नीतिवचन 29:21
जो अपने दास को उसके लड़कपन से ही लाड़–प्यार से पालता है, वह दास अन्त में उसका बेटा बन बैठता है।
यहाँ प्रबंधकों के लिए अच्छी सलाह है। किसी कर्मचारी के साथ समझदारी और सावधानी से पेश आने से उसके साथ परिवार के सदस्य जैसा रिश्ता बन सकता है। बाइबल में स्वामी और दास के बीच बहुत दूरी दिखाई गई है, जो आज भी नियोक्ता और कर्मचारियों के बीच मौजूद है। योग्यता और पद में इस महत्वपूर्ण दूरी को बनाकर रखा जाना ही चाहिए है। लेकिन विवेकशील प्रबंधक अपने कर्मचारियों से न केवल उनकी मेहनती आज्ञाकारिता बल्कि स्नेहपूर्ण वफ़ादारी भी हासिल करते हैं।
बाइबल अधिकार की शिक्षा किसी भी अन्य तत्वज्ञान या धर्म से बढ़कर देती है, उअसकी पैरवी करती है और उसे बढ़ावा देती है, क्योंकि सभी मानवीय रिश्तों की बुनियाद एक सृष्टिकर्ता परमेश्वर की संप्रभु सत्ता है। यहोवा ने मानवीय अधिकार के पाँच क्षेत्र निर्धारित किए हैं – पति, माता-पिता, स्वामी, न्यायधीश और पास्टर। इसलिए उनके पदों से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता (सभोपदेशक 10:5-7; रोमियों 13:1-7; 1 कुरिं 11:9; इफिसियों 6:1-9; कुलुस्सियों 3:18-25; इब्रानियों 13:7,17; 1 पतरस 2:13 – 3:7)।
लेकिन बाइबल इस परमेश्वर-प्रदत्त अधिकार के दुरुपयोग पर प्रतिबंध भी लगाती है और दुरुपयोग के लिए कड़ी सजा का प्रावधान भी देती है (भजन 12:5; सभोपदेशक 5:8)। मालिकों के अपने नौकरों पर अधिकार की कुछ सीमाएं होती हैं, और वे उनके साथ निष्पक्षता, दयालुता और प्रेम के साथ व्यवहार करने के लिए बाध्य होते हैं (लैव्यव्यवस्था 19:13; 25:39-46; व्यवस्थाविवरण 15:12-18; 24:14-15; इफिसियों 6:9; कुलुस्सियों 4:1)। और परमेश्वर का सिद्धांत सिखाता है कि आप जितना प्रेम अपने पड़ोसी से चाहते हैं, आपको भी अपने पड़ोसी से वैसा ही प्रेम करना है, जिसमें दास भी शामिल हैं (लूका 6:31; 10:27)।
पुराने रूढ़िवादी और इवैन्जलिकल भाष्यकारों ने इस नीतिवचन को बहुत अलग तरीके से समझा। उनका मानना था कि यह एक दास के साथ उसकी युवावस्था में बहुत अच्छा व्यवहार करने की निंदा करता है, क्योंकि वह विलासिता से बिगड़ जाएगा, अपना उचित स्थान भूल जाएगा, और बाद में वारिस के बराबर होने का एक दुस्साहसी अनुमान लगाएगा। चूँकि अधिकांश भाष्यकार आम तौर पर एक-दूसरे का अनुसरण करते हैं, इसलिए वे यहाँ एक-दूसरे से सहमत भी होते हैं। उनकी व्याख्या और अनुप्रयोग निम्नलिखित कारणों से गलत हैं।
सबसे पहला, प्रयुक्त शब्दों का व्यंग्यात्मक स्वरुप पाठक को स्पष्ट दिखाई देना चाहिए, जो यहाँ स्पष्ट नहीं है। इस नीतिवचन का सरल पाठ उस सकारात्मक निर्देश की ओर इशारा करता है जिसमें नौकरों के बुद्धिमानीपूर्ण तरीके से व्यवहार करने की शिक्षा है। व्यंग्यात्मक फटकार के विपरीत अर्थ में शब्दों को लेना वास्तव में कठिन है, क्योंकि यहाँ ऐसी किसी व्याख्या के लिए कोई शब्द या संदर्भ संकेत नहीं हैं।
