नीतिवचन 27:17
जैसे लोहा लोहे को चमका देता है, वैसे ही मनुष्य का मुख अपने मित्र की संगति से चमकदार हो जाता है।
आपके लिए अच्छे मित्र ज़रूरी हैं, और आपको भी एक अच्छा मित्र बनना ज़रूरी है। जैसे लोहा लोहे को चमका सकता है, वैसे ही एक अच्छा मित्र मित्र को चमका सकता है। जैसे लोहे का रंदा चाकू की धार को तेज़ बना सकता है, ठीक वैसे ही एक अच्छा दोस्त अपने दोस्त को सुधार सकता है। क्या आप एक अच्छे मित्र हैं? क्या आपके अच्छे मित्र हैं?
चाकू की धार को कपड़े, रोटी, लकड़ी, प्लास्टिक और यहाँ तक कि सोने से भी तेज नहीं किया जा सकता। उल्टा चाकू ही इन सब चीज़ों को अधिक उपयोगी बनाने के लिए काट सकता है और उन्हें आकार दे सकता है, लेकिन ये चीज़ें चाकू की धार को सिर्फ़ थोथा करेंगी। चाकू को तेज़ या पैना करने के लिए लोहे या लोहे जैसी ही किसी दूसरी वस्तु की आवश्यकता होती है जो कम से कम चाकू जितनी ही सख्त हो। एक बार तेज करने के बाद, चाकू ऐसी चीजों पर तुरंत और बड़ी आसानी से काम करता है (सभोपदेशक 10:10)।
यह नीतिवचन अच्छे दोस्तों के बारे में है – वे आपको चमकदार बनाएंगे (नीतिवचन 27:9)। एक अच्छा दोस्त आपको उज्जवल, तेज़ और अधिक उपयोगी बना देगा। लेकिन ऐसा हर कोई मित्र नहीं कर सकता। केवल बुद्धिमान मित्र ही आपको बुद्धिमान बनाते हैं (नीतिवचन 13:20), इसलिए अच्छे लोग दूसरे अच्छे लोगों से प्रेम करते हैं (तीतुस 1:8)। मूर्ख मित्र आपके जीवन को नीरस और भ्रष्ट कर देंगे (नीतिवचन 13:20; 1 कुरिन्थ 15:33)। यदि आपके पिता का कोई नेक और बुद्धिमान मित्र था या है, तो बुद्धिमानी इसी में है कि आप भी उसे अपना मित्र बना लें (नीतिवचन 27:10)।
एक से भले दो। सुलैमान ने दार्शनिकता की अपनी महान पुस्तक में यह सिखाया, क्योंकि ऐसे बुद्धिमान मित्र कम से कम चार तरीकों से एक-दूसरे को तेज और चमकदार बनाते हैं (सभोपदेशक 4:9-12)। वे परिश्रम की सफलताओं को एक साथ साझा कर सकते हैं, गिरने पर एक-दूसरे को उठा सकते हैं, बड़ी उपलब्धियों के लिए पूरक क्षमताओं को जोड़ सकते हैं और आपसी दुश्मनों से बचाव कर सकते हैं। एक अच्छा दोस्त एक महान आशीष है। एकान्त जीवन मूर्खतापूर्ण है और इन महान लाभों से वंचित रखता है।
यहां प्रयुक्त संज्ञा मुख का अर्थ किसी व्यक्ति का चेहरा और रूप हो सकता है (नीतिवचन 25:23; 1 शमू 16:7,12; दानि 1:13-15; मत्ती 6:16); इसका मतलब किसी अन्य व्यक्ति के प्रति भावना की अभिव्यक्ति हो सकता है (नीतिवचन 16:15; उत्पत्ति 31:2; भजन 4:6; 44:3; प्रेरितों 2:28); और इसका अर्थ किसी व्यक्ति का स्वभाव, आचरण, व्यवहार या चाल-चलन भी हो सकता है (नीतिवचन 15:13; व्यवस्था 28:50; भजन 10:4; सभो 7:3; दानि 5:6,9)। मनुष्य का स्वभाव, आचरण, व्यवहार और चाल-चलन क्या है? यह उसका चरित्र है।
यह नीतिवचन मनुष्य के चरित्र से संबंधित है – जो सच में एक बहुत ही अनमोल गुण है। चरित्र किसी भी पुरुष या महिला का अब तक का सबसे महत्वपूर्ण माप है। इस नीतिवचन में प्रयुक्त शब्द ‘मुख’ को किसी व्यक्ति के चेहरे के भावों को सुधारने तक ही सीमित करना सुलैमान की बुद्धि का उपहास करना होगा। रंदा चाकू को केवल धारदार ही नहीं बनाता; यह चाकू को उसकी उपयोगिता में भी चमकदार बनाता है। शब्द ‘मुख’ को केवल चेहरे के हावभाव को निखारने तक ही सीमित करने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि दोस्त पहले से ही एक-दूसरे की तारीफ़ करते हैं।
