नीतिवचन 29:19
दास बातों ही के द्वारा सुधारा नहीं जाता, क्योंकि वह समझकर भी नहीं मानता।
विद्रोह सक्रिय या निष्क्रिय हो सकता है। दुष्ट दास मौखिक ताड़ना को नहीं मानेंगे, क्योंकि उनका हृदय विरोध से भरा होता हैं। वे इतना तो डरते हैं कि अपने मुंह से श्राप की बातें न निकालें, लेकिन उनमें एक सद्गुणी दास की भावना नही होती। भले ही उन्हें स्पष्ट रूप से या बार-बार सुधारा जाता है और वे सबक सीखने और अपने आवश्यक सुधार को समझते हैं, पर फिर भी वे ठीक से जवाब नहीं देंगे या अपने बर्ताव मे सुधार नहीं करेंगे। इसलिए उनपर अधिकार को कठोरता से लागू करने की आवश्यकता होती है।
एक निंदनीय, खिन्न, असभ्य दास अपने हठी विद्रोह को मौखिक निर्देश और सुधार की उपेक्षा करके दर्शाएगा। चीजों को ध्यानपूर्वक और स्पष्ट रूप से समझाने पर भी, न तो वह उनसे सहमत होगा और न ही उन्हें मानेगा। हालांकि वह आपके द्वारा पूछे गए प्रश्नों को समझता तो है, पर उनका उत्तर नहीं देगा। उस अधिकार को तड़पाने के लिए जिससे वह घृणा करता है, वह चुप्पी का उपयोग करता है। वह आपके नियम को न मानकर चुपचाप अपनी दुष्टता व्यक्त करता है। लोग ऐसे व्यक्ति का वर्णन एक ऐसे व्यक्ति के रूप में करते हैं जिसे “मुझे क्षमा कर दो” कहना नही आता।
यदि आप स्वयं को यह कहते हुए पाते हैं कि “कुछ तो बोलो ” तो आप उस विद्रोही समस्या’ में है जिसका वर्णन यहाँ सुलैमान ने अपने बेटे से किया। मौन सहमति या समर्पण का प्रमाण नहीं है; यह अक्सर अवज्ञा का ऊँची आवाज में कहा कथन होता है। वे शब्दों से परे अन्य उपायों का उपयोग करना आवश्यक मानते हैं। यह कोई ऐसा-वैसा दास नहीं है, क्योंकि बहुत से दास बातों ही के द्वारा सुधर जाते हैं (मत्ती 8:9)।
ऐसे विद्रोह को कुचल दिया जाना चाहिए। व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए अधिकार को लागू करना अवश्य होता है। इसे मूसा की व्यवस्था के अंतर्गत दो विकल्पों द्वारा हल किया गया था। मूसा की व्यवस्था के अनुसार, आवश्यक होने पर आप अपने दास को कोड़े लगवा सकते थे (नीतिवचन 19: 29 ; 26:3, निर्गमन 21:20-21)। और यदि आप उसे कोड़े लगवाकर भी नहीं सुधार पाते, और तंग आ जाते, तो आप उसे किसी अधिक प्रभूत्व वाले स्वामी को बेच सकते थें। मूसा की व्यवस्था अनावश्यक कठोरता के विरुद्ध चेतावनी देती है ( लैव्यवस्था 25:43), परंतु फिर भी अधिकार की गरिमा को बनाए रखना आवश्यक होता था ( नीतिवचन 19:25; 21:11; 26:3)।
आधुनिक रोजगार-प्रणाली में मूसा की व्यवस्था में वर्णित प्रावधान नहीं है, इसलिए आज के बुद्धिमान स्वामी लड़ाकू असफल कर्मचारियों को नौकरी से ही निकल देते हैं। एक खराब सेब रखने से पूरा गुच्छा खराब हो जाएगा। एक विद्रोही कर्मचारी को रहने देना, भले ही वह मौन विद्रोह करे, वह आपके अधिकार पर भारी पड़ेगा। यदि आपके पास तिरस्कारी कर्मचारी है, और आप उसे सुधार नहीं सकते तो उसे बाहर निकाल दें (नीतिवचन 22:10)।
माता-पिता क्या आप अपने बच्चों को जानते हैं ? क्या आप जानते हैं कि मौन कब विद्रोह बन जाता है? क्या आप उनमें चिड़चिड़ेपन का अवलोकन करते हैं? क्या आप समझ पाते हैं कि एक अंतर्मुखी और गैर-मिलनसार बच्चा एक समस्या हो सकता है? क्या आप उनके तुनकमिज़ाज भिन्नताओं को जानते हैं, और क्या आप निरुस्ताही बच्चों पर ध्यान देते हैं जिनमें संकोची प्रतिक्रिया देने की प्रवृत्ति होती है ? आपके पलक झपकते ही उनका विद्रोह बढ़ सकता है।
विद्रोह का रूप सक्रिय या निष्क्रिय, ऊँची आवाज में या मौन ,क्रोधित या हठी हो सकता है। निष्क्रिय विद्रोह का पता लगाना आपका काम है। बच्चे को आपके निर्देशों ,सुधार या प्रश्नों को टालने न दें। वे शीघ्रता से टालने की युक्तियों को सीख लेते हैं, क्योंकि उन्हें पता होता हैं कि आप पूछ पूछकर थक जाएंगे और उन्हें भूल जाएंगे। उनके बहानो को अस्वीकार करें, जैसे कि उनका अधिक समय मांगना; आपका सामना करते समय बच्चों के पास ऐसी कोई विद्रोही विलासिता नहीं होती है।
