नीतिवचन 27:1

कल की बड़ाई आज मत कर; क्योंकि तू नहीं जानता कि दिनभर में क्या होगा। (केजेवी)

आज का दिन ही आपका प्रकट भविष्य है। इस ज्ञात भविष्य पर ध्यान दो। कल शायद आप जीवित न रहे, और आप नहीं जानते कि कल क्या होगा। परमेश्वर ने आपको आज कहलानेवाला दिन दिया है; और आपको बड़ी बुद्धिमत्ता से उसका उपयोग करना चाहिए। आपका भविष्य परमेश्वर के हाथों में है, इसलिए अपनी योजनाओं में दीनता और सदाचार रखे।

कल शायद आपके लिए भारी वर्षा लेकर आए, आप अपनी नौकरी खो दे, आपकी पत्नी आपको छोड़कर चली जाए, कोई दुर्घटना हो जाए, कोई बड़ी बिमारी हो जाए, और यहां तक कि आपकी मृत्यु भी हो जाए। आप इन में से किसी भी घटना को न तो जान सकते हैं, और न ही उन्हें रोक सकते हैं। जीवन तथा भविष्य को लेकर आपका दृष्टिकोण अगले कुछ ही घंटों में प्रचण्ड रूप से बदल सकता है।

आज कभी लौटकर नहीं आएगा। अगर आनेवाला कल आए ही नहीं तो सोचकर देखिए कि आपको किस व्यक्ति पर प्रेम करना चाहिए? किसे क्षमा करना चाहिए? किसका आभार मानना चाहिए? किसके ज़ख्मों पर मरहम लगाना चाहिए? इन सबसे बढ़कर, यह सोचे कि आपको आज अंगीकार तथा प्रशंसा में परमेश्वर को क्या देना चाहिए, और उसका सम्मान करने आपका आज का आचरण कैसा होना चाहिए?

आज का दिन कभी लौटकर नहीं आएगा। अपने विचारों, शब्दों, और कर्मों की ओर ध्यान दो, कहीं ऐसा न हो कि कल आपके लिए दर्दनाक परिणाम, या अनंतकाल के लिए अपराध-भावना और शोक ले आए। एक कामयाब जीवन कई धर्मपरायण दिनों से बनकर स्थापित होता है। सुनिश्चित करें कि आज का दिन धर्मपरायण दिनों की इस श्रृंखला में सबसे सुनहरा दिन हो।

परमेश्वर की बुद्धि कहती है कि संतोष सहित भक्ति बड़ा लाभ है (1 तिमु 6:6)। क्योंकि आप जानते हैं कि भक्ति का जीवन कैसा होता हैं, क्या आप वैसा जीवन जी रहे हैं? और जो परमेश्वर ने आपको पहले ही दिया है क्या आप उस में संतुष्ट हैं? दीर्घायु होने का और कल के विषय में पापमय अहंकार से बचने का यही मार्ग है।

आप भविष्य में क्या करना चाहते हैं इसका ढिंढोरा न पीटे। आप अपने भविष्य के लिए जो भी योजना बनाएं उसके विषय में दूसरों को बताते समय इन शब्दों में अपने जीवन और योजनाओं को विनम्रता से सौंप दें, “यदि प्रभु की इच्छा हो तो”। आपके जीवन के लिए यही परमेश्वर की आज्ञा है, और अन्य कोई भी तरीका दुष्टता है (याकूब 4:13-16)।

यदि आपने किसी को ठेंस पहुंचाई है तो आपके और उसके मध्य मेल-मिलाप हो गया है ऐसा अनुमान न लगाए। आज ही आप उनसे भेंट करें और मेल करा ले। किसी भी महत्वपूर्ण मसले को मूर्खता से यह सोचकर आज टाल मत दो कि आपके पास आनेवाला कल का दिन है। आज का बुद्धिमत्ता से उपयोग करके विनम्रता से स्वर्ग के और पृथ्वी के न्याय आसन का कर्ज चुकाकर उसे संतुष्ट करो।

जीवन की अपेक्षाकृत आयु औसत गणना पर आधारित है, परंतु यह किसी विशेषज्ञ की गणना पर आधारित नहीं है। वास्तव में, आपकी मृत्यु जवानी में ही हो सकती है जो कि जीवन-बीमा कंपनियों द्वारा अनुमानित औसत आयु है। अगर जीवन की आयु 73 वर्ष की है (भजन 90:10), तो कुछ ऐसे हैं जो 23, 53 और 90 वर्ष की आयु में मर जाते हैं, ताकि 73 की औसत आयु पूरी कर सके।

मृत्यु से अधिकतर लोग इतने हैरान क्यों हो जाते हैं? क्योंकि यह अटल है जिससे कोई इनकार नहीं कर सकता। क्योंकि लोग कल जीवित रहने की एक प्राणघातक व्यर्थ कल्पना करते हैं! सब लोग अलग-अलग तरीके से कल की डिंग मारते हैं। और इन में से एक आम तरीका है अपनी ही मृत्यु की अनदेखी करना जब कि आप दूसरों को मारने की योजना बना रहे होते हैं।

