नीतिवचन 25:3
स्वर्ग की ऊँचाई और पृथ्वी की गहराई, और राजाओं का मन इन तीनों का अंत नहीं मिलता।
स्वर्ग आपकी सोच से कहीं अधिक ऊँचाई पर है, और पृथ्वी उतनी ही अधिक गहराई में है जितना आप सोच भी नहीं सकते। न ही आप एक सच्चे राजा के मन को वास्तव में जान सकते हैं। उसकी आत्मा में गोपनीय जानकारी, बोझ, योजनाएं, खतरे, ज्ञान और बुद्धि होती है जिन्हें आप नहीं समझ सकते। राष्ट्रीय मुद्दों के विषय में अपने बहुत सीमित दृष्टिकोण के आधार पर एक राजा का आंकलन करना मूर्खता और धृष्टता कहलाता है।
सुलैमान एक राजा था, और स्वयं एक राजा का पुत्र था। वह पृथ्वी के इतिहास में सबसे बुद्धिमान राजनीतिज्ञ था। राजा की महिमा गुप्त बातों का पता लगाने से होती है (नीतिवचन 25:2), उसने नागरिकों की अपने राजा के निर्णयों या कार्यों को जानने और समझने की असमर्थता पर ध्यान दिया। यहाँ परमेश्वर की ओर से बुद्धि के वचन दिए गए हैं, जो आपको नागरिकों के शासकों को उचित सम्मान देना सिखाती है (निर्गमन 22:28; रोमियों 13:1-7; तीतुस 3:1)।
आखिर वह ऊँचाई कितनी ऊँची है? आकाश कितना ऊँचा है? वह ब्रह्मांड के कितनी दूर तक फैला है? आखिर वह गहराई कितनी गहरी है? पृथ्वी के केंद्र में क्या है? ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिनके बारे में मनुष्य केवल अनुमान लगाते हैं। वे वास्तव में यह जान या समझ नहीं सकते हैं। यह प्रेरित तुलना मनुष्य के ज्ञान में एक भारी कमी को दर्शाती है – यहाँ यह नागरिकों के शासकों पर प्रश्न उठाना है (भजन संहिता 103:11; यशायाह 55:9)।
सुलैमान ने जब अपने दरबार में एक शिशु को आधा काटने के लिए तलवार माँगी, तो कई लोग चकित हो गए। वे नाराज थे! एक बच्चे को मार डालना? और दोनों औरतों को आधा-आधा दे देना? यह कैसी कठोरता है! वह इतना आवेगपूर्ण क्यों था? उसने अधिक प्रश्न क्यों नहीं पूछे? एक मृत्यु को दूसरी मृत्यु के द्वारा हल करना? इसके बजाय उसने सहयोगी न्यायपीठ का चयन क्यों नहीं किया? सार्वजनिक रूप से प्रतिरक्षक अधिवक्ता नियुक्त करने का चुनाव क्यों नहीं किया और कुछ भी न सीखने के लिए छह महीने क्यों नहीं लिए? उसने जेल की सज़ा देने का निर्णय क्यों नहीं लिया? क्योंकि राजा के मन में बुद्धि थी (1 राजाओं 3:16-28)!
