नीतिवचन 28:3
जो निर्धन पुरुष कंगालों पर अन्धेर करता है, वह ऐसी भारी वर्षा के समान है जो कुछ भोजनवस्तु नहीं छोड़ती।
गरीबी, या निर्धनता मनुष्य को परोपकारी, कुलीन या सदाचारी नहीं बनाती है। सुलैमान ने देखा कि निर्धन मनुष्य भी अन्य निर्धन मनुष्यों के प्रति क्रूर और कंजूस होते हैं, जिसे वह एक विकृत प्रथा मानता था। और उसने गरीब लोगों को अधिकारी बनते या धनवानों को बेरहम अत्याचारी बनते भी देखा जो अपने ही पुराने साथियों पर अपनी ताकत का दुरुपयोग कर उनपर अंधेर करते हैं। यह मिथ्याभिमान और मानसिक विकृति है। वह, जिसे अपने पुराने दिनों के हालातों को याद रखना चाहिए और दीनता से पेश आना चाहिए, अपने अहंकारी लालच में आकर गरीबों को पीसता है।
निर्धन होने का अर्थ सद्गुणी होना नहीं है। वास्तव में, निर्धनता आमतौर पर एक नीच मन, मूर्ख हृदय और सुस्त शरीर की निशानी है। क्योंकि अन्य सब बातें एक समान हैं, इसलिए अगर कोई मनुष्य अपने पड़ोसी की तुलना में गरीब है, इसका कारण उसका मूर्खतापूर्ण जीवन है। परमेश्वर की ओर से आनेवाली सर्वोपरि आशीष या उसकी ओर से आनेवाला दण्ड इन दोनों बातों के अलावा, अगर किसी बात से सफलता मिलती है तो वे बातें हैं परिश्रम और बुद्धि, और इसके विपरीत, आलसीपन और मूर्खता के कारण केवल गरीबी आती है (नीतिवचन 10:4; 11:24; 12:24; 22:29)। कुछ और विश्वास करना असफलता का श्रेय बुद्धि को देने जैसा होगा!
बारिश का उद्देश्य और उपयोग पृथ्वी का पोषण करना है ताकि अनाज की बढ़ती हो। और यह बड़ी अद्भुत रीति से होता है, क्योंकि हम देखते हैं कि कैसे बारिश यह धीरे-धीरे और लगातार गिरती है। लेकिन जब बारिश अपने साथ तेज आंधी को लेकर आती है, तो वह पानी की बाढ़ से उपरी मिट्टी और उसके अन्दर बोए बीज को आसानी से बहा ले जाती है। यह बढ़ती फसल को भी बर्बाद कर सकती है जिससे अनाज नष्ट हो जाता है। दोनों ही मामलों में, जो चीज खेत और उसके मालिक के लाभ के लिए होनी चाहिए वह एक क्रूर और विनाशकारी शक्ति बन जाती है।
निर्धन मनुष्य, चाहे वह अब भी गरीबी में हो या उसे कुछ अधिकार या सफलता मिली हो, उसे अपने गरीब भाइयों पर दया करनी चाहिए। उसे अपने पिछले हालातों को स्मरण रखना चाहिए। फिर भी, यह एक तथ्य है कि निर्धन मनुष्य दूसरे गरीबों के प्रति बहुत आलोचनात्मक हो सकता है, जिसे सुलैमान ने मानव अस्तित्व के अपने अध्ययन में देखा। यदि आप एक मूर्ख निर्धन मनुष्य को ऊँचा उठाते हैं या उसका सम्मान करते हैं, तो आप संभवतः एक राक्षस पैदा करेंगे जो उन्हें रौंदेगा जिनपर उसे दया करनी चाहिए और उनकी रक्षा करनी चाहिए (नीतिवचन 30:21-22)।
क्या आपकी याददाश्त अच्छी है? या आप उन लोगों को जिनके जैसे आप भी कभी थें, तुच्छ समझते हैं? पिताओं, क्या आप बच्चों पर यह स्मरण करके कि आप भी कभी उनकी उम्र में मूर्ख थें, दया करते हैं? यदि आप कोई उद्योगपति हैं, क्या आपको अपने करियर के उन संघर्ष भर दिनों का स्मरण है ताकि आप पर्याप्त रूप से उन लोगों को तसल्ली दे सके जो अभी उसी संघर्ष से गुज़र रहें हैं? पर्यवेक्षक, चूँकि आप भी पिछले वर्ष एक कामगार थें, तो क्या आप आज अपने अधीन कामगारों के प्रति तरस खाते हैं? छात्र, क्या आप अपने छोटे भाई पर तरस खाते हैं जब वह उन कठिन प्रश्नों का सामना करता है जिनका सामना आप ने उसी क्लास में रहते किया था? दादा-दादी, क्या आप पिछली कठिनाइयों को याद करते हैं और अब अपने बच्चों या पोते-पोतियों की उनका सामना करने में मदद करते हैं?
क्रिश्चन पाठक, आप तो कभी निर्धन से भी निर्धन थे। भ्रष्ट, निराश्रित और शापित! आप नरक के लिए नियत अपराधी थे। लेकिन यीशु मसीह ने आपको पाप और मृत्यु से छुड़ाने के लिए अपना जीवन दे दिया और आपको अनंत विरासत के साथ परमेश्वर की संतान बना दिया। उसकी महिमा हो! क्या आप अपने घिनौने इतिहास और उस महान क्षमा को याद कर सकते हैं जो आपको स्वतंत्र रूप से दी गई थी और अब जो आपके विरुद्ध पाप करते हैं क्या उन्हें क्षमा कर सकते हैं (मत्ती 18:21-35)? या क्या आप खेती को बर्बाद करनेवाली उस भारी वर्षा के समान है, जिससे कोई फसल और अनाज नहीं उगता?
प्रभु यीशु मसीह एक मामूली बढ़ई के निर्धन पुत्र की पहचान से निकलकर पृथ्वी के समस्त राजाओं का अधिपति बना (प्रक 1:5)। क्या वह आपकी कमज़ोर हालत और कठिन परीक्षाओं में आपको याद करता है और आप पर दया करता है? हाँ, बिलकुल! (भजन 103:13-14; इब्रा 2:17-18; 4:14-16) दाऊद ने उसके बारे में लिखा, “वह मानो भोर का प्रकाश होगा जब सूर्य निकलता है, ऐसा भोर जिसमें बादल न हों, जैसा वर्षा के बाद निर्मल प्रकाश के कारण भूमि से हरी हरी घास उगती है” (2 शमूएल 23:4)।
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