नीतिवचन 28:6
टेढ़ी चाल चलनेवाले धनी मनुष्य से, खराई से चलनेवाला निर्धन पुरुष ही उत्तम है।
सच्ची सफलता कैसी होती है? क्या आप सफल हैं? यदि आप इस परमेश्वर-प्रेरित नीतिवचन पर भरोसा करते हैं, तो आप जानते हैं कि खराई से जीना ही जीवन की सच्ची सफलता है चाहे निर्धनता ही क्यों न हो, और मूर्खतापूर्वक जीना ही विफलता है चाहे आप कितने ही धनवान क्यों न हो। स्वर्ग के इस दिव्य ज्ञान को मान लों, और सफलता के बारे में इस दुनिया की झूठी विचारधाराओं को ठुकरा दों।
क्या आप इन वचनों पर विश्वास करेंगे? ये वचन सृष्टि के रचियता परमेश्वर की श्वास से लिखें गएँ हैं, और उन्हें इस संसार के सबसे सफल मनुष्य ने लिखा – सबसे अधिक बुद्धिमान और धनवान राजा। आपको कौन-सी बात सत्य के इन वचनों पर विश्वास करने से रोकती है? क्या आपको लगता है कि आप सुलैमान से अधिक चतुर हैं?
प्रयुक्त शब्द “उत्तम” उस प्राथमिकता की ओर इशारा करता है जो परमेश्वर और सुलैमान जीवन के लिए हमारे सामने रख रहें हैं, जो कि इस पुस्तक में बुद्धि-ज्ञान सिखाने का एक तरीका है। क्या आप परमेश्वर का भय मानते हैं और बुद्धि की इतनी लालसा रखते हैं ताकि आप उस पर विश्वास करें? क्या आप आसानी से पैसा कमाने और उसे जमाकर रखने के बजाय खराई से चलने पर अधिक ज़ोर दे पाते ते हैं?
क्या आप गरीबी में संतुष्ट रह सकते हैं? या खराई से चलने में संतुष्ट रहने के लिए आपको मध्यम वर्ग का गौरव हासिल करना होगा? कृपया ध्यान दें कि इस नीतिवचन में उपदेशक ने एक निर्धन मनुष्य को ऊँचा उठाया है। दाऊद और सुलैमान ने सिखाया कि भक्ति के साथ निर्धनता भी भक्तिरहित बड़े धन से उत्तम है (भजन 27:4; 37:16; 84:10; नीतिवचन 15:16; 16:8,19; 19:1,22)। इस सत्य को अपनाओं।
खराई से चलना एक ऐसी जीवनशैली चुनना है जो हमेशा पवित्र, धार्मिक, न्यायपूर्ण और महान कार्य करके परमेश्वर और मनुष्यों के सामने आपकी सत्यनिष्ठा को बनाए रखती है। क्या यही आपका जुनून है? परमेश्वर आपसे प्रसन्न हो और धर्मी लोग आपसे प्रसन्न हों, यही आपकी महत्वाकांक्षा होनी चाहिए।
ज्यादातर लोग विकृत जीवन जीते हैं, एक ऐसी जीवनशैली चुनकर जो परमेश्वर के वचनों और उसके उपदेशों का तिरस्कार और उल्लंघन करती है। जीवन में उनके चुनाव स्वार्थ से भरे और दुष्टता से युक्त होते हैं, धर्मपरायण नहीं। सभी देशों का विशाल जनसमुदाय यही चुनाव करता है, और यह परमेश्वर को उनका शत्रु बनाता है (याकूब 4:4)।
खराई के जीवन और एक बेईमानी के जीवन के बीच का यह चुनाव आपको उन्नति की ओर ले जाएगा या पतन की ओर ले जाएगा, यह आपके फैसले पर निर्भर करता है (मत्ती 7:13-14,21-27; 1 तीमु 6:17-19)। रूपया चाहे जितना भी हो, वह आपकी आत्मा को इस जगत या इसके बाद आनेवाले जगत के संकटों से नहीं बचा सकता, इसलिए सच्ची सफलता के लिए इसका कोई महत्व नहीं है।
यह दुनिया आपकी सफलता का मूल्यांकन इस बात से करती है कि आपके शरीर की अभिलाषा और आँखों की अभिलाषा और जीविका के घमण्ड किस चरम पर है (1 युहन्ना 2:15-17)। और शैतान इसे बढ़ावा देने के लिए आग के तीर छोड़ता है (लूका 4:5-8)। क्या आप परमेश्वर के वचन पर विश्वास करके दोनों ताकतों का प्रतिकार कर पाते हैं? कौन-सी ताकत आपके निर्णयों को जन्म देगी इसका आप प्रतिदिन फैसला करते हैं।
पौलुस ने इस नीतिवचन की पुष्टि करते हुए लिखा, “सन्तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है” (1 तीमु 6:6)। और उसने रुपया कमाने की महत्वाकांक्षा को फटकार लगाईं (1 तीमु 6:7-10)। एक निर्धन मनुष्य, जो भक्ति का जीवन जीता और अपने हालात और कमाई में संतुष्ट रहने का चुनना करता है, वही सफलता का सच्चा माप है। परमेश्वर ऐसे मनुष्य की प्रशंसा करता है, और उसके पास जो कुछ है उससे वह प्रसन्न होता है। क्या ही धन्य स्थिति है!
क्या आप परमेश्वर द्वारा आपको दी गई सच्ची सफलता के लिए उसके आभारी हैं? यदि आप खराई से एक धार्मिक जीवन जीने की लालसा रखते हैं और अपने जीवन से संतुष्ट हैं, तो परमेश्वर ने ही आपको ऐसी इच्छा और उसे प्राप्त करने का जुनून देकर अपनी कृपा से आशीषित किया है (फिलिप्पियों 2:12-13)। और यदि आपके पास धार्मिकता का मार्ग सीखने का एक स्रोत, एक बाइबिल चर्च और पादरी है, तो आपके पास वह सब कुछ है जो आपको चाहिए।
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