अकेले रहनेवाले ज़िन्दगी में कुछ ख़ास नहीं कर पाते हैं, क्योंकि वे आगे बढ़ नहीं सकते (एक चाकू खुद को तेज नहीं कर सकता)। वे अज्ञानता, ख़राब आदतों और उदास आत्माओं से सुस्त और कठोर हो जाते हैं। अकेले रहनेवाले लोग हमेशा किसी भी समूह के सबसे कमजोर सदस्य होते हैं, क्योंकि अच्छे दोस्तों की कमी के कारण, जो उन्हें चमका सकते हैं, उनमें जंग लग जाता है और वे सड़ने लगते हैं। इस नीतिवचन की बुद्धि को नकारा नहीं जा सकता।
अकेले रहनेवाले लोग अपना जीवन बर्बाद करते हैं। उनका जीवन व्यर्थ है। वे कभी किसी को पैना नहीं करते। उनके अंतिम संस्कार में जो कुछ लोग शामिल होते हैं वे केवल कर्तव्य के कारण ही वहाँ आते हैं; उन्हें किसी को वास्तविक रूप से खो देने का कोई ख़ास अहसास नहीं होता, क्योंकि ताबूत में पड़ा अकेला व्यक्ति जब जीवित था तो उसने कभी भी उनके जीवन को चमकदार बनाने के लिए कुछ नहीं किया होता है। ऐसा जीवन व्यर्थ जीवन है, और यह दूसरों से प्रेम करने की परमेश्वर की आज्ञा का सीधा उल्लंघन है (मरकुस 12:31; गला 5:13-14)।
अगर कुंवारे लोग अच्छे लोगों के साथ अधिक समय बिताएं, तो उन्हें उपयोगी इंसान बनाया जा सकता है, लेकिन आत्म-भोग की आलसी आदतों को तोड़ना मुश्किल है। स्वार्थ, आलस्य और अभिमान मनुष्य को अच्छे मित्र ढूँढ़ने से रोकते हैं: वह अपने आप में जंग खा कर खुश रहता है। मूर्खता, अज्ञानता और बुरी आदतें मनुष्य को मित्र बनाए रखने से रोकती हैं: क्योंकि वह खुद ही उन्हें दूर जाने के लिए मजबूर करता है (नीतिवचन 18:24)।
जो खिलाड़ी सफल होते हैं उनके लिए अवश्य होता हैं कि वे अपने प्रशिक्षण के दौरान अपने से अधिक ताकतवर खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करें और उनसे प्रशिक्षण लें, अन्यथा उनके कौशल का कभी परीक्षण नहीं किया जाता, और वे कभी भी सर्वोत्तम पैंतरें नहीं सीख पाते हैं, न ही उनकी अधिकतम शक्ति को आजमाया जाता है, और आप ऐसे में वे खुद को ताकतवर समझकर सिर्फ़ खुद को धोखा देते हैं। अकेला रहना और सीमित मित्रों का होना कंप्यूटर पर टेनिस खेलकर विंबलडन की तैयारी करने जैसा है। इस तरह के विकल्प का परिणाम विफलता की गारंटी है।
परमेश्वर ने अदन में कहा की कि मानव जाति सामाजिक है (उत्पत्ति 2:18)। एक पत्नी और बच्चे मूल्यवान समाज की स्थापना करते हैं, लेकिन वे पर्याप्त नहीं हैं। पत्नियाँ शायद ही कभी किसी आदमी को दूसरे अच्छे आदमी के जैसा पैना कर पाती हैं, क्योंकि वह एक कमजोर धातु से लोहे को तेज करने की कोशिश करती है (1 पतरस 3:7)। किन्तु, स्त्रियों को पुरुषों द्वारा तेज की जा सकता है और बदले में वे एक-दूसरे को भी तेज कर सकती हैं, लेकिन शायद ही कभी वे समान या चमकदार धातुओं को टक्कर दे सकती हैं जिसके परिणामस्वरूप एक पुरुष पर एक उज्ज्वल, चमकदार, तेज धार होती है। आप समझ गएँ?
