नीतिवचन 27:5
खुली हुई डाँट गुप्त प्रेम से उत्तम है।
आप अपने मित्रों से कैसा प्रेम करते हैं? क्या वे आपसे सच्चा प्रेम करते हैं? यहाँ एक छोटा और समझने में लगभग कठिन नीतिवचन है, लेकिन यह एक ऐसा नीतिवचन है जिसे आपको दोनों दिशाओं से सीखना और उसका व्यवहारिक उपयोग करना ज़रूरी। क्या आप एक सच्चे, प्रिय मित्र हैं? क्या आपके प्रेम करने वाले मित्र हैं, और जिस प्रेम के साथ वे आप पर प्रेम करते हैं क्या आप उसका मूल्य समझते हैं?
मित्र दो प्रकार के होते हैं, और दोनों की पहचान डाँट और प्रेम तथा नीतिवचन 27:6 के द्वारा प्रकट की जाती है। एक मित्र दूसरे मित्र से उत्तम है, इसलिए अवश्य है कि आप जो उत्तम मित्र है उससे सीखे और प्रेम करें, और जो बुरा मित्र है उसे छोड़ दे और उसकी सम्मति को खारिज करें। सुलैमान ने परमेश्वर की प्रेरणा से हमें बताया कि सच्ची मित्रता और प्रेम की परिभाषा क्या है।
खुली हुई डाँट क्या है? यह किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से और सीधे तौर पर उसकी गलती बताना है, चाहे वह ग़लती आपके खिलाफ हो, दूसरों के खिलाफ हो, या स्वयं परमेश्वर के खिलाफ। यह खुली हुई होती है, क्योंकि आप यह दिखावा करने के बजाय कि सब कुछ ठीक है, आप अपने मित्र का सामना करते है और उसके मुंह पर उसे फटकारते हैं; और यह डाँट है, क्योंकि आप झूठी तारीफ करके चापलूसी करने के बजाय उसकी गलती को सुधारते हैं। खुली हुई डांट का मतलब दूसरों को बताना नहीं है, क्योंकि अनावश्यक रूप से दूसरों को बताना गलत है (नीतिवचन 25:9; 11:13)।
यीशु मसीह ने इस नियम की शिक्षा दीं (मत्ती 18:15); याकूब ने यही सिखाया (याकूब 5:19-20); पौलुस ने यही सिखाया (गला 6:1-3); और पौलुस ने पतरस के साथ ऐसा किया, जिसकी गलती सार्वजनिक थी (गला 2:11-14)। सच्चे मित्रों, अर्थात ऐसे मित्र जिन्हें परमेश्वर के पुत्र और उसके प्रेरितों ने सराहा, उन्होंने इस नीतिवचन का पालन किया।
मित्र को उसके पाप के लिए डांटना सच्चा प्रेम है, और मूसा ने बहुत पहले ही यह सिखाया (लैव्य 19:17)। मित्र को न सुधारना वास्तव में उससे नफ़रत करना है। प्रेम पाप में पड़े लोगों को सह नहीं सकता (1 कुरिन्थ 13: 6), क्योंकि उन्हें पवित्र जीवन जीने में मदद करना प्रेम और मित्रता की सर्वोच्च कसौटी है (1 शमु 23:16)।
गुप्त प्रेम क्या है? इसमें दूसरे की गलतियों को सुधारने का साहस दिखाने या प्रतिबद्ध रहने के बजाए उनके लिए स्नेह, मित्रता और सेवाभाव दिखाया जाता है। यह गुप्त है, क्योंकि यह प्रेम के वास्तविक चरित्र-गुण – सुधार – से रहित होता है; इसे व्यंग्यात्मक रूप से प्रेम कहा जाता है, क्योंकि इस तरह के रिश्ते में केवल बाहरी चापलूसी और सतही सज्जनता मौजूद होती है। बल्कि ऐसा प्रेम वास्तव में नफ़रत है (लैव्य 19:17)।
उससे जुड़ा अगला नीतिवचन इसे समझने में मदद करता है (नीतिवचन 27:6)। जो मित्र आपको सुधारकर घाव देता है, वह विश्वासयोग्य है; जो मित्र सुधार करने के बजाए चुंबन लेता है वह शत्रु है। चुम्बन तो कपटपूर्ण होते हैं, क्योंकि उन में कोई ठोस प्रमाण नहीं होता है; घाव सच्चा है, क्योंकि यह सच्ची मित्रता का ठोस प्रमाण है। बड़े प्रेम और घनिष्ठ मित्रता का नतीजा सांसारिक चापलूसी नहीं, अपितु डाँट होगा (नीतिवचन 28:23; 27:9)।
प्रिय पाठक, क्या आप ऐसा प्रेम करते हैं? यदि हाँ, तो आप बेलगाम लोगों को चेतावनी देंगे (1 थिस 5:14), अपने बच्चों को डाँटेंगे और ताड़ना देंगे (नीतिवचन 13:24; 29:15), दूसरों को धार्मिकता के लिए प्रोत्साहित करेंगे (इब्रा 3:12-13; 10:23-25), और उनकी उन्नति के लिये अपना नहीं बल्कि औरों के आनन्द की अधिक परवाह करेंगे (रोमियों 15:1-2)।
क्या आप इस नीतिवचन की खुली डांट को बिना क्रुद्ध हुए ग्रहण करते हैं? दाऊद ने कहा कि वह एक धर्मीजन की डाँट और मार को सच्चे प्रेम का कार्य समझेगा (भजन 141:5)। आप पापी मनुष्य होने के कारण, आपको ऐसे मित्रों की ज़रूरत है, जो आपकी चापलूसी करने के बजाय आपका सामना करेंगे। उनकी कद्र करें!
यीशु ने विश्वासयोग्यता से अपने प्रिय मित्रों को डाँटा (मत्ती 16:23; लूका 9:55; यूहन्ना 21:17), और उन्होंने अपना शेष जीवन उन पर उसके प्रेम और विश्वासयोग्य सेवा से उन्नति पाने में बिताया। अब तक का लिखा गया सबसे महान प्रेम पत्र बाइबल है, और जब जब आप इसे धर्मी विनम्रता और मन की खराई से पढ़ेंगे तब तब आप इसमें अपने लिए डांट पाएंगे। परमेश्वर के प्रेम को जानने के लिए इसे आज ही से पढना शुरू करें।
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