नीतिवचन 28:8

जो अपना धन ब्याज और अन्यायपूर्ण लाभ से बढ़ाता है, वह उसके लिये बटोरता है जो कंगालों पर अनुग्रह करता है।

यहां आपकी आर्थिक सफलता के लिए एक नियम है। ब्याज का अर्थ है किसी को उधार दियें हुए रुपये का समय-सीमा के अनुसार सालाना या महीनेवार प्रतिशत मूल्य लगवाना। दुष्ट लोग अधिक ब्याज वसूलते हैं और गरीबों का आर्थिक लाभ उठाते हैं। परमेश्वर ऐसे शोषणकर्ताओं की संपत्ति ले लेता है और उसे ऐसे मनुष्यों को देता है जो गरीबों की मदद करते हैं (नीतिवचन 22:16,22-23)।

ब्याज ‘टाइम वैल्यू ऑफ मनी’, अर्थात् पैसे का समय-मूल्य होता है, यह एक बुनियादी वित्तीय अवधारणा है जिसका सिद्धान्त है कि वर्तमान में जो पैसा आपके पास है वह भविष्य में प्राप्त होने वाली उसी राशि से अधिक मूल्यवान बनेगा। इस लिहाज़ से ब्याज एक शुद्ध उद्देश्य रखता है। ब्याज देने का अर्थ है वर्तमान में किसी से धन या संपत्ति लेना है और भविष्य में समय-मूल्य के अनुसार सूद-और ब्याज समेत उसे चुका देना। यह आपके पैसे को उधार देने और कुछ समय बाद वापस प्राप्त करने का प्रतिफल है। ब्याज के बारे में आंतरिक रूप से कुछ भी गलत या अनैतिक नहीं है (व्यवस्था 23:20; मत्ती 25:27)। यह पूंजी की लागत है। यह रुपयों की कीमत है।

आज ऋण-प्रणाली बैंकों द्वारा चलाई जाती है, जो केंद्रीय बैंक की देखरेख में काम करती हैं। खुद को घाटे से बचाने के लिए हमारे देश के बैंक कुछ विशिष्ट प्रकार के ऋण के लिए उच्च ब्याज वसूलती हैं। हाल ही में हुएं मामलों पर अगर गौर करे जिनमें कर्ज़दार बैंकों का पैसा लेकर भाग गएँ, तो वित्तीय धोखाधड़ी का डर और जोखिम हमेशा मौजूद है। बाकी देशों में ब्याज आम तौर पर कम होता है, और लोग वहा समय के मूल्य या पूंजी की सुरक्षा की चिंता किए बिना ऋण दे सकते हैं और ऋण ले सकते हैं।

प्राचीन इज़राइल पर विचार करें। प्राचीन इज़राइल में कोई केंद्रीय बैंक या कागजी मुद्रा नहीं थी। उनकी धन आपूर्ति में आर्थिक चक्रों के कारण कोई उछाल या मंदी नहीं होती थी और न ही लेनदारों से देनदारों को धन हस्तांतरित करने के लिए कोई हेरफेर की जाती थी, जैसा कि हमारे देश में आम बात है। उनके पास कोई रिज़र्व बैंकिंग सिस्टम या कोई अन्य केंद्रीय बैंक नहीं था। उनके पास सोना-चाँदी और सोने-चाँदी के सिक्के हुआ करते थे। ऐसे पैसों का हेरफेर करना बहुत मुश्किल होता था, क्योंकि खनन एक बहुत खर्चिला कार्य होता था।

उस समय इज़राइल के पास कोई कागजी मुद्रा नहीं थी। वे हमारे संविधान में वर्णित राष्ट्र की वित्तीय अखंडता की सुरक्षा के किसी भी अनुच्छेद से 3000 वर्ष आगे थे। इज़राइल का पैसा तौला जाता था (उत्पत्ति 23:16; 43:21; अय्यूब 28:15; एज्रा 8:25), यही कारण है कि कई नीतिवचन सच्चा तराजू और पलड़े का वर्णन करते हैं (नीतिवचन 11:1; 16:11; 20:23)। परमेश्वर की महिमा करों। इज़राइल में साहूकार (मनीचेंजर्स) विदेशी सिक्कों को हिब्रू सिक्कों में बदल देते थें; यीशु सिक्के पर कैसर की छाप होने की बात करता है; और यहूदा ने चाँदी के तीस सिक्कों के लिये उसे पकड़वाया था। कागजों को इस्तेमाल केवल इन सिक्कों के लेन-देन के लिए होता था।

