नीतिवचन 28:14

जो मनुष्य निरन्तर प्रभु का भय मानता रहता है वह धन्य है; परन्तु जो अपना मन कठोर कर लेता है वह विपत्ति में पड़ता है।

क्या आप सुखी हैं? क्या आप उतने सुखी हैं जितना आप हो सकते थे? जब परमेश्वर और सुलैमान सुख का जिक्र करते हैं, तो आपको उनकी व्याख्या सुननी चाहिए। यहां जीवन में सुख पाने के बारे में सबसे बुद्धिमान राजा ने एक नियम दिया है। जिन लोगों ने इस नीतिवचन के दोनों खण्डों को आजमाया है, वे जानते हैं कि यह बिल्कुल सच है। आप आज ही सुखी हो सकते हैं।

सब लोग सुखी रहना चाहते हैं और विपत्ति से बचना चाहते हैं, और यहां बताया गया है कि कैसे। आपको अपने सृष्टिकर्ता के साथ एक रिश्ता कायम करने की ज़रूरत है। उसके बिना, आप विश्व में एक खोया हुआ कण हैं। यदि आप निरन्तर परमेश्वर का भय मानोगे, तो आप सुखी रहोगे। परन्तु यदि आप उसके विरूद्ध बलवा करो, तो आपका जीवन विपत्तियों से भर जाएगा। आज ही सर्वशक्तिमान परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह आपको उसका भय मानने की कृपा और शक्ति दें।

क्या यह नीतिवच परमेश्वर का भय मानने के विषय में है? हाँ, क्योंकि नीतिवचन की पूरी पुस्तक का विषय यही है (नीतिवचन 1:7); और यही मनुष्य का संपूर्ण कर्तव्य भी है (सभो 12:13); किसी और बात का भय आपको कोई सुख नहीं देगा (नीतिवचन 29:25); बल्कि यह अपने मन को कठोर करने के विपरीत है (यशायाह 63:17); इसके न होने से उत्पात और अराजकता मचती है (भजन 36:1-2); और यह परमेश्वर के सामने अपने पापों को मान लेने का उचित रूप से पालन करता है जो कि समृद्धि के लिए आवश्यक है (नीतिवचन 28:13)।

आपको कितनी बार या कितने समय तक परमेश्वर का भय मानना चाहिए? उसका भय आपको निरन्तर मानना है, तब भी जब आप सुखी न हो। परमेश्वर अय्यूब जैसे परमेश्वर का भय मानने वाले मनुष्य से कुछ समय के लिए दूर हो सकता है, जिससे उसका सुख कम हो सकता है; लेकिन अंत में वह वैसे ही वापस लौट आता है जैसे वह अय्यूब के जीवन में लौट आया, और वह भी पहले से बढ़कर आशिषों के साथ। आपका सुख और आपकी सफलता निरन्तर परमेश्वर का भय मानने पर निर्भर हैं।

परमेश्वर का भय मानना क्या है? यह परमेश्वर से प्रेम करना है। आप जो कुछ भी करते हैं वह आप केवल उसकी महिमा के लिए करते हैं (1 कुरिन्थ 10:31)। आपको चाहिए कि आप अपने जीवन की चाल पर ध्यान रखें, कहीं ऐसा न हो कि आप उसकी आज्ञाओं को तोड़ दें और उसे अप्रसन्न कर बैठें। आप अपने प्रत्येक विचार, शब्द, कार्य और योजना का सावधानीपूर्वक निरीक्षण करें यह ज़रूरी है । आपको कुछ भी करने से पहले यह सोचना होगा कि, क्या मेरा यह फैसला उसे मंजूर है? क्या मेरा यह काम उसे प्रसन्न करेगा?

