नीतिवचन 3:20
उसी के ज्ञान के द्वारा गहिरे सागर फूट निकले, और आकाशमण्डल से ओस टपकती है।
जल-चक्र आपके लिए क्या मायने रखता है? इससे बुद्धि की प्राप्ति के लिए आपकी इच्छा और भी बढ़नी चाहिए। प्रकृति-माता (Mother Nature) परमेश्वर से बैर रखनेवाले द्वेषियों का सिर्फ़ एक मतिभ्रम है, ठीक वैसे ही जैसे सांता क्लॉज़ और परियों की कहानियाँ हैं। महान परमेश्वर ने अपनी बुद्धि से सब महासागरों, झरनों और जल चक्रों की सृष्टि कीं और उसी की उन पर हुकूमत चलती है, और उन में उसकी असीम बुद्धि, समझ और ज्ञान स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
इस दृष्टांत के द्वारा कि कैसे प्रभु परमेश्वर ने गहिरे सागर का निर्माण किया और वही उस पर प्रभुत्व करता है, सुलैमान ने तीन चीजों के महत्व को बढ़ाया – बुद्धि, समझ और ज्ञान (नीतिवचन 3:19-20)। परमेश्वर की सृष्टि और उसकी देखभाल को देखकर आपको इन चीजों का मूल्य समझ में आना चाहिए। जल-चक्र का अवलोकन परमेश्वर की महिमा और सच्चे ज्ञान के महत्व को बढ़ाता है।
जब उसने लगभग 6000 साल पहले पृथ्वी बनाई, तो परमेश्वर ने हाइड्रोजन और ऑक्सीजन बनाया, अर्थात वे तत्व जिनके संयोजन से जल बनता है, जल के तीन रूप अस्तित्व में आते हैं, जिस तापमान पर वे रूप बदलते हैं, और विश्व में इन रूपों में पानी की मात्रा और स्थान बनते हैं (उत्पत्ति 1:1-2,6-10)। यह उसके लिए कुछ भी नहीं था (उत्पत्ति 1:16)।
चार्ली डार्विन (1809-1882) वहां नहीं था। जो सब का सर्वोच्च न्यायाधीश है उस ने उसे लगभग 5800 वर्षों तक इस पृथ्वी पर पैदा नहीं होने दिया। अब मृत्यु पश्चात् वह जानता है कि उसकी कोरी कल्पनाएँ कितनी मूर्खतापूर्ण थीं, क्योंकि स्वर्ग और पृथ्वी को बनानेवाले यहोवा से उसका सामना हो चुका है। अब वह अपनी घिनौनी और व्यर्थ बकवास को तुच्छ समझता होगा, क्योंकि वह जान चूका है कि उसके सिद्धांत तर्कसंगत या सच्चा विज्ञान नहीं हैं (2 थिस्सलुनीकियों 3:2; 1 तीमुथियुस 6:20-21)।
परमेश्वर ने अदन को सींचने के लिए जमीन से कुहरा उठवाया (उत्पत्ति 2:6)। लगभग 2400 ईसा पूर्व, उसने इंसानों की एक पूरी पीढ़ी ही जलप्रलय में डुबोने के लिए गहरे जलों को फोड़ दिया और आकाश के झरोखें खोल दिएँ थें (उत्पत्ति 7:11-12)। एक वर्ष पश्चात्, उसने जल में प्रकाश के अपवर्तन से धनुष बनना ठहराया, ताकि नूह और अन्य पवित्रों को याद दिलाया जा सके कि इस दुनिया का विनाश अब कभी जलप्रलय से नहीं होगा (उत्पत्ति 9:12-17)।
सब जल चक्र उसके हैं (सभोपदेशक 1:7)। सुलैमान, जो लगभग 900 ई.पू. में था, उसने परमेश्वर से इन बातों को विस्तार से जान लिया था। एलीहू, जिसने कभी किसी डार्विनवादी से मौसम विज्ञान का कोई कोर्स नहीं किया था, जल चक्र के बारे में बहुत कुछ जानता था। उसने बादलों के बारे में लिखा कि वे जल वाष्प से बनते हैं और फिर वे उस कुहरे से बारिश टपकाते हैं (अय्यूब 36:26-33)। उसने गरज, बिजली, बर्फ, बवंडर, बर्फ और पानी और मौसम के कई अन्य पहलुओं के बारे में लिखा (अय्यूब 37:1-24)। केवल परमेश्वर ही समुद्र के झरनों, बिजली की दिशा और अन्य रहस्यों को पूरी तरह से जानता है (अय्यूब 38:1-41)।
