नीतिवचन 28:20
सच्चे मनुष्य पर बहुत आशीर्वाद होते रहते हैं, परन्तु जो धनी होने में उतावली करता है, वह निर्दोष नहीं ठहरता।
एसोप की कहानी में कौन जीता – खरगोश या कछुआ? कछुआ! व्यापार में कौन जीतता है – संयमी एडी या एक महत्वकांक्षी स्वपनदर्शी? एडी जीतता है! परन्तु हारने से भी बुरा आवेगशील स्वप्नदर्शी जो शीघ्रता से धनी होना चाहता है, पापमय परीक्षाओं में गिरता भी है जो मनुष्यों को भ्रष्ट और नष्ट कर देती हैं। आप हार सकते हैं, और आप बुरी तरह से हार सकते हैं। आज ही जीतने का चुनाव करें।
क्या आप शीघ्रता से धनवान होना चाहते हैं? पश्चात्ताप करें! ये एक पापमय लालसा है, और ये आप को बरबाद कर देगी। ये आपके निर्णय-कौशल को बिगाड़ देगी, आपके प्राण के लिए प्रलोभनों का सृजन करेगी और आर्थिक तौर पर आपके विरूद्ध अलौकिक व प्राकृतिक दोनों नियमों को लायेगी। इसके बजाय, एक उत्तम और उपयोगी नौकरी या व्यवसाय पर कठिन श्रम करें, और आपको बहुगुणित करने के लिए प्राकृतिक व अलौकिक आशीषों की प्रतीक्षा करें (नीति. 28:19, 21-22)।
इस नीतिवचन का एक संदर्भ है। यहाँ पर उल्लेखित विश्वस्त मनुष्य आर्थिक तौर पर एक विश्वासयोग्य मनुष्य है, ऐसा मनुष्य जो निकम्मों से संगति नहीं रखता और अपने खेत में परिश्रम से काम करता है (नीति. 28:19, 21-22)। परमेश्वर उन मनुष्यों को समृद्धि की प्रतिज्ञायें देता है जो त्वरित आर्थिक सफलता के लिए भ्रान्तियों द्वारा विचलित नहीं होते। परन्तु वह लालची लोगों को उन पर आनेवाले न्याय की चेतावनी देता है, जो ‘झटपट-अमीर-बनो’ या ‘30 दिनों में कैसे अमीर बनें’ जैसे विचारों से लिपटे रहते हैं।
यहाँ पर उल्लेखित विश्वासयोग्यता एक लेन-देन या व्यापार पर परिश्रमी, धीरजवन्त, और सदाचारी प्रयत्न है। इसकी तुलना एक अधैर्यवान् व्यक्ति के आवेगी और अविवेकी कार्य-विधियों से की गई है, जो किसी भी कीमत पर आगे बढ़ने के लिए लालच से भरा है। सुलैमान जानता था कि मनुष्य उबाऊ कामों को तुच्छ जानने की परीक्षा में पड़ सकते हैं और व्यापार व निवेश के घपलों के पीछे जा सकते हैं, अतः उसने आपको चेतावनी दी (नीति. 12:11; 13:23; 14:23; 28:19)।
जल्दबाजी परख करने की क्षमता को विकृत करती है : यह एक दीर्घकालिक योजना की अधिक बड़ी सम्भावना को बरबाद करते हुए, परिदृश्य को संकरा करती और समय को अल्पकालिक बना देती है (नीति. 6:6-8; 12:11; 13:4, 23; 14:4; 30:25)। दूसरा, जल्दबाजी प्रलोभनों का सुझाव देती है जिससे लालची मनुष्य विनाश पाते हैं (नीति. 14:15; 15:27; 22:3; 28:21; 1 तीमु. 6:6-10)। तीसरा, जल्दबाजी प्राकृतिक और ईश्वरीय न्याय को ले आती है (नीति. 20:21; 23:4-5; सभो. 5:13; लूका 12:15-21)।
सबक को ठीक ठीक समझें। कुछ लालची व्यक्ति लॉटरी टिकिट खरीदते या जुएखानों में जुआ खेलते हैं। दोनों सम्पत्ति के अधिकार की गारंटी देते हैं जो अंत में आर्थिक विनाश की ओर लेकर जाते हैं। एकमात्र विजेता अगर कोई हैं तो वह है सरकार या जुआखाना। वे सोच सकते हैं कि जैसे ही ‘जैकपॉट’ लगेगा वे खेलना छोड़ देंगे। परन्तु खोया हुआ पैसा बचत में से आया, जो भविष्य के निवेशों से वंचित करता है। “विजेताओं” की भ्रान्ति इसे व्यसनी बना देती है। वे उनकी असली नौकरी और वेतन से नफ़रत करते हैं। ये मूर्ख अपव्ययी हैं (नीति. 18:19)।
