नीतिवचन 29:25

मनुष्य का भय खाना फन्दा हो जाता है, परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है उसका स्थान ऊँचा किया जाएगा।

क्या आपको इससे फर्क पड़ता है कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं? यह एक खतरनाक जाल है। दूसरों का यह डर आपको पाप में धकेल सकता है। यदि आप उन्हें अपने निर्णयों में दखलंदाजी करने देंगे, तो आप उनमें समझौता करने पर मजबूर हो जाएंगे। केवल परमेश्वर और उसके वचन पर भरोसा रखें, और आप सुरक्षित रहेंगे (नीतिवचन 18:10; भजन संहिता 119:128)।

मनुष्य से डरना परमेश्वर से डरने के बिलकुल विपरीत है। उसका अर्थ परमेश्वर के बजाय, मनुष्यों को प्रसन्न करने और उनकी सहमति, मित्रता और अनुग्रह प्राप्त करने की चिंता करना होता है। आप उनकी नाराज़गी या अस्वीकृति से डरने लगते हैं, इसलिए आप उनकी स्वीकृति बनाए रखने और उनके मित्र बने रहने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। अपने जीवन को पवित्रशास्त्र के आधार पर मापने के बजाय, आप स्वयं के विषय में उनकी लोकप्रिय राय को लेकर चिंतित रहते हैं।

हम अक्सर अन्य मनुष्यों के इस डर को साथियों का दबाव कहते हैं। इसका स्रोत आपके साथी होते हैं, अर्थात वे जिनकी सामजिक स्थिति आपके बराबर हो, आपकी उम्र के लोग, ओहदे में आपके समकक्ष लोग। यह एक दबाव कहलाता है क्योंकि वे जिस बात की स्वीकृति देते हैं या नहीं देते हैं, यह आपको उनके साथ रहने के लिए अपने विश्वासों या कार्यों को बदलने के लिए मजबूर कर देता है। साथियों का यह दबाव आपको सांसारिक विलासिता में जीने के लिए मजबूर करता है (रोमियों 12:1-2)।

मनुष्यों का यह डर कई स्रोतों से आ सकता है। एक कर्मचारी को अपने मालिक से रोज़गार के बुनियादी सम्मान से परे, कहीं अधिक डर हो सकता है। एक पास्टर को अपने सदस्यों द्वारा उपदेश को अस्वीकार किए जाने और समर्थन के कम हो जाने का डर हो सकता है। एक व्यक्ति को अपने जीवनसाथी और उसके द्वारा उत्पन्न होने वाले घरेलू तनाव का डर हो सकता है। विद्वान जन या कलीसिया परिषद एक पास्टर को सत्य से समझौता करने के लिए डरा सकते हैं।

हारून मूसा की अनुपस्थिति में लोगों से डर गया था, इसलिए उसने दबाव में आकर सोने का बछड़ा बनाया (निर्गमन 32:22-24)। राजा शाऊल ने लोगों से डरकर अगाग को छोड़ देने के कारण अपना राज्य खो दिया (1 शमूएल 15:24)। हेरोदेस अपने लोगों, अपनी पत्नी और अपने मित्रों से डरता था, इसलिए उसने बप्तिस्मा देनेवाले यूहन्ना को मार डाला (मत्ती 6: 6-11)। पिलातुस को लोगों का और कैसर के साथ उसके राजनीतिक संबंधों का डर था (यूहन्ना 19:11-16)। पतरस ने दूसरों से डरकर यीशु मसीह को पहचानने से इन्कार किया (मत्ती 26:69-75) और यहूदियों से डरकर सुसमाचार से भी समझौता किया (गलातियों 2:11-13)।

वहीं दूसरी ओर, दाऊद अपने सबसे बड़े भाई के आरोप से हतोत्साहित नहीं हुआ (1 शमूएल 17:28)। दानिय्येल को शेरों की मांद से डर नहीं लगा, क्योंकि उसने नए क़ानून के बावजूद प्रार्थना करने की अपनी दैनिक आदत को बरकरार रखा (दानिय्येल 6:10)। उसके तीन मित्र नबूकदनेस्सर या उसकी धधकती भट्टी से नहीं डरे (दानिय्येल 3:16-18)। पिन्तेकुस्त के बाद पतरस और प्रेरितों ने साहसपूर्वक यहूदियों का सामना किया (प्रेरितों के काम 5:29)। और अरिमतिया के रहने वाले यूसुफ ने हियाव बांधकर यीशु का शव माँगा (मरकुस 15:43)।

आज अधिकांश ख्रिश्चन लोग परमेश्वर से अधिक मनुष्यों से डरते हैं। वे यहूदियों के कमज़ोर शासकों के समान हैं। बाइबल कहती है, “तौभी अधिकारियों में से बहुतों ने उस पर विश्वास किया, परन्तु फरीसियों के कारण प्रगट में नहीं मानते थे, कहीं ऐसा न हो कि वे आराधनालय में से निकाले जाएं; क्योंकि मनुष्यों की ओर से प्रशंसा उनको परमेश्वर की ओर से प्रशंसा की अपेक्षा अधिक प्रिय लगती थी” (यूहन्ना 12:42-43)।

