नीतिवचन 29:8

ठट्ठा करनेवाले लोग नगर को फूँक देते हैं, परन्तु बुद्धिमान लोग क्रोध को ठण्डा करते हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विनीत बुद्धि आवश्यक होती है। देश राजनीतिक समृद्धि समझदार और बुद्धिमान शासकों पर निर्भर करती है। राजा सुलैमान के नीतिवचन जीवन के हर क्षेत्र को संबोधित करते हैं। यहां वह राजनीति विज्ञान सीखें जिसका आप सफलता के लिए अपने जीवन में व्यावहारिक उपयोग कर सकते हैं। परमेश्वर का दिव्य पुस्तकालय, अर्थात् बाइबल, जीवन के हर क्षेत्र को संबोधित करनेवाला ख़ज़ाना है!

ठट्ठा करने वाले लोग स्वयं के लिए विनाशकारी होते हैं, और वे उन लोगों के लिए भी घातक होते हैं जो उनके निकट सम्बन्धी या मित्र हैं। उनका अहंकार और उनकी विद्रोही आत्मा परमेश्वर और मनुष्य दोनों के क्रोध को भड़का देते हैं। यदि वे किसी शहर, राष्ट्र या किसी संगठन में सत्ता में हैं, तो वे अनावश्यक झगड़े और सामाजिक तनाव पैदा करते हैं।

लेकिन बुद्धिमान लोग, अपने मन की दीनता विनम्रता और विवेक से चलकर, शांति और एकता बनाए रखने या बहाल करने के लिए परमेश्वर और मनुष्यों के क्रोध को शांत करते हैं। जो लोग बुद्धिमान होते हैं वे ठट्ठा करने वाले लोगों से बचने में और उनकी संगति से दूर रहने में सावधानी बरतते हैं (नीतिवचन 22:10); बल्कि वे परमेश्वर और मनुष्यों के साथ मेल-मिलाप करानेवाले बनते हैं (यहेज़केल 22:30; याकूब 3:17-18)।

ठट्ठा करने वाले लोग अहंकार से भरे मूर्ख होते हैं। मूर्ख वह व्यक्ति होता है जिसके पास न तो बुद्धि होती है, और न ही उसे प्राप्त करने की कोई अभिलाषा। वह अज्ञानी, आलसी और हठधर्मी होता है। वह एक पराजित मूर्ख है। मूर्ख बहुत बुरा होता है, परन्तु ठट्ठा करने वाला उससे भी अधिक बुरा होता है (नीतिवचन 26:12; 29:20)! ठट्ठा करने वाला मनुष्य अहंकार से युक्त मूर्ख होता है। वह घमंड में इतना फूला हुआ होता है कि उसे सुधारने वाले शिक्षकों को तुच्छ जानता है; वह इतनी नफ़रत से भरा उग्रवादी प्रवृत्ति का होता है कि वह झगड़ों का मज़ा लेता है। वह दूसरों के किसी भी सुधार, निर्देश, असहमति या विरोध पर क्रोधित हो जाता है (नीतिवचन 9:7-8; 21:24)।

मानवजाति स्वभाव से ही नफरती, दुर्भावनापूर्ण और स्वार्थी है (तीतुस 3:3)। एक मामूली चिंगारी से ही दंगे और झगड़े शुरू हो सकते हैं। यदि कोई बुद्धिमान व्यक्ति कोमल शब्दों से क्रोध को शांत करने के लिए मौजूद नहीं है, तो लड़ाई होने की पूरी सम्भावना होती है (नीतिवचन 15:1; 25:15)। लेकिन यदि कोई उपहास करने वाला मौजूद है, तो उसके नफरती और आक्रामक व्यवहार और शब्द छोटे-छोटे मतभेदों को हिंसक संघर्ष में बदल देंगे (नीतिवचन 15:1)।