इज़राइल में प्रत्येक गोत्र और परिवार के पास मौलिक ऋण-मुक्त पूंजी होती थी। यहोवा परमेश्वर ने कनान देश के सातों देशों से उनकी राजधानी छीनकर उन्हें दे दी थी। उसने उन्हें विरासत में उन के शत्रुओं की संपत्ति भी सौंपी थी, जिसे वे एक गोत्र से दूसरे गोत्र में स्थानांतरित नहीं कर सकते थे। शहरों के निर्माण, कुएँ खोदे जाने और अंगूर के बागानों के रोपण के साथ स्थापित संपत्तियों में पूरी तरह से पूंजी लगाई जाती थीं, बहुत कम उधार लिया जाता था। उन्हें क़र्ज़ लेने की नौबत केवल तब आती थी जब उनपर कोई आपातकालीन स्थिति आती, एक ही मौसम में साल भर का अनाज उगाना होता, या बीमारी, मृत्यु, या परमेश्वर की ओर से कोई प्राकृतिक आपदा होती।

यहोवा परमेश्वर ने अपने लोगों और उनके बीच रह रहें गरीबों के लिए आर्थिक कानून-व्यवस्था दीं थी। उसने ग़रीबों से ब्याज लेने पर प्रतिबन्ध लगाया (निर्गमन 22:25; लेव 25:35-37), क्योंकि इससे उनकी गरीबी और भी बढ़ जाती, और यह लालच या क्रूरता की भावना को दर्शाता था। उसने एक इस्राएली का दूसरे इस्राएली से ब्याज वसूलने की भी मनाही की (व्यवस्था 23:19), क्योंकि देश के लोगों को एक-दूसरे की मदद करनी थी, न कि एक-दूसरे से अमीर बनना था। इज़राइल किसी पराए से ब्याज वसूल कर सकता था (व्यवस्था 23:20), जो इंगित करता है कि ब्याज अपने आप में कोई अनैतिक या दमनकारी चीज़ नहीं है, क्योंकि उन्हें किसी परदेशी का आर्थिक शोषण नहीं करना था (निर्गमन 22:21; 23:9)।

इसके अलावा, एक समझ जिसे बुद्धिमान लोगों ने मान लिया है वह यह कि मूसा की आर्थिक-व्यवस्था गरीबों पर सख्ती से लागू होती है (व्यवस्था 15:1-6)। इसमें देनेवाले की वित्तीय सुरक्षा की परवाह किए बिना, गरीबों को उदारतापूर्वक दिया जाना चाहिए और उनकी सुरक्षा की जानी चाहिए (व्यवस्था 15:7-11)। जैसा कि उपदेशक सुलैमान ने अन्य नीतियों में सिखाया, खुले मन से उदारतापूर्वक देने से देने वाले को और भी ज्यादा समृद्ध बनाता है (नीतिवचन 11:24-26)।

इस नीतिवचन में निहित बुद्धि गरीबों से ब्याज वसूलने की भर्त्सना करती है। यह व्याख्या और उसका लागुकरण हम केवल तब समझ पाते हैं जब हम इस नीतिवचन के दूसरे खंड को पढ़ते हैं और उसे मूसा की व्यवस्था से जोड़ते हैं। सबक गरीबों के बारे में है। यह गरीबों का फायदा उठाकर उनका किसी भी अन्य तरीके से आर्थिक शोषण करने की मनाही करता है, जैसे उन्हें कोई वस्तु बेचते समय अधिक कीमत वसूलना, या उनसे कोई वस्तु खरीदने में उन्हें कम भुगतान करना, या भुगतान करने में देरी करना, रुपयों के लिए उनसे कोई चीज अपने पास गिरवी रखवाना, या उनके द्वारा किए गए किसी काम में देरी के आधार पर मजदूरी का भुगतान करना।

जब आप किसी गरीब व्यक्ति के साथ आर्थिक व्यवहार करते हैं, तो क्या आप स्वेच्छा से बाजार मूल्य का भुगतान करने के प्रति ईमानदार हैं? क्या आप इतने उदार और सावधान हैं कि कही आपसे कम भुगतान न हो जाए? क्या आप जो भी वस्तु बेचते हैं उसके बारे में आप जो कुछ भी जानते हैं उसे स्पष्ट रूप से प्रकट करते हैं? क्या आप धमकी या जबरन वसूली के किसी भी और सभी तौर-तरीकों से बचते हैं जिनमें गरीबों को अपने ही पक्ष में निर्णय लेने बाध्य किया जाता है? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर केवल वे ही लोग आसानी से दे सकते हैं जो भक्तिमान और ईमानदार हैं, और वे अपने ऐसे सद्गुण के कारण ही आर्थिक रूप से उन्नति करते और बढ़ते जाते हैं।