स्मरण रखें कि परमेश्वर कैसे अनादर करने वाली आंखो से घृणा करता है (नीतिवचन 30:17)। अपने बच्चों के चेहरों को देखे और उन्हें पढ़े। हर तरह की बदतमीजी को सुधारें ,चाहे वह उनके चेहरे के भावों में ही क्यों न हो। मौन अनादरणीय हो सकता है। जब आप इस तरह की समस्या का पता लगाते हैं, तो बच्चे को उसकी ज़िद से बचाने के लिए अधिक गंभीर उपायों को शीघ्रता से अपनाएं। इस मामले में छडी़ अद्भुत रीति से कार्य करेगी (नीतिवचन 22:15 ; 23:13-14: 29:15)।
मौन विद्रोह में आँसुओं का भी प्रयोग किया जाता है। वे अपनी दुष्टता से आपको यह कहने के बजाय कि वे ऐसा नहीं करेंगे, वे बस आंसूओं को बहाते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि भावना के इस तरह के दिखावे से उन्हें पिछली बार कैसे आपसे छुटकारा मिला था। यदि आँसू वास्तविक होंगे, तो वे क्षमा याचना के सच्चे शब्द कहेंगे और सही कार्य करेंगे। किसी भी बच्चे को, विशेषकर बेटियों को, आंसूओं को एक आवरण के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति न दें।
पतियों, अपने वैवाहिक जीवन को संभालो। अपनी पत्नी का चेहरा देखो और वैवाहिक जीवन में किसी भी समस्या के उठते ही उसका समाधान करो । मौन विद्रोह बहुत आम है। वे स्वं-धर्मी रूप से स्वयं को विनम्र साबित करेंगी, हर समय अपने अंदर कड़वाहट बढ़ाएंगी। इस पापपूर्ण विद्रोह को उसकी चुप्पी, सुलगती आँखों, चेहरे के हावभाव या भावभंगिमा से पहचाने। उस बातचीत को तब तक समाप्त न होने दो जब तक कि वह परमेश्वर और आपके साथ पूरी तरह से मेल न करे ।
पत्नियों, मौन रखना समर्पण नहीं है। यदि आपका पति आपको सुधारता हैं तो शीघ्रता से उसे बताएं कि आपको अपनी ग़लती पर खेद है। उसे (पति को) बताएं कि आपने सबक को समझ लिया है, और आप इसे कैसे समझी हैं यह उन्हें बताएं; भविष्य में बेहतर बर्ताव करने का वादा करो। क्या यह आपके गौरव के लिए बहुत मुश्किल है? अभी घुटनों पर आ जाओ और परमेश्वर के सामने अपने अहंकार को स्वीकार करो। घमंड एक भयानक पाप है,और यह आपके जीवन और घर को नष्ट कर देगा। उल्टा जवाब देना गलत है, चाहे वह शब्दों से हो या मौन से (तीतुस 2:9)। इससे बचकर रहें!
मसीहियों को अपने उद्धारकर्ता पर कभी भी एक दाग नहीं बनना चाहिए। उन्हें प्रसन्नता और पछाताप के साथ सुधार को ग्रहण करना चाहिए। उन्हें यथाशीघ्र सुधार करने की इच्छा आदरपूर्वक व्यक्त करनी चाहिए। फिर उन्हें वही करना चाहिए जो उनसे अपेक्षित है। दासों का मौन विद्रोह करना यीशु मसीह के सुसमाचार के सर्वथा विपरीत है (इफिसियों – 6:5- 7; 1 तीमुथियुस 6:1-2)।
मसीहियों को अपनी गलतियाँ दिखाई देने पर उन्हें यह कहने में बड़ी फुर्ती करनी चाहिए कि उन्हें अपनी गलती पर दुःख है। जो मनुष्य पृथ्वी पर यह कहने के लिए तैयार नहीं है कि वह गलत है, उसके पास अपने विद्रोह पर विचार करने के लिए अनंतकाल होगा, क्योंकि जानबूझकर किया गया इस तरह का हठ निंदनीय हैं। अवज्ञाकारी दास,पत्नियां और बच्चे, वे घृणित प्राणी हैं जो पृथ्वी को कंपाती है (नीतिवचन 30: 21-23), मसीहियों को ऐसी नामधराई से बचना चाहिए)
प्रिय मसीही पाठक, क्या आप उस महान परमेश्वर को समझते है जिसकी आप सेवा करते हैं? जब आप पाप के लिए दोषी ठहराए जाते हैं तो आपको ईमानदारी से उसके आगे इसका अंगीकार करना अवश्य है। अपने पाप से फिरने के लिए अपने हृदय में दृढ विश्वास और उद्देश्य को महसूस करना ही पर्याप्त नहीं है। आपको अपने पापों का अंगीकार करना होगा, अपनी मूर्खता को स्वीकार करना होगा, और उसकी ओर से मुंह फेरना होगा (नीतिवचन 28: 13; अय्यूब 33:27: 34:31-32; यूहन्ना 1:9)। आपका महिमामय स्वामी आपको अपनाएगा ,स्वर्गदूत आनंद मनाएंगे और आपकी संगति फिर से बहाल हो जाएगी।
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