नीतिवचन 25:22
क्योंकि इस रीति तू उसके सिर पर अंगारे डालेगा, और यहोवा तुझे इसका फल देगा।
अपने शत्रुओं का भला करना सही और बुद्धिमानी है (नीतिवचन 25:21)। यह साबित करता है कि आप परमेश्वर की संतान हैं, क्योंकि इससे आप परमेश्वर की भलाई दिखाते हैं, यहां तक कि उन लोगों पर भी जो आपसे नफरत करते हैं और आपके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। यह अपने दुश्मनों से निपटने का सबसे उत्तम समाधान है, क्योंकि इससे या तो उनकी नफरत पिघल जाती है या उनकी दुष्ट और भी कठोर हो जाती है। परन्तु आपकी भलाई को वे चाहे जो भी प्रतिक्रिया देते हो, यहोवा आपको इसका फल देगा।
मूसा के द्वारा इस्राएल को दी गई परमेश्वर की व्यवस्था में अपने शत्रुओं का भला करने का नियम शामिल था (निर्गमन 23:4-5)। परन्तु फरीसियों ने, जो अपने भ्रष्ट हृदयों में अत्यंत दुष्ट थे, इसके विपरीत शिक्षा दी। उन्होंने सिखाया कि मनुष्यों को अपने पड़ोसियों और दोस्तों से प्रेम रखना है और अपने दुश्मनों से नफरत करनी है (मत्ती 5:43)। परन्तु प्रभु यीशु मसीह ने उनकी मानवतावादी, स्वार्थी सोच को की भर्त्सना की और सिद्ध भक्ति की शिक्षा दी।
उसने कहा, “परन्तु मैं तुम से कहता हूं, अपने शत्रुओं से प्रेम रखो, जो तुम्हें शाप देते हैं उन्हें आशीष दो, जो तुम से बैर रखते हैं उनके साथ भलाई करो, और जो तुम्हें तुच्छ समझते हैं और तुम्हें सताते हैं उनके लिए प्रार्थना किया करो।” (मत्ती 5:44)। परमेश्वर प्रतिदिन अपने शत्रुओं की सांसारिक ज़रूरतों को पूरा करता है, इसलिए जब हम भी ऐसा ही करते हैं, हम साबित करते हैं कि हम परमेश्वर की संतान हैं (मत्ती 5:45)। केवल अपने मित्रों से प्रेम रखने से कुछ साबित नहीं होता, क्योंकि अधर्मी भी ऐसा ही करते हैं (मत्ती 5:46-47)। जो मनुष्य सिद्ध है, वह अपने शत्रुओं से प्रेम रखेगा (मत्ती 5:48)।
जब कोई व्यक्ति स्वाभाविक प्रवृत्तिवाले किसी मनुष्य का, जो आदम से दुष्ट मन लेकर जन्मा है, शत्रु बन जाता है, तो वह बदला लेने की सोचता है। परन्तु परमेश्वर ऐसे विचारों को दोषी ठहराता है (रोमियों 12:17-19; 1 थिस्स 5:15)। वह हमें आदेश देता है कि हम अपने शत्रुओं के साथ भलाई का व्यवहार करें (लैव्य 19:18; रोमियों 12:20-21)। यह हमेशा से ही धर्मनिष्ठ लोगों का चरित्र रहा है (अय्यूब 31:29-30; भजन 35:11-14)। अच्छे सामरी ने एक ऐसे घायल व्यक्ति पर जो वंश और धार्मिक दृष्टि से उसका शत्रु था – अर्थात् एक यहूदी- बहुत दया कीं (लूका 10:25-37; यूहन्ना 4:9; 8:48) ।
अपने शत्रुओं के साथ ऐसे नेक कार्य करने से दो चीजें होती हैं। पहली “तू उसके सिर पर अंगारे डालेगा।” यह रूपक कीमती धातुओं को ढालने के लिए कच्ची धातु को गलाने की प्राचीन प्रथा से उदाहरण लेता है। कच्ची धातु पर गर्मी लगाने से आप अपनी मनचाही धातुएं पिघला सकते हैं और उनमें से सब अशुद्धि और मैल निकल जाएगा। जबकि बहुमूल्य सामग्री प्राप्त करने के लिए कच्ची धातु को हमेशा आग पर रखा जाता था, कभी-कभी गर्मी को और अधिक बढ़ाने के लिए कच्ची धातु के ऊपर धधकते कोयले डाले जाते थे।
सच्ची और दिल से की गई भलाई, जो अलौकिक और अनपेक्षित है, एक व्यक्तिगत दुश्मन को पिघला सकती है (नीतिवचन 15:1)। यह अपराध-बोध, शर्म और पश्चाताप की बहुमूल्य धातुओं को बाहर निकाल सकता है। इससे वह आपके प्रति अपने कठोर व्यवहार पर पुनर्विचार कर सकता है, पश्चाताप की तीव्र पीड़ा महसूस कर सकता है और क्षमा मांग सकता है। दो बार शाऊल के प्रति दाऊद की भलाई के कारण उसका कठोर मन पिघल गया था (1 शमू 24:1-22; 26:1-25), और जब गिदोन ने एप्रैमी पुरुषों की प्रशंसा कीं तब उनका जी उसकी ओर से ठंडा हो गया (न्यायियों 8:1-3)।
दूसरी बात यह हो सकती है, कि जब आप अपने शत्रु के साथ भलाई करते हैं, और अगर उसमें कोई स्वाभाविक अच्छाई नहीं है, तो यह उसके मन की दुष्टता को और भी कठोर कर सकता है। अगर धातु में कोई कीमती तत्व न हो तो पिघलानेवाली आग उसे भी प्रकट करती है। जिस प्रकार तेज़ तपती धूप मलबे को सुखाकर कठोर बना देती है और कूड़ा-कचरा जला देती है, उसी प्रकार अच्छे लोगों की सौम्य परोपकारिता अपवित्र दुष्टों को भी कठोर कर सकती है। जब यीशु अपने गाँव नासरत को गया और उसने कोमल शब्दों लोगों से बातें कीं, तब भी उनके मन नहीं पिघले (लूका 4:16-30), और गेथसमनी में अपनी गिरफ़्तारी के समय जब उसने एक सैनिक के कटे कान छूकर उसे अच्छा किया तब भी वहां मौजूद यहूदी भीड़ की बुरी योजनाएँ नरम नहीं हुई (लूका 22:51)।
चाहे अग्नि के अंगारे अत्याचारी के मन को पिघला दें या उसे अपनी उत्पाती मनोवृत्ति में और भी कठोर कर दें, यहोवा उस मनुष्य को प्रतिफल देगा जो अपने शत्रुओं के साथ दयालुता से व्यवहार करता है। धन्य परमेश्वर अपने दोस्तों और दुश्मनों दोनों पर अपनी धूप और बारिश भेजता है, और जब उसकी सन्तान भी ऐसा ही करती हैं तो वह उनसे प्रसन्न होता है। हालाँकि शत्रु द्वारा होनेवाला का उत्पीड़न पीड़ादायक होता है, परमेश्वर आपको आपकी सहनशीलता के लिए आशीष देगा।
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