आप जो भी बिज़नेस या काम-धंदा करते हैं उसमें अगर गरीब लोग शामिल हैं, तो सावधान रहें और बुद्धिमान बनें। यदि आप उनका लाभ उठाने की कोशिश करते हैं या ऐसा सोचते भी है, तो आप दुष्ट और मूर्ख हैं। सिर्फ़ इसलिए कि आर्थिक लेन-देन कानूनी है, शोषण को सही नहीं ठहराता। सिर्फ़ इसलिए कि आर्थिक लेन-देन “बाज़ार मूल्य” के अनुसार होता है, शोषण को सही नहीं ठहराता। स्वर्ग में एक परमेश्वर है जो सभी लेन-देन अपनी नज़र रखता है, और उसे मापता और तौलता है। सावधान!

क्या कोई ख्रिश्चन विश्वासी ऐसे बैंक में काम कर सकता है, जहाँ गरीब लोगों से ऋण पर ब्याज लिया जाता है? हाँ, अन्यथा इस अधर्मी दुनिया में लगभग हर पेशे से दूर रहना होगा। क्या कोई ख्रिश्चन विश्वासी शराब की दुकान में काम कर सकता है जहाँ पियक्कड़ों को शराब बेची जाती है? क्या कोई ख्रिश्चन विश्वासी उस स्कूल की इमारत की मरम्मत कर सकता है जहाँ यह सिखाया जाता है कि मनुष्य का विकास बंदरों से हुआ? क्या कोई ख्रिश्चन विश्वासी होटल में काम कर सकता है जहाँ कोई धनवान अपनी पड़ोसन को लेकर आता है या युवा अपने कमरों में अपनी महिला-मित्र या कॉल-गर्ल्स को लेकर आते हैं या बुलवाते हैं (1 कुरिन्थियों 5:10)? एक पेशे के रूप में बैंकिंग अन्य किसी भी पेशे के समान ही वैध और जायज़ है।

यह नीतिवचन आपको शुद्ध किया हुआ सामान्य ज्ञान देने पाए। यदि कोई गरीब पड़ोसी अपनी तनख्वाह मिलने तक कुछ रूपये मांगने आता है, तो एक धर्मी मनुष्य उसे बिना ब्याज लगाए पैसे उधार दे देगा। यदि उसे अपनी मोटर साइकल की मरम्मत करने की आवश्यकता हो जो उसके पास काम पर जाने का एकमात्र साधन है, तो वह तब भी मदद मांगने आ सकता है। लेकिन अगर कोई गरीब पड़ोसी अपने बच्चे के लिए खिलौनें लेना चाहता है या आपके माध्यम से अपना खाने-पीने का कोई शौक पूरा करना करना चाहता है, तो ब्याज पर उधार देना या साफ़ मना कर देना उचित हो सकता है। अमीरों को ब्याज-मुक्त ऋण देने की आवश्यकता नहीं है, खासकर व्यापार के लिए, अन्यथा आप गरीबों को लूटने जैसे ही दोषी हैं (नीतिवचन 22:16)।

परमेश्वर गरीबों की देखभाल करता है, और उनका मुक़दमा लड़ता है, और जो उनका फायदा उठाने की कोशिश करते हैं, वह उन्हें कठोर दण्ड देगा। जब आप किसी प्रांत में अत्याचार देखते हैं, विशेषकर गरीबों पर, तो जान लो कि उन अत्याचारियों से भी बड़ा कोई है जिसे इन बातों की सुधि रहती है (सभो 5:8)। वह अनाथों का पिता और विधवाओं का न्यायी है (भजन 68:5)। जब तुम उन्हें आर्थिक रूप से चोट पहुँचाते हो तो वह उनकी पुकार सुनता है (निर्गमन 22:25-27)। सावधान!

