नीतिवचन 3:18

जो बुद्धि को ग्रहण कर लेते हैं, उनके लिये वह जीवन का वृक्ष बनती है; और जो उसको पकड़े रहते हैं, वह धन्य हैं।

जीवन का एक वृक्ष है। आपने इसे पा लिया। सफलता और सुख उसके फल हैं, और आप इसे हमेशा के लिए प्राप्त कर सकते हैं। मनुष्य तृप्ति और समृद्धि पाने के लिए व्यर्थ बातों की खोज करता है, परन्तु ये दोनों ही आज आपके सामने वरदान के रूप में रखे जा हैं। क्या आप वास्तव में जीवित हैं? ये वचन आपसे परमेश्वर और अब तक के सबसे बुद्धिमान राजा की ओर से कहे जा हैं।

यहाँ सच्ची बुद्धि एक स्त्री है, जैसा कि स्त्रीलिंग सर्वनामों और शब्दों ‘वह……बनती है’ के उपयोग द्वारा प्रकट किया गया है। आपने आखिरकार उसे पा लिया है। वह आपको बुला रही है (नीतिवचन 1:20-23; 8:1-4; 9:1-6)। उसके दाहिने हाथ में दीर्घायु और बाएं हाथ में धन और प्रतिष्ठा है (नीतिवचन 3:16)। उसके मार्ग सुख और शान्ति के हैं (नीतिवचन 3:17)। संसार में उसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती (नीतिवचन 3:13-15)। उससे प्रेम रखों!

रानी बुद्धि आपके सामने जीवन और आनंद रख रही है। वह जीवन का वृक्ष है। फल उत्पन्न करने वाले पेड़ ऐसे फल देते हैं जिनका स्वाद और ताज़गी पल भर के लिए ही हैं, लेकिन उसका फल ऐसा है जो जीवन भर का सुख और जीवन भर की शांति देनेवाला होता है। वह आपको एक सुरक्षित, सफल और संतुष्टपूर्ण जीवन प्रदान करती है। वह आपको संतोष, सुख और आनंद प्रदान करती है। वह आपको ये सब बातें उनके सही मायने में देना चाहती है। उसे थाम लो! उसे कभी जाने मत दो!

जीवन और सुख तो सभी मनुष्य पाना चाहते हैं, लेकिन ज्यादातर मनुष्य उन्हें गलत जगहों पर खोजते हैं। संसार ये चीजे आपको नहीं दे सकता, क्योंकि संसार तो उस जीवन और सुख को नष्ट कर देता है। बाहरी रूप से अमीर दिखाई देनेवाले और प्रसिद्ध लोगों के जीवनों को देखें – जैसा कि परमेश्वर ने प्रतिज्ञा कीं, वे मानसिक नैराश्य, दुष्क्रियता, नशा, ड्रग्स, तलाक और असामयिक मृत्यु से ग्रस्त हैं (पढ़ें नीतिवचन 2:22; 4:19; 5:22- 23; 13:15; 22:5; आदि)।

उन्हें देखें! उन्हें लगता है कि जब दो औरतें आपसी आग में बिस्तर पर होती हैं तो वह शादी है और एक बच्चा गोद लिए हुए दो समलिंगी पुरुष एक परिवार हैं। उनका मानना है कि ज्यादा से ज्यादा कर्ज़ लेने से, चाहे सरकारी हो या निजी बैंक से, कुछ भी ठीक हो सकता है। वे सिखाते हैं कि परिवार के लोगों की आपसी सहभागिता किसी चिड़ियाघर में जाकर लंगूरों से मिलने जैसा है। वे बड़े पैमाने पर बिना किसी लाभ के फिजूलखर्ची करते हैं। वे जीवनसाथी को छोड़ देते हैं और उनकी अदला-बदली करते हैं, और वे कभी सच्चा प्रेम या सुख नहीं पाते। वे इतने दुष्क्रिय बन गए हैं कि कोई आशा नहीं।

वे मनोरंजन, खेल-कूद, शिक्षा, व्यवसाय में सफलता, यौनाचार की अपनी-अपनी मर्जी, भौतिक संपत्ति, एक आराम और छुट्टियों से भरी जीवन शैली, एक परफेक्ट जीवनसाथी और बॉडी बिल्डिंग के पीछे भागते हैं, लेकिन ये चीजें एक समृद्ध और सुखी जीवन नहीं बनाती। केवल बुद्धि ही आपको अच्छा जीवन दे सकती है, और केवल तभी आप खानपान, मित्र, प्रेम, विवाह, यौन, संपत्ति आदि बातों के वास्तविक लाभों को समझ पाएंगे।

