नीतिवचन 25:7
क्योंकि जिस प्रधान का तू ने दर्शन किया हो उसके सामने तेरा अपमान न हो, वरन् तुझ से यह कहा जाए, “आगे बढ़कर विराज।”
विनम्रता परमेश्वर और मनुष्यों से अनुग्रह जीतेगी। एक महान ख्रिश्चन मनुष्य, एक सफल अगुआ, एक दयालु व्यक्ति या बहुत से मित्रोंवाला व्यक्ति बनने के लिए विनम्रता महत्वपूर्ण है। सच्ची विनम्रता कभी भी दूसरों के कामों, अनुमोदन या उपस्थिति पर तर्क-वितर्क नहीं लगाती। बिना निमंत्रण के जाने से अच्छा है निमंत्रण पाने पढ़ी जाना, क्योंकि बिना निमंत्रण के जाना आपके लिए अपमानजनक हो सकता है और आपको नज़रंदाज़ भी किया जा सकता है और किया भी जाना चाहिए। खुद को महत्वपूर्ण बनाने का प्रयास करने के बजाय दूसरों को आपको महत्वपूर्ण बनाने दें (नीतिवचन 25:27; 27:2)।
यहाँ नीतिवचन का केवल आधा हिस्सा ही है। ये शब्द सार्वजनिक समारोहों में विनम्र दृष्टिकोण अपनाने की व्याख्या और पुरस्कार हैं। पहला भाग घोषित करता है, “जिस प्रधान का तू ने दर्शन किया हो उसके सामने तेरा अपमान न हो।” सुलैमान ने सामाजिक आयोजनों के लिए अच्छे शिष्टाचार सिखाकर विनम्रता का पाठ सिखाया। खुद विनम्र मानसिकता से पीछे के आसन पर बैठें और फिर यजमान आपको खुद आगे के आसन पर बैठने आमंत्रित करें यह अधिक बेहतर है, बजाए इसके कि आप खुद को बड़ा समझकर आगेवाले आसन पर बैठें और फिर यजमान आपको उपस्थित लोगों के सामने पीछे के आसन पर बैठने के लिए कहें।
प्रभु यीशु मसीह ने विनम्रता का पाठ सिखाने के लिए इसी दृष्टांत का उपयोग किया, जब उसने भोजन के समय घमंडी मेहमानों को अपने लिए बेहतर आसनों को चुनते देखा (लूका 14:7-10)। सुलैमान के इस नीतिवचन की तुलना में अधिक विस्तार के साथ, जैसा कि एक दृष्टांत एक नीतिवचन की तुलना में अधिक विस्तृत है, यीशु ने सिखाया कि आपको पीछे के आसन पर जाकर बैठने के लिए कहा जाए और आप बाकि सब उपस्थित मेहमानों के सामने ज़िल्लत उठाए उससे अच्छा है कि यजमान आपको आगे के आसन पर बैठने के लिए कहे और सब के सामने आपकी इज्ज़त हो और प्रतिष्ठा बढे! उसने यह कहकर निष्कर्ष निकाला कि वह विनम्रता को पुरस्कृत करेगा और घमंड को दंड देगा (लूका 14:11)। सावधान!
जबकि सार्वजनिक अपमान और अस्वीकृति की शर्म इस नीतिवचन को शक्तिशाली और मूल्यवान बनाती है, यह आपकी अहंकारी भावना है जिसे पहचानकर दूर कर देना अवश्य है। गर्वपूर्ण कार्य जो दूसरों को ठेस पहुँचाते हैं वे केवल अहंकारी भावना और घृणित हृदय के लक्षण हैं। सच्ची विनम्रता आत्मा में शुरू होती है, जहां आप परमेश्वर के सामने अपनी व्यर्थता को स्वीकार करते हैं और दूसरों से अपेक्षा करने या उनसे आपका सम्मान करने और सेवा करने की मांग करने के बजाय उनकी सेवा करने के लिए खुद को प्रतिबद्ध करते हैं।
सार्वजनिक मीटिंग की चर्चा में आप का रवैया कैसे हैं? क्या आप शांति और धैर्यपूर्वक दूसरों की बातें सुन सकते हैं, या क्या आप बात करने की ललक से व्याकुल होते हैं? जब आमने-सामने की चर्चा होती है तब क्या? क्या यह ज़रूरी है कि आप प्रत्येक कथन का उत्तर अपने किसी कथन से दें? आपके लिए बोलना क्यों महत्वपूर्ण है? आपको इसकी आवश्यकता क्यों महसूस होती है? आप इस नीतिवचन द्वारा सिखाए गए विनम्रता के सिद्धांत का उल्लंघन कर रहे हैं। आपको ज्यादातर मामलों में तब तक चुप रहना चाहिए जब तक कि आपको आपकी राय विशेष रूप से नहीं पूछी जाती।
इस नीतिवचन द्वारा सिखाए गए विनम्रता और चुप्पी के इस सिद्धांत के अधिक दूरगामी अनुप्रयोग पर विचार करें। यदि आपको यात्रा के दौरान या नौकरी में अन्य कार्यों या लाभों के लिए कंपनी से व्यय खाते का उपयोग करने का विशेषाधिकार दिया गया है, तो आपको हमेशा अधिक महंगी जगह और महंगे मेनू आइटम की तुलना में खाने और मेनू आइटम के लिए कम महंगी जगह चुननी चाहिए। अगर आप यूसुफ या दनिय्येल के समान सफलता पाना चाहते हैं तो इसके लिए उनके जैसा चरित्र आवश्यक है, और यह मानसिकता आपको आपके ऊपर के उन अधिकारीयों की दृष्टि में जो आपके बिलों को मंजूरी देते हैं, प्रिय बना देगी। वे आप पर अधिक भरोसा करेंगे और बाद में आपसे अधिक खर्च करने के लिए कहेंगे। बहुत से लोग ऐसी सरल बुद्धि को समझ नहीं पाते।
आपकी सफलता के लिए विनम्रता और मन की दीनता ज़रूरी है। यदि आप अभिमान, अहंकार और घमण्ड से नफरत नहीं करते हैं, तो परमेश्वर स्वयं आपको निश्चित रूप से नीचे गिरा देगा (नीतिवचन 8:13; 15:25; 16:5; अय्यूब 40:9-14)। मित्रता या व्यवसाय के लिए लोग आपको अस्वीकार कर देंगे, क्योंकि अधिकांश लोग घमंडी भावनावाले इन्सानों से घृणा रखते हैं (नीतिवचन 13:10; 26:12,16; 28:11)। और आपको आपकी गलतियाँ महँगी पड़ेगी, क्योंकि घमंड अपने दुस्साहस के कारण अंधा करनेवाला और धोखा देने वाला होता है (नीतिवचन 11:2; 16:18; 29:23)। परमेश्वर के सामर्थ्यशाली हाथ के नीचे स्वयं को नम्र करें, और वह आपको जल्द ही ऊंचा उठाएगा (नीतिवचन 18:12; याकूब 4:10; 1 पतरस 5:6)।
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