दूसरा, “लाड़-प्यार” का अर्थ ऐशोआराम की ज़िन्दगी देना नहीं है, क्योंकि इसका अर्थ सावधानी और चतुराई से व्यवहार करना भी है, जैसा कि अगाग आनन्द के साथ शमूएल के पास आया था (1शमूएल 15:32)।
तीसरा, सुलैमान ने नीतिवचन में कहीं और यह भी सिखाया कि बुद्धि से चलनेवाला दास अपने स्वामी के उस पुत्र पर जो लज्जा का कारण होता है प्रभुता करेगा, और उस पुत्र के भाइयों के बीच भागी होगा (नीतिवचन 17:2)। साथ ही यह भी सिखाया कि जो कर्मचारी बुद्धि से काम करता है उस पर राजा प्रसन्न होता है (नीतिवचन 14:35)। यीशु ने सिखाया कि बुद्धिमान और विश्वासयोग्य दास को बड़ी पदोन्नति दी जाएगी (लूका 12:41-48)।
चौथा, बाइबल नौकरों के साथ दुर्व्यवहार के विरुद्ध कड़ी चेतावनी देती है तथा उनके साथ दयालुता से व्यवहार करने की माँग करती है। मूसा ने सेवकों को लेकर यह आज्ञा दी, “उस पर कठोरता से अधिकार न करना; अपने परमेश्वर का भय मानते रहना” (लैव्यव्यवस्था 25:43)। दासियों को बेटियों के समान माना जाना है तथा उन्हें भोजन, वस्त्र देकर उनके विवाह तक का कर्तव्य निभाया जाना है (निर्गमन 21:9-11)। मूसा ने सेवकों को अपने स्वामियों से प्रेम करने तथा जीवन भर उनके साथ रहने के लिए भी कहा (निर्गमन 21:1-6)। और सुलैमान ने माना कि स्वामी तथा दास दोनों का भोजन एक ही होता था (नीतिवचन 27:27)।
सेवकों के प्रति अय्यूब के शुद्ध और उत्तम दृष्टिकोण पर विचार करें। उसने कहा, ““जब मेरे दास या दासी ने मुझ से मेरी शिकायत की, तब यदि मैं ने उनका हक मार दिया हो; तो जब ईश्वर उठ खड़ा होगा, तब मैं क्या करूँगा? जब वह आएगा तब मैं क्या उत्तर दूँगा? जिसने मुझे गर्भ में बनाया क्या वही उसका भी बनानेवाला नहीं? क्या एक ही ने हम दोनों की सूरत गर्भ में न रची थी?” (अय्यूब 31:13-15)। हालाँकि उन दिनों दासों के कोई कानूनी अधिकार नहीं होते थे, फिर भी अय्यूब ने उन्हें अपने पास आकार शिकायत करने का अधिकार दिया था।
अब्राहम का अपने एक दास – दमिश्कवासी एलीएजेर – के साथ इतना घनिष्ठ संबंध था कि उसने उसे अपना उत्तराधिकारी बनाने का भी मन बना लिया था (उत्पत्ति 15:2-3)। बाद में उसने अपने बेटे इसहाक के लिए दुल्हन चुनने का काम दूसरे दास को सौंपा, जिसके परिणामस्वरूप रिबका इस्राएल की माँ बनी (उत्पत्ति 24:1-67)। और पौलुस ने फिलेमोन से कहा कि वह उनेसिमुस को दास की तरह नहीं वरन् दास से भी उत्तम, अर्थात् भाई के समान माने (फिलि 1:16)।
पाँचवाँ, दानिय्येल, हालाँकि इस्राएल से एक बंदी नपुंसक था, लेकिन नबूकदनेस्सर, दारा और कुस्रू उसके साथ प्यार से पेश आते थें। यहाँ तक कि बेलशस्सर ने उसे राज्य में तीसरे स्थान पर पदोन्नत किया (दानिय्येल 5:29)। हालाँकि वह युद्ध एक बंदी था, फिर भी उसे कई राजाओं के आंतरिक मंत्रालयों में पदोन्नत किया गया। पोतीपर और फिरौन के बुद्धिमान प्रबंधन के कारण यूसुफ को पोतीपर के पूरे घराने और फिर मिस्र देश पर ही पदोन्नत किया गया (उत्पत्ति 39:1-6; 41:38-45)।