जब गिदोन और उसके तीन सौ पुरुष मिद्यानियों का पीछा कर रहे थे, तो उसने अपने भूखे सैनिकों के खाने की व्यवस्था करने के लिए सुक्कोत और पनूएल नगरों के लोगों को बुलाया। उन्होंने उसका यह कहकर मज़ाक उड़ाया की वह और उसकी सेना मिद्यानियों को हराने की दृष्टि से बहुत छोटी और कमज़ोर थें। इसलिए जब उसने जीत हासिल कर ली, तो वह वापस लौटा और उन दोनों नगरों के ठट्ठा करने वालों को कड़ी सजा दी (न्यायियों 8:4-18)।

याबेश के लोगों ने अम्मोनियों के राजा नाहाश के सेवक बनने की पेशकश की। लेकिन उसने ठट्ठापूर्वक उनके पुरुषों की दाहिनी आँखें फोड़ने की माँग की। कैसा भड़काऊ अनुरोध था! इन्हें ही दंगा और झगड़ा भड़कानेवाले शब्द कहते हैं! याबेश लोगों ने, जो पहले नरम दिल के थें, इस्राएल से एक सेना जुटाई और नाहाश और उसके लोगों को पूरी तरह से पराजित कर दिया (1 शमू 11:1-11)।

इस नीतिवचन से एक सबक अम्मोन के लिए पर्याप्त नहीं था! बाद में, उनके राजा हानून ने दाऊद के राजदूतों की ठट्ठा की, इसलिए उसने अपने शक्तिशाली योद्धाओं के साथ योआब और अबीशै को भेजकर उनका विनाश कर दिया। हालाँकि दाऊद और हानून के पिता के बीच अच्छे संबंध थे, लेकिन हानून को अपने नफरती स्वभाव के कारण करारी सैन्य-पराजय का सामना करना पड़ा (2 शमू 10:1-14; 12:26-31)।

फिर भी, एक बुद्धिमान पुरुष या बुद्धिमान स्त्री किसी भी शहर को, यहाँ तक कि पुरे देश को क्रोध से बचा सकते हैं। ठट्ठा करने वाला शेबा, जिसने अबशालोम के विद्रोह के बाद सिंहासन पर दाऊद की बहाली के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, हाबिल शहर में छिपा हुआ था। योआब ने स्पष्ट समझाया कि क्यों उसकी बड़ी सेना ने उस नगर को घेर लिया था, और एक बुद्धिमान स्त्री ने ठट्ठा करने वाले उस पुरुष का सिर काट दिया और अमन के पैगाम के साथ उसे योआब को भेज दिया और इस तरह पुरे नगर को विनाश से बचा लिया (2 शमू 20:1-22)।

विचार करें कि कैसे इफिसुस के नगरसेवक ने विवेकपूर्ण और समझदारीपूर्ण शब्दों से प्रेरित पौलुस के उपदेश के कारण अपने शहर में दंगे की साजिश को कुचल दिया (प्रेरितों 19:23-41)। हालाँकि दिमेत्रियुस नामक एक सुनार ने अपनी हिंसक बयानबाजी से गुस्साई भीड़ को भड़का दिया था, एक बुद्धिमान व्यक्ति शहर को आत्म-विनाश या नागरिक अशांति के लिए रोम की कड़ी सजा से बचाने में सक्षम था।

अब तक के उदाहरण किसी शहर के विरुद्ध मनुष्यों के क्रोध से संबंधित हैं, लेकिन ठट्ठा करने वाले लोग परमेश्वर का क्रोध भी लाते हैं। मनश्शे जैसे नफरती राजा इस्राएल पर परमेश्वर का क्रोध ले आया (2 राजा 21:9-15; 23:26-27; 2 इतिहास 36:16-17; यशायाह 28:14-22; यिर्मयाह 36:23-32)। परन्तु बुद्धिमान राजाओं की नम्रता और अधीनता ने उसके क्रोध को टाल दिया और वे उसके क्रोध के बजाए उसके अनुग्रह को ले आएं (2 राजा 22:11-20; योना 3:5-10)।

