नीतिवचन 25:25
जैसे प्यासे के लिए शीतल जल, वैसे ही दूर देश से आया मंगल समाचार होता है। (केजेवी)
क्या आप एक अच्छे वक्ता हैं? क्या आप दूसरों को अच्छी बातों की जानकारी देते हैं? क्या आप अच्छी खबरें पहुंचाने में एक दूत के समान हैं? जो निर्जन और दूरस्थ हैं और अच्छी खबरों से वंचित हैं, क्या आप उनके विषय में सोचते हैं? क्या आप उनके लिए एक अनुकूल संवाददाता हैं जो आप से अच्छी बातें सुनना चाहते हैं? क्या आप उन्हें स्मरण करते हैं जो आप से प्रेम करते हैं, और आपके होठों से अच्छे वचन सुनने से आनंदित होते हैं?
यह नीतिवचन एक सरल सादृश्यता और उपमा है। एक प्यासा मनुष्य एक ठंडे पानी का प्याला पीकर तसल्ली पाता है, बच जाता है, तरोताज़ा हो जाता है, उसमें जान आ जाती है, और वह जीवित रहता है। आपको उसका खिलखिलाता चेहरा देखना चाहिए और उसके कृतज्ञ मन को महसूस करना चाहिए। दूरदराज़ के मित्र से या किसी उद्योग से आनेवाली अच्छी खबर से उसके सुननेवालों पर ऐसा ही शक्तिवर्धक और स्फुर्तिदायक प्रभाव पड़ता है। अच्छी खबर या अच्छा समाचार एक बड़ा उपहार है, जिसका कोई दाम नहीं। तो फिर अच्छे समाचार के दूत क्यों न बने? दूसरों में जान डालने और उन्हें नई स्फुर्ति देने का क्या ही सरल तरीका है!
ज्यादातर भाष्यकार इस नीतिवचन को नए नियम के आध्यात्मिक लागूकरण तक ही सीमित करते हैं। वे अच्छे समाचार का परिवर्तन मसीह के सुसमाचार में करते हैं, और दूर देश को वह स्वर्ग कहते हैं। सुसमाचारों की पुस्तकों में जाने-माने वचनों का उपयोग करके वे अपने अर्थानुवाद के लिए एक आकर्षक विषय की स्थापना करते हैं। परंतु यह नीतिवचन यदि रोमियो की पत्री के 10वें अध्याय में होता तो आप उनसे सहमत हो जाते, परंतु यह वचन वहां नहीं है।
प्रभु यीशु मसीह का सुसमाचार एक सबसे अच्छी खबर है, और स्वर्ग सचमुच एक दूर देश है, और उसके प्रचार को सुनने से प्राण में जान आती है और नया बन जाता है। परंतु सुलैमान ने बुद्धि के व्यवहारिक पाठ पढ़ाएं, जैसा कि उसने इस पुस्तक की प्रस्तावना में स्पष्ट किया (नीति 1:1-9)। इस नीतिवचन के पहले या बाद में सुसमाचार का कोई संदर्भ नहीं है (नीति 25:24, 26)। यदि आपको याद हो, तो हम ने देखा है कि नीतिवचन अक्सर गूढ़ कहावतें हैं, और उनका अर्थ गुप्त होता है; और इस कारण उनके गहन अर्थ को खोजने के लिए आप को परिश्रम करना है (नीति 1:6)।
क्या इन शब्दों में बुद्धि का एक व्यवहारिक और मूल्यवान सबक है? हां! क्या यहां टेलीफोन और ई-मेल का आविष्कार करने का कोई गुप्त सुझाव दिया गया है? नहीं! दूर देश में रहनेवाले लोगों से या दूर देश की घटनाक्रमों से आनेवाली अच्छी खबर या अच्छा समाचार प्रोत्साहन देनेवाला और लाभदायक होता है, इस कारण बुद्धिमान मनुष्य अच्छे वक्ता बनते हैं, ताकि जो उन पर निर्भर हैं उन्हें प्रसन्नता से भर दे और लाभान्वित करें (नीति 25:13)। और चूंकि इस 21वीं सदी में संचार के माध्यमों का तेजी से आविष्कार होता जा रहा है, इस कारण एक महान वक्ता न बन पाने का आपके पास कोई बहाना नहीं है।
जब याकूब ने यूसुफ के विषय में समाचार सुना तो उसका उस पर क्या असर पड़ा? दूर देश से आए इस अद्भुत समाचार की तुलना में उस पर इस बात का कोई असर नहीं पड़ा कि उसके बेटों के थैलों में कितना अनाज या सोना भरा पड़ा था (उत्पत्ति 45:27-28)। याकूब की आत्मा में जान आ गई, और वह जल्दी ही अपने पुत्र से भेंट करने निकल पड़ा। क्या कोई है जो आपसे किसी अच्छे समाचार को सुनने बेताबी से प्रतिक्षा कर रहा है? क्या कोई हैं जो पीड़ा और तकलीफों से मूर्छित हो गए हैं, जिनमें आप अपनी अच्छी खबर के माध्यम से जान डाल सकते हैं?