आप गरीबों के साथ जैसा व्यवहार करते हैं, परमेश्वर उसे अपने प्रति व्यवहार मानता है (नीतिवचन 14:31; 17:5)। “जो कंगाल पर अनुग्रह करता है, वह यहोवा को उधार देता है, और वह अपने इस काम का प्रतिफल पाएगा” (नीतिवचन 19:17)। यदि आप गरीबों की उपेक्षा करते हैं, तो वह आपकी ज़रूरत के समय आपकी उपेक्षा करेगा (नीतिवचन 21:13; 28:27)। भले लोग गरीबों की सुधि लेते हैं (नीतिवचन 29:7,14; 31:9,20); दुष्ट लोग गरीबों पर अत्याचार करते हैं (नीतिवचन 28:3; 30:14)। एक मनुष्य जो गरीबों के प्रति उदार है, वह आशीष पाकर धन्य कहलाएगा (नीतिवचन 11:24; 22:9; 28:27) और सुखी रहेगा (नीतिवचन 14:21)।

जैसा कि यह नीतिवचन चेतावनी देता है, जो मनुष्य गरीबों का फायदा उठाता है वह कुछ वक़्त के लिए आर्थिक उन्नति में आगे बढ़ सकता है। परन्तु यहोवा उसका लाभ छीन लेगा, और उसे उस मनुष्य को दे देगा जो कंगालों पर दया करता है। यीशु ने उस मनुष्य के बारे में जिसने बुद्धिमानी से अपने एक तोड़े का उपयोग नहीं किया, कहा “इसलिये वह तोड़ा उससे ले लो, और जिसके पास दस तोड़े हैं, उसको दे दो” (मत्ती 25:28)। अमीर और अमीर हो जाते हैं, जब वे यहोवा का भय मानते हैं और उसकी आज्ञा मानते हैं।

आर्थिक रूप से सफलता के लिए एक और नियम दिया गया है। अपने घराने, अपने मित्रों और अपने चर्च के गरीबों की खोजबीन करें और उनके प्रति उदार बनें। अपनी संपत्ति की सुरक्षा के बारे में कभी न सोचें। दो, तो तुम्हें भी दिया जाएगा (लूका 6:38)। उदारतापूर्वक दो, और परमेश्वर तुम्हारे लिये स्वर्ग की झरोखें खोल देगा (व्यवस्थाविवरण 28:12; यशायाह 32:8; मलाकी 3:8-10)। निडर होकर दो, और वह अपनी प्रयोजनात्मक व्यवस्था के अनुसार तुम्हारी हर ज़रूरत को पूरा करेगा (सभो 11:1-6)। अपना पैसा बिखेर दो, इससे आर्थिक वृद्धि होगी।

क्या आप रेस्तरां में उदारतापूर्वक टिप देते हैं, जहां गरीबों को वेटर, वेट्रेस, डिलीवरी-बॉय और डिशवॉशर के रूप में नौकरियां मिलती हैं? क्या आप होटल के कमरों में उदारतापूर्वक टिप देते हैं, जहां गरीबों को रूम-सर्विस के रूप में नौकरी मिलती है? क्या आप सभी लेन-देन में हर समय गरीबों पर विचार करते हैं? परमेश्वर इन तनावपूर्ण नौकरियों को करनेवाले प्रत्येक व्यक्ति की सुधि लेता है। वह गरीबों के प्रति एक दयालु पिता हैं और जब आप ऐसा करते हैं तो आप साबित करते हैं कि आप उसके पुत्र हैं। यह नीतिवचन परमेश्वर की महिमा, गरीबों की सुरक्षा और आपके सुख और लाभ के लिए है। यह जीत-जीत-जीत है। इसका पालन करें!

रुपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है (1 तीमु 6:6-10), और इसका लोभ आपको गरीबों का फायदा उठाने के लिए प्रेरित करेगा। जो व्यक्ति प्रभु का भय मानता है वह अपनी संपत्ति बांटने और गरीबों की मदद करने के लिए तैयार रहता है (1 तीमु 6:17-19)। और यह अनन्त जीवन का प्रमाण है, जिसे परमेश्वर कभी नहीं भूलेगा, बल्कि इसे सारे विश्व के सामने उजागर करेगा (मत्ती 25:31-46; इब्रानियों 6:10)।

स्वर्ग के महान और गौरवशाली परमेश्वर, जो वन के सारे जीव–जन्तु और हज़ारों पहाड़ों पर रहने और चर्नेवाले के जानवरों का स्वामी है और जिसकी संपत्ति कभी ख़त्म नहीं हो सकती, उसने अपने प्रेम और मन की उदारता से जगत की उत्पत्ति के पहले ही इस दुनिया के कुछ निर्धनों और कंगालों को उद्धार पाने के लिए चुना (1 कुरिन्थ 1:26 -31; याकूब 2:5)। सावधानीपूर्वक उसके जैसा ही प्रेमी और उदार बनें और उसके जैसी ही उदार भावना दिखाएं (मत्ती 5:43-48; याकूब 2:1-10; 1 यूहन्ना 3:16-19)।

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