नीतिवचन 28:15

कंगाल प्रजा पर प्रभुता करनेवाला दुष्ट गरजनेवाले सिंह और घूमनेवाले रीछ के समान है।

अधिकार या शक्ति का उपयोग गरीबों पर अत्याचार करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। असहाय या कमज़ोरों की रक्षा के लिए परमेश्वर ने अधिकार के पद नियुक्त किये। जब सरकारी शासक गरीबों पर अत्याचार करते हैं, तो वे मानों जंगली और उपद्रवी जानवरों के समान होते हैं। वे उन्हें मिली सत्ता का क्रूरता और असंवेदनशील रूप से दुरुपयोग करके देश और समाज को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। मनुष्य अगर खतरनाक और जंगली जानवरों को चिड़ियाघरों में बंद कर देता है, तो ज़रूरी है कि उनके जैसे शासकों को भी उनके पद से हटाकर जेल में बंद कर दिया जाए।

देश के जो नेता और शासक गरीबों का ध्यान नहीं रखते, वे दुष्ट हैं। प्राधिकार और शासन का एक महान कर्तव्य यह है कि कर्तव्यनिष्ठा से उन लोगों की सहायता करना जो स्वयं की रक्षा या सहायता करने में असमर्थ हैं। जब कोई दुष्ट व्यक्ति सत्ता में आ जाता है और अपने शासनकाल में अल्पसंख्यकों और गरीबों पर अत्याचार करता है, तो यह एक भयावह बुराई है। परन्तु स्वर्ग में एक परमेश्वर है, जो ऐसे शासकों को दण्ड देगा (सभो 5:8)।

इन नीतिवचन में परमेश्वर की बुद्धि और सुलैमान के अवलोकन पर आधारित एक ईश्वर-प्रेरित उपमा को प्रयुक्त किया गया है। गरजनेवाला सिंह खतरनाक और जानलेवा होता है (भजन 104:21; यशायाह 31:4; आमोस 3:4; 1 पतरस 5:8)। घूमनेवाला रीछ एक भूखा भालू होता है जो खाने की तलाश में अपने सामान्य निवास स्थान से बाहर निकल आता है। जानवरों के साम्राज्य के ये दो भौतिक मिसालें एक दुष्ट शासक के क्रूर और अत्याचारी चरित्र को दर्शाती हैं जो अपने राज्य में अल्पसंख्यकों और गरीबों पर अत्याचार करता है। इन क्रूर जानवरों में वह दया और तरस का कोई कण नहीं होता है जो एक धर्मनिष्ठ और महान शासकों की विशेषता है।

एक महान शासक गरीबों की रक्षा करता है और उनका भरण-पोषण करता है, और उसका शासन लंबे समय तक बना रहेगा (नीतिवचन 29:14)। कृपा और सच्चाई एक राजा की गद्दी को संभाले रखती हैं, अत्याचार और लालच नहीं (नीतिवचन 20:28)। नीतिमान शासकों के अधीन देश आर्थिक समृद्धि के साथ साथ एकता और भाईचारे में भी तरक्की करता जाता है और नागरिक आनन्द मनाते हैं (नीतिवचन 29:2)। लेकिन जब एक पक्षपाती, सत्ता का लोभी, और स्वार्थी इन्सान जनता को मूर्ख बनाकर शासक बन जाता है, तो सत्ता की भूख उसे अत्याचारी बना देती है, जैसा कि संदर्भ से पता चलता है (नीतिवचन 28:16)। ऐसे अत्याचारी के अधीन कष्ट भोगने की अपेक्षा मर जाना या जन्म ही न लेना बेहतर है (सभो 4:1-3)।

दुष्ट शासक अल्पसंख्यकों और गरीबों पर कैसे अत्याचार कर सकता है? निःसंदेह, एक दुष्ट शासक अपनी या अपने मित्रों की अचल संपत्ति बढ़ाने के लिए गरीबों की संपत्ति पर हाथ मर सकता है और मारता भी है, वह देश की संपत्ति को बेच सकता है, अपने हरम के लिए उनकी सुंदर बेटियों का अपहरण कर सकता है, उनकी पत्नियों को अपने हरम में ले जाने के लिए पतियों की हत्या करवा सकता है, वह देश की तरक्की दिखाने और दिखावटी निर्माण परियोजनाओं के लिए देश के गरीबों पर महंगाई और बाकी जनता पर अत्यधिक कर लगा सकता है, और वैसा हो भी रहा है, या देशभक्ति दिखाने किसी कमज़ोर पड़ोसी देश पर अनावश्यक सैन्य अभियान चलवा सकता है। न्याय प्रणाली को भ्रष्ट करने के लिए रिश्वत देना या न्यायालयों में अपने पक्ष के लोगों को बिठा सकता है, अपने विरोधियों को केन्द्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग से क़ानूनी शिकंजे में फंसवा सकता है, सरकारी स्कूलों में गरीबों की शिक्षा को और भी कमज़ोर करवा सकता है, और प्राइवेट स्कूल माफियाओं को शिक्षा की क़ीमत बढ़ाने की आज़ादी दे सकता है, ताकि गरीब बच्चें उच्च और अच्छी शिक्षा से वंचित रहें, आदि।

