नीतिवचन 29:24

जो चोर की संगति करता है वह अपने प्राण का बैरी होता है; शपथ खाने पर भी वह बात को प्रगट नहीं करता।

परमेश्वर चोरी से बैर रखता है। वह चोरों को दण्ड देगा, पर साथ ही वह उन सब को भी दण्ड देगा जो चोरों की रक्षा करते हैं। अगर आप किसी चोर की रक्षा करते हैं, तो आप अपने ही प्राण के बैरी है, क्योंकि आप अपने ही पर परमेश्वर का न्याय ला रहे हैं। जब आप किसी चोर की जानकारी दे सकते हैं या उसके खिलाफ गवाही दे सकते हैं, तो आपको ऐसा ही करना चाहिए।

इस नीतिवचन को समझें। जब आप एक गवाह बनकर अदालत में जाते हैं और शपथ लेते हैं, तो आपको सच बोलना चाहिए और चोर के बारे में जो कुछ भी आप जानते हैं, वह सब बताना चाहिए। अगर आप सब कुछ नहीं बताते हैं, तो आप चोर के साथ उसके गुनाह में भागीदार बनने का फैसला लेते हैं, और परमेश्वर उस चोर के साथ आपको भी न्यायोचित रूप से दंड देगा।

सोचकर देखें कि अदालत में सच न बोलने के कारण आपका पाप कितना बुरा हैं – आपने उस चोर की चोरी के अपराध में जिसे आप बचा रहे हैं, अपना झूठ भी जोड़ दिया है। परमेश्वर को झूठा गवाह बनने के पाप और जो यह पाप करता है उस मनुष्य, दोनों से बैर रखता है, जैसा कि सुलैमान ने साफ़ साफ़ लिखा भी है (नीतिवचन 6:16-19)।

क्या आप एक चोर को बचाकर खुद निर्दोष छूट सकते हैं? क्या आपको लगता है कि आपका पाप मामूली है, सिर्फ इसलिए कि क्योंकि आपने खुद कुछ नहीं चुराया? आप मूर्ख हैं; आप अपने ही प्राण के बैरी हैं; आप पर न्याय आने पर है। परमेश्वर को चोरों के साथ साथ उनके साथियों से भी बैर रखता है। यह सोचकर खुद को यह धोखा न दें कि आप निर्दोष हैं। अगर आप किसी अपराधी को बेनकाब कर सकते हैं या किसी अपराध को सुलझाने में मदद कर सकते हैं, तो यह आपका कर्तव्य है कि आप सब कुछ बताएं।

चोर के अपराध में साझेदार बनने की बात दूसरे खंड में समझाई गईं है। जब संपत्ति के मालिक, सत्र न्यायाधीश या अन्य अधिकारी आपसे शपथ लेने को कहते हैं, इसके बावजूद आप इनकार करते हैं कि आप कुछ भी जानते हैं। हो सकता है कि आपने चोरी की गाड़ी न चलाई हो, लेकिन जब पूछताछ की गई तो आपने चोर का पर्दाफाश नहीं किया। कितनी बार बच्चों और युवाओं को सच के इस पल का सामना करना पड़ता है।

यहाँ शपथ सत्य बोलने की शपथ है (गिनती 5:21; न्यायियों 17:2)। अमेरिका में, अदालत में गवाह अक्सर अपने दाहिने हाथ को परमेश्वर की ओर उठाकर और अपने बाएं हाथ को बाइबल पर रखकर सच की शपथ लेते हैं, “क्या आप सच, पूरा सच और केवल सच के अलावा कुछ भी नहीं बोलने की शपथ लेते हैं, ताकि परमेश्वर आपकी मदद करें?” यह एक शासक का शाप सुनना है, जो गवाहों को सत्य बोलने के लिए प्रेरित करता है।

उचित शपथ लेना परमेश्वर की आराधना का ही एक कार्य है, क्योंकि आप विश्व में सर्वोच्च न्यायाधीश के रूप में यहोवा परमेश्वर का सम्मान करते हैं। इस्राएल को यहोवा के नाम की शपथ लेनी पड़ती थी (उत्पत्ति 24:3; व्यवस्थाविवरण 6:13; 10:20; यिर्मयाह 4:2)। वे इन शब्दों को कहकर सत्य की पुष्टि करते थें: “यहोवा जिसने हमारा यह जीव रचा है, उसके जीवन की सौगन्ध” (यिर्मयाह 38:16)। जब आप इस पवित्र तरीके से शपथ लेते हैं, तो भला होगा कि आप अपनी सौगन्धे पूरी करें (सभोपदेशक 5:1-7)। यह कितनी बड़ी ईशनिन्दा है कि यहोवा के साक्षी नामक एक झूठा सम्प्रदाय परमेश्वर के उस शानदार नाम की शपथ नहीं लेते जिसे उन्होंने बाइबल से चुराया है!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अर्थात विश्व के सर्वोच्च अधिकारी की उचित सौगन्ध लेने का उद्देश्य यही है कि झूठ बोलने के किसी भी विचार या संभावना को मिटा देना (इब्रानियों 6:16)। मूसा ने चोरी सहित मामलों की तह तक पहुँचने के लिए ऐसी शपथ खाने का आदेश दिया (निर्गमन 22:8-15; व्यवस्थाविवरण 21:1-9; 1 राजा 8:31-32; 22:16)। यह बुद्धिमानी से भरी परम्परा है, और यह झूठ बोलने वालों पर और भी कठोर न्याय को ले आता है।