दाऊद ने योनातान के प्रेम को स्त्रियों के प्रेम से भी बढ़कर समझा, हालाँकि उस समय उसकी शादी बहुत बुद्धिमान अबीगैल से हुई थी (1 शमू 25:3; 2 शमू 1:26)। योनातान ने दाऊद से आध्यात्मिक प्रेरणा और वफादारी और सेवा की वाचा वाचा बाँधकर प्रभु में अपना हाथ मज़बूत करके दाऊद को चमकाया जो कि एक औरत कभी नहीं कर सकती थी और न ही करेगी (1 शमू 23:16)। इन दो महान मित्रों ने मिलकर, एक-दूसरे को चमकाया, और दोनों ने परमेश्वर की महिमा के लिए एक शक्तिशाली साझेदारी बनाई।
अय्यूब अपने मित्रों के बीच ऐसा ही एक व्यक्ति था जो उन्हें चमकदार बना सकता था (अय्यूब 4:3-4)। रोम के भाइयों ने महान प्रेरित पौलुस को भी चमकदार बनाया था (प्रेरितों 28:15), क्योंकि विश्वास करने वाले भाइयों में पारस्परिक शांति होती है (रोमियों 1:12; 15:24)। पौलुस इसी खूबी के कारण तीमुथियुस से प्रेम रखता था (2 तीमुथियुस 1:3-5), और वह फिलिप्पीयुस के विश्वासियों की संगति के लिए हमेशा आभारी था (फिलि 1:3-5)। और हमारे प्रभु ने भी चेलों को दो-दो के दल में भेजा (लूका 10:1; प्रेरितों 13:2)।
यीशु मसीह की जीभ विद्वानों की जीभ थी, और वह जानता था कि किस समय कैसे उत्तर देना है और किन्हें देना है (यशायाह 50:4)। वह बहुतों को चमकदार करता था और किया भी। जब वह थोड़े ही समय के लिए अपने दो चलों के साथ चला, तो दोनों के मन में उत्तेजना उत्पन्न हुई (लूका 24:32)। उस गौरवशाली कार्य को देखें जिसमें उसने तरसुस के शाऊल को प्रेरित पौलुस बनाने के लिए चमकाया (गला 1:11-24)।
इसी लिए, यीशु मसीह ने पवित्र लोगों की कलीसिया बनाई, जहां वे अपने पारस्परिक लाभ के लिए एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं, एक-दूसरे की सहायता कर सकते हैं, एक-दूसरे को प्रोत्साहित कर सकते हैं, एक-दूसरे को चेतावनी दे सकते हैं और एक-दूसरे को फटकार भी लगा सकते हैं (1 थिस्स 5:14; इब्रानियों 3:12-13; 10:23-25) । चर्च के सदस्यों को एक-दूसरे का बोझ उठाना है और एक-दूसरे को गलतियाँ करने से बचाना है (गला 6:1-2; याकूब 5:19-20), जो कि चर्च का एक दूसरे को चमकदार बनाने का उद्देश्य होना है। यही कारण है कि पौलुस ने उन्हें चेतावनी दी जिन्होनें एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना छोड़ दिया था (इब्रानियों 10:23-25)।
प्रारम्भिक कलीसिया, पवित्र आत्मा के शक्तिशाली प्रभाव के तहत, अपनी संगति और विश्वासियों के समाज के प्रति बहुत उत्साही थी (प्रेरितों 2:42-47)। सदस्यों के घनिष्ठ संबंधों को देखें और स्वयं इस लक्ष्य के लिए अधिक प्रयास करने के लिए दृढ़ रहें। क्या आपकी कलीसिया एक दूसरे को सिद्ध बनाने में इसी कलीसिया की राह पर चलती है? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? यदि नहीं तो एक मसीही होने के नाते आप खुद इस विषय में क्या करेंगे?
