नीतिवचन 29:12
यदि हाकिम झूठ को सुना करे, तो उसके समस्त सेवक दुष्ट हैं।
अगुवें अपनी ताकत का उपयोग करके या तो अच्छाई की स्थापना करते हैं या बुराई की। सत्ता के साथ जिम्मेदारी आती है, क्योंकि जो सत्ता के स्थान पर बैठा है वह देश का अगुआ होने के कारण उसका पाप देश के कई लोगों को भी पाप करने की ओर ले जाएगा। जैसा राजा, वैसी प्रजा। जैसे सारसों का झुण्ड उड़ान भरनेवाले केवल एक सारस के पीछे उड़ता है, वैसे ही राष्ट्रों का चलन है।
जब एक देश का प्रधानमंत्री झूठ और बाकी सब प्रकार के भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है, या उसे होने देता है, तो उसका मन्त्रीमण्डल और फिर उसकी सरकार और फिर उसका पूरा देश ही उसका अनुसरण करने लगता है। जिसने एक बार पाप कर लिया वह अब कई अपराधों के लिए दोषी ठहरता है। यह शायद ही मायने रखता है कि एक अगुआ आधिकारिक या अनौपचारिक रूप से क्या कहता है, नागरिक उसके शब्दों को नहीं, उसके कर्मों को अपना आदर्श मानकर वैसा ही करते हैं।
सुलैमान ने अपने बेटे को राजनीतिशास्त्र पढ़ाया। भविष्य में एक धर्मी शासक दिलाने के लिए, उसने शीर्ष पद के नीचे के पद पर पड़नेवाले प्रभाव की शक्ति के बारे में चेतावनी दी। दो बातें एक शासक के पापों को बढ़ाते हैं – घोटाला और उदाहरण – समाचार तेजी से और दूर तक फैलता है, और कई लोग उसका अनुसरण करते हैं।
झूठ बोलना सूझबूझ के साथ किया हुआ पाप है, हालाँकि यह नियम किसी भी दुष्टता पर लागू होता है जिसकी अनुमति अधिकार रखने वालों द्वारा दी जाती है। अगुवों को सत्यवादी होना चाहिए (नीति 16:13; 17:7; 12:19)। यदि वे अपने व्यवहार में ईमानदारी और सच्चाई की मांग नहीं करते हैं, तो बेईमानी तेज़ी से दूर-दूर तक फैल जाएगी। अगुओं की लगातार चापलूसी की जाती है, लेकिन उन्हें इस तरह के झूठ पर ध्यान नहीं देना चाहिए, ऐसा न हो कि यह दूसरों को भ्रष्ट कर दे।
शासक अपनी दुष्टता को अपने प्रतिनिधिमंडल द्वारा व्यापक रूप से फैला देते हैं। वे इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अपनी सरकार में ऐसे मनुष्यों को चुनकर कार्यभार सौंपते हैं जिनके नैतिक मूल्य और इरादे उन्हीं के समान होते हैं, जो सम्बन्धित कार्य-क्षेत्र को, और परिणामस्वरूप पुरे देश को ही बुरी तरह से प्रभावित कर देता है। एक शासक जो झूठ को सुनकर उसपर अमल करता है, उसे ऐसे पदों के लिए उन मनुष्यों को नियुक्त करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी जो झूठ बोलकर उसकी चापलूसी करेंगे या अन्य मामलों में बेईमान होंगे।
शासक प्रोत्साहन देकर दुष्टता फैलाते हैं। अधिकारी जानते हैं कि अपने अधिकार का उपयोग करते समय अपने व्यवहार में शुद्धता और सच्चाई का पालन करने बहुत सावधानी की आवश्यकता होती है। परन्तु जब एक प्रधान शासक ही बेईमानी को स्वीकार करता है, तो वह भ्रष्ट महत्वाकांक्षा वाले बेईमान लोगों को आगे आने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह नीच या दुष्ट मंसूबोंवाले मनुष्यों को प्रोत्साहित करता है कि वे छल या कपट द्वारा अपनी योजनाओं को अंजाम दे।