ये मूर्ख नहीं देख सकते कि लॉटरियाँ गरीब पर कर थोपने की एक युक्ति है, जिन के पास कोई आमदनी या सम्पत्ति नहीं कि कर दें (अथवा चतुर कि वे जान सकें कि उन पर कर थोंपा जा रहा है)। लॉटरी टिकटों की सबसे लम्बी कतारें सदैव सबसे गरीब क्षेत्रों में होती हैं। सरकारी इकाईयाँ जैकपॉट की राशि को नियमित रूप से ऊँचा उठाते हुए, इन गरीबों को उनके अपर्याप्त साधनों में से स्वेच्छा से अतिरिक्त कर देने के लिए मजबूर कर देती हैं। हर समय मूल व्यवसाय क्या है? सरकार जीतती है, और हर बार गरीब और अधिक गरीब बन जाता है।
जूएखाने उन लोगों को आकर्षित करते हैं जो और भी आधुनिक हैं, जिनके पास जब्त किये जाने के लिए अधिक पैसा है। मुम्बई, दिल्ली और इन जैसे अन्य महानगरों में बहुत-सी तड़क-भड़क की चीजें, विलासी कमरे, चलचित्र मनोरंजन, भोजन के उपाहार-कक्ष, और मुफ्त पेय हैं, कि आपके बटुओं को खाली करें। सावधानीपूर्वक गणना की गई रणनीति पर आधारित यह कारोबार आपको अकसर कुछ हद तक जीतने देता है कि आप को खेलने में लगाए रखें जब तक कि वे आपका सब कुछ न ले लें।
एक और उदाहरण पर विचार करें। एक मनुष्य जो जल्द आगे निकल जाना चाहता है, वह सोचता है कि वह प्रभु को पैसे देने में समर्थ नहीं है। वह तर्क करता है कि आर्थिक रूप से सबल हो जाने पर वह एक बड़ा दान-दाता बनेगा। परमेश्वर से चुराने के द्वारा, वह ईश्वरीय नियमों को सक्रिय करता है जो उसे घटाकर दरिद्रता में ला देगें, भले ही कितने भी परिश्रम व चतुराई से वह काम करे (नीति. 11:24; हाग्गै 1:5-10; मलाकी 3:8-12)।
अन्य व्यक्ति उसकी चिकित्सा बीमा पॉलिसी को रद्द हो जाने देता है। जो भी हो, उसे तीन साल में कोई दावा करने की जरूरत नहीं पड़ी। वह प्रीमियम या किश्त की राशि को विभिन्न नेटवर्क मार्केटिंग तरीकों में लगाता है। स्वयँ को अनावश्यक रूप से जोखि़म के लिए खुला रखने के द्वारा, एक विवेक के नियम का उल्लंघन करने से वह अगले साल उसकी पत्नी की की बड़ी बिमारी पर खर्चे के कारण दिवालिया हो जाता है (नीति. 6:1-5; 27:12-13)।
एक दूसरा व्यक्ति बैंक द्वारा मिलनेवाले ब्याज को लेकर कुढ़ता है। जबकि सभी बैंक सालाना 3 प्रतिशत ब्याज दे रही होती हैं, उसे एक दिन एक ई-मेल आता है, जिसमे कोई बैंक गारंटी के साथ 10 प्रतिशत प्रति माह ब्याज देने का प्रस्ताव देती है। वह स्वयँ को भाग्यवान समझकर धन्य कहता है और अपने परिवार को ‘आलीशान गाड़ी-बंगला’ दिखाकर जो वह तीन माह में खरीदेगा, एक खोखली योजना में निवेश करता है। जब एक दिन अचानक जाँच एजेन्सी फोन करती है, तो 3 प्रतिशत भी सोने जैसा दिखता है। परन्तु तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। उसकी जल्दबाजी ने उसे असम्भव पर विश्वास करने पर विवश कर दिया!