बाइबल उन बुद्धिमान लोगों के उदाहरणों से भरी हुई हैं जिन्होंने अपने विवेक और समझदारी से परमेश्वर के क्रोध को अपने लोगों से दूर कर दिया। ऐसे पुरुषों के अलावा मूसा, हारून, पीनहास, एलियाह, आमोस, अय्यूब, दानिय्येल, शमूएल और नूह पर विचार करें। परमेश्वर के दण्ड के प्रति ठट्ठापूर्वक प्रतिक्रिया देने के बजाय, उन्होंने विनम्रतापूर्वक उसकी दया के लिए याचना की और अपने साथ साथ अपने लोगों को भी बचाया।

इस नीतिवचन का सबक और चेतावनी परिवारों और चर्चों पर भी लागू होते हैं। किसी परिवार या चर्च में ठट्ठा करने वाला व्यक्ति अपने अहंकारी विद्रोह के कारण उसे परमेश्वर या लोगों के क्रोध के अधीन कर देता है। माता-पिता और पास्टर को चाहिए कि वे ठट्ठा करनेवाले ऐसे लोगों को बेनकाब करें, उन्हें दण्ड दें, और निकाल बाहर करें (नीतिवचन 19:25,29; 21:11; 24:9)। जब ठट्ठा करनेवाले की पहचान कर उसे निकाल दिया जाएगा, तो कलह, दंगा और निन्दा का अंत हो जाएगा (नीतिवचन 22:10)!

चूंकि ठट्ठा करने वाले सबसे पहले घर पर ही दिखाई देते हैं, इसलिए माता-पिता को उन शब्दों, व्यवहारों या अभिव्यक्तियों को कड़ी सजा देनी चाहिए जो प्रकट करते हैं कि उनके दिलों में कैसा जहर है (निर्गमन 21:15,17; व्यवस्था 27:16; नीतिवचन 30:17)। ढुलमुल, असम्मानजनक रवैये को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है जो आजकल अधिकांश घरों में प्रचलित हैं। अधिकार या सुधार के प्रति घृणित और अशुद्ध उपेक्षा को पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए।

यहाँ आपके लिए कई सबक हैं। विनम्र और बुद्धिमान शासकों के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करें; प्रार्थना करें कि आपके नेता ठट्ठा करने वाले न हों (1 तीमु 2:1-2)। ठट्ठा करने वाले से घृणा करो ताकि तुम दूसरों को ख़तरे में न डाल सको। ठट्ठा करने वालों से ऐसे बचें जैसे किसी महामारी से – सुनिश्चित करें कि ऐसों में आपका कोई भी मित्र न हो। यदि आप अधिकार में हैं, तो ठट्ठा करने वालों को दंडित करें और जितनी जल्दी हो सके उनसे छुटकारा पाएं (नीतिवचन 19:25; 21:11)।

पुत्र – प्रभु यीशु मसीह – को चूमने से ही क्रोध शांत होता है (भजन 2:12)! परन्तु दुष्ट यहूदियों ने उसका ठट्ठा किया, जिसके कारण उनका राष्ट्र पूरी तरह से नष्ट हो गया (मत्ती 21:33-46; 22:1-7; 23:34-39; 1 थिस्स 2:14-16)। उन्होंने उसका उपहास किया और उसका मज़ाक उड़ाया, जिससे उनके शहर पर अब तक का सबसे बड़ा संकट आया (लूका 19:41-44; 21:20-22)।

आपके बारे में क्या, पाठक? क्या आप ठट्ठा करने वाले व्यक्ति हैं या बुद्धिमान व्यक्ति हैं? क्या आप परमेश्वर के सामने स्वयं को नम्र करते हैं या उसके क्रोध को भड़काते हैं? क्या आप पौलुस की इस चेतावनी की ठट्ठा करेंगे, “यदि कोई प्रभु से प्रेम न रखे तो वह शापित हो” (1 कुरिन्थ 16:22)? क्या आप यथाशक्ति सभी मनुष्यों के साथ शांति से रहते हैं, या क्या आपके हृदय और जीवन में कड़वी नफ़रत और कलह भरा है (रोम 12:18; याकूब 3:14-16)? आपका पाप आपको लगेगा!

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