शासक अपने अनुसरण का आदर्श रखकर दुष्टता को फैलाते हैं। जैसे बच्चे माता-पिता या बड़े भाई-बहनों को देखकर सीखते हैं, वैसे ही अधीनस्थ अपने नेता के उदाहरण से ईमानदारी के महत्व को सीखते हैं। यदि वह झूठको स्वीकार करता है या बोलता है, तो लोग उसके नेतृत्व का अनुसरण करेंगे। इसी आधार पर, फारस के राजा क्षयर्ष ने अपने साम्राज्य में वैवाहिक व्यवस्था की शुद्धता को बनाए रखने के लिए अपनी रानी वशती को तलाक दे दिया था (एस्तेर 1:10-20)।
शासक चापलूसी के द्वारा अपनी दुष्टता को फैलाते हैं। यदि कोई शासक बेईमानी करने की अनुमति देता है, तो वे जो उसका समर्थन पाना चाहते हैं, उसे प्रभावित करने के लिए कुछ भी कहने के लिए अपने को स्वतंत्र महसूस करेंगे। एक शासक को खुश करने की इच्छा अपने आप में भ्रष्ट कर देती है, परन्तु अगर शासक दुष्ट हो तो यह और भी बुरा है (नीति 23:1-3)। क्योंकि राजा अहाब ने झूठ बोला था, इसलिए उसके भविष्यवक्ताओं ने भी उसे खुश करने के लिए बेपनाह झूठ बोला (1 राजा 22:2-12)। दोएग ने भी शाऊल का समर्थन बुराई ही से जीता।
शासक गठबन्धन के द्वारा अपनी दुष्टता को बढ़ाते हैं। समान प्रवृत्ति के लोग एकसाथ रहते हैं। एक बार जब झूठ अभिव्यक्त हो जाता है, तो झूठे लोग ऐसी जगह एकत्रित हो जाएंगे जहाँ वे झूठ बोलने में स्वतंत्र और सुरक्षित महसूस कर सकें। जिस तरह गिद्ध मुर्दे के इर्दगिर्द इकट्ठा होते हैं, उसी तरह झूठे भी भ्रष्ट अधिकारी के पास जमा होंगे। सत्यवादी मनुष्य झूठ से नफरत करते हैं, और झूठे लोग सत्यवादी लोगों से नफरत करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप शिध्र ही राजनीतिक विभाजन हो जातें हैं।
शासक उन्मूलन के द्वारा दुष्टता को बढ़ाते हैं। जब झूठ को स्वीकार किया जाता है और उनका इस्तेमाल किया जाता है, तो दुष्टता के ऐसे बढ़ते स्वरुप के कारण सत्यवादी लोग पीछे हट जाने, छिप जाने या अपने पद को छोड़ देने के लिए विवश हो जाते हैं (नीति 28:12,28; 29:2)। इस प्रकार, एक खुले हमले के बिना, ईमानदार लोगों को शक्तिशाली पदों से हटा दिया जाता है। बेलशस्सर के शासनकाल में राजा के पापपूर्ण मार्ग के कारण ही दानिय्येल गुमनामी के अंधेरे में था (दानिएल 5:10-16)।
शासक अपने अधीनस्थों के कर्तव्यत्याग से अपनी दुष्टता को फैलाते हैं। अधीनस्थों का यह कर्तव्य है कि वे अपने वरिष्ठों को झूठ से बचाए। वे ऐसा क्यों नहीं कर पाते हैं? इसलिए क्योंकि वे अपनी नौकरी को बचाना चाहते हैं! हिम्मत के साथ यह कहकर कि बड़ी ख़ूबी से प्रस्तुत किए गए कुछ विचार झूठे हैं धारा के विपरित तैरने की तुलना में प्रवाह के साथ बहकर जाना आसान है। वे दुष्ट सलाहकार हैं, जो अपने राजा के विनाश में सहयोग करते हैं, जैसा कि शासकों के सलाहकार आज भी साबित करते हैं।
अधिकारियों को झूठ से बचाना आपका कर्तव्य है। कर्मचारियों को किसी भी स्रोत से आनेवाले झूठ से अपने नियोक्ताओं की रक्षा करनी चाहिए, भले ही आपका अधिकारी झूठे विचार से मोहित होता हो। जब बच्चे अपने माता-पिता को अपने भाई-बहन के किसी झूठ की सूचना देते हैं तब वे चुगलखोर नहीं होते हैं। मानवीय सीमाओं के कारण, सत्ता में बैठे लोगों को उन्हें धोखा देनेवालों के प्रयासों से बचाने के लिए अपने आसपास भरोसेमंद व्यक्तियों की आवश्यकता होती है।