आप नहीं जानते कि कल आप जीवित रहेंगे या नहीं, या कुछ और बात हो जाएगी, परंतु न्याय के दिन आपको आज के पल पल का हिसाब देना होगा (रोमि 14:10-12; 2 कुरिं 5:9-11)। इसलिए, सबक यह है कि आप अपने जीवनों को भक्ति और बुद्धिमत्ता से जिए और अपनी सारी योजनाओं को दीनता से परमेश्वर को सौंप दे।

आप क्या कर सकते हैं? आपको एक समय एक ही दिन जीना चाहिए। प्रत्येक दिन को एक उपहार समझो और परमेश्वर की महिमा के लिए उसे बुद्धिमत्ता से जियों (भजन 90:12; रोमि 14:7-9)। आप परमेश्वर के मार्ग पर चलो और उससे प्रीति रखो। ताकि यदि कल आपका कोई नुकसान भी हो जाए तो भी इससे आपकी शाश्वत शांति और विश्राम को कोई हानि नहीं होगी।

अपना व्यवसाय और अन्य सभी योजनाएं परमेश्वर की सार्वभौम इच्छा पर सौंप दो, क्योंकि केवल वही कल को जानता है (याकूब 4:13-16)। इस समर्पण के बिना ऐसी दुस्साहसी योजनाएं पाप हैं। युक्तिपूर्ण योजनाओं पर या अपनी जमा पूंजी पर घमण्ड करना न केवल पाप है, बल्कि यह मूर्खता भी है; ऐसी योजनाएं महज़ व्यर्थ की कल्पनाएं हैं।

यीशु ने कहा, “इसलिए कल की चिन्ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्ता आप कर लेगा। आज के लिए आज ही का दुख बहुत है” (मत्ती 6:34)। क्या ही मूल्यवान बुद्धि और विवेक है! कल की चिंता न करो। कल अपनी चिंता आप ही कर लेगा। आप को व्यस्त रखने के लिए आज का उद्यम और दुख ही पर्याप्त है। आप यह कहों, “मेरी रोज की रोटी आज मुझे दे।”

मूर्ख लोग परमेश्वर से मेल-मिलाप करना कल पर छोड़ देते हैं, परंतु वह कल कभी आता ही नहीं। हमेशा बहाने दिए जाते हैं। फेलिक्स, जो पौलुस का उपदेश सुनकर भयभीत हो गया था, उसने पौलुस से कहा, “इस समय तो तू जा। समय मिलने पर मैं तुझे फिर बुलाऊगां” (प्रेरीतों 24:25)। वह समय कभी नहीं आया। धर्मपरायण और बुद्धिमान बनने के लिए आपके पास केवल आज का दिन है – आपके पास कोई और दिन होगा ऐसा व्यर्थ का अनुमान न लगाएं।

बच्चें और युवा बड़ी मूर्खता से और अधीरता से अनुमान लगाते हैं कि आगे और बहुत सारे कल आएंगे क्योंकि वे आज को मूल्य देने के बजाय भविष्य के कल्पित सुखों की लालसा करते हैं। जो मध्यम आयु के हैं, वे दीर्घायु होकर बुढ़ापे में पहुंचना चाहते हैं। बूढ़ों को बड़ा आत्मविश्वास होता है कि वे अपने पड़ोसियों से अधिक आयु जिएंगे। भविष्य के विषय में ऐसा भ्रम पागलपन है। इस नीतिवचन को पढ़ने में जो पल आप बिता रहे हैं, वे आपके जीवन के अंतिम पल हो सकते हैं!

यीशु मसीह ने एक धनवान और कामयाब मनुष्य का दृष्टांत बताया जिसने बड़े आत्मविश्वास से आनेवाले कई वर्षों के लिए योजना बनाई, परंतु उसी रात उसकी मृत्यु हो गई (लूका 12:16-21)। ऐसे अहंकार और दुस्साहस के लिए परमेश्वर ने उसे मूर्ख मनुष्य कहा। और यदि आप आज का उपयोग परमेश्वर की महिमा के लिए नहीं करते हैं तो आप बुद्धिमान नहीं हैं।

जीवन जीने का सबसे अच्छा तरीका है, आत्मिक बातों में अपने आज को अपने जीवन का आखिरी दिन मानना। यदि आप जान ले कि आज रात आपकी मृत्यु होगी और तुरंत ही आपका सामना सर्वशक्तिमान परमेश्वर से होगा, तो आप आज का दिन कैसे जीते? इस दृष्टिकोण से अनावश्यक भेद प्रमाणित करते हैं कि आप कल पर घमंड कर रहे हैं।

क्या प्रभु यीशु मसीह, जो धन्य और एकमात्र अधिपति है, आपको आपकी मृत्यु के समय या उसके आकस्मिक आगमन के समय विस्मय से प्रतीक्षा करते हुए पाएगा? आज ही आपकी मृत्यु हो सकती है। वह जल्द लौट कर आ रहा है। स्वर्ग और नरक सबसे अधिक गंभीर विषय हैं। क्या आप इसी विचार के अनुकूल जीवन जिएंगे? या फिर आप कल की योजना बनाने की घातक ग़लती करके आज रात को ही मर जाएंगे?

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