यहां दो प्रत्यक्ष और महत्वपूर्ण सबक हैं। आपको अपनी आत्मिक उन्नति करने के लिए कुलीन और धर्मनिष्ठ मित्रों की आवश्यकता है, और आपको दूसरों के लिए भी ऐसा ही मित्र बनना ज़रूरी है ताकि आप उनकी आत्मिक उन्नति कर सकें। इस बात की चिंता करने के बजाय कि दूसरे आपके लिए और अधिक क्यों नहीं करते हैं, या वे आपके प्रति जो करते हैं वह क्यों करते हैं, इसके बजाय दूसरों के जीवन में चमकदार प्रभाव डालने का फैसला लें, और जो वे आपके साथ करते हैं उसके पीछे छिपे उनके नेक इरादों और वांछित प्रभाव की खोज करें।
यदि यह नीतिवचन सच है, तो इसमें जो जो सबक हैं उन्हें आपको नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। यदि अच्छे दोस्त किसी व्यक्ति के चरित्र को सुधारते हैं, तो एक बुद्धिमान पति अपनी पत्नी को एक चमकदार पत्नी बनने के लिए उसकी धर्मी सहेलियों के साथ समय बिताने में मदद करेगा। यह पत्नी का पोषण करना है (इफि 5:28-29)। एक बुद्धिमान पत्नी भी ऐसा ही करेगी, यह जानते हुए कि उसके पति के लिए अच्छे लोगों के साथ रहना उसे ही चमकदार बनाएगा। और माता-पिता भी अपने बच्चों को अन्य बुद्धिमान और कुलीन बच्चों के साथ मित्रता करने के लिए प्रेरित करेंगे।
रंदा चाकू को पैना या तेज़ बनाने के लिए चाकू के ब्लेड को चिंगारियां निकलने तक घसता है, इसी प्रकार सच्चे मित्र आपको कभी-कभी सुधारेंगे, निर्देश देंगे, डांटेंगे या चेतावनी देंगे, जो कि चिंगारियां निकलने जैसा काम है। क्या आप उनकी आलोचनाओं को चमकदार मानने को तैयार हैं? दाऊद ने कहा कि जब धर्मी लोग उसे मारते हैं तो वह उसे कृपा मानता है (भजन 141:5), जैसा कि सुंदर और बुद्धिमान अबीगैल ने किया था जब वह बहुत क्रोधित हुआ था (1 शमू 25:21-35)। सुलैमान ने मित्र के घावों को शत्रु के चुंबन से बेहतर माना (नीतिवचन 27:6,9)।
क्या आप दूसरों के जीवन को चमकदार बनाने में अपनी भूमिका को लगन से निभाते हैं (नीतिवचन 10:21; 11:30)? क्या आप उन्हें अधिक उपयोगी और उत्पादक बनाने के लिए उनपर अपना तीव्र प्रभाव डाल रहे हैं? क्या आप खुद भी अपनी पूर्णता के लिए अन्य अच्छे लोगों के साथ संबंधों को महत्व देते हैं और उन्हें बढ़ावा देते हैं, भले ही कभी-कभी उनके सुधार और उपदेश आपको चोट पहुँचानेवाले या चुभनेवाले हों? पृथ्वी के धर्मी और बुद्धिमान लोग अपनी पारस्परिक पूर्णता के लिए सहायक साथी बनें (भजन 16:3; 101:6; 119:63,79)।
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