झूठ सुनने या झूठ बोलने के बजाय, उच्च अधिकार वाले अगुओं को सत्यनिष्ठ होना चाहिए जो परिश्रम से मामलों की जड़ तक पहुंचते हो (निर्ग 18:21; नीति 25:2)। उन्हें झूठ को कभी बर्दाश्त नहीं करना चाहिए (नीति 12:22)। दाऊद ऐसा ही एक राजा था, और वह बेईमान लोगों को अपने पास भी नहीं आने देता था (भजन 101:3-8)। धार्मिकता और सच्चाई के लिए ऐसी चौकस देखभाल ही है जो शासकों को सुरक्षित रखती है (नीति 16:12; 20:28)।
दाऊद झूठ से नफरत करता था, तब भी जब वह राजा के अपने अधिकारयुक्त पद के बारे में किसी को उसकी चापलूसी करते सुनता था। एक मूर्ख अमालेकी ने दाऊद से झूठ बोला कि उसने राजा शाऊल को घायल पाया है और उसे मार डाला है। उसने यह झूठ इस आशा में कहा कि वह दाऊद का अनुग्रह पायेगा ताकि अपने लिए एक पद या पुरस्कार प्राप्त कर सके। दाऊद ने क्या किया? परमेश्वर के अभिषिक्त राजा को छूने के अपराध के कारण उसने उसे मार डाला (2 शमूएल 1:1-16)।
ईमानदारी और सच्चाई ही धार्मिकता के वे पहलु हैं जो एक समझौता करने वाले या दुष्ट शासक के अधीन संकटों से गुज़रते हैं। सुलैमान ने यह भी सिखाया कि अर्थ-व्यवस्था और पदों के बिच विद्यमान भेदों को ध्वस्त करने की मूर्खता एक ऐसी मूर्खता है जिसे ऊपर से नीचे तक बढ़ावा दिया जाता है (सभो 10:5-7)। अधिकांश सरकारों और राष्ट्रों पर एक नज़र डालने से पता चलता है कि कैसे उनके नेताओं का चरित्र नीचे तक व्यापकता से फैल चूका है।
राजनीतिक बुद्धि का यह नियम उल्टा भी सच है। दुष्ट सलाहकारों वाला एक अगुवा अपनी स्वयं की सत्यनिष्ठा और अपने प्रशासन को भ्रष्ट कर देता है (नीति 25:4-5; 1 कुरिन्थ 15:33)। इस प्रकार, एक दुष्ट प्रथम महिला (राष्ट्रपति की पत्नी) खतरनाक साबित हो सकती है, जैसे अहाब की पत्नी ईज़ेबेल (1 राजा 21:25)। इस आधार पर, सुलैमान ने बुद्धिमानी से अपने राज्य के आरंभ में ही एब्यातार, योआब, शिमी और अदोनिय्याह का विनाश करने का आदेश दिया।
यह सबक माता-पिता के लिए भी है। आप जिस किसी भी दुष्टता की अनुमति देंगे, वह फैल जाएगी। बड़े पाखंडी छोटे पाखंडियों को जन्म देते हैं। यदि आप पाप करने वाले बच्चे का सम्मान करते हैं या उसकी रक्षा करते हैं, तो आप अपने बच्चों के बीच पाप को बढ़ावा दे रहे हैं, चाहे आप कुछ भी कहें। बच्चे शिक्षा से ज्यादा अनुकरण से जल्दी सीखते हैं। इस्राएल में यह कहावत थी, जैसी माता, वैसी ही उसकी पुत्री भी। माता-पिता, सावधान रहो।
इस बुद्धिमान नियम के पालन के द्वारा परमेश्वर की कलीसियाओं को भ्रष्ट ताकतों से बचाने के लिए, पौलुस ने तीमुथियुस को आदेश दिया कि वह अपने निजी जीवन पर ध्यान दे, ऐसा न हो कि अपनी ओर ध्यान देने में उसकी विफलता के कारण उन लोगों का नाश हो जाए जो उसकी सेवकाई के पात्र हैं (1 तीमु 4:16)। और जब उसने लोगों को प्राचीनों के पद पर नियुक्त किया, तो उसे बहुत सावधान रहना था कि वह केवल शुद्ध और निष्कलंक लोगों को ही नियुक्त करे (1 तीमु: 5:22)।
यीशु मसीह सच्चा और विश्वासयोग्य शासक है; वह एक राजा है जो झूठ और झूठ बोलनेवालों से घृणा रखता है। वह उन सब को आग की झील में डाल देगा (प्रका 21:8,27)। क्योंकि वह धार्मिकता से प्रेम रखता था, परमेश्वर ने उसके राज्य के राजदण्ड और सिंहासन को सदा के लिए ऊंचा किया (भजन 45:6-7; इब्रा 1:8-9)। समय और अनंत काल के लिए अपना सारा भरोसा उसी पर रखो। वह सब झूठ बोलनेवाले राजाओं को उखाड़कर फेंक देगा (सभोपदेशक 5:8; प्रका 2:26-27)।
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