नीतिवचन 28:11

धनवान मनुष्य स्वयं को अपनी दृष्टि में बुद्धिमान समझता है, परन्तु समझदार गरीब उसकी बुद्धिमानी की वास्तविकता को पहचान जाता है।

धन-संपत्ति और सफलता इन्सान को अँधा कर सकती हैं। इससे मनुष्य घमण्डी बनकर मूर्खतापूर्ण बातें सोचने लगता है। तो वही, एक बुद्धिमान गरीब मनुष्य धनवान मनुष्य की गलतियों को देख सकता है और साबित कर सकता है कि वह गलत है। धनवान होकर भी बुद्धिरहित होने की तुलना में एक बुद्धिमान गरीब होना अधिक बेहतर है। आज ही बुद्धि खरीदें, और इसे कभी न बेचें (नीतिवचन 23:23)।

परिणाम कुछ भी साबित नहीं करते, क्योंकि कई विपरीत कारणों से अंतिम नतीजे अक्सर कुछ और ही निकल आते हैं। एक समझदार व्यक्ति, चाहे वह कितना भी गरीब क्यों न हो, मूर्ख धनवान का विश्लेषण कर उसे दोषी ठहरा सकता है। आपकी सब उपलब्धियों में बुद्धि सबसे अहम और सर्वोपरि चीज़ है, और इसमें सब प्रकार की मानव-विचारधाराओं और मानव-कल्पनाओं पर गंभीरता से संदेह करना शामिल है, भले ही उन विचारधाराओं और कल्पनाओं के उपयोग से कितनी ही उपलब्धियाँ, धन-संपत्ति या लोकप्रियता हासिल हुई हो।

धन और सफलता की उपलब्धी कुछ लोगों को इस सोच की ओर ले जाती है कि वे महान या अजेय हैं, जबकि सच तो यह है कि जिस परमेश्वर ने उन्हें बनाया है उसी ने उनके गरीब पड़ोसियों को भी बनाया है (नीतिवचन 18:11; 10:15)। उन्हें भी अपने कपड़े वैसे ही पहनने पड़ते हैं, जैसा कि उनका निर्धन पडोसी, और दोनों ही अक्सर लगभग एक ही उम्र में मर जाते हैं (नीतिवचन 22:2)।

इस नीतिवचन का धनवान मनुष्य मूर्ख है – वह जब धन का गलत मूल्य लगा रहा है, तो सोचता है कि वह बुद्धिमान है। वह बुद्धि-ज्ञान की सिख या चेतावनियाँ नहीं सुन पाता, इसलिए क्योंकि वह सफलता से फूले हुए अहंकार के कारण बहरा हो गया है (नीतिवचन 26:16)। यह सोच उसे मूर्ख से भी बदतर बना देती है (नीतिवचन 26:12)। अपने अहंकार में आकर वह यह मान लेता है कि वह अपनी सकारात्मक उपलब्धियों के कारण धर्मी है और यह मानकर बैठ जाता है कि उसने वित्तीय अजेयता हासिल कर ली है।

इस नीतिवचन का गरीब मनुष्य एक बुद्धिमान व्यक्ति है – वह समझवाला व्यक्ति है। वह धनवान मूर्ख को देख कर ही उसके जीवन की व्यर्थता को आसानी से पहचान सकता है। वह धनवान मनुष्य का धन, उसकी सफलता या समाज़ में दिखावटी शोहरत को देखकर धोखा नहीं खाता और न विचलित होता है। वह अपने कामों का साफ़ साफ विश्लेषण करने और अपनी कमियों और पापों की पहचान करने में सक्षम है (नीतिवचन 18:17)। विवेक और बुद्धि पर आर्थिक स्थिति का कोई असर नहीं पड़ता।

धनवान लोगों के साथ आम तौर पर सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाता है, जो उन्हें अपने बारे में बहुत ऊँची सोच रखने की ओर ले जाता है (नीतिवचन 14:20; 19:4)। धनवान लोगों के पास कई व्यावसायिक या वित्तीय उपलब्धियां होती हैं, इसलिए वे अहंकारपूर्वक निष्कर्ष निकालते हैं कि वे विजेता हैं (नीतिवचन 18:11)। लेकिन गरीब मनुष्य, जिसपर ऐसी अंधकारी बातों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, धनवान मनुष्य के जीवन की खामियों और अपराधों को समझने में सक्षम होता है।