उन्हें देखें! वे प्रेम के बारे में लिखते और गाते हैं, जैसे बॉलिवुड के गायक और गायिकाएं। उन्हें लगता है कि सबसे बड़ा प्रेम है अपने आप से प्रेम करना -अपनी आत्मकामुकता को स्वीकार करना और सबसे स्वार्थी पीढ़ी को जन्म देना। वे हर चीज से डरते हैं; वे किसी भी बात के लिए जिम्मेदारी नहीं लेते हैं; और वे सत्य के सिवा किसी भी बात पर विश्वास करते हैं। उन्होंने भ्रमित होकर सुखी जीवन की परिभाषा ही विकृत कर दीं है। आपको बुद्धिरूपी जीवन के वृक्ष की आवश्यकता है।

आपको लगता है कि यौन सम्बन्ध आपको सुख देगा? परन्तु यौन सुख क्या है यह बुद्धि परिभाषित करती है। संसार के लोग इस सुख के मजे किसी के भी साथ लेने की फिराक में रहते हैं, परन्तु यह परमेश्वर है जिसने इसके हर विवरण का आविष्कार किया। बुद्धिमान रचनाकार के रूप में, उसने इसकी अधिकतम संतुष्टि के लिए नियम दिए। सुलैमान ने 1000 स्त्रियों के साथ यौनाचार का प्रयोग किया और नीतिवचन की पुस्तक में अपना परमेश्वर-प्रेरित विश्लेषण लिखा। इस संसार को इसकी कोई समझ नहीं है।

संसार के लोग कामसूत्र की किताबे लिखते हैं, प्रेम और वफ़ादारी को अनदेखा करते हैं, कामसूत्र बारे में गाने गाते हैं, अनचाहे बच्चों की गर्भ में ही हत्या करते हैं, सरोगेट्स गर्भाशयों को किराए पर लेते हैं, समलैंगिकता में लिप्त होते हैं, फिल्मों और वेबसाइटों में इसका प्रचार करते हैं, स्कुल-कॉलेजों में इसे बढ़ावा देते हैं, इसमें डॉक्टरेट की डिग्री देते हैं और हर प्रकार की वासना से काल्पनिक और मायावी आनंद के पीछे भागते हैं। लेकिन परमेश्वर यौन सुख का वास्तविक आनंद केवल उन्हीं के लिए संभालकर रखता है जिनके पास जीवन का वृक्ष है।

संसार नीतिवचन 14:12 में सुलैमान की चेतावनी को पूरा करता है, “ऐसा मार्ग है, जो मनुष्य को ठीक जान पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है”। और यदि आप इसे पढ़ने से चूक गए हैं, तो नीतिवचन 16:25 में भी आप इसे पढ़ सकते हैं” ऐसा भी मार्ग है, जो मनुष्य को सीधा जान पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है”। उन्हें लगता है कि वे सही हैं, लेकिन वे मौत की ओर बढ़ रहे हैं। उनके पास जीवन का वृक्ष नहीं है।

सुलैमान ने नीतिवचन के कई प्रारंभिक खंडों में बुद्धि को एक वांछनीय स्त्री के रूप में उसका मानवीकरण किया (नीतिवचन 1:20-33; 2:4; 3:13-18; 4:5-13; 8:1-36; 9:1-12)। इस खंड में, उसने सिखाया है कि वह माणिक से अधिक कीमती है और जीवन में किसी भी चीज़ से उसकी तुलना नहीं कीं जा सकती (नीतिवचन 3:15), वह धन और सम्मान के साथ साथ लंबी उम्र लाती है (नीति 3:16), और उसके तरीके सुखद और शांति से भरे हुए हैं (नीतिवचन 3:17)।

अदन में जीवन का एक वृक्ष था, जिसे करूबों और एक ज्वलनशील तलवार का अवरोध लगाकर हमारे प्रथम विद्रोही माता-पिता की पहुँच से बाहर रखा गया था (उत्पत्ति 3:24)। और स्वर्ग में जीवन का एक वृक्ष है, जो वर्ष के हर महीने में एक अनोखा फल देता है, और जिस में जाति जाति के लोगों को चंगा करने के पत्ते हैं (प्रकाशितवाक्य 2:7; 22:2,14)। इसलिए, इस नीतिवचन में प्रयुक्त जीवन के वृक्ष का रूपक सचमुच शक्तिशाली है।

यहाँ यह रूपक एक समृद्ध और सफल जीवन के स्रोत को चित्रित करता है। बुद्धि सीखने और समझ प्राप्त करने से मनुष्य के पास एक अच्छे और सुखी जीवन का आधार होता है। जीवन का वृक्ष एक अद्भुत जीवन का फल देता है। वह हर एक व्यक्ति जो बुद्धि को खोजता है और उसे प्राप्त करता है, उसने जीवन का एक रूपक वृक्ष पा लिया है। वह मुफ़्त में ही इससे फल तोड़ सकता है और एक अच्छा जीवन जी सकता है।

