नीतिवचन 28:13

जो अपने अपराध छिपा रखता है, उसका कार्य सफल नहीं होता, परन्तु जो उनको मान लेता और छोड़ भी देता है, उस पर दया की जायेगी।

समृद्धि और सफलता – साथ साथ शांति और आनंद- प्राप्त करना आसान है। अभी अपने पापों को मान लो और उन्हें छोड़ भी दो। दरिद्रता और असफलता – साथ साथ पीड़ा और दुख- प्राप्त करना भी आसान है। अपने पापों को छिपाए रखो, और दिखावा करो कि मानों सब कुछ ठीक है। परन्तु धन्य परमेश्वर आपको छोटे से छोटे पाप से भी बचकर नहीं जाने देगा। जान लो कि आपका पाप आपको ढूंढ लेगा! आप क्या चाहते हैं – समृद्धि या विनाश?

पापों को आसानी से परिभाषित किया जा सकता है: जीवन जीने के लिए परमेश्वर ने जो व्यवस्था दीं उस व्यवस्था को तोड़ना पाप है, और उसकी व्यवस्था में प्रकट सभी नियम बाइबल में पाए जाते हैं। पाप उन कामों को करना है जिन्हें करने की परमेश्वर ने हमें आज्ञा नहीं दी है, और उन कामों को न करना जिन्हें करने की परमेश्वर ने हमें आज्ञा दी है, पाप है। ऐसी दो मुख्य आज्ञाएँ हैं जो परमेश्वर और पड़ोसी के प्रति आपके प्रेम को निर्धारित करती हैं; दस आज्ञाएँ उन कर्तव्यों का और विस्तार से वर्णन करती हैं; फिर शेष बाइबल में इन दस आज्ञाओं में से प्रत्येक के उचित व्यवहारिक उपयोग के बारे में वर्णन किया गया है।

जब आप पाप करते हैं, तो आपके पास एक विकल्प होता है। पहला, आप पाप को अपने तक ही सीमित रख सकते हैं, इसे दूसरों से छिपा सकते हैं, परमेश्वर के सामने इसे मानने से इनकार कर सकते हैं, और जब आपका मन हो, आप उसे दोबारा कर सकते हैं। और दूसरा, आप अपने घुटनों पर आ सकते हैं, उसे खुलकर परमेश्वर के सामने मान सकते हैं, यदि उस पाप के कारण किसी का नुकसान हुस या चोंट पहुँची हो तो आप उसकी क्षतिपूर्ति कर सकते हैं, और इसे दोबारा करने से बचने के लिए आवश्यक कदम उठा सकते हैं। इस मामले में आपके चुनाव का आपके जीवन पर बहुत असर होगा।

सब मनुष्य पाप करते हैं। और धन्य परमेश्वर यह जानता है (1 यूहन्ना 1:8,10; 2:1)। आप अपने पापों से कैसे निपटते हैं, इससे दुनिया में बहुत फर्क पड़ता है। यदि आप उन्हें मान लेते हैं, तो वह आपको क्षमा करने में विश्वासयोग्य और न्यायी है (1 यूहन्ना 1:9)। परन्तु यदि आप अपने पापों को अपने मन में रखोगे, तो वह आपकी प्रार्थना भी नहीं सुनेगा, और आपसे अपना मुख फेरकर विपत्ति भेजेगा (भजन 66:18; 1 पतरस 3:12)।

किसी भी मनुष्य का पाप इतना अधिक, इतना अखण्ड, या इतना अधिक भयानक नहीं है कि परमेश्वर उसे क्षमा न कर सके। उसके विचार और मार्ग आपके विचारों और मार्गों से बहुत ऊपर हैं – पापों को क्षमा करने और माफ़ करने की उसकी क्षमता की दृष्टी से (यशा 55:6-9)। उनमें किसी भी मनुष्य के पाप से बढ़कर क्षमाशीलता है। परमेश्वर हमेशा टूटे हुए मनों और निराश हृदयवाले लोगों को ग्रहण करता है; वह ऐसे बलिदान का न कभी तिरस्कार करेगा और न कभी ठुकराएगा (भजन 51:16-17)। यह केवल आपका अहंकारी विद्रोह और ज़िद्द ही है जो आपको अभी अपने पाप मानने से रोक रही है।

अहाब और मनश्शे दो सबसे दुष्ट राजा थे, फिर भी परमेश्वर ने उन दोनों पर दया की, और यह परमेश्वर की क्षमाशीलता पर संदेह करने वालों के लिए उत्कृष्ट पाठ है (1 राजा 21:25-29; 2 इतिहास 33:1-13)। दाऊद ने परमेश्वर की महान आशीष और ज्ञान प्राप्त करने के बावज़ूद, व्यभिचार और हत्या जैसा संगीन पाप किया, फिर भी परमेश्वर ने उसे एक पल में क्षमा कर दिया (2 शमूएल 12:13)। और परमेश्वर ने पतरस को भी क्षमा कर दिया, जिसने मसीह का इनकार न करने के अपनी घमंडपूर्ण प्रतिज्ञा के बाद मसीह को श्राप और शपथ खाकर उसे न जानने का झूठ बोलकर भयानक पाप किया था।

अपने पापों को छिपाओ और उनकी रक्षा करो, और धर्मी परमेश्वर तुम्हें अंदर से बाहर तक पीसकर चूर्ण बना देगा। उन्हें मान लो और उन्हें छोड़ दो, तो वह तुम्हारी आत्मा को जीवन और ज्योति देकर पुनर्स्थापित करेगा (अय्यूब 33:27-28)। आपके पास एक चुनाव है, पाठक, एक मामूली चुनाव। क्या करेंगे आप? आज आप जिस तरह से अपने पापों से निपटते हैं, उससे या तो आपकी भविष्य की समृद्धि तय होगी या विनाश। शाऊल के बजाय दाऊद की तरह बनें और शाऊल के समान दण्ड पाने के बजाय दाऊद की आशीष पाएं।

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