विचार करें कि एक इंच की बारिश, जो अक्सर होती है, एक सामान्य अमेरिकी काउंटी में 10-15 बिलियन गैलन पानी लाती है। कैसे फूले हुए बादल, जिनके माध्यम से हवाई जहाज आसानी से गुजरते हैं, अरबों टन पानी को अपने में समाकर चलते हैं? परमेश्वर उन्हें अपने ज्ञान से संतुलित करता है (अय्यूब 37:16)। वह बादलों की गिनती करता है और उनकी कुप्पियों में पानी रखता है (अय्यूब 38:37)।
पानी से जुड़ी मानवीय खोजबीन बस वही हैं जो वे कहलाती हैं- खोज। वे मनुष्य हैं जो अंततः उन चीज़ों को खोजते हैं जिन्हें परमेश्वर ने बहुत पहले बनाया और स्थापित किया था। आविष्कार मात्र को खोजने वाले की बुद्धि आविष्कारक की बुद्धि से बहुत कम है। मानवीय आविष्कार उससे बड़े नहीं हैं। वे मनुष्य हैं जो अंततः परमेश्वर द्वारा बनाए गए पदार्थ या बहुत पहले से निर्धारित गुणों का उपयोग करते हैं। परमेश्वर की बुद्धि मनुष्य की बुद्धि से उतनी ही श्रेष्ठ है जितनी कि ज्योति अंधकार से श्रेष्ठ है।
मनुष्य इतना अज्ञानी है कि किसी भी चीज की खोज या आविष्कार करने में परमेश्वर को ही उसका मार्गदर्शन करना ज़रूरी होता है (नीतिवचन 8:12; यशायाह 28:23-29)। 19वीं शताब्दी में अमेरिकी और यूरोपीय अस्पतालों में प्रसव के दौरान मातृ-मृत्यु दर लगभग 25% थी, जब तक कि होम्स, सेमेल्विस और पाश्चर ने डॉक्टरों से अपने हाथ धोने के लिए नहीं कहा, संक्रामक रोगों से निपटने के लिए बहते पानी से हाथ धोने की वह प्रथा जिसका वर्णन बाइबल में 1500 ईसा पूर्व में ही किया गया है (लेव 15:5,13)। परमेश्वर की स्तुति करो कि उसने अपनी बुद्धि और अपना ज्ञान मनुष्यों को दिया।
परमेश्वर का धन्य पुत्र, नासरत का यीशु, अपने सामर्थ्य के वचन से सभी प्रकार के झरनों और अन्य सभी चीज़ों को थामे रखता है (इब्रानियों 1:3)। विश्व के अणु उसकी महान शक्ति से बने हुए हैं – एक साथ बंधे हुए हैं (कुलुस्सियों 1:17), क्योंकि उसमें बुद्धि और ज्ञान के सब भण्डार छिपे हुए हैं (कुलुस्सियों 2:3)। परमेश्वर ने उसे अपने लोगों के लिए बुद्धि ठहराया कि उनका उद्धार हो (1 कुरिन्थियों 1:30)। वह समय जल्द आता है जब सब मनुष्य विश्व के इस न्यायाधीश के सामने खड़े रहेंगे (प्रेरितों 17:30-31)।
पाठक, अपने सृष्टिकर्ता के सामने खुद को विनम्र करें और अपने पूरे दिल से उसके वचन में निहित बुद्धि और ज्ञान का पीछा करें। कहीं और इस ज्योति या समझ का कोई दूसरा स्रोत नहीं है (भजन 119:128; यशायाह 8:20; 1 तीमुथियुस 6:3-5; 2 तीमुथियुस 3:16-17)। मनुष्य के विचार व्यर्थ हैं। परमेश्वर अपनी बुद्धि उन लोगों को देना चाहता है जो उसके सामने खुद को विनम्र करेंगे।
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