एक रूढ़ीवादी व्यक्ति इन उदाहरणों पर हँसता है। वह इतना चतुर है किसी भी बेईमानी की योजना को तुरंत पहचान लेता है। वह प्रभु को धोखा नहीं देगा। वह प्रतिवर्ष 12 प्रतिशत देता है (जो टैक्सों या करों के बाद उसे 7 प्रतिशत पड़ता है)। वह लॉटरी टिकटों और ‘खोखली’ योजनाओं की हंसी उड़ता है। वह यत्न से काम करता है – दो-दो नौकरियां, या व्यवसाय करता है – जब तक कि एक दिन उसे हृदयघात नहीं आता, पत्नी से तलाक के कागज नहीं देखता, और ऐसे बच्चों को नहीं पाता, जो उस से घृणा करते हैं।
एक अन्य व्यक्ति कोई बचत न करने को अपनी जीवन-शैली बना लेता है। वह बचत करना रोक देता है और मकान व कार पर अनुचित खर्चा करता है। उसे ऐशोआराम की जिन्दगी अभी चाहिए होती है। जब एक बड़ा व्यापारिक सौदा आता है, उसके पास इस में निवेश करने के लिए कोई पूँजी नहीं होती है। जिस कंपनी में वह काम करता है जब उसे कोई दूसरी कंपनी उसपर अपना अधिकार जमा लेती है, तब वह अपनी नौकरी ही खो देता है, उसके पास कोई आपात्कालीन-निधि नहीं है। जब जब ज़मीन और मकान-निर्माण के बाज़ार में गिरावट आती है, उस पर दबाव आता है कि अपने घर को बचने या तो बैंक को भुगतान करे अन्यथा घर ख़ाली करे। अन्त में वह और उसकी पत्नी किसी फास्ट-फूड रेस्टारैन्ट में बर्तन धोने का काम करते हैं।
एक अन्य व्यक्ति एक लेखापाल है। वह संचालक बनने की महत्वाकांक्षा से जलता है। जब मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) उसके सामने पदोन्नति का प्रस्ताव रखता है कि वित्तीय लेखा-जोखा के लिए उपार्जित धनों को फुलाये, वह तर्क करता है कि वह झूठ व चोरी को अपने नए पदभार से ठीक कर सकता है। यह मात्र एक अस्थाई पाप है। परन्तु कुछ कारण से, सी.एफ.ओ. इसे अगले वर्ष फिर करना चाहता है। वह अपने सपनों की नौकरी में शापित होता है।
एक लोभी हृदयवाले न्यायाधीश को एक घूस का प्रस्ताव दिया जाता है कि एक विधवा की भू-सम्पत्ति के वसीयतनामे का प्रमाणपत्र देने में हेर-फेर करे। वह सुनिश्चित करता है कि विधवा को पर्याप्त हिस्सा मिले कि आराम से रह सके, किन्तु वह उस वसीयत की व्याख्या अपने उपकारक के पक्ष में करता है। वह मात्र दो साल बाद, धीमे व पीड़ादायक मस्तिष्क-कैन्सर से मर गया। उसका अन्तिम विचार क्या है? क्यों मैं सब न्यायाधीशों के ‘न्यायी’ को भूल गया (भजन 68:5; सभो. 5:8)।
एक ट्रक-चालक को अच्छा नहीं लगता कि लोग उसे एक ट्रक चालक के रूप में पहचाने। उसे वह सम्मान नहीं मिलता जो अन्य व्यावसायिकों को मिलाता है। वह अपनी नौकरी को तुच्छ जानने लगता है। जब एक दिन ‘रोलैक्स’ घड़ी पहननेवाला, परिवर्तन-चालित , सदा-मुस्कुरानेवाला व्यक्ति उसे उच्च दामवाले साबुन में निवेश के द्वारा बहु-स्तरीय धन कमाने के विषय में बताता है, वह अपना साज़-सामान बेच देता है और दोनों पैरों से कूद पड़ता है। उसे अन्तिम बार साबुन से भरे एक गोदाम के मालिक के रूप में, हाथों से कब्र खोदने का काम करते देखा गया।
एक अन्य व्यक्ति ने वर्ष की समाप्ति पर उसकी वित्तीय स्थिति का आकलन किया। उसकी बैलेन्स-शीट ने कम ही उन्नति दिखायी। इस गति से वह कैसे धनी बन सकता है? अगला दिन, टैक्स का दिन था। अचरज! परमेश्वर और शैतान उसे प्रलोभित कर रहे थे – परमेश्वर उसे सिद्ध बनाने के लिए, शैतान उसे नष्ट करने के लिए। उसने अपने टैक्स-विवरण में थोड़ा गलत हिसाब दिया। उसे अन्तिम बार तिहाड़ जेलखाने में देखा गया, और अब उसके पास साबुन से भरा कोई गोदाम नहीं था!
एक विश्वासयोग्य मनुष्य उबाऊ काम को, जो परमेश्वर ने उसे दिया है, स्वीकार करता है, यत्न से और धीरज से काम करता है, बचत करता और उदारता से देता है, झूठ और घपलों से घृणा करता है, सन्तोष का चुनाव करता है, जोखि़म से बचता है, कर्तव्यनिष्ठ रूप से ईमानदार है, मित्रों और शत्रुओं की चिन्ता करता है, और प्रतिदिन की रोटी के लिए प्रभु पर भरोसा करता है। उसे अन्तिम बार, सन्तुष्टि की शान्ति के साथ उसकी एकमात्र पत्नी के साथ, और बहुत से नाती-पोतों के साथ आनन्द करते हुए, एक पर्याप्त बड़े भू-सम्पदा के साथ देखा गया। उसके मित्रगण थे स्वयँ परमेश्वर और सबसे अच्छे भक्त मनुष्य (याकूब 2:23; भजन 101:6), और वह भजन 112 और 128 की प्रतिज्ञा की गई आशीषों का स्पष्ट अनुभव कर रहा था।
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