तब सुलैमान ने अपनी माँ से की गई एक महत्वपूर्ण प्रतिज्ञा तोड़ दी, जब उसने अपने भाई अदोनिय्याह के लिए अबीशग को मांगा (1 राजाओं 2:12-25)। उसने केवल ऐसा माँगने के कारण उस भाई को मार डाला। सुलैमान ने परमेश्वर द्वारा दिए गए अपने शासन को एक हड़पने वाले से बचाया (1 राजाओं 1:5-7)। अपनी मां से किया गया वादा तब उसके लिए कोई मायने नहीं रखता था। यह आपको एक झूठ और हत्या दिखाई देगा, परंतु वास्तव में राजा के हृदय की कोई थाह नहीं।
नए नियम के कुछ सबसे कठोर वचन उन लोगों के लिए उपयुक्त किए गए हैं जो नागरिकों के शासकों की आलोचना करते हैं (2 पतरस 2:10-12; यहूदा 1:8-10)। परमेश्वर ने शासन को लेकर उनकी अज्ञानता का उपहास किया और घोषणा की कि उन्हें क्रूर पशुओं की तरह नष्ट कर दिया जाना चाहिए। उसने खुलासा किया कि स्वर्गदूत तक भी मानव शासकों का अनादर नहीं करते। घमंडी और हठधर्मी होने के कारण, उसने उनकी निंदा की। वे एक पाप के दोषी थे जिससे वह बहुत घृणा करता है – नगर के अगुओं का अनादर।
आपका राष्ट्रपति प्रतिदिन उससे कहीं अधिक और महत्वपूर्ण जानकारियों से निपटता है, जिसका विश्लेषण आप और आपके दस सबसे बुद्धिमान मित्र मिलकर भी एक महीने में नहीं कर सकते। वह हर निर्णय को लेने के लिए, चारों दिशाओं से भारी दबाव का सामना करता है। उसके कार्यों की आलोचना करना वास्तव में मूर्खतापूर्ण और हठधर्मिता है, जबकि आपको उसमें शामिल कारकों के विषय में कोई भी जानकारी नहीं होती है। और कुछ सरकार-विरोधी समाचार पत्र या वेबसाइट, आपके ज्ञान या क्षमता में कुछ भी नहीं जोड़ते, क्योंकि उन्हें भी इसके विषय में कोई जानकारी नहीं होती है।
हालांकि यह राजाओं और राष्ट्रपतियों के लिए कहा गया है, परंतु इस नीतिवचन का ज्ञान सभी अधिकारियों पर लागू होता है। एक पिता अपने परिवार के लिए ऐसे निर्णय लेता है जिन्हें उसके बच्चे नहीं समझ पाते। किसी व्यवसाय का मालिक को ऐसी चीज़ें भी करनी पड़ती है जो उसके कर्मचारी नहीं समझ सकते, क्योंकि उस मालिक के पास कॉफी ब्रेक लेने और समय पूरा होते ही घर जाने के अलावा भी कई सारे काम और हृदय में कहीं अधिक ज्ञान होता है। परमेश्वर की ओर से दिये गए कार्य को पादरीगण अक्सर बोझ, प्रतीति, ज्ञान और लक्ष्यों के कारण नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जिनमें से अधिकांश कलीसिया के सदस्यों के लिए अज्ञात होते हैं।
यदि आप उन चीजों के लिए अपने अगुओं की आलोचना करते हैं जिन्हें सीखने में आप असक्षम हैं, तो उचित और न्यायपूर्ण यही होगा कि आपके अधिकार के निहित हर एक व्यक्ति आपके विरुद्ध विद्रोह में उठे और आपके निर्णयों को अस्वीकार करे। उचित और न्यायपूर्ण यही होगा कि वे आपका अनादर करें। उचित और न्यायपूर्ण यही होगा कि आपके जीवन में कुछ भी सही न हो, क्योंकि आपने परमेश्वर द्वारा नियुक्त शासक पर आरोप लगाया और उसकी आलोचना की जिसके पास आपसे कहीं अधिक ज्ञान है।