छटवां, अमेरिका और अन्य देशों में गुलामी के इतिहास में ऐसे उदाहरण शामिल हैं जहाँ नौकरों के साथ परिवार के सदस्यों सा व्यवहार किया जाता था और दोनों तरफ गहरा और स्थायी स्नेह और वफ़ादारी होती थी। पौलुस ने युवा बेटों और नौकरों के बीच ज़्यादा अंतर नहीं माना (गलातियों 4:1-2)। साफ़ है, कि ऐसे स्वामी हुआ करते थे जो इस नीतिवचन की कोमल बुद्धि का व्यावहारिक उपयोग करते थे।
सातवाँ, जो बाइबल भाष्यकार दूसरी व्याख्या करते थे वे खुद गुलामों की खरेदी करनेवाली पीढ़ी से थे, जिन्होंने इस नीतिवचन के दया और अनुग्रहपूर्ण सिद्धांत की व्याख्या को नज़रअंदाज़ कर दिया था। 18वीं सदी के इंग्लैंड और 19वीं सदी के अमेरिका में गुलामी के खिलाफ़ आवाज़ उठने के कारण, उन्होंने नौकरों को उनके स्थान पर रखने के लिए अधिक कठोरता को आवश्यक जाना, इसलिए घरेलू शांति बनाए रखने के लिए पास्टरों और कलम को झुका दिया गया था।
इस नीतिवचन की व्याख्या से परे, हमारे लिए क्या सबक है? कर्मचारियों के साथ परिवार के सदस्य जैसा विचारशील और चतुराईपूर्ण व्यवहार का नतीजा यह होगा कि स्नेह और विश्वासयोग्यता का संबंध स्थापित होगा। एक कहावत है, “आप शहद के उपयोग से ज़्यादा मक्खियाँ पकड़ सकते हैं, सिरके के उपयोग से नहीं।” आप दया के व्यवहार से ज़्यादा भक्ति और परिश्रम आकर्षित कर सकते हैं, न कि मतलबीपन से। ख्रिश्चन नियोक्ताओं को हर समय अपने कर्मचारियों के साथ विवेकपूर्ण और समझदारी से व्यवहार करना चाहिए। उन्हें सभी शिकायतों का निष्पक्ष और न्यायसंगत तरीके से निवारण करना चाहिए, और जो उनकी सेवा करते हैं उन लोगों के साथ उन्हें खुलकर और ईमानदारी से वार्तालाप करना चाहिए।
“ताकत ही सबकुछ है” परमेश्वर-द्वेषियों का एक मूर्खतापूर्ण आविष्कार है। बुद्धिमान व्यवसायी और प्रबंधक सावधानीपूर्वक और चतुराईपूर्ण व्यवहार से कर्मचारियों का प्रेम और उनकी वफ़ादारी जीतते हैं। दिल से की गई सेवा डर से या तनख्वाह पाने के लिए की जानेवाली सेवा से उत्तम है। पति, माता-पिता, न्यायधीश और पास्टर भी समझेंगे कि यह सिद्धांत उन पर भी लागू होता है। सही आचरण बाइबल से निर्धारित और परिभाषित किया जाता है, न कि अधिकार रखने वालों की ताकत से।
यदि आप केवल शक्ति और विशेषाधिकार के द्वारा अपने अधिकार को लागू करना चाहते हैं, तो आप अपने परमेश्वर यहोवा की परीक्षा लेते हैं, जो कि एक बहुत गंभीर अपराध है (सभोपदेशक 5:8; इफिसियों 6:9; कुलुस्सियों 3:19,21; 4:1)। प्रत्येक ख्रिश्चन पाठक को अपने अधिकार के अधीन लोगों के प्रति वैसी ही दयालुता दिखानी चाहिए जैसी उनका स्वर्गीय पिता अपने शत्रुओं के प्रति दिखाता है (मत्ती 5:43-48; प्रेरितों के काम 14:17)। हालाँकि वह सबका प्रभु है, वह सबके लिए अच्छा भी है और उनकी इच्छाओं को पूरा करता है (भजन 145:9-16)।
नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।