लेकिन वह गर्भपात को भी वैध बना सकता है, जिसमें गरीब, अजन्मे शिशुओं को मारा जाता है। वह मुद्रा आपूर्ति को बढ़ा सकता है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं और जीवन स्तर में कमी आती है। वह न्यूनतम वेतन बढ़ा सकता है, गरीबों के लिए नौकरियों की संख्या कम कर सकता है। वह आयात पर शुल्क लगा सकता है, जिससे विदेशों से सस्ते माल की लागत बढ़ जाएगी। वह उनके बेटों को कम वेतन वाली और अल्पकालिक सेना में भर्ती करवा सकता है, जबकि अमीर भर्ती से बचते हैं। वह बड़े बड़े व्यवसायियों की रक्षा कर सकता है, जो वस्तुओं की कीमतें बढ़ाते हैं, किसी बड़े उद्योगपति के लिए छोटी कंपनियों और उद्योगों को बर्बाद कर सकता है और जो मेहनती और महत्वाकांक्षी हैं उन के लिए अवसर कम कर सकता है।

वह ऐसे उत्पाद शुल्क लगा सकता है जिससे गरीबों का महीने का बजट बिगड़ जाए। वह गरीबों की सब्सिडी बंद कर सकता है। वह ज्यादा काम करवाकर कम भुगतान कर सकता है। वह कानूनी और कर प्रणालियों को जटिल बना सकता है, जिससे कि गरीब लोग किसी क़ाबिल पेशेवर की मदद न ले सकें। वह देश की झूठी तरक्की दिखाने राष्ट्रीय ऋण बढ़ा सकता है, जिससे सभी वस्तुओं और करों की लागत बढ़ जाती है। वह पैरवीकारों की बात सुन सकता है, जिनमें से कुछ या कोई भी गरीबों के लिए गरीबों द्वारा नियोजित नहीं है। वह महंगाई को तब तक बढ़ा सकता है जब तक गरीब मज़बूर होकर सरकारी खैरात पर निर्भर न हो जाए ताकि वे अपनी भूख मिटाने उसकी मुफ़्त अनाज-योजना का लाभ पाने उसे अपना वोट दे।

फिरौन ने अपने खज़ाने के नगरों, गोदामों और रामसेस को बसाने के लिए गरीब इस्राएलियों पर कठोर दासत्व थोपा था, और उनके बालकों को मारवा डाला (निर्गमन 1:8-16)। स्वर्ग के महान और भयानक परमेश्वर ने अपनी प्रजा की पुकार सुनी (निर्गमन 2:23-25)। वह उसपर हँसा! फिरौन की आज्ञा न मानने के लिए परमेश्वर ने दाइयों को आशीर्वाद दिया (निर्गमन 1:15-21); परमेश्वर ने मूसा के पोषण, परवरिश और प्रशिक्षण के लिए फिरौन का उपयोग किया (प्रेरितों 7:20-22); परमेश्वर ने मिस्र को ध्वस्त कर दिया और उनके हर परिवार में पहलौठे को मार डाला (निर्गमन 10:7; 12:29-30); जब वे चले गए तो परमेश्वर ने इस्राएल से कहा कि वे मिस्र की संपत्ति अपने साथ ले लें (निर्गमन 12:35-36); और अन्त में परमेश्वर ने फिरौन और उसकी सेना को लाल समुद्र में डुबाकर मार डाला (निर्गमन 14:21-30)।