सच्चा ख्रिश्चन विश्वासी होना और साथ ही मनुष्यों की स्वीकृति के प्रति भय या सम्मान रखना असंभव है। यीशु ने अपने वचन के सुननेवालों को चेतावनी दी, “तुम जो एक दूसरे से आदर चाहते हो, और वह आदर जो एकमात्र परमेश्वर की ओर से है, नहीं चाहते, किस प्रकार विश्वास कर सकते हो? (यूहन्ना 5:44) ऐसे कई और लोग थे, जो दूसरों की राय या उत्पीड़न से डरते थे (यूहन्ना 7:13; 9:22)।

अन्य मनुष्यों के डर को दूर करने के क्या उपाय हैं? मनुष्यों की तुलना में, पवित्रशास्त्र पर अधिक भरोसा रखें (अय्यूब 32:6-14; भजन संहिता 119:98-100; यशायाह 8:20)। भ्रष्ट या पापी मित्रों से दूर रहें (नीतिवचन 9:6; 22:24-25; भजन संहिता 101:3; 1 कुरिन्थियों 15:33)। अपनी रक्षा के लिए प्रभु पर भरोसा रखें (दानिय्येल 3:16-18; इब्रानियों 13:6)। सांसारिक मनुष्य की अज्ञानता और नाकाबलियत को ध्यान में रखें (भजन संहिता 39:5; 62:9; 1 तीमुथियुस 6:20)। व्यक्तिगत रूप से या एक कलीसिया के रूप में, किसी भी ऐसे संघ में प्रवेश न करें जो आप पर ग़लत करने का दबाव डाले (2 इतिहास 18:1; 2 कुरिन्थियों 6:14-18)।

याद रखें कि परमेश्वर या सत्य कभी भी लोकप्रिय नहीं होंगे। वास्तव में, वह सब कुछ जिसे संसार स्वीकार करता है और तुच्छ नहीं जानता, वह परमेश्वर की दृष्टि में घृणित ठहरता है (लूका 6:26; 16:15)। नूह के बारे में सोचो! क्या आप लोकप्रिय होना अच्छा लगता है, या उभय-निष्ठ? दानिय्येल के बारे में सोचो! क्या आप सिर्फ़ सूप और पानी पीना पसंद करेंगे, जबकि आपके साथी राजभोज से मांस और दाखरस का लुत्फ उठा रहे हों?

उत्पीड़न को पहचानें और स्वीकार करें। यह प्रमाण है कि आप यीशु मसीह का अनुसरण कर रहे हैं, और यही उसकी ओर से बड़ी प्रशंसा पाने का माध्यम है (यशायाह 51:7-8; 66:5; मत्ती 5:10-12; यूहन्ना 16:2; प्रेरितों के काम 5:41; 2 तीमुथियुस 3:12; 1 पतरस 4:12-16)। यदि उन्होंने यीशु मसीह से बैर रखा, तो वे निश्चय आप से भी बैर रखेंगे (यूहन्ना 15:18-25)। परन्तु आपके विरुद्ध बनाया गया कोई भी हथियार सफल नहीं होगा ( यशायाह 54:17)। इस पर विश्वास करो!

प्रिय युवा! आप सबसे अधिक कमज़ोर हैं। क्या आप साथियों के दबाव को समझते हैं और उससे भागते हैं? इस संसार के मूर्ख युवा आपको भी मूर्खता और पाप का पीछा करने, और परमेश्वर और पवित्रता से दूर हो जाने के लिए मजबूर करते हैं। क्या आप उनकी बोली, उनकी आदतों, उनके पहनावे और उनके फैशन के विरुद्ध अपनी राय आगे रख पाते हैं? क्या आप उनके व्यभिचार, विद्रोह और षड्यंत्रकारी गुटों से बैर रखते हैं? प्रभु का भय मानो!

क्या आपको एक मसीही कहलाने में शर्म महसूस होती है? क्या आप बिना किसी हिचकिचाहट के अपने स्कूल में बाइबल ले जा सकते हैं? या अपने कार्यालय में ले जा सकते हैं? क्या आप अविश्वासियों के सामने भी, उत्सुकता से अपने भोजन के समय परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं? क्या आप सांसारिक मनोरंजन में शामिल होने के निमंत्रण को आसानी से ठुकरा पाते हैं? क्या आप दूसरों को यह समझाने में सक्षम हैं कि रविवार का दिन प्रभु का दिन होता है? क्या आप आत्मविश्वास से साधारण कपड़े पहनते हैं?