“यदि कोई साक्षी होकर ऐसा पाप करे कि शपथ खिलाकर पूछने पर भी कि क्या तू ने यह सुना अथवा जानता है, और वह बात प्रगट न करे, तो उसको अपने अधर्म का भार उठाना पड़ेगा” (लैव्यव्यवस्था 5:1)।

प्रगट करने का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है किसी मामले से पर्दाफाश करना। चूँकि “प्रगट” अब आम उपयोग में नहीं है, इसलिए ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में इसकी परिभाषा दी गई है:

किसी व्यक्ति की पोल खोलना, उसकी गुप्त बातों को उजागर करना, या किसी को कुछ ऐसा बताना जो उसे बदनाम या नुकसान पहुँचाए। प्रकट करना, खुलासा करना, घोषित करना, ज्ञात करना, दिखाना।

पवित्र आत्मा ने जिस प्रकार इस शब्द का उपयोग किया इस पर भी विचार करें। एक घृणित महिला को छिपाया नहीं जा सकता, क्योंकि वह प्रकट की जाएगी – उसकी पोल खुलेगी, उसकी घोषणा की जाएगी, या उसे दुनिया के सामने दिखाया जाएगा – कि वह क्या है, ठीक वैसी ही जैसे कि जब आप इत्र लगाए हुए व्यक्ति के पास से गुजरते हैं तो उसकी खुशबू आती है (नीतिवचन 27:16)। हर कोई जानता है कि वह स्त्रीजाति पर एक कलंक है, और देखनेवालों को उसके पति पर उसकी भयानक दुर्दशा के कारण तरस आना चाहिए। और जैसे पतरस के सन्देश से पता चला – पता चला या संकेत मिला – कि वह गलील का था (मत्ती 26:73)।

यदि आप को शपथ खिलाकर या किसी अधिकारी द्वारा चोरी के बारे में पूछताछ की जाती है, और आप अपराधी का नाम नहीं बताते हैं, तो आप दो अपराधों के दोषी हैं (निर्गमन 20:15-16)। आपको किसी भी मनुष्य से ज़्यादा परमेश्वर का भय मानना चाहिए (नीतिवचन 29:25); न्याय-प्रणाली में बाधा डालना गम्भीर पाप है (निर्गमन 23:1-7; व्यवस्थाविवरण 19:15-21); ईमानदार अधिकारी के सामने ऐसा मददगार खुलासा बिल्कुल भी चुगली या बुराई करना नहीं है (1 तीमुथियुस 5:13; 1 कुरिन्थियों 1:11)।

हो सकता है कि आप चोरी के बारे में अदालत में कभी गवाही न दें। लेकिन अन्य परिस्थितियाँ आपको सच बताने और दूसरों के किए गलत कामों को प्रगट करने के लिए पुकारती हैं। माता-पिता बच्चों से सवाल करते हैं, शिक्षक और प्रिंसिपल छात्रों से सवाल करते हैं, और नियोक्ता कर्मचारियों से सवाल करते हैं। उन्हें जानकारी की आवश्यकता होती है ताकि वे बुरे लोगों को दण्ड दे सकें और दूसरों की रक्षा कर सकें। उन्हें सच जानने का अधिकार है।

क्या आप इस नीतिवचन को याद रखेंगे और अपने भाई-बहन, सहपाठी या सहकर्मी के अपराध का खुलासा करेंगे? परिणामों पर विचार करें। यदि आप किसी अपराध को छिपाते हैं, तो आप अपने ही बैरी हैं, क्योंकि परमेश्वर का न्याय आप पर और अपराधी पर भी उतर रहा है। परमेश्वर और मनुष्यों के सामने यह आपका कर्तव्य है कि जब आपसे पूछा जाए तो गलत काम करने वालों का खुलासा करें और उन्हें प्रगट करें।

इस नीतिवचन में बुद्धि है। एक व्यवस्थित समाज के लिए ईमानदारी बहुत ज़रूरी है। कानूनी शपथ की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आप अपराध के बारे में जानकारी के साथ जो करते हैं, उससे आप पर परमेश्वर का या तो अनुग्रह होगा या दण्ड मिलेगा। परमेश्वर एक गौरवशाली न्यायाधीश है जो झूठी गवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा। पापी की रक्षा करना पापी के साथ दोषी होना है। परमेश्वर सत्य और संपत्ति के अधिकारों की मांग करता है और उन्हें लागू करता है।

यीशु मसीह को धोखे से पकड़वाकर जब उसपर लम्बा मुक़द्दमा चला उस दौरान उसने पूरी तरह से चुप्पी साधे रखी; पिलातुस खुद अचम्भित हुआ (मरकुस 15:5; यशायाह 53:7)। लेकिन जब महायाजक ने उसे सत्य बोलने की शपथ दिलाई, तो उसने सीधे और ईमानदारी से उत्तर दिया (मत्ती 26:63-64)। फिर उसने महायाजक और अन्य यहूदी अगुओं को उस भयानक न्याय के बारे में एक गंभीर चेतावनी दी जो वह उन पर ले आनेवाला था! क्या आप इस गौरवशाली राजा को जानते हैं? क्या आपने खुद को नम्र किया है और वचन और कर्म से उसे अपने जीवन का प्रभु माना है?

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