शाऊल ने गरीब दाऊद को कई बार मारने की कोशिश की और नोब में याजकों को मार डाला, इसलिए धन्य परमेश्वर ने पलिश्तियों के साथ एक लड़ाई में उसका और उसके बेटों का बुरी तरह से विनाश कर दिया (1 शमू 18:11; 22:12-19; 31:1-13)। अहाब और इज़ेबेल ने नाबोत से उसकी अंगूर की बारी हथियाने की साजिश रची, इसलिए परमेश्वर ने इज़ेबेल को खाने के लिए कुत्तों को भेजा, और अन्य कुत्तों ने अहाब के रथ से उसका खून चाट लिया (1 राजा 21:1-16; 22:34-38; 2 राजा 9:30- 37)। रहूबियाम ने इस्राएल पर अत्याचार करने के लिए कर बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन उसने अपने शत्रुनों के हाथों इस्राएल के बारह गोत्रों में से दस गोत्रों को खो दिया (1 राजा 12:1-20)। दुष्ट अत्याचारियों का न्याय किया जाएगा।

लेकिन इस दुनिया में ऐसे भी अत्याचारी हैं जो केवल सरकारी शासकों तक ही सीमित नहीं हैं। परमेश्वर क्रूर और अत्याचारी पतियों का भी न्याय करेगा (मलाकी 2:10-16; 1 पतरस 3:7)। इसलिए, पतियों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपनी पत्नियों को बड़ी संवेदनशीलता से प्रेम करें, संजोएं और उनका पोषण करें (इफि 5:25-29; कुलु 3:19; 1 पतरस 3:7)। आपकी पत्नी आपके लिए प्रभु से ऋण पर मिली है, और यदि आप किसी भी तरह से उसके उपहार का दुरुपयोग या उत्पीड़न करते हैं, तो इसकी क़ीमत आपको इस जीवन में और मृत्यु के बाद में नरक में जाकर चुकानी होगी (नीतिवचन 18:22; 31:31; मलाकी 2:13)। सावधान!

परमेश्वर पिताओं को बच्चों पर अत्याचार करने से बचने की आज्ञा देता है (इफि 6:4; कुलु 3:21)। एक पिता के पास अपने घर पर शासन करने के लिए परमेश्वर प्रदत्त अधिकार और शक्ति हो सकती है, लेकिन बेहतर होगा कि वह प्रेम और दया के साथ शासन करे, अन्यथा वही परमेश्वर, जिसने ऊपर गरीबों का बदला लिया था, उस पर फैसला सुनाएगा। स्वर्ग का परमेश्वर पिताओं से अपेक्षा करता है कि वे अपने बच्चों पर दया करें (भजन 103:13; यिर्म 31:20; लूका 11:11-13; 15:20-24)। यहां तक कि पापों के लिए दंड भी कोमलता से दिया जाए (नीतिवचन 3:11-12)। केवल पिता ही दोषी नहीं हैं, क्योंकि दबंग महिलाएं भी अपने बच्चों के लिए बराबर का अभिशाप हैं (नीतिवचन 30:21-23)।

अगर आपको लगता है कि यह नीतिवचन महज राजनीतिशास्त्र के बारे में है तो आगे विचार करें। नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों की अच्छी देखभाल करनी चाहिए, विशेष रूप से निचले स्तर के गरीबों की (लैव्य 25:39-43; व्यवस्था 24:14-15; इफि 6:9; कुलु 4:1)। पास्टरों को कभी भी अपनी मण्डलियों में गरीबों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि प्रभु यीशु मसीह को पक्षपात से नफरत है (1 तीमु 5:21; याकूब 2:1-7)। यद्यपि पास्टरों को स्वर्ग से अधिकार प्राप्त हुआ है, इसके बावजूद उन्हें अपने चर्च के लोगों के लिए दूध पिलानेवाली माँओं के समान होना है (1 थिस्स 2:7-8)।

केवल एक ही सिद्ध और परीपूर्ण शासक है, और वह पूरे विश्व पर महिमा के सिंहासन पर बैठता है – वह प्रभु यीशु मसीह है (2 शमू 23:1-5; भजन 45:6-7; इब्रानियों 1:8-9)। परमेश्वर ने इस दुनिया के गरीबों को अपने बच्चों के रूप में चुना, और उनकी देखभाल का दायित्व प्रभु यीशु मसीह को सौंपा है (1 कुरिन्थ 1:26-31)। उसने प्रतिज्ञा कीं कि व उनमें से एक को भी न खोएगा – हर कोई स्वर्ग में उसके साथ अनंत काल के लिए जीवित रहेगा(यूहन्ना 6:37-39; 10:27-29; 17:2; रोमियों 8:28-39; इब्रानियों 2:13)।

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