बुद्धि को पानेवाले और उसको संभालकर रखनेवाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए वह जीवन का एक वृक्ष है, जो सफलता और सुख के लिए स्रोत और माध्यम देती है, जैसा कि यह नीतिवचन कहता है। यौनसुख या अन्य बाकी सब वैध लक्ष्य या जीवन का आनंद केवल तभी संतोषजनक होता है जब उसे बुद्धि के नियमों के अनुसार किया जाता है। परमेश्वर, मनुष्यों और स्वयं की दृष्टि में दिर्घायु होने का केवल यही तरीका है।

आपने जीवन का वृक्ष पा लिया है। आप महिला-बुद्धि से मिल चुकें हैं। जीवन और आनन्द आपके सामने हैं। लेकिन आपको उसे थाम लेना है – आपको परमेश्वर के वचन में गोता लगाना और प्रभु का भय मानना सीखना ज़रूरी है, जो बुद्धि का आरम्भ है। जैसे-जैसे आप बुद्धि में बढ़ते जाते हैं, वैसे वैसे आप जो सीखते जाते हैं उसे याद रखना है, क्योंकि संसार, शैतान और आपका अपना देह-स्वभाव इसे आपसे दूर करने की कोशिश करेंगे।

बुद्धि क्या है? यह परमेश्वर का भय मानना और उससे प्रेम करना और उसकी आज्ञाओं का पालन करना है। बाइबल का महान परमेश्वर सभी चीजों का आरम्भ और अंत है, और वह उन लोगों को पूर्ण बुद्धि और समझ प्रदान करता है जो उसके प्रेरित शास्त्रों पर विश्वास करेंगे और उनका पालन करेंगे। बुद्धि जीवन के सभी निर्णय लेते समय ठीक ठीक परख करने की शक्ति है, जो उस पर और उसके वचन पर भरोसा करने से सीखी जाती है।

ऐसे व्यक्ति पर आनेवाली परमेश्वर की आशीष दो बातों के कारण बड़ी कहलाती हैं – वह जीवन में सही चुनाव करता है और अद्भुत परिणामों की कटनी करता है, और परमेश्वर उसकी आज्ञाकारिता के लिए अलौकिक रूप से आशीष देता है। शुरू से अंत तक, बाइबल ऐसे व्यक्ति के जीवन की भरपूरी के बारे में वर्णन करती है (व्यवस्था 32:46-47; यहोशु 1:7-9; भजन 1:1-3; 112:1-3; 128:1-6; 144:11-15; यूहन्ना 10:10; इब्रा 11:6; याकूब 1:25)।

दाऊद ने लिखा, और पतरस ने दोहराया, “हे लड़को, आओ मेरी सुनो, मैं तुम को यहोवा का भय मानना सिखाऊँगा। वह कौन मनुष्य है जो जीवन की इच्छा रखता, और दीर्घायु चाहता है ताकि भलाई देखे? अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुँह की चौकसी कर कि उससे छल की बात न निकले। बुराई को छोड़ और भलाई कर; मेल को ढूँढ़ और उसी का पीछा कर। यहोवा की आँखें धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उनकी दोहाई की ओर लगे रहते हैं। यहोवा बुराई करनेवालों के विमुख रहता है, ताकि उनका स्मरण पृथ्वी पर से मिटा डाले” (भजन 34:11-16; 1 पतरस 3:10-12)।

बुद्धि केवल इस जीवन में ही नहीं बल्कि अगले जीवन में भी सफलता और सुख का साधन है। वह मनुष्य जो बुद्धि को थामे रखता है और उसे याद रखता है, अनन्त जीवन की निश्चयता और प्रमाण पाता है (मत्ती 7:21-23; प्रेरितों के काम 10:34-35; 2 पतरस 1:5-11)। सबसे बड़ा जीवन और सब से उत्तम सुख स्वर्ग में उनके लिये रखा है जो प्रभु यीशु मसीह की आज्ञाओं को मानते हैं (भजन संहिता 16:11)।

जीवन का वृक्ष आपके सामने है। सफलतापूर्वक और आनन्द से जिएं, अब और अनंतकाल के लिए। आपका भविष्य आज से शुरू होता है। परमेश्वर की प्रेरित और संरक्षित बाइबल को लें, उसे पढ़े, और उसके हर वचन के सामने स्वयं को विनम्र करें। यीशु मसीह के सामने गिर पड़ो, जिसकी वह गवाही देती है, और अनन्त जीवन को थाम लो (1 तीमुथियुस 6:12)। आज ही उन्नति करना आरम्भ करें (नीतिवचन 8:1-21; 9:1-12)। परमेश्वर आपका भला करे।

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