प्रिय माता-पिता, क्या आप अपने बच्चों से डरते हैं? क्या आप उनके चेहरे, उनके स्वभाव या उनकी अस्वीकृति से डरते हैं? तो धार्मिकता के लिए खड़े हों और प्रभु पर भरोसा करें। एली ने अपने बेटों के लिए समझौता किया, और अपना सब कुछ खो दिया (1 शमूएल 2:30; 3:13)। यहोशू अपने पूरे घराने के लिए पीछे हट गया, और एक पिता के रूप में अपने इस साहसी तत्परता के कारण 4000 वर्षों से उसका ज़िक्र किया जाता रहा है। अपना कर्तव्य निभाएँ (नीतिवचन 29:15,17)।

प्रिय पतिगण, क्या आप अपनी पत्नी से डरते हैं? क्या घरेलू शांति के भंग हो जाने के कारण आपको समझौता करना पड़ता है? अब्राहम अपने परिवार को प्रभु के मार्ग पर चलने की आज्ञा देने में परमेश्वर का मित्र कहलाता था (उत्पत्ति 18:19)। आपको अपनी पत्नी पर प्रभुता करना चाहिए (उत्पत्ति 3:16)। उसके पास न तो आपका पद है और न ही परमेश्वर की इच्छा जानने की क्षमता (1 कुरिन्थियों 14:34-35)। क्या आदम द्वारा अपनी पत्नी की बात मानने या अब्राहम द्वारा अपनी पत्नी की बात मानने के उद्धृत परिणाम आपको डराते हैं? तो आपको डरना भी चाहिए!

प्रिय मसीही स्त्री! क्या आप आज के फैशन ट्रेंड को लेकर चिंतित रहती हैं? क्या आप भी अपनी कमियों को छिपाने और अधिक दिखावा करने की समाज की इस होड़ में लगी हुई हैं? क्या आप अधिक कपड़े पहनकर स्वयं को ढकने में सक्षम हैं, जबकि अन्य महिलाएं कम कपड़े पहनकर अपना अंग-प्रदर्शन करती हैं? ऐसा क्या है जो आपको अच्छे से बनाए गए बालों और नई पोशाक और अन्य उपसाधनों की तुलना में, एक नम्र और शांत आत्मा को अधिक महत्व देने से रोकता है (1 पतरस 3:3-4)? क्या यह साथियों का दबाव ही है जो आपको अपनी सबसे आकर्षक पोशाक को न पहनने से रोकता है, ताकि आप पवित्र ठहरें?

पास्टर, केवल वचन का प्रचार करें (2 तीमुथियुस 4:2)! अनुमोदन पाने के लिए अपने लोगों के चेहरों की ओर न देखें (यिर्मयाह 1:17)। सदैव आग्रही, हठी और चेतावनी देनेवाले बने रहें (2 तीमुथियुस 4:2)। आपसे पहले भी ऐसे कई पास्टर होकर गएँ हैं, जो किसी शिकंजे या दांव से नहीं डरते थे। क्या आप उनकी नेक संगति के योग्य हैं? उन्हें अपना आदर्श बनाएँ ताकि वे आपकी सेवकाई को आकार दे सकें (इब्रानियों 12:1-4)।

प्रिय पास्टर, खरे सिद्धांत के उपदेश की अनदेखी करने वाले और लोगों को खुश रखनेवाले पास्टरों की संगति का तिरस्कार करें। वह समय आ गया है जब मनुष्य खरे उपदेश को सहन नहीं कर सकेंगे, परन्तु आपको फिर भी आग्रहपूर्वक वचन का प्रचार करना है (2 तीमुथियुस 4:1-5)। परमेश्वर ने आपको अपनी कलीसिया को लोगों की भीड़ से भरने के लिए नहीं बुलाया है। चर्च में सदस्यों की संख्या बढ़ाने के लिए ऐसा कुछ न करें जिसमें आपको किसी प्रकार का समझौता करना पड़े। परमेश्वर ने आपको अपनी कलीसिया को आत्मिक रूप से बढ़ाने के लिए बुलाया है। आपको परमेश्वर को प्रसन्न करना है, मनुष्यों को नहीं (गलातियों 1:10)।

क्या आप शत्रुओं से, या शिक्षकों से, या पूर्वजों से डरते हैं? या इन तीनों डरते हैं? परमेश्वर के उपदेशों पर ध्यान करने और उनका पालन करने के कारण, भजनकार इन तीनों प्रकार के मनुष्यों के विरुद्ध आश्वस्त था (भजन संहिता 119:98-100)। नवयुवकों और प्रभु के सेवकों के लिए इन वचनों को याद रखना आवश्यक होना चाहिए। क्या आप अपने मित्रों से डरते हैं? यदि ऐसा है तो फिर यह सुनिश्चित करें कि आपके केवल ऐसे मित्र हो जो इस सत्य से प्रेम रखते हैं (भजन संहिता 119:63)।

परमेश्वर के प्रत्येक शब्द का आदर करते हुए (भजन संहिता 119:128) और यह जानते हुए कि कोई भी मनुष्य आपको कोई हानि नहीं पहुँचा सकता, प्रभु पर भरोसा रखें (नीतिवचन 16:7; 1 पतरस 3:13)। आपको एक दिन अपने जीवन का लेखा किसी मनुष्य को नहीं, बल्कि परमेश्वर को देना होगा (सभोपदेशक 12:13-14; 2 कुरिन्थियों 5:10-11)। केवल उसी से डरो, जो सचमुच हानि पहुँचाने में सक्षम है (लूका 12:4-5)।

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