के माथे पर पवित्र अभिषेक-तेल छिड़कना बपतिस्मा है।

अविवाहित युवक एयर युवतियों! जब पवित्र शास्त्र यौन-संबंध को विवाह तक सीमित करता है, विवाह को केवल मसीहियों तक सीमित करता है, और कष्टदायिनी स्त्रियों को तुच्छ ठहराता है, तब उस पर भरोसा रखिए। यौन-संबंध की मूर्खतापूर्ण इच्छा अथवा इन सीमाओं के बाहर किसी व्यक्ति की चाह की ओर तनिक भी न झुकिए। एक भक्तिमान जीवनसाथी के लिए किए गए अपने प्रयासों को आशीष देने हेतु परमेश्वर पर भरोसा रखिए।

परिश्रमी पुरुषों! पवित्र शास्त्र पर भरोसा रखिए कि उदारता से धन देना समृद्धि लाएगा, धन को बटोरकर रखना दारिद्र्य लाएगा, और व्यापारिक योजनाओं के पीछे चलना आपको नीचे गिरा देगा। अपने अहंकारी और स्वार्थी विचारों को अस्वीकार कीजिए। परिश्रमी मनुष्यों को उन्नति देने की अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा करने हेतु परमेश्वर पर भरोसा रखिए।

पाठक! आपके सामने एक चुनाव है। परमेश्वर और पवित्र शास्त्र पर भरोसा रखकर अपनी समझ का सहारा न लीजिए, अथवा अपनी समझ का सहारा लेकर परमेश्वर और पवित्र शास्त्र को अस्वीकार कीजिए। चुनाव आपका है, परन्तु उसके परिणाम निश्चित हैं। यदि आप पवित्र शास्त्र में प्रकट परमेश्वर के विचारों के लिए अपने विचारों को अस्वीकार कर देंगे, तो शान्ति और समृद्धि उस सीमा तक आपकी होगी, जिसे संसार न समझ सकता है और न उसका कोई कारण बता सकता है।

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