आप इस नीतिवचन को किस प्रकार लागू कर सकते हैं? अपने अगुओं का सम्मान करें, यहां तक कि अपने विचारों में भी, तब भी जब उनके निर्णय आपको गलत लगें (सभोपदेशेक 10:20; 1 राजाओं 12:1-4; 1 पतरस 2:13-17)। अपने माता-पिता के नियमों और इच्छाओं का सम्मान करने के द्वारा उनका आदर करें, यहां तक कि चेहरे के भावों से भी उनका आदर करें (नीतिवचन 30:17; व्यवस्थाविवरण 27:16; इफिसियों 6:1-3)। अपने स्वामी की सेवा ठीक उसी तरह करें जैसे आप मसीह की सेवा कर रहे हों, भले ही वे अनुचित क्यों न हों (इफिसियों 6:5-8; 1 पतरस 2:18-23)। अपने पादरी की आज्ञा का पालन एक ऐसे व्यक्ति के रूप में करें जो आपकी आत्मा के लिए एक गहरा, पवित्र कर्तव्य रखता हो (इब्रानियों 13:7,17)।
यदि आप वर्तमान में लिए जा रहे निर्णयों और अपने राष्ट्र के भविष्य को लेकर चिंतित हैं, तो अपने शासकों के लिए प्रार्थना करें। उन्हें डांटें या फटकारे नहीं, बल्कि उनके लिए प्रार्थना करें! आपके लिए परमेश्वर की यही इच्छा है, भले ही वे शासक दमनकारी अविश्वासी ही क्यों न हों (1 तीमुथियुस 2:1-3; यिर्मयाह 29:4-7; एज्रा 6:10)। आपको उनके कार्यवाही को लेकर चिंतित होने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि परमेश्वर सम्पूर्ण रूप से नियंत्रण में है (दानिय्येल 2:20-22)!
परंतु एक राजा है जिसे आप कभी भी पूर्ण रूप से जान नहीं पाएंगे। वह राजाओं का राजा है। “और पृथ्वी के सब रहनेवाले उसके सामने तुच्छ गिने जाते हैं, और वह स्वर्ग की सेना और पृथ्वी के रहनेवालों के बीच अपनी ही इच्छा के अनुसार काम करता है; और कोई रोककर उससे नहीं कह सकता है , ” तूने यह क्या किया है?” (दानिय्येल 4:35)। प्रिय पाठक, क्या आप इस राजा का आदर करते हैं? क्या आप उस पर भरोसा करते हैं? क्या आप उसके हर अनुरोध का पालन करते हैं, क्या तब भी जब आप उसे समझ नहीं पाते?
आप कभी भी उस राजा को पूर्ण रूप से समझ नहीं पाओगे, परंतु वह आपकी आत्मा के हर भेद को जान लेगा। आप अपने जीवन का पूरा लेखा उसे दोगे, कहे गए हर एक शब्द का भी (रोमियों 14:10-12; 2 कुरिन्थियों 5:9-11; मत्ती 12:36)। जो कुछ भी आपने सोचा, कहा, और किया है, वह उसकी पुस्तकों में लिखा जा चुका है, जिसे आपके खेदजनक मामले की जाँच करने के लिए खोला जाएगा (प्रकाशितवाक्य 20:11-15)।
यदि आप उसके प्रिय लोगों में से एक हैं, तो वह आपको पूरे ब्रह्मांड के आगे अपनी संतान घोषित करेगा और आपको एक अकथनीय अनंत विरासत देगा। आप स्वर्ग के आनंद को महसूस करने पाएंगे, जबकि दुष्टों को नरक में गिरा दिया जाएगा, यह सब कुछ उसके द्वारा प्रदान किए गए एक माध्यम की धार्मिकता और योग्यता के द्वारा होगा, जो कि स्वयं यीशु मसीह है। राजा के हृदय की कोई थाह नहीं!
पौलुस ने उद्धार के प्रकाश में परमेश्वर के बारे में यों लिखा, “आहा! परमेश्वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गंभीर है। उसके विचार कैसे अथाह,और उसके मार्ग कैसे अगम हैं ! “प्रभु की बुद्धि को किसने जाना? या उसका मंत्री कौन हुआ ?या किसने उसे पहले कुछ दिया है जिसका बदला उसे दिया जाए ? क्योंकि उसी की ओर से , और उसी के द्वारा, और उसी के लिए सब कुछ है । उसकी महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन” (रोमियों 11:33-36)।
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