नीतिवचन 28:4

जो व्यवस्था का त्याग करते हैं सो दुष्टों की स्तुति करते है; परन्तु व्यवस्था के पालक उन से विवाद करते हैं।

इस पीढ़ी के दुष्ट दार्शनिकताओं और जीवनशैलियों का विरोध करने का सबसे अच्छा तरीका एक धर्मपरायण जीवन है। आप अपने कार्यों से सत्य और ज्ञान के लिए एक मज़बूत कथन और शक्तिशाली चित्रण प्रस्तुत कर सकते हैं। यदि आप अपने जीवन में परमेश्वर की आज्ञाओं से समझौता करते हैं, तो आप दुष्टों के साथ परमेश्वर के विरुद्ध सहमत होकर उनकी प्रशंसा और समर्थन करते हैं। मूढ़ता से दुष्टों की स्तुति करने के बजाए धार्मिकता को सराहें और ईश्वरीय गुणों को दर्शाकर पापियों की निंदा करें।

एक ईश्वर-विरोधी समाज के अपवित्र विचारों और आचरणों की आलोचना करना आसान है। पापियों की मूर्खता सर्वत्र दिखाई देती है। लेकिन शब्द तुच्छ और बहुत निरर्थक हो जाते हैं, जब आप अपने जीवन में सच्चाई से समझौता करते हैं। क्या आप इस पक्षपात को पाखंड के रूप में पहचान सकते हैं?

कई पापी दूसरों के पाखंड को देखकर परमेश्वर, धर्म या धार्मिकता के प्रति अपने तिरस्कार को सही ठहराते हैं। जबकि यीशु मसीह न्याय के महान दिन उनके इस बहानेबाज़ी को ठुकरा देगा, फिर भी यह शारीरिक वासनाओं के अनुसार जीवन जीने वाले विश्वासियों द्वारा पहुचाएँ नुकसान और खतरे की ओर संकेत करता है।

यदि दुष्ट लोग आपके जीवन में समझौता या विरोधाभास देखेंगे, तो वे मूर्खता और विद्रोह में मजबूत होंगे। वे आश्वस्त रहेंगे कि आप उनसे अलग नहीं है, इसलिए वह बिना किसी विवेक के अपने बुरे रास्ते पर चलते रहेंगे ।

सच्चे मसीही काफी अल्पसंख्यक हैं, इसलिए यीशु ने उन्हें पृथ्वी का नमक और जगत की ज्योति कहा है (मत्ती 5:13-16)। यदि आप समझौता करते हैं तो आप अपना नमकीनपन खो देते हैं और किसी काम के नहीं रहते। यदि आपका प्रकाश उज्जवल रूप से नहीं चमकता है, तो आप दुनिया के अंधेरे में योगदान देते हैं।

पाप, पाप होता है। क्योंकि जो कोई सारी व्यवस्था का पालन करता है ,परंतु एक ही बात में चूक जाए तो वह सब बातों में दोषी ठहरता है। ( याक़ूब 2:10) यदि आप व्यभिचार का उपहास करते हैं, परंतु परस्त्रीगमन के विषय में कल्पना करते, या अपने पति या पत्नी को बार-बार यौन संबंध बनाने के लिए धोखा देते हैं, तो तुम व्यभिचारी के समान दुष्ट हो और तुम पाखंडी हो (याकूब 2:11-13)। परमेश्वर ऐसे पाखंड का न्याय करेंगे।

व्यवस्था का पालन करना, दुष्टों से न्यायालयीन बहस करना है- यह उनसे लड़ता है और उनका विरोध करता है। परंतु व्यवस्था का त्याग करना, दुष्टों को महिमा देना है। यदि आप परमेश्वर की धार्मिकता के पवित्र स्तर का त्याग करते हैं और उससे समझौता करते हैं तो आप अपनी इच्छा से परमेश्वर की व्यवस्था को वैसे ही तोड़कर पापियों की महिमा करते हैं ,जैसे कि वह करते हैं ।

किसी गर्भपात क्लीनिक में धरना देने के बजाय अपने बच्चों से प्रेम करें और उन्हें परमेश्वर के वचन के द्वारा प्रशिक्षित करें। धर्मपरायण और आज्ञाकारी बच्चों वाला एक प्रेममय परिवार, शिशु गर्भपात क्लिनिक में जाने वाले नासमझ हत्यारों से किसी भी बातचीत करने की तुलना में गर्भपात के विरोध में अधिक ऊँची आवाज़ में सन्देश देता है।

क्या आप को दुनियाभर में तलाक की अधिकाई को देखकर गुस्सा आता है? तो अपना वैवाहिक जीवन परिपूर्ण रखें। तलाक, एक असफल विवाह का सिर्फ एक पहलू है; कई और पहलू भी होते हैं। आप अपनी शादी में कहाँ समझौता कर रहे हैं? क्या आपने पवित्र शास्त्र के प्रकाश से इसकी जांच की है?

आज के विद्रोही युवाओं से गुस्से में हैं? तो सुनिश्चित करें कि आप सरकारी अधिकारियों का सम्मान करते हुए गति सीमा के तहत गाड़ी चलाएं, व्यावसायिक अधिकार का सम्मान करते हुए अपने सहयोगी से अधिक कार्य करें, वैवाहिक अधिकार का सम्मान करते हुए अपने पति के प्रति समर्पित रहें, और धार्मिक अधिकार का सम्मान करते हुए अपने पास्टर का पालन करें ।

मानव उद्विकास के बारे में सुन-सुनकर उब गए हैं? ऐसे जीएं जैसे कि आप सृष्टिकर्ता को जानते हैं! ऐसे जीएं जैसे कि आप उसकी महिमा के लिए रचे गए हैं और उसके (परमेश्वर) पास आपके जीवन की शर्तों को निर्धारित करने का अधिकार है। अपने सभी कार्यों में उसकी महिमा करें, और अपने रचयिता के रूप में उसकी चर्चा करें। आप इस सरल तरीके से मानव उद्विकास की निंदा कर सकते हैं।

सांसारिक मसीहत आज सामान्य है । यह ईश्वर से अधिक आनंद से प्रेम करना है और बिना किसी अधिकार के धार्मिकता का एक रूप रखना है । विलासिता की तुलना में परमेश्वर से अधिक प्रेम करके और कलीसिया की सेवाओं से अधिक उसके अधिकार को अपने जीवन में सर्वोपरि रखके, इन समझौता करनेवाले मसीहियों की निंदा करें ।

मसीही पाठक, अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में धार्मिकता से जीना सुसमाचार को सुशोभित करता है (तीतुस 2:1,10; फिलिप्पियों 1:27) और इसे दुष्टों के दोषों से बचाता है (1 तीमुथियुस 5:14,6:1; 1 पतरस 2:12)। आपका लक्ष्य एक कुटिल और विकृत राष्ट्र के मध्य परमेश्वर का एक निर्दोष और हानिरहित निष्पाप पुत्र होना है और परमेश्वर की महिमा के लिए जगत की ज्योति बनना है (फिलिप्पियों 2:15; मत्ती 5:16)।

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