क्या सुख और भय एक साथ रह सकते हैं? हाँ, क्योंकि परमेश्वर का भय मानना उसकी आज्ञाओं का पालन करके उसे प्रसन्न करने की श्रद्धापूर्ण इच्छा है और पाप से घृणा करना है। इस भय में कोई दर्द या पीड़ा नहीं है। यह ऐसा भय है जो आशा करता है कि परमेश्वर अनुग्रह करेगा (भजन 147:11) और कांपते हुए आनन्दित होता है (भजन 2:11)। यह ऐसा भय है जो ज़रूरत के समय सहायता के लिए उसके अनुग्रह के सिंहासन के सामने साहसपूर्वक आने के अनुकूल होता है (इब्रानियों 4:12-16)।

जिस भय के कारण आदम को अदन के पेड़ों के बीच छिपना पड़ा, वह अपराध और विद्रोह का अधर्मी भय था। परमेश्वर से जन्मा मनुष्य जिस प्रकार का भय मानता है वह एक प्रेमी पिता का भय है। यह प्रसन्न करने की प्रबल इच्छा है और अवज्ञा पर एक शक्तिशाली रोक है, लेकिन इसमें स्नेह, विश्वास और सुरक्षा भी शामिल है (नीतिवचन 16:20)। जब व्यक्ति परमेश्वर को ठीक ठीक रीति से जान लेता है तो दर्दनाक भय दूर हो जाता है (1 यूहन्ना 4:18)।

परमेश्वर के प्रति आपके भय के कारण आपको खुद पर अविश्वास होना चाहिए, क्योंकि आत्मविश्वास पाप और अधोगति की ओर ले जाता है (1 कुरिन्थ 10:12)। बुद्धिमान लोग खुद पर भरोसा नहीं करते, बल्कि वे अपने मनों को अपने सबसे खतरनाक दुश्मन के रूप में तुच्छ समझना सीखते हैं (यिर्मयाह 17:9)। यीशु मसीह को जानने से इनकार करने से पहले पतरस का अपनी ताकत और साहस पर भरोसा आपको ऐसी मनोदशा की ओर ले जाने पाए जिसमें आप परमेश्वर से सहायता मदद और सामर्थ्य मांगने के लिए खुद को छोटा कर देते हैं।

चूँकि परमेश्वर की आज्ञाएँ अपने आप में जीवन और समृद्धि हैं (नीतिवचन 3:1-2) और उनका पालन करने से उसका अनुग्रह और आशीष मिलती है (भजन 147:11), अत: ये दो कारक मनुष्य को सुख की ओर ले जाते हैं। सफलता के लिएआपका परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना और परमेश्वर का आपके जीवन को समृद्ध बनाना एक अद्भुत संयोजन है। उसकी आज्ञाओं को मानने से इनकार करना मूर्खता है और मृत्यु को चुनना है तथा खुद पर उसका दण्ड ले आना है। धोखा न खाओ; परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है वही काटेगा (गलातियों 6:7)।

यदि आप जीवन से प्रेम करते हैं और लम्बी आयु का आनंद लेना चाहते हैं, तो परमेश्वर का भय मानें और बुराई से दूर रहें (भजन 34:12-16; 1 पतरस 3:10-12)। लोग सुखी रहने के लिए परामर्श और उपचार के लिए बड़ी फीस चुकाते हैं, लेकिन यहाँ आपके सृष्टिकर्ता की ओर से सुखी जीवन की एकदम सही परिभाषा है। और यह उस व्यक्ति ने लिखी जिसने मनुष्य को ज्ञात हर उद्देश्य और आनंद के साथ प्रयोग किया। यहां उसका निष्कर्ष वही है जो उसने अपने दार्शनिक और व्यावहारिक शोध के अंत में निकाला (सभोपदेशक 12:13)।

भजन 112:1-10 या भजन 128:1-6 पढ़ें। देखिये कि क्या परमेश्वर का भय मानने में कल्याण है। आपको और क्या चाहिए? बेशक, हॉलीवुड और बॉलीवुड आपको सुखी जीवन का अपना संस्करण बेचने की कोशिश करते हैं, लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति उस चमक-धमक, भावुक करनेवाला संगीत और झूठ बोलने वाली विषयवस्तु से लेकर तलाक, ड्रग्स, नशे, बीमारी और बेकारी, आदि सब पहलुओं को देखते हैं जो इसके तथाकथित सितारों को विपत्ति में डाल देते हैं।