बहुतेरे इतने स्वार्थी हैं कि वे वार्तालाप नहीं कर सकते। तो वही कुछ अन्य ऐसे हैं जो अति व्यस्त हैं, खामोश मनोदशा के हैं, या कभी प्रशिक्षित नहीं किए गए हैं। कुछ तो संचार और वार्तालाप में कोई उद्देश्य या मूल्य नहीं देख पाते। हम अक्सर सुनते हैं, “जो दिखाई न दे, उसे ध्यान में कैसे रखें,” या अन्य शब्दों में कहें तो, “दृष्टि से ओझल, तो मन से भी ओझल।” किंतु बुद्धिमान मनुष्य इस तरह से नहीं सोचते। वे परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ना चाहते हैं, इस कारण वे अनुकूल और परिपूर्ण वक्ता बनते हैं। वे जानते हैं कि एक अच्छा विचार अगर अभिव्यक्त न किया जाए तो वह व्यर्थ का विचार है, और किसी काम का नहीं। अगर आप उसे अभिव्यक्त ही न कर पाओं, तो फिर सोचना ही क्यों?
कौन है जो आप से सुनना चाहता है? क्या किसी को लगता है कि वह दूर देश में रहता है, इसलिए कि वह आप से कभी कोई अच्छा समाचार नहीं सुन पाता है? क्या आप के वरिष्ठों को पता है कि आप उनके द्वारा सौंपे गए किसी काम में प्रगति कर रहे हैं या नहीं? क्या आप के कनिष्ठ जानते हैं कि आप उनसे क्या उम्मीद कर रहे हैं? और अगर आप उनसे खुश है तो क्या वे इसके विषय में जानते हैं? क्या आपके माता-पिता जानते हैं कि आप ठीक हैं? क्या आपके बच्चे जानते हैं कि आप उनसे क्या चाहते हैं कि वे करें? आपने आखरी बार कब अपने किसी दूरदराज़ के किसी मसीही मित्र को तसल्ली या प्रोत्साहन दिया? कलीसिया के किसी ऐसे सदस्य का क्या जो भौगोलिक दृष्टि से अन्य विश्वासियों की सहभागिता के नियमित दायरे से बाहर रहता है?
संदर्भ में सुलैमान ने पहले ही सिखा दिया था कि विश्वासयोग्य दूत अपने भेजनेवाले को ठंडक पहुंचाता है (नीति 25:13), परंतु यहां वह संदेश की विषयवस्तु पर बल दे रहा है। आत्माओं का उत्थान करने और दूसरों को लाभ पहुंचाने आज आप कौन-सा अच्छा समाचार उन्हें बता सकते हैं? अच्छे समाचार से व्यक्ति की हड्डियां पुष्ट होती हैं – अच्छा समाचार मनुष्यों के जीवनों में समृद्धि की खुशियां ले आता है (नीति 15:30)। अति विलम्ब से व्यक्ति का मन निराश हो जाता है (नीति 13:12)। अभी और इसी वक्त अपने वार्तालाप के द्वारा आप दूसरों के लिए जीवन का वृक्ष बन सकते हैं। किसी को चुने, और ऐसा ही करें।
कहीं तुम में से कोई यह न सोच बैठे कि मसीह का सुसमाचार इस धरती पर बताया गया अब तक का सबसे बड़ा शुभ समाचार नहीं है, इसलिए बाइबल के इस महिमामय वचन पर विचार करें : “पर्वतों पर उसके पैर क्या ही सुहावने हैं जो शुभ समाचार लाता है; जो शान्ति की बातें सुनाता और भलाई का शुभ संदेश लाता और उद्धार का संदेश देता है” (यशा 52:7)।
अगर सुसमाचार के महत्व के इस वर्णन से आपके दिलो-दिमाग पर कोई असर नहीं पड़ा, तो इस एक और वचन पर चिंतन करें : “और निस्सन्देह भक्ति का भेद बड़ा गम्भीर है—वह जो शरीर में होकर प्रकट हुआ, आत्मा द्वारा धर्मी प्रमाणित हुआ, स्वर्गदूतों को दिखाई दिया, ग़ैरयहूदियों में उसका प्रचार हुआ, जगत में उस पर विश्वास किया गया और महिमा में ऊपर उठा लिया गया।” (1 तिमु 3:16)। सुसमाचार आज तक का सबसे महान समाचार है।
यह संदेश इतना अद्भुत है कि स्वर्ग के धन्य परमेश्वर ने एक बार आसमान को चीर कर यहूदिय पर खोल दिया और जंगल में अपनी भेड़ों की रखवाली कर रहे चरवाहों को इस महान समाचार का ऐलान करने के लिए स्वर्ग की सेना में से स्वर्गदूतों की एक बड़ी भीड़ भेज दी, “देखो, मैं तुम्हें एक बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूँ जो सब लोगों के लिए होगा…… आकाश में परमेश्वर की महिमा, और पृथ्वी पर मनुष्यों में जिनसे वह प्रसन्न है, शान्ति हो”। पूरा विवरण पढ़े (लूका 2:8-20)। अच्छा समाचार सुनने की अपनी प्यास बुझाएं। इससे अपने हृदयों को हर्ष से भर जाने दें। अपने उद्धार के लिए आज ही अपने पापों से पश्चात्ताप करके प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करें।
नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।