उपलब्धियां धोखा देनेवाली हो हैं। मूसा ने चट्टान पर प्रहार करके पानी निकाला, जबकि परमेश्वर ने उससे कहा था कि उसे चट्टान को केवल आज्ञा देनी है (गिनती 20:7-13)। आप ऐसे बच्चों से मिलेंगे जो काफी सभ्य लगते हैं और जिन्होंने अपने पिता-माता से कभी मार नहीं खाई, लेकिन उनके माता-पिता मूर्ख हैं (नीतिवचन 19:18; 22:15; 23:13-14; 29:15)। कई लोग तो कर्ज़ लेकर शुरू किएँ गएँ उद्द्योगों पर धनवान भी हो जाते हैं और कर्ज़ चुकाना टालने के लिए दिवालियापन का दिखावा कर अपने राजनीतिक पहुँच का अपने स्वार्थ के लिए उपयोग करते हैं, लेकिन वे गलत हैं (नीतिवचन 13:23; 20:21; 22:7)।

उपलब्धियां धोखा देनेवाली हो हैं। इसलिए उन पर अच्छे से विचार करें। जो सफलताएँ प्रतीत होती हैं वह यह भी हो सकती हैं कि परमेश्वर केवल आपका उपयोग कर रहा है (10:5-15), क्योंकि मूर्खों की समृद्धि उनके लिए अभिशाप है (नीतिवचन 1:32), अविश्वसनीय रूप से अस्थायी है (भजन 36:1-2; 50:21), बस आपका किसी विषय पर सीमित दृष्टिकोण है (युहन्ना 19:15-16), मनमानी सोच है, खोखली योजना का प्रारंभिक “मुनाफा” है! सावधान!

लाभ भक्ति नहीं है (1 तीमु 6:3-5)। संतोष सहित भक्ति बड़ा लाभ है (1 तीमु 6:6)। यह गहन ज्ञान जीवन के लिए एक आवश्यक और मूल्यवान नियम है। एक गरीब व्यक्ति जो संतुष्ट है, उसे धन के बिना ही एक धनवान व्यक्ति की तुलना में आसानी से अधिक खुशी और शांति मिल सकती है। ख्रिश्चन समाज को सबसे अधिक संतुष्ट रहना चाहिए, क्योंकि उनके पास स्वयं परमेश्वर ही उनके भाग के रूप में हैं (इब्रानियों 13:5-6; भजन 73:25-26)।

ध्यान रहें, धन आपके सोचने-समझने के विवेक को अंधा या विकृत न करने पाएं। बाहर से दिखाई देनेवाली समृद्धि के कारण दुष्टों से ईर्ष्या, या जलन न रखें (भजन 37:1-3; 73:1-24)। सच्चा बुद्धिमान व्यक्ति मुँह देखा न्याय नहीं करता और न अनाप-शनाप निष्कर्ष निकालता है (यूहन्ना 7:24)। ध्यान रहें, किसी भी क्षेत्र में बाहर से दिखाई देनेवाली सफलता आपको कभी भी “परमेश्वर यों कहता है” से विचलित न करने पाए, क्योंकि परमेश्वर का कहा वचन ही सच्ची बुद्धिमत्ता और ज्ञान है। धनवान शीघ्र ही कब्र में उतारे जायेंगे; मृत्यु उन पर भोज का आनन्द लेगी; वे अपने धन से किसी को मृत्यु से नहीं छुड़ा सकते (भजन 49:6-14)।

परमेश्वर ने अमीरों की तुलना में पृथ्वी के सबसे गरीबों को अनन्त जीवन पाने के लिए चुना (मत्ती 19:23-26; 1 कुरिन्थ 1:26-29; याकूब 2:5)। गरीब विश्वासियों को इस अद्भुत समाचार पर आनन्दित होना चाहिए (याकूब 1:9)। मृत्यु के क्षण में, धनवान मूर्ख हमेशा के लिए सबसे अंधकारमय गरीबी और कल्पना से परे सबसे भयानक पीड़ा भुगतने के लिए नरक में चला जाएगा, लेकिन यीशु मसीह पर विश्वास रखनेवाला गरीब व्यक्ति अनंतकाल के लिए अकथनीय धन और सुख पाने स्वर्ग चला जाएगा। क्या आपने यीशु मसीह को अपने जीवन का भाग बना लिया है?

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