यदि आप हठधर्मिता से परमेश्वर के मार्ग को अस्वीकार करते हैं, तो आप अपने ऊपर उसका कठोर न्याय लाएँगे (नीतिवचन 29:1; 1:24-32; 6:12-15; 28:18)। अपराधियों का मार्ग कठिन है (नीतिवचन 13:15; 4:19; 19:16; 22:5)। लूत और शाऊल ने परमेश्वर की आज्ञाओं से समझौता किया, और वे दोनों दयनीय जीवन जी रहे थे जिसका अंत भयानक नामधराई के साथ हुआ, जो कुछ साल पहले बिल्कुल अकल्पनीय था। अब्राहम और लूत के बीच कितना अंतर है! शाऊल और दाऊद के बीच कितना अंतर था! कितना बेकार का जीवन!

परमेश्वर का भय मानना कोई हल्की बात नहीं है। यह या तो जीवन है, या मृत्यु। ये या तो सुख है या विपत्ति। यह अनंतकाल का विषय है। केवल मूर्ख ही परमेश्वर की बातों को हल्के में लेते हैं, और उन्हें अपनी मूर्खता का प्रतिफल मिलेगा। केवल मूर्ख ही बाहरी धार्मिक अनुष्ठानों और विधियों पर भरोसा करते हैं, क्योंकि परमेश्वर पाखंडी को नष्ट कर देगा (अय्यूब 20:4-9)। बुद्धिमान लोग यहाँ पृथ्वी पर के अपने आत्मिक सफ़र का समय डरते और कांपते हुए बिताएंगे (1 पतरस 1:17)।

आपने अपना मन परमेश्वर के विरूद्ध कहां कठोर कर लिया है? वह क्या चाहता है जो आप देना नहीं चाहते? क्या आप हठपूर्वक उसके नियुक्त पास्टरों की शिक्षा का विरोध करते हैं? क्या आपने आज अपना आत्म-परीक्षण किया? क्या आपका पूरा जीवन परमेश्वर के भय की बुनियाद पर निर्मित है? आप उसकी सार्वजनिक आराधना से कहाँ समझौता कर रहे हैं? आप अपनी निजी जिंदगी से कहां समझौता कर रहे हैं? क्या आपने अपने गुप्त पापों को स्वीकार किया है और उन्हें छोड़ दिया है? क्या आप यह देखने के लिए कि क्या वे सब आपके जीवन से मिट गएँ हैं, अपना आत्म परिक्षण करते हैं?

यदि आप यह सोचते हैं कि आप विद्रोह करके बच सकते हैं, यदि आप सोचते हैं कि अवज्ञा में आपको शांति मिल सकती है, तो वह क्रोधपूर्वक आपके शर्मनाक अवज्ञाकारी जीवन को शापित कर देगा और आपका नाम जीवितों से मिटा देगा (व्यवस्था 29:18-20)। जान लें कि आपको आपका पाप लगेगा। पुत्र, अर्थात् यीशु मसीह को चूमो, जिसका अर्थ है उस पर अपने उद्धार के लिए विश्वास करना! यह वह सुख या निराशा नहीं है जिसका आपको किसी यात्रा पर सामना करना पड़ सकता है – यह जीवन और अनंत काल है।

यीशु मसीह निरन्तर अपने पिता परमेश्वर का भय मानता था और वही काम करता था जिससे वह प्रसन्न हो (इब्रानियों 5:7), और वह निरन्तर स्वर्ग में अपने सिंहासन पर बैठा रहता है और हमेशा हमेशा के लिए सुख और आनंद का भरपूर आनंद उठाता है (भजन 16:11)। यदि आप भय और कांपते हुए अपने उद्धार का कार्य करते हैं, तो आप शीघ्र ही वहां पहुंच सकते हैं जहाँ वह है (फिलिप्पियों 2:12-13; 2 पतरस 1:10-11)।

नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।