नीतिवचन 27:11
हे मेरे पुत्र, बुद्धिमान होकर मेरा मन आनन्दित कर, तब मैं अपने निन्दा करनेवाले को उत्तर दे सकूँगा।
बच्चे अपने पिता को दो तरीकों से आहत कर सकते हैं! या वे उसे दो तरीकों से उसका सीना चौड़ा कर सकते हैं, और खुद पर गर्व महसूस करा सकते हैं! एक बच्चे का सद्चरित्र और अच्छा आचरण बाप का मन आनन्दित कर देता है, और इससे दूसरों के सामने उसका मान-सम्मान बढ़ता है। जैसा कि सुलैमान ने समझाया, बच्चे बुद्धिमान होकर अपने पिता का मन आसानी से आनन्दित कर सकते हैं और समाज में उसका सम्मान बढ़ा सकते हैं।
जब कोई पुरुष सत्य, बुद्धि-ज्ञान और धार्मिकता के लिए दृढ़ रुख अपनाता है, तो उसके बच्चे या तो उसका सम्मान बढाएँगे या उसे आहत करेंगे। वे उसकी उम्मीदों को कुचलकर, उसके प्राण को घायल कर सकते हैं (नीति 17:21,25; 19:13; 1 शमू 2:27-36)। वे उसके शत्रुओं को उसकी आलोचना या निंदा करने का अवसर देकर, उसकी प्रतिष्ठा पर दाग लगा सकते हैं (1 शमू 2:12-17,22-25; 8:3-5)।
दूसरी ओर, यदि उसके बच्चे सत्य, ज्ञान और धार्मिकता का जीवन जीते हैं जिसका आदर्श उनके पिता ने अपने जीवन और शिक्षा से उनके सामने रख दिया है, तो वे उसके मन आनन्दित कर सकते हैं और उसे अपने विरोधियों को चुप कराने के लिए शक्तिशाली आत्म-विश्वास दे सकते हैं। हर बाप अपने जीवन में कई बार यह देखने के लिए इंतजार करता है और सोचता है कि उसके बच्चे उसकी विरासत के साथ क्या करेंगे – इसे नष्ट कर देंगे, या इसे ऊंचा उठाएंगे।
बच्चे परमेश्वर की ओर से पुरुष के लिए अद्भुत आशीर्वाद हैं (नीति 5:15-18; भजन 127:3; 128:3-4)। वे इस अर्थ से वीर के हाथ में तीर के समान हैं कि वे अपने पिता की सहायता कर सकते हैं और दुनिया में उसका दबदबा बढ़ाकर उसके चरित्र और बुद्धि-ज्ञान की शक्ति को साबित कर सकते हैं (भजन 127:4)। जब एक पुरुष के कई पुत्र होते हैं – एक बड़ा परिवार – तो उसे किस भी परिस्थिति का सामना करने की हिम्मत मिलती है (भजन 128:5)।
लेकिन यह तभी काम में आता है जब बच्चे बुद्धिमान और नेक हों। लेकिन अगर वे मूर्ख और दुष्ट हैं, तो वे अपने पिता को कोई लाभ नहीं पहुँचाते। बल्कि वे वास्तव में उसे और उसके हर मकसद को नुकसान पहुंचाते हैं। वे उसके चरित्र और प्रतिष्ठा पर कलंक हैं, क्योंकि उसके शत्रु उसकी दुष्ट संतान के कारण उसे बदनाम कर सकते हैं। केवल कुलीन और विवेकशील पोते-पोतियाँ ही बूढ़ों के लिए मुकुट हैं (नीति 17:6)।
पिता की प्रतिष्ठा के लिए आज्ञाकारी बच्चों का यह मामला इतना महत्वपूर्ण है कि परमेश्वर ने उनसे जो उसकी कलीसिया के दो मुख्य पदों- पास्टर और डीकन – पर नियुक्त होना चाहते हैं, मांग कीं कि उनके बच्चे विश्वासी और आज्ञाकारी हों (1 तीमु 3:4-5,12; तीतुस 1:6)। मनुष्य जिसके घर में बेलगाम बच्चे हैं जिन्हें वह अपने वश में नहीं रख सकता, यह दर्शाता है कि वह यीशु मसीह के चर्च की देखभाल करने में सक्षम नहीं होगा।
सुलैमान दाऊद का सद्गुणी पुत्र था। सोर का राजा हीराम, जो दाऊद से हमेशा बहुत प्रेम रखता था, जब उसकी पहचान सुलैमान से हुई, तो उसने आनन्दित होकर दाऊद की ओर से परमेश्वर को धन्यवाद दिया (1 राजा 5:1-7)। और यह घटना दाऊद की मृत्यु के बाद की है! हालाँकि दाऊद को उसके शत्रुओं ने उसके अन्य पुत्रों के कारण बड़ी आसानी से दोषी ठहराया होगा, लेकिन उन्हें सुलैमान का भय मानना पड़ा।
परन्तु एली के पुत्रों ने उसका दिल तोड़ दिया, अपने उपर परमेश्वर का कठोर दण्ड ले आयें, और इस्राएल को उसके परिवार और परमेश्वर की आराधना से घृणा करने पर मजबूर कर दिया (1 शमू 2:12-17,22-25)! शमूएल, जिसे इस भयानक विपत्ति से सीखना चाहिए था, उसके भी पुत्र दुष्ट थे जिन्होंने इस्राएल पर उसके शासन का अन्त कर दिया (1 शमू 8:3-5)। शिमोन और लेवी ने कनानियों के बीच अपने पिता याकूब की प्रतिष्ठा को खराब कर दिया (उत्पत्ति 34:30)। मूर्ख बेटे अपने बाप का दिल तोड़ सकते हैं और उसकी इज्ज़त और शोहरत को मिट्टी में मिला सकते हैं।
यदि बच्चे एक बाप के मन को आनन्दित कर सकते हैं और उसे महान बना सकते हैं, यहाँ तक कि उसके शत्रुओं के सामने भी, तो उन्हें धर्म के मार्ग की शिक्षा देना अत्यंत महत्वपूर्ण होना चाहिए। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि अब्राहम ने इसे गंभीरता से लिया (उत्पत्ति 18:19)। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि यहोशू ने इसे गंभीरता से लिया (यहोशू 24:15)। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि बाइबल में यह कई स्थानों पर दिया गया एक आदेश है (नीति 22:6; व्यवस्था 4:9-10; 6:4-7; 11:18-19; भजन 78:1-8; योएल 1:1-3; इफि 6 :4)!
इसलिए पिताओं, इस कर्तव्य की उपेक्षा न करें। यदि आप इस मामले में आलसी और लापरवाह हैं, तो आप न केवल अपने बच्चों की ज़िन्दगी बर्बाद करेंगे, बल्कि आप अपने जीवन में भविष्य में बहुत दर्द, अपनी पत्नी के जीवन में बहुत दुःख लाएंगे, और अपने ही हाथों अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक प्रतिष्ठा को बर्बाद कर देंगे (नीति 17:21,25; 19:18; 22:15; 23:13-14; 29:15,17)! अपने तीरों को तेज़ करने के लिए आज आप क्या कर सकते हैं और आपको क्या करना चाहिए?
बच्चों! क्या तुम अपने माता-पिता का सम्मान करना अपना कर्तव्य समझते हो? परमेश्वर ने इसकी आज्ञा दी है, लेकिन तुम बुद्धिमान और धर्मी बनकर भी उनके मनों को आनन्दित कर सकते हो, और अपने सद्गुणी, धर्मपरायण और सदाचारी चरित्र और आचरण से उनके आलोचकों को चुप करा सकते हो। इस अवसर की उपेक्षा मत करो, क्योंकि अगर तुम उपेक्षा करोगे तो यही चीजें तुम पर दण्ड के रूप में वापस आएँगी (नीति 1:31; गला 6:7)।
अगर तुम सुसमाचार के प्रचारक को कोई सबसे बड़ी प्रशंसा और सबसे कीमती उपहार दे सकते हो, तो वह है बाइबल से उसकी शिक्षा को मानकर धार्मिक जीवन जीना। जब वह देखता है कि तुम अपने जीवन में आत्मा के फल ला रहें हो, उसके मन को धन्यता और आनन्द की प्राप्ति होती है, और जब पूरी कलीसिया आत्मा का फल उत्पन्न करती है तो जो लोग उसके खरे उपदेश का विरोध करते हैं या उसके व्यक्तित्व पर हमला करते हैं उनके मुँह बंद हो जाते हैं और पास्टर के प्रतिष्ठा की रक्षा होती है।
प्रभु यीशु मसीह, जो अपने पिता का आदर्श पुत्र था, उसने हमेशा के लिए परमेश्वर के शत्रुओं की भर्त्सना का मुंहतोड़ जवाब दे दिया है। स्त्री से जन्मा यह इस पुत्र हमेशा अपने माता-पिता की आज्ञा मानता था और जब वह क्रूस की मृत्यु तक आज्ञाकारी रहा तो अपने शत्रु अर्थात् शैतान के सिर को कुचलकर उसका खुल्लम-खुल्ला तमाशा बनाया और विजयी होकर जी उठा (रोम 8:32-34; कुलु 2:13-15; प्रकाशितवाक्य 12:7-11)। पिता ने घोषणा की कि वह उससे अति प्रसन्न था और उसे सब से ऊँचें स्थान पर बिठाया (इफि 1:20-23; फिलि 2:9-11)।
पाठक! यदि आप जीवित परमेश्वर के पुत्र होने का दावा करते हैं, तो उसके साथ आपका आचरण कैसा रहा है, और आप इस दुनिया में उसकी महिमा की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए क्या कर रहें हैं? क्या आप अपने बुद्धिमान और सद्गुणी जीवन से उसके मन को आनन्दित कर रहे हैं? क्या आप पूरी भक्ति से उसकी धर्म शिक्षाओं पर चलकर अपने सदाचारी आचरण और वाणी से सुसमाचार के दुश्मनों को चुप करा रहे हैं? यह आपका एक गौरवशाली विशेषाधिकार और महत्वपूर्ण कर्तव्य है। इसे आज से ही आत्मसात करके उसपर प्रसन्नतापूर्वक चलना आरम्भ करों!
नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।