नीतिवचन 25:2

बात को गुप्त रखना ईश्वर का विभव है; परन्तु राजा की प्रतिष्ठा बात को खोज लेने में है।

परमेश्वर के पास सभी बातों के विषय में असीम बुद्धि है। वह बिना अपने उद्देश्य को प्रकट किए, बिना किसी से कोई सलाह मांगे, या जो जो वह करना चाहता है उसका मनुष्यों से परिक्षण कराए बिना ही महिमामय रूप से कार्य करता है। इस मामले में राजाओं के विषय में ऐसा नहीं है। चूंकि वे तुलना में बहुत कम समझते हैं, इसलिए कोई भी काम करने से पहले उन्हें सब बातों का सावधानीपूर्वक परिक्षण और सोच-विचार करना अनिवार्य है। अपने आपको परमेश्वर के समान बुद्धिमान समझकर मनमाने ढंग से कार्य करना उनके लिए मूर्खता होगी। सभी मानव-अधिकारियों के लिए अवश्य है कि वे अपने राजाओं (देश के प्रधानमन्त्री) के विवेकपूर्ण आदर्शों पर चले।

यह संसार परमेश्वर की गुप्त इच्छा के अनुसार चलता है, जिसके विषय में हम बहुत कम जानते हैं (व्यवस्था 29:29)। वह न तो किसी से सलाह लेता है, और न ही इन बातों को प्रकट करता है (अय्यूब 26:14; रोमियों 11:33), और उसके विषय में ऐसी बहुत सी बातें हैं (अय्यूब 23:14; भजन 139:17-18)। केवल पवित्रशास्त्र के प्रकटीकरण और समय के बीत जाने के पश्चात् ही आप परमेश्वर की इस इच्छा को जान पाते हैं। परन्तु आपको उसकी प्रकट इच्छा, अर्थात् बाइबल, दी गई है, जिसके द्वारा आपको अपने जीवन को अनुशासित करना है और अपने सभी निर्णयों की उसी प्रकाश में परखकर उन्हें सत्यापित करना है (व्यव. 29:29)।

परमेश्वर यहोवा मनुष्यों के साथ उनके मनों में कार्य करके एकान्त में व्यवहार करता है, और केवल कभी कभार ही उन्हें दूसरों के द्वारा परखे जाने के लिए उनके इरादों को दूसरों के सामने प्रकट होने देता है। वह अक्सर मनुष्यों को बिछौने पर क्लेश देता है, और उनके चित्त में उन्हें ताड़ना देता है (अय्यूब 33:14-33)। उसने रात को स्वप्न में अबीमेलेक से कहा कि वह सारा को न छुए (उत्प. 20:3), और उसने लाबान से कहा कि वह याकूब के साथ कोमलता का व्यवहार करे (उत्प. 31:24)। दाऊद जानता था कि इन निजी समयों का उपयोग कैसे प्रभु के साथ करना है (भजन 4:4; 42:8; 63:6; 77:6; 119:147-148; 139:17-18)।

परमेश्वर आपको आपके बड़े और छोटे सब पाप बिना किसी पर उन्हें उजागर किए प्रतिदिन क्षमा करता है। इसके लिए आपको बहुत आभारी होना चाहिए, और साथ ही, ऐसी बातों को दूसरों से गुप्त रखने में उसकी अनुग्रहपूर्ण महान महिमा आपको दिखाई देनी चाहिए। जब कोई व्यक्ति आपके विरुद्ध पाप करता है और आपके पास अपने खिलाफ किए उन व्यक्तिगत अपराधों को नज़रअंदाज़ करने और उन्हें दूसरों से गुप्त रखने का अवसर होता है, तो यह आपकी भी महिमा है (नीतिवचन 17:9; 19:11)। लेकिन यह आपका कर्तव्य है, उस अधिकार के साथ जो परमेश्वर ने आपको किसी विशेष कार्य या भूमिका के रूप में दिया है, कि आप मामलों की खोज करें, और पवित्र शास्त्र की बुद्धि के अनुसार विवेकपूर्ण ढंग से उनसे निपटे।

एक महान राजा को सभी तथ्यों की जानकारी इकट्ठा करना चाहिए, अपने बुद्धिमान सलाहकारों को बुलाना चाहिए, गवाहों की जांच करनी चाहिए, मामलों की समीक्षा करनी चाहिए, परिणामों पर विचार करना चाहिए और निष्कर्ष निकालने और निर्णय लेने से पहले विचार-विमर्श करना चाहिए। सुलैमान ने दो वेश्याओं के मामले को बड़ी बुद्धिमानी से निपटाया (1 राजा 3:9-28)। क्षयर्ष ने वशती के विद्रोह के संबंध में ऐसी ही बुद्धिमानी से काम किया (एस्तेर 1:12-21), परन्तु वह तब असफल रहा जब उसने यहूदियों के विरुद्ध हामान के व्यक्तिगत प्रतिशोध को जल्दबाज़ी से स्वीकार कर लिया (एस्तेर 3:8-15)।

परमेश्वर ने मूसा को बताया कि अधिकारियों को सुनी-सुनाई बातों से कैसे निपटना है (व्यवस्था 13:12-18)। उन्हें इसके बारे में पूछताछ करनी है, खोज करनी है और लगन से छानबीन करनी है। यदि उनकी जांच से पता चलता है कि मामला सत्य और निश्चित है, तो उन्हें उचित न्याय पर अमल करना होता था। परस्पर विरोधीभासी गवाही के मामलों में भी यही प्रक्रिया अपनाई जानी थी (व्यवस्था 19:15-21)। अय्यूब, जो सिद्ध और धर्मी मनुष्य था, उसने इस भक्तिपूर्ण प्रक्रिया का पालन किया (अय्यूब 29:16)।

प्रत्येक अधिकारी को इस नेक राजा के आदर्शों पर चलना चाहिए। माता-पिता को भी अपने बच्चों के संबंध में मामलों की खोज करनी चाहिए। बच्चों के पास कोई अधिकार नहीं हैं; उनके पास जिम्मेदारियां और सुअवसर हैं। यदि संदेह करने का कारण पाया जाता है, या यदि नहीं भी हो, तौभी बुद्धिमान माता-पिता कड़ाई से पूछताछ करेंगे और मसले की पुष्टि करने या दोषी ठहराने के लिए खोजबीन करेंगे। इसके पहले कि कली में फँसा हुआ पाप एक पूर्ण विकसित जहरीला पौधा बने, माता-पिता और बच्चे दोनों के लिए उसे जड़ से ही उखाड़ कर फेंक देना ज्यादा आसान होगा।

जो पिता मसले की खोजबीन नहीं करता, परन्तु अपना सिर बालू में छिपा लेता है, वह पिता कहलाने के योग्य नहीं। और उसे पीड़ादायक लज्जा का शिकार बना दिया जाएगा (नीत 29:15,17)। वह पिता जो बिना सावधानीपूर्वक जाँच-पड़ताल किए सब बातों पर विश्वास कर लेता है, भोलेभालेपन को बढ़ावा देता है (नीतिवचन 14:15)। दाऊद ने मूर्खता में आकर अदोनिय्याह को बिना किसी विरोध के राजद्रोह में बहुत दूर जाने दिया, और इस की कीमत अदोनिय्याह को अपना जीवन खोकर चुकानी पड़ी (1 राजा 1:6; 2:10-25)। इस नीतिवचन को पढ़ने वाले प्रत्येक पिता एक चतुर तहकीकात करने वाला बने।

मानव शासकों का उद्देश्य और उनकी बुद्धि इसीलिए है कि वे सभी मामलों की सावधानीपूर्वक जांच-पड़ताल करें, ताकि वे अपनी प्रजा पर ठीक से शासन कर सकें और उसकी रक्षा कर सकें। जब परमेश्वर ने मानव अधिकार के पाँच क्षेत्रों को ठहराया तो उसका उद्देश लापरवाही और दबंगाई से शासन कराना कभी नहीं था। शासन-व्यवस्था राज्यकर्ता के उपभोग के लिए नहीं दी गई थीं, बल्कि अधिकार के अधीन लोगों की सुरक्षा और उन्नति के लिए दी गई थीं। धर्मी अय्यूब ने अपने सेवकों के विवादों पर भी ध्यान दिया (अय्यूब 31:13-15)।

मसीही अधिकार का यही वह सम्मानजनक पहलू है जिसे प्रत्येक मजिस्ट्रेट, मालिक, पिता, पति और पास्टर को भी अपने कर्तव्य के निर्वहन में शामिल करना चाहिए। जबकि अधिकार के तहत आनेवालों की सेवा करने का स्तर पदों के अनुसार में भिन्न होता है, फिर भी यह आपके ईश्वर-प्रदत्त अधिकार का उपयोग पवित्र तरीके से करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उदाहरण के लिए, कंपनी और स्वयं के लाभ के लिए रोजगार की स्थितियों के मुख्य नियम, लेकिन वे उस परिस्थिति और हालत का उपयोग समान रूप से और निष्पक्ष रूप से करने के लिए भी बाध्य हैं (इफिसियों 6: 9; कुलुस्सियों 4:1)।

प्रभु यीशु मसीह एक ऐसे स्तर पर काम करता है जिसे आप समझा भी नहीं सकते। वह प्राण और आत्मा को, और गाँठ–गाँठ और गूदे–गूदे को अलग करके आर–पार छेदता है (इब्रानियों 4: 12-14)। सभी चीजें उसके सामने खुली और प्रकट हैं, लेकिन वह स्वयं एक ऐसी ज्योति में बसता है, जहाँ कोई भी मनुष्य नहीं पहुंच सकता (1तीमुथियुस 6:16)। वह हमारे ह्रदय और मन को परखता है (प्रकाशित 2:23)। इसके पहले की वह आपके सब गुप्त पापों की खोज करें, जबकि उन्हें छिपाने की कोशिश कर रहे हैं, भला होगा कि आप उसके सामने अपना मन खोलें और उसे याचना करें कि वह आपके मामले का परिक्षण अनुग्रह से करें और आपको उन्नत करें (अय्यूब 34: 31-32; भजन